भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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७३४ सूर्य-सिद्धान्त लोग किसी वस्तु को सुखाने के लिये उसे ऐसे तल पर रखते हैं जो इस प्रकार टेढ़ा कर दिया जाता है कि किरणें लम्ब रूप में गिरें । चित्र १२४ से प्रकट होता है कि विषुवत् रेखा के आसपास सूर्य की किरणें जितनी आती हैं उतनी ही किरणें विषुवत् रेखा से दूर के देशों में तिरछी होने के कारण अधिक क्षेत्रफल में फैल जाती और मन्द पड़ जाती हैं। इस चित्र से स्पष्ट देख पड़ता है कि जितनी किरणें विषुवत्रेखा के पास क ख भू भाग पर पड़ती हैं उतनी ही किरणें उत्तर ध्रुव के निकट ग ग भूभाग पर पड़ती हैं जो क्षेत्रफल में कहीं अधिक होता है इसलिये फैल जाने के कारण इनकी तीव्रता कम पड़ जाती है । देवताओं और असुरों के दिन रात के विभाग— देवासुरा विषुवति क्षितिजस्थं दिवाकरम् । पश्यन्त्यन्योन्यमेतेषां वाम सव्ये दिनक्षपे ॥४७॥ मेषादावुदितस्सूर्यः त्रीन् राशिनुदगुत्तरे । संचरन्प्रागहर्मध्यं पूरयेन्मेरुवासिनाम् ॥४८॥ कर्क्यादिसंचरंस्तद्वद् अह्नः पश्चार्धमेव सः । तुलादीन् त्रीन्मृगादींश्च तद्वदेव सुरद्विषाम् ॥४६॥ अतो दिनक्षपे तेषामन्योन्यं हि विपर्ययात् । अहोरात्र प्रमाणं च भानोर्भगण पूरणात् ॥५०॥ अनुवाद—(४७) जिस दिन सूर्य विषुवन्मण्डल पर होता है उस दिन देवता और असुर दोनों उसको क्षितिज पर देखते हैं; इनका दिन रात एक दूसरे से विपरीत होता है । (४८) मेष राशि के आदि में उदय होकर सूर्य उत्तर की तीन राशियों मेष, वृष और मिथुन में उत्तर की ओर बढ़ता हुआ उत्तर मेरु-निवासियों अर्थात् देवताओं के दिन का पूर्वार्ध पूरा करता है । (४६) उसी प्रकार कर्क के राशि आदि से आगे बढ़ता हुआ तीन राशि कर्क, सिंह और तुला में वह उनके दिन का उत्तरार्ध पूरा करता है । इसी प्रकार तुला, वृश्चिक और धनु राशियों में जाता हुआ वह असुरों के दिन का पूर्वार्ध तथा मकर, कुम्भ और मीन राशियों में जाता हुआ वह असुरों के दिन का उत्तरार्ध पूरा करता है । (५०) इसलिये देवताओं और असुरों के अहोरात्र एक दूसरे के विपरीत होते हैं और सूर्य का एक भगण (चक्कर) पूरा होने पर इनका एक अहोरात्र होता है । विज्ञान-भाष्य—जिस दिन सूर्य वसंत-सम्पात-बिन्दु पर आता है उस दिन को विषुव-दिन कहते हैं। इस दिन यह उत्तर और दक्षिण ध्रुव से क्षितिज