सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमध्यमाधिकार ४५ इसको तीन से गुणा कर १ जोड़ने से ५,६५,३३,६७,७३४ हुआ । इसको ७ से भाग देने पर शेष १ बचता है । इसलिए चलते सावन वर्ष का आरंभ रविवार को हुआ और इस वर्ष का स्वामी रवि हुआ । चित्र ६- पृथ्वी से ग्रहों की दूरी के अनुसार क्रम यह तो हुई सूर्य सिद्धान्त के अनुसार वर्षपति निकालने की रीति । आज- कल के सभी पंचांगों में वर्षपति (वर्षेश) उस दिन का स्वामी माना जाता है जिस दिन चैत्र शुक्ल प्रतिपदा होती है और वर्ष का मंत्री उस दिन का स्वामी समझा जाता है जिस दिन मेष संक्रान्ति होती है। मेघेश उस दिन का स्वामी होता है जिस दिन आर्द्रा नक्षत्र लगता है, इत्यादि इसी विचार से वर्ष भर का फल निकाला जाता है । मकरंद सारिणी में सूर्य सिद्धान्त से भिन्न नियम यह है:-- चैत्र शुक्ल प्रतिपद्दिवसे यो वारः स राजा । मेष संक्रान्ति दिवसे यो वारः स मंत्री । कर्क संक्रान्ति दिवसे यो वारः स सत्याधिपः । तुला संक्रान्ति दिवसे (यो) वारः स रसाधिपः । मृग संक्रान्ति दिवसे यो वारो (स) नीरसाधिपः । आर्द्राप्रवेश