वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)
Vaidik Shiksha Paddhati and Gurukul System
डॉ. भास्कर मिश्र द्वारा
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26 \ वैदिक वाङ्मय में राष्ट्रीय एकता एवं अखण्डता प्रदान करना। साम्प्रदायिकता तथा रक्त-पात, बैर-भाव के अर्थहीन झगड़ों को समाप्त कर राष्ट्र में अमन-चैन का सन्देश फैलाना तथा वैदिक साहित्य से प्रेरणा प्राप्त कर सब समान है न कोई छोटा है न कोई बड़ा, इसका प्रचार करना। राष्ट्रीय एकता एवम् अखण्डता की अवधारणा राष्ट्रीय एकता से राष्ट्र के समस्त वासियों में ‘हम’ की भावना का बोध होता है। ‘हम’ की भावना से तात्पर्य है राष्ट्रहित के समक्ष अपने वैयक्तिक हितों का त्याग करने में तनिक भी संकोच न करना। जिस राष्ट्र में नागरिक उपर्युक्त गुणों से युक्त होते हैं उनमें ही ‘हम’ की भावना पायी जाती है और यही ‘हम की भावना’ राष्ट्रीय एकता कहलाती है। राष्ट्रीय एकता राष्ट्र का प्राणतत्त्व होती है जिसके बिना राष्ट्र की कल्पना ही निस्सार है। राष्ट्र को सर्वोपरि तथा राष्ट्रहित को ही अपना हित मानते हुए राष्ट्रीय एकता को इस प्रकार परिभाषित कर सकते हैं :- ‘‘जब किसी राष्ट्र के व्यक्तियों में स्थान, जाति, भाषा, धर्म व संस्कृति आदि किसी भी आधार पर भिन्नता होते हुए भी राष्ट्रहित के आधार पर ‘हम’ की भावना होती है और वे राष्ट्रहित के आगे अपने वैयक्तिक हितों का त्याग करते हैं तो इसे राष्ट्रीय एकता कहते है।’’$^१$ राष्ट्रीयएकता के सम्मेलन ने राष्ट्रीयएकता को इस प्रकार परिभाषित किया है :- ‘‘राष्ट्रीयएकता एक मनोवैज्ञानिक एवं शैक्षिक प्रक्रिया है, जिसके द्वारा लोगों के दिलों में एकता, संगठन एवं सन्निकटता की भावना, सामान्य नागरिकता की भावना और राष्ट्र के प्रति भक्ति की भावना का विकास किया जा सकता है।’’$^२$ उपर्युक्त परिभाषा से स्पष्ट है कि राष्ट्रीयएकता का स्वरूप अमूर्त है जिसे देखा नहीं जा सकता बल्कि अनुभव किया जा सकता है। जिसकी प्रकृति मनोवैज्ञानिक है, जो देशवासियों के हृदय में राष्ट्र के प्रति प्रेम, भक्ति, त्याग, बलिदान, संगठन, भाईचारे की भावना को जन्म देती है और जो अखण्ड राष्ट्र की निर्माणक है। ‘‘नवभारत टाइम्स’’ के प्रधान सम्पादक श्री अक्षय कुमार जैन ने राष्ट्रीयएकता को कुछ इस प्रकार परिभाषित किया है :- १. रमन बिहारी लाल की ‘शिक्षा के दार्शनिक और समाजशास्त्रीय सिद्धान्त’ रस्तौगी पब्लिकेशन्स, शिवाजी रोड, मेरठ, पृ० ६५ २. आधुनिक सामाजिक विज्ञान-१ लेखक- उदयवीर सक्सेना एवं शकुन्तला सक्सेना, पृ० ३३३
CC-0. Gurukul Kangri Collection, Haridwar