वैदिक गणित: १६ सूत्र
Vaidik Ganit: 16 Sutra
जगद्गुरु स्वामी भारती कृष्ण तीर्थ / रोबिन सिराना द्वारा
स्रोत: Vaidik Ganit 16 Sutras Compilation · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)
सूत्र - 3
उध्वार्तियक भ्याम् – सीधे और तिरछे दोनो विधियों से
86 * 28
\begin{array}{cc} 8 & 6 \\ 2 & 8 \end{array}
पहले दोनो संख्याओं के ईकाई के अंकों में गुणा करें
6 * 8 = 48
\begin{array}{cc} 8 & 6 \\ 2 & 8 \end{array}
अब तिरछी गुणा करें –
8 * 8 = 64
6 * 2 = 12
64 + 12 =
\begin{array}{cc} 8 & 6 \\ 2 & 8 \end{array}
अब दहाई के अंको की गुणा करें
8 * 2 = 16
अब प्राप्त संख्याओं को लिख दें 16 / 76 / 48
प्रत्येक खण्ड का हासिल अगली संख्या में जोड़ दें ।
16 + 7/6 + 4*/8 = \boxed{2408 \text{ उत्तर}}
9
सूत्र - 4
परावज्य योजयेत् – परिवर्तन एवं प्रयोग
इस सूत्र का प्रयोग भाग करने में किया जाता है, आप इस सूत्र की सहायता से बड़ी से बड़ी संख्या को आसानी से भाग दे सकते हैं।
जैसे -
2112 / 97
2112 को 97 से भाग करना है।
भाजक 97 का आधार 100 है, अतः संख्या – आधार
97 – 100 = - 3
परिवर्तन = +3 (चिन्ह बदल जायेंगे, ऋणात्मक धनात्मक बन जायेगा, धनात्मक ऋणात्मक बन जायेगा)
- ➤ 97 के नीचे आधार से घटी संख्या लिखें "3", व 3 से पहले 0 लिखें क्योंकि आधार 100 है।
- ➤ फिर 3 कॉलम बना लें।
- ➤ फिर जिसे भाग करना है उस संख्या को लिखे, आधार 100 हैं तो 2 अंक बाद में लिखे। जैसे 2112 में से 12 आगे लिखे।
- ➤ अब संख्या 2 1 1 2 का पहला अंक 2 की गुणा 0 व 3 में करें।
- ➤ 2 * 0 = 0 को अगली संख्या 1 में जोड़ दें
10
- ➤ 2 * 3 = 6 को अगली संख्या 2112 की second last संख्या 1 में जोड़ दें।
- ➤ 2 * 0 = 0 को अगली संख्या 2112 की third last संख्या 1 में जोड़ दें।
- ➤ अब संख्या 2 1 1 2 का दूसरा अंक 1 की गुणा करें 0 व 3 में और अगली संख्या में जोड़ दें।
- ➤ 1 * 3 = 3 को आखिरी वाली संख्या 2 में जोड़ दें।
- ➤ 1 * 0 = 0 को second last संख्या 1 में जोड़ दें।
- ➤ अब सभी संख्या को जोड़ दें।
The diagram illustrates the step-by-step calculation of the number 2175 from the digits 9, 7, 0, 3, 2, 1, 1, 2. It shows the following steps:
- Step 1: Digits 9, 7, 0, 3 are shown. An 'x' points to 0, and an arrow points from 2 to the box below.
- Step 2: A box contains the instruction: "इसे ऐसे ही लिख दें। और 2 की गुणा 0 व 3 में करें।" (Write it like this. And multiply 2 by 0 and 3).
- Step 3: The digits 1, 1, 2 are shown. Arrows point from the 1s to the first and second addition signs, and from the 2 to the third addition sign.
- Step 4: A box contains the calculation: 6 + 0 + 3 = 9. Arrows point from 6 to 7, from 0 to 1, and from 3 to 5.
- Step 5: The final result is shown in a box as 2175.
संख्या प्राप्त हुई
= 21 75
इसमें 21 भागफल है, अतः 75 शेषफल हैं।।।
11
सूत्र - 5
शून्यं साम्यसमुच्चये – समुच्चय समान होने पर शून्य होता है।
\frac{x}{2} + \frac{x}{3} = \frac{x}{4} + \frac{x}{1}
x प्रत्येक पद में हैं, अतः x का मान शून्य होगा। इसलिए समीकरण का मान भी शून्य होगा।
\frac{7}{4x+4} + \frac{7}{7x-15} = 0
x प्रत्येक पद में हैं, अतः x का मान शून्य होगा
अंश समान हैं अतः
4x+4+7x-15 = 0
x = 1 \text{ उत्तर}
12
सूत्र – 6
आनुरूप्ये शून्यमन्यत् – अनुरूपता होने पर दूसरा शून्य होता है।
यदि किसी एक चर के गुणांकों का अनुपात स्वतंत्र पदों के अनुपात के बराबर हो जाये तो दूसरे चर का मान शून्य हो जाता है।
23x + 14y = 46
92x + 17y = 184
23x + 14y = 46 \dots\dots\dots(1)
92x + 17y = 184\dots\dots\dots(2)
x के गुणांकों का अनुपात x = 23/92
अथवा x = 1:4
y के गुणांकों का अनुपात y = 14/17
अथवा y = 14:17
13
स्वतंत्र पदों का अनुपात = 46:184
अथवा 1:4
चूँकि x के पदों का अनुपात = स्वतंत्र पदों का अनुपात
अतः y = 0
y = 0 समीकरण एक में रखने पर
23x = 46
x = 2 उत्तर
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सूत्र – 7
संकलन व्यकलनाभ्याम् – योग द्वारा एवं अन्तर द्वारा
यह सूत्र बीजगणितीय व्यंजकों का महत्तम समापवर्तक निकालने में किया जाता है।
विधि –
- • दोनो चरों के गुणकों का मान ज्ञात करें
- • दोनो समीकरणों का योग निकालें।
- • दोनो समीकरणों का अन्तर निकालें।
- • प्राप्त सरल समीकरणों से उभय-चरों के मान निकाल लें
90x - 46y = 226 \dots\dots\dots 1
46x - 90y = 182 \dots\dots\dots 2
यहाँ पहले समीकरण के एक चर का गुणक दूसरे समीकरण के दूसरे चर के गुणक के बराबर हैं।
दोनों समीकरण का योग
136x - 136y = 408 \dots\dots\dots 3
44x + 44y = 44 \dots\dots\dots 4
15
समीकरण 3 को 136 व समीकरण 4 को 44 से भाग देने पर हमें प्राप्त होता है।
x - y = 3
x + y = 1
x = 2, y = -1 \text{ उत्तर}
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सूत्र – 8
पूरणापूरणाभ्याम् – पूर्णता एवं अपूर्णता द्वारा
इस सूत्र का प्रयोग द्विघातीय, त्रिघातीय एवं चतुर्थघातीय समीकरणों को हल करने में किया जाता है।
द्विघातीय समीकरण के लिए –
- • द्विघातीय समीकरण को x^2 के गुणक से भाग दें
- • x के गुणक के आधे का वर्ग निकालें।
- • इस संख्या जोड़कर व घटाकर पूर्ण वर्ग बनायें
जैसे –
x^2 + 4x - 5 = 0
x^2 के गुणक से भाग (x^2 का गुणक 1 है।)
1 से भाग
अब x के गुणक का आधा, x का गुणक = 4
4 का आधा = 2
अब 2 का वर्ग = 4
4 को समीकरण में जोड़ने व घटाने पर –
x^2 + 4x - 5 + 4 - 4 = 0
x^2 + 4x + 4 = 9
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(x+2)^2 = +/- 9
x = 1 या x = -5 उत्तर
त्रिघातीय समीकरण के लिए –
- • अपने अनुमान से कुछ ऐसे त्रिघातीय समीकरण लिखिए जो प्रदत्त समीकरण के अधिक निकट हों।
- • प्रदत्त समीकरण को अनुमानित समीकरण से घटाये
- • प्राप्त अन्तर को समीकरण के दोनों ओर जोड़ कर त्रिघातीय समीकरण को पूरा करें।
जैसे -x^3 + 6x^2 + 11x + 6 = 0
\begin{aligned} \text{अनुमान } (x + 1)^3 &= x^3 + 3x(x+1) + 1 \\ &= x^3 + 3x^2 + 3x + 1 \end{aligned}
\begin{aligned} (x+2)^3 &= x^3 + 8 + 6x(x+2) \\ &= x^3 + 8 + 6x^2 + 12x \end{aligned}
निकट अनुमान = x^3 + 6x^2 + 12x + 6 = 0
घटना -
18
(x^3 + 6x^2 + 11x + 6) - (x^3 + 6x^2 + 12x + 8) = 0
समीकरण हल करके (x+2) प्राप्त हुआ
(x+2) को दोनों ओर जोड़ने पर –
x + 2 + x^3 + 6x^2 + 11x + 6 = x + 2
x^3 + 6x^2 + 12x + 8 = x + 2
(x+2)^3 = x + 2
माना (x+2) = y
y^3 = y
y^3 - y = 0
y.(y^2-1) = 0
y = 0, 1 \text{ या } -1 \text{ उत्तर}
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सूत्र - 9
चलनकलनाभ्याम् – क्रमिक चाल द्वारा अथवा कलन द्वारा
इस सूत्र का प्रयोग द्विघातीय समीकरणों को हल करने में किया जाता है।
पहले x^2 एवं x के गुणक निकालें और उन्हें क्रमशः a और b से सम्बंधित करें
अब अचर पद निकालें और उसे c से सम्बंधित करें।
सूत्र -
2ax + b = \pm \sqrt{b^2 - 4ac}
जैसे -7x^2 + 5x - 2 = 0
a = 7, b = -5, c = -2
a, b व c के मान सूत्र में रखने पर -
2 \cdot 7x + (-5) = \pm \sqrt{25 + 56}
14x - 5 = \pm 9
x = \frac{-9 + 5}{14} = 2
x = \frac{9 + 5}{14} = 1
उत्तर
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सूत्र – 10
यावदूनम् – जितना कम हैं।
इस सूत्र का उपयोग 10 के निकट विभिन्न घातों की संख्याओं को जोड़ने में किया जाता है।
जैसे – 999997 + 743456
999997 के निकट 10 की घात में कमी = 3
(100000 - 999997 = 3)
अतः 743456 में से 3 घटाये
एवं 999997 में 3 जोड़ दे।
743456 - 3 = 743453
999997 + 3 = 100000
अब 100000 + 743453
= 1743453 उत्तर
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सूत्र – 11
व्यष्टिसमष्टि – एक से पूर्ण और पूर्ण को एक मानते हुए। (विशिष्ट एवं साधारण)
यह सूत्र दो अंको संख्याओं में गुणनफल निकालने के लिए प्रयोग किया जाता है।
जैसे – 76 * 92
तो अब इन दोनों संख्याओं का औसत निकाले –
\frac{76 + 92}{2} = \frac{168}{2} = 84
औसत में से किसी एक संख्या का अन्तर
= 84 - 76 = 8
औसत के वर्ग में से अन्तर के वर्ग को घटाये
= 84^2 - 8^2
= 7056 - 64
= 6992 \text{ उत्तर}
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सूत्र – 12
शेषाण्यइकेन चरमेण – अंतिम अंक के सभी शेषों को
इस सूत्र का उपयोग किसी भी परिमेय संख्या का भागफल प्राप्त करने में किया जाता है।
जैसे -
3/8
अंश 3 व हर 8 से कम है, तो अंश के अन्त में शून्य लगाकर भाग दें -
30/8 = \text{भागफल} = 3, \text{ शेषफल} = 6
अब शेषफल लें और शेषफल के अन्त में शून्य लगाये और पुनः 8 से भाग करें।
60/8 = \text{भागफल} = 7, \text{ शेषफल} = 4
अब शेषफल लें और शेषफल के अन्त में शून्य लगाये और पुनः 8 से भाग करें।
40/8 = \text{भागफल} = 5, \text{ शेषफल} = 0
शेषफल 0 हो गया, अतः भागफल से पहले दशमलव लगाकर लिखें।
3/8 = 0.375 \text{ उत्तर.}
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सूत्र – 13
सोपान्यद्वमन्यम् – अन्तिम एवं उपान्त्य का दुगुना
इस सूत्र का उपयोग भाजकता का पता लगाने, गुणा करने में, और परिमेय व्यजनों के सरलीकरण में किया जाता है।
इस सूत्र का उपयोग केवल 12 से गुणा करने एवं 4 से भाजकता ज्ञात करने में किया जाता है
जैसे –
457 * 12
संख्या के दोनो ओर शून्य लगाये।
04570 * 12
अब संख्या के अन्तिम अंक एवं उपान्त्य अंक को दुगुना करके जोड़े
The diagram shows the number 0 4 5 7 0. A blue arrow points from the digit 7 to a box labeled 'उपान्त्य अंक' (Penultimate digit). Another blue arrow points from the digit 0 to a box labeled 'अन्तिम अंक' (Last digit). A third blue arrow points from the box 'उपान्त्य अंक' to the digit 0 in the original number, indicating the doubling of the penultimate digit.
अतः उपान्त्य अंक का दुगुना = 7*2 = 14 + 0 (अन्तिम अंक)
प्राप्त संख्या = 1 4 (1 हासिल है।)
प्राप्त संख्या = ④
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अब ईकाई का अंक काट दे
0 4 5 7 0
अब फिर से अन्तिम अंक में उपान्त्य अंक का दुगुना करके जोड़े
7 + 5 * 2 = \boxed{1} 7 + 1 (ऊपर जो हासिल प्राप्त हुआ, यहाँ जोड़े)
प्राप्त संख्या = 8
ईकाई का अंक काट दे –
0 4 5 7 0
अब फिर से अन्तिम अंक में उपान्त्य अंक का दुगुना करके जोड़े
5 + 4 * 2 = \boxed{1} 3 + 1 (ऊपर से प्राप्त हासिल का अंक जोड़ दे)
प्राप्त संख्या = 4
ईकाई का अंक काट दे –
0 4 5 7 0
अब फिर से अन्तिम अंक में उपान्त्य अंक का दुगुना करके जोड़े
4 + 0 * 2 = 4 + 1 (हासिल जोड़ दे)
प्राप्त संख्या = 5
अब प्राप्त संख्या ऊपर से नीचे लिखे
4 5 7 * 12 = 5 4 8 4 उत्तर
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4 से भाजकता -
जैसे – 987364 यदि संख्या के अन्तिम एवं उपान्त्य अंक 4 से विभाजित हैं तो पूर्ण संख्या 4 से विभाजित हो जायेगी।
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सूत्र - 14
एकन्यून पर्वण - पहले से एक कम के द्वारा
दो गुणन संख्याओं में जब एक संख्या के सभी अंक 9 हो तो एकन्यून पर्वण विधि द्वारा गुणा किया जाता है। जिस संख्या के सभी अंक 9 हो उसे गुणक तथा दूसरी संख्या को गुण्य कहते हैं।
जैसे -
\begin{array}{rcc} 738 & * & 999 \\ \downarrow & & \downarrow \\ \text{गुण्य} & & \text{गुणक} \end{array}
गुणनफल के प्रथम भाग को प्राप्त करने के लिए गुण्य में से एक घटाये
738 - 1 = 737
अब गुणक में 1 जोड़े
999 + 1 = 1000
अब इसमें से गुण्य को घटाये
1000 - 737 = 262
अब प्रथम भाग (737) को लिखे, उसके बाद प्राप्त संख्या (262) को लिखें -
737262 उत्तर
उपसूत्र
अनुरूप्येण - अनुपातों से
इस सूत्र के उपयोग से आनुपातिक गुणन या भाग किया जाता है। जब संख्याएँ सैद्धान्तिक आधार 100 से काफी दूर हो तो क्रियात्मक आधार उपयोग में लाया जाता है।
जैसे –
1. 39 * 49
इन संख्याओं का वास्तविक आधार = 100
कार्यकारी आधार = 50
अतः कार्यकारी आधार से संख्या को घटाये
\begin{array}{l} 50 - 39 = 11 \\ 50 - 49 = 1 \end{array}
विचलनों को गुणा करें –
11 * 1 = 11 (यह गुणनफल का अन्तिम हिस्सा है।)
अब संख्या को आपस में तिरछा घटाये
विचलन का अन्तर -
या तो 39 में से 1 घटाये या फिर 49 में से 11 घटाये –
39 - 1 = 38
कार्यकारी आधार 100 से आधा है, इसलिए 38 का भी आधा कर दे।
38/2 = 19
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