वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)
Vaidik Shiksha Paddhati and Gurukul System
डॉ. भास्कर मिश्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंDigitized by Arya Samaj Foundation Chennai and eGangotri प्राक्कथन राष्ट्रीयएकता एवं अखण्डता की सुरक्षा एवं संरक्षा प्राचीन भारतीय-संस्कृति का सार्वकालिक सन्देश रहा है, और वैदिक वाङ्ग्मय इस भारतीय संस्कृति का वाहन रहा है। समस्त वैदिक वाङ्ग्मय राष्ट्रीयएकता अथवा विश्व-बन्धुत्व की भावना से आकण्ठ आप्लावित है, जिसका प्रभाव समय-समय पर अखिल-भारतीय-चिन्तन-पद्धति पर पड़ा, तथा जिसके कारण भारत में राष्ट्रीयएकता तथा धर्मनिरपेक्षता की भावना को बहुत बल मिला। भारत जैसे विशाल देश में विभिन्न जातियाँ, धर्म, वेश-भूषा तथा रीतिरिवाज होने के बाद भी राष्ट्रीयएकता स्थापित रहना इसी वैदिक-वाङ्मय की मूल संस्कृति के प्रभाव का परिणाम है। इतिहास इस बात का साक्षी है कि जब मानव ने "सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चित् दुःखभाग्भवेत्" की भावना से जितना अधिक तादात्म्य स्थापित किया है, वह उतना ही सुखी, सुरक्षित तथा चिरायु हुआ है। आज की विषम परिस्थितियों में राष्ट्रीयएकता एवं अखण्डता को भारतीय समाज में जीवित रखने का प्रयास ही एक ज्वलन्त समस्या है। हमारा देश इस समय ऐसी भयावह स्थिति का सामना कर रहा है, जिसका समुचित एवं सार्थक समाधान यदि शीघ्र नहीं हो सका तो भारतीयसमाज को विघटित होने से बचा पाना बहुत ही कठिन हो जाएगा। कुछ बाह्य एवं आन्तरिक शक्तियों द्वारा अपनी स्वार्थपूर्ति के लिए धार्मिक-संकीर्णता के आधार पर मनुष्य को बाँटने वाली राजनीति की जा रही है। मानवीय-कल्याण की भावनाओं को त्यागकर उच्च मूल्यों से विमुख होकर आज धर्म पर आधारित राजनीति को बढ़ावा दिया जा रहा है। राष्ट्रीयएकता एवं धर्मनिरपेक्षता के विपरीत भारतीय समाज के विभिन्न वर्ण अपनी-अपनी व्यक्तिगत, धार्मिक, क्षेत्रीय एवं जातीय विचारधाराओं तथा मान्यताओं के आधार पर देश को बाँटने के प्रयास कर रहे हैं। ऐसी विषम परिस्थितियों का सामना करने के लिए एक ऐसे शोधकार्य की परम आवश्यकता थी, जिससे राष्ट्रीयएकता और धर्म-निरपेक्षता की भावना को बढ़ावा मिले। इस सन्दर्भ में भारतीय संस्कृति के संवाहक तथा विविध-ज्ञान-विज्ञान के आदिस्रोत वैदिक वाङ्मय के गम्भीर-ज्ञान-सागर के असंख्य-सूक्त-रत्नों में से राष्ट्र- सम्बन्धित इस बहुमूल्य रत्न को भी खोजने की मेरी प्रबल इच्छा हुई, क्योंकि वेद असंख्य एवं अक्षय ज्ञान की निधि हैं, यह सर्वविदित है। इनमें आध्यात्मिक-ज्ञान के CC-0. Gurukul Kangri Collection, Haridwar