सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें७३६ सूर्य-सिद्धान्त सूर्य-सिद्धान्त में सायन और निरयण का भेद नहीं है। इससे जान पड़ता है कि जिस समय वर्तमान सूर्य-सिद्धान्त लिपिबद्ध हुआ है उस समय वसंत-सम्पात उसी जगह था जिस जगह आजकल निरयण मेष का आदि स्थान माना जाता है। इसके बाद सिद्धान्त शिरोमणि आदि जो ग्रन्थ बने हैं उनमें इन दोनों की चर्चा है। देवताओं या असुरों के अहोरात्र के वर्णन से, जो सूर्य-सिद्धान्त में कई जगह आया है, यह सिद्ध होता है कि इनका अहोरात्र सायन वर्ष से समान होता है और यही वर्ष का स्वाभाविक मान है। परन्तु इस अहोरात्र का प्रमाण सूर्य के भगण-काल के समान भी बतलाया गया है जो मध्यमाधिकार के श्लोक २६ और ३७ के अनुसार ३६५.२६५८७५६ मध्यम सावन दिन के समान होता है और सायन वर्ष से ०१६५४० मध्यम सावन दिन बड़ा है। यह भगणकाल शुद्ध नाक्षत्र- सौर वर्ष से भी ००२३८२ दिन बड़ा है। (देखो पृष्ठ २४५ की पाद-टिप्पणी)। इसलिये जान पड़ता है कि सूर्यसिद्धान्त में सायन वर्ष का मान स्थूल रूप से सूर्य के भगण काल के समान मान लिया गया है। देवासुरों का मध्याह्न काल कब होता है तथा ऊपर नीचे का क्या अर्थ है- अतो दिनक्षपे तेषामन्योऽन्यं हि विपर्ययात् । उपर्यात्मानमन्योऽन्यं कल्पयन्ति सुरासुराः ॥५१॥ अन्येऽपि समसूत्रस्था मन्यन्तेऽधः परस्परम् । भद्राश्वकेतुमालस्था लंकासिद्धपुराश्रिताः ॥५२॥ सर्वत्रैव महीगोले स्वस्थानमुपरिस्थितम् । मन्यन्ते खे यतो गोलस्तस्य क्वोर्ध्वं क्व वाऽप्यधः ॥५३॥ अनुवाद-(५१) देवताओं और असुरों का मध्याह्न और मध्यरात्रि अयन के अंत में एक दूसरे के विपरीत होती है। देवता और असुर दोनों अपने को दूसरे से ऊपर मानते हैं। (५२) जो लोग भूव्यास की दिशा में रहते हैं वे भी दूसरे को अपने से नीचे मानते हैं जैसे भद्राश्व वर्ष के (यमकोटि नगर के) रहने वाले केतुमाल देश के (रोमक नगर के) रहने वालों को और लङ्का नगर के रहने वाले सिद्धपुर वालों को अपने से नीचे समझते हैं। (५३) इस भूगोल पर सब जगह लोग अपने स्थान को ऊपर मानते हैं क्योंकि यह भूगोल आकाश में स्थित है इसलिये उसका ऊपर और नीचे कहाँ है ? विज्ञान-भाष्य- ५१वें श्लोक का पूर्वार्ध ५०वें श्लोक से सम्बन्ध रखता है और उत्तरार्ध यह बतलाया है कि देवता और असुर दोनों अपने को दूसरे से