सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमध्यमाधिकार ६६ है, इसका कारण यह है कि कोरी आंख से अथवा दूरवीक्षण यंत्र से यह ठीक-ठीक नहीं देखा जा सकता कि चन्द्र ग्रहण का उन्मीलन अथवा सम्मीलन किस क्षण से आरम्भ हो जाता है । यदि पास ही पास के दो दर्शक अपनी अपनी घड़ी लेकर यह देखने बैठें कि सम्मीलन किस समय आरम्भ होता है और चुपके से उस समय को लिख लें जिस समय प्रत्येक को सम्मीलन देख पड़े तो देखा जाता है कि उन दोनों के देखे हुए कालों में दो-¹तीन मिनट का अन्तर होता है । शायद यही कारण है जिससे उज्जैन, कुरुक्षेत्र और रोहतक के देशान्तरों में दो तीन मिनट का अन्तर है यद्यपि यह ६२वें श्लोक में एक ही उत्तर-दक्षिण रेखा पर अर्थात् भूमध्य रेखा पर बतलाये गये हैं । नीचे ग्रीनविच से इन स्थानों के देशान्तरों की तुलना की जाती है :— नगर ग्रीनविच से देशान्तर उज्जैन से देशान्तर उज्जैन से देशान्तर (कोणात्मक) (कालात्मक) उज्जैन ² ७५°४६'६" पूर्व घड़ी पल विपल मिनट सेकंड कुरुक्षेत्र ³ ७६°२०' ,, ०°३३'५४" पूर्व ० ५ ३६ (२ १५.६) रोहतक ७६°३५' ,, ०°४८'५४" ,, ० ८ ६ (३ १५.६) काशी ४ ८३°३'४" ,, ७°१६'५८" ,, १ १२ ५० (२६ ८) इन अंकों से सिद्ध है कि चंद्रग्रहण से देशान्तर जानने की रीति में दो तीन मिनट का अन्तर हो सकता है । दूसरी रीति—जिस प्रकार चन्द्रमा पृथ्वी की परिक्रमा करता है और उसमें ग्रहण लगता है इसी प्रकार वृहस्पति के चारों ओर भी ४, ५ पिंड परिक्रमा करते हुए दूरवीक्षण यंत्र से देखे जाते हैं। यह वृहस्पति के चन्द्रमा कहलाते हैं। जब यह वृहस्पति की छाया में घुसते हैं तो इनमें भी ग्रहण लगता है । वृहस्पति के चन्द्रमा बहुत छोटे हैं और इनके परिक्रमण काल भी छोटे हैं इसलिए इनमें ग्रहण जल्दी-जल्दी लगते हैं । ग्रहण के कारण इनके छिपने और प्रकट होने का समय ग्रीनविच काल के अनुसार नाविक पंचांगों में ( Nautical almanac ) दिया रहता है । इसलिए यदि किसी स्थान में उसके स्थानीय काल के अनुसार वृहस्पति के चन्द्रमा के छिपने या प्रकट होने १. Godfray's Treatise on Astronomy. Sixth edition, page 261. २. Indian Chronology, page 60. ३. Imperial Gazetteer of India. ४. भारत भ्रमण (मकरंद सारिणी में काशी का देशान्तर ६६ पल दिया है जो ऊपर के मान से ४ पल कम है) ।