सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
DevanagariHindipublished838 पृष्ठ
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भूगोलाध्याय ७३३ हैं परन्तु उत्तर दक्षिण ध्रुवों पर सूर्य की किरणें बहुत तिरछी हो जाती हैं इसलिये वहां सदैव ठंडक रहती है। यह बात चित्र १२३ से स्पष्ट हो जायगी। इस चित्र में दिखलाया गया है कि सूर्य से आती हुई किरणें ग ख तल पर लम्ब हो कर गिरती हैं और वही किरणें क ख तल पर तिरछी हो जाती हैं। यह स्पष्ट है कि क ख तल ग ख तल से बड़ा है क्योंकि यह समकोण त्रिभुज क ग ख का कर्ण है इसलिये जब वही किरणें अधिक स्थान में फैल जाती हैं तब उनकी शक्ति कम पड़ जाती है और ग ख तल पर जितनी गरमी होती है उतनी क ख तल पर नहीं हो सकती। इसका अनुभव पढ़े, बेपढ़े सभी को है, क्योंकि जब सूर्य की किरणें तिरछी आती हैं तब
[चित्र १२४: चित्र में दर्शाए गए बिंदु एवं रेखाएँ:
- ऊपर वृत्त चाप पर बिंदु: घ, ग, क, ख
- क्षैतिज रेखा के सिरे: ङ, ह
- ऊर्ध्व अधोरेखा: विषुवत रेखा]