सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें७० सूर्य सिद्धान्त का समय देखा जाय तो नाविक पंचांग में दिये हुए समय से जो अन्तर होता है वही उस स्थान का ग्रीनविच से देशान्तर है। परन्तु यह रीति भी ऊपर कही हुई रीति की तरह स्थूल है क्योंकि वृहस्पति के चंद्रमा के छिपने या प्रकट होने का क्षण निश्चित रूप से दूरवीक्षण से भी नहीं जाना जा सकता परन्तु इसमें उतनी अशुद्धि नहीं होती जितनी पहली रीति में होती है। तीसरी रीति—टूटनेवाले तारों के प्रकट होने और लुप्त होने के क्षण को भिन्न-भिन्न स्थानों के स्थानीय कालों से तुलना करने पर देशान्तर सूक्ष्मतापूर्वक जाना जा सकता है यदि तारों के टूटने के समय का निश्चय पहले से हो सके और उनके पहचानने में कोई गड़बड़ न हो। चौथी रीति : विद्युत् द्वारा समाचार भेज कर देशान्तर जानना—यदि दो स्थानों का एक दूसरे से ऐसा सम्बन्ध हो कि एक स्थान से दूसरे स्थान को विद्युत् द्वारा समाचार भेजा जा सके तो इन दोनों स्थानों का देशान्तर सहज ही जाना जा सकता है क्योंकि विद्युत् समाचार के पहुँचने में इतना कम समय लगता है कि उससे जो अशुद्धि हो सकती है वह नहीं के समान है। मान लीजिए काशी से लखनऊ का देशान्तर जानना है। दोनों नगरों के दर्शकों को एक ही प्रकार की घड़ी रखनी चाहिये, जैसे यदि एक की घड़ी सावन काल बतलाती हो तो दूसरे की घड़ी भी सावन काल बतलाती हो। दोनों घड़ियों को अपने अपने यहाँ के स्थानीय काल से मिला लेना चाहिये जिससे प्रत्येक घड़ी अपने यहाँ का स्थानीय काल शुद्धतापूर्वक बतला सके। काशी लखनऊ से पूर्व है इसलिए काशी का स्थानीय काल लखनऊ के स्थानीय काल से आगे रहेगा और इन दोनों में जितना अन्तर होगा वही काशी से लखनऊ का देशान्तर है। जिस समय काशी की घड़ी में 'स₁' समय हो उसी समय काशी से विद्युत् संकेत किया जाय। जिस समय यह संकेत लखनऊ पहुँचे उसी समय लखनऊ की घड़ी में समय देख लिया जाय। यदि इस घड़ी में 'स₂' समय हो और यह मान लिया जाय कि लखनऊ में संकेत उसी क्षण पहुँचा है जिस क्षण काशी से भेजा गया है तो काशी से लखनऊ का देशान्तर 'द₁' नीचे लिखे समीकरण से सिद्ध होगा :- द₁ = स₁ - स₂ परन्तु इस समीकरण से देशान्तर का जो मान निकलेगा वह यथार्थ देशान्तर से कुछ कम होगा क्योंकि काशी से लखनऊ तक विद्युत् संकेत के पहुँचने में कुछ न कुछ समय अवश्य लगता है। यदि इस समय का मान 'य' हो और काशी से लखनऊ का यथार्थ देशान्तर 'द' हो तो पूर्वोक्त समीकरण का रूप यह होगा :- द = (स₁ + य) - स₂ = द₁ + य (१)