भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

पृष्ठ 773, कुल 838 में से

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पृष्ठ 773

७४८ सूर्य-सिद्धान्त होगा इसलिये जब किसी स्थान का अक्षांश और सूर्य की क्रान्ति एक ही दिशा में है और सूर्य की क्रान्ति कम है तो मध्याह्न छाया उसी दिशा के ध्रुव की ओर होगी परन्तु यदि क्रान्ति अधिक है तो छाया की दिशा उल्टी होगी (देखो त्रिप्रश्नाधिकार चित्र ५५, ५६)। परन्तु कर्क रेखा के उत्तर के देशों में मध्याह्न-छाया की दिशा सदा उत्तर की ओर होगी और मकर रेखा के दक्षिण के देशों में मध्याह्नछाया सदा दक्षिण की ओर होगी । चित्र १२७ में गोल रेखा के भीतर जो क्षेत्र है वह भूपृष्ठ का गोलार्ध प्रकट करता है। उ और द क्रम से उत्तर और दक्षिण ध्रुव हैं। रो ल य विषुवत् रेखा है। य यमकोटि, ल लंका और रो रोमक नगर है। सिद्धपुरी इस गोलार्ध पर नहीं दिखायी जा सकती क्योंकि यह लंका के समसूत्र में दूसरे गोलार्ध में है। विषुवत् रेखा से २३°२७' उत्तर कर्क रेखा और दक्षिण मकर रेखा हैं। ये रेखाएँ विषुवत् रेखा के समानान्तर हैं। इन्हीं दोनों रेखाओं के बीच वाले भूभाग पर मध्याह्न-छाया उत्तर या दक्षिण हो सकती है। विषुवत् रेखा ६६ ३३' उत्तर और दक्षिण तथा उसके समानान्तर उत्तरी ध्रुव मंडल और दक्षिणी ध्रुव मंडल हैं। इन्हीं रेखाओं पर दिन का प्रमाण वर्ष में एक बार ६० घड़ी या २४ घंटे का होता है और रात्रि का प्रमाण भी एक बार इतना ही होता है जैसा कि ६०-६१ श्लोकों में बतलाया गया है। इन्हीं रेखाओं के बीच के भूभाग में अहोरात्र का प्रमाण ६० घड़ी का होता है। इनके बाहर के भूभाग में दिन रात्रि का प्रमाण विचित्र होता है। उत्तरी ध्रुव मंडल के और उत्तर विषुवत् रेखा से ६६°५०' दूर जो समानान्तर रेखा है उस पर वर्ष में एक बार-बार २ मास का दिन तथा दो मास की रात होती है। इसके भी उत्तर विषुवत् से ७८°३१' दूर जो रेखा है वहाँ ४ महीने का दिन और ४ महीने की रात होती है। इसी प्रकार दक्षिणी ध्रुव मंडल में भी होता है। उत्तरी ध्रुवों पर ६ महीने का दिन और ६ महीने की रात होती है। विषुवत् रेखा के चार नगरों में सूर्योदय सूर्यास्त कब होता है— भद्राश्वोपरिगः कुर्याद् भारते तूदयं रविः । राज्यर्धं केतुमालाख्ये कुरुष्वस्तमयं तथा ।।७०।। भारतादिषु वर्षेषु तद्वदेव परिभ्रमात् मध्योदयार्धरात्रास्तकालात् कुर्यात्प्रदक्षिणम् ।।७१।। अनुवाद—(७०) जब भद्राश्व वर्ष के यमकोटि नगरों में सूर्य ठीक ऊपर होता है तब भारतवर्ष के लंका नगर में उसका उदय होता है, केतुमाल देश के रोमक नगर में अर्धरात्रि होती है और कुरुदेश के सिद्धपुरी नगर में उसका अस्त होता

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