वाक्यपदीयम्: ब्रह्मकाण्ड (भर्तृहरि - शब्दब्रह्म, स्फोट-सिद्धान्त एवं भाषा-दर्शन सटीक)
Vakyapadiya Brahmakanda of Bhartrihari with Commentary
भर्तृहरि (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण शुक्ल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंविकलं (कृत्स्नं) स्फोटमभिव्यञ्जन्ति न चेतरध्वनिवैयर्थ्यम् अभिव्यक्तिभेदात्।" Wait, look at the footnote callout: "तथाहि¹" -> footnote 1 is on तथाहि! Let's check line 11: "तथाहि¹ सर्वान्तिमात्प्राग्भाविनो ध्वनयोऽनुपजातसंस्कारविशेषस्य प्रतिपत्तुर्व्यक्त-"
Line 12: "पदग्रहणसमर्थाः सर्वान्तिमध्वनिजनिप्यमाणव्यक्तरपदग्रहणानुगुणसंस्कारोत्पादिकाः" Wait, "जनिप्यमाण"? No, 'ष': "जनिष्यमाण"! Wait, look at "व्यक्तरपद" or "व्यक्ततरपद"? In line 12: "...ध्वनिजनिष्यमाणव्यक्ततरपदग्रहणानुगुण..." Wait, is there a 'त'? Let's check: "जनिष्यमाणव्यक्ततरपदग्रहणानुगुणसंस्कारोत्पादिकाः" or "जनिष्यमाणव्यक्तरपद..."? Look at line 12: "सर्वान्तिमध्वनिजनिष्यमाणव्यक्ततरपदग्रहणानुगुणसंस्कारोत्पादिकाः" -> wait, 'व्यक्त' then 'तर': Look at 'व्य' 'क्' 'त' 'त' 'र' - yes, 'व्यक्ततर'!
Line 13: "बु