वामन पुराण

वामन पुराण
Vamana Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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| अध्याय ८९ ] | वामनभगवान्का विविध स्थानोंमें निवास-वर्णन और कुरुजाङ्गलके लिये प्रस्थान करना | ४३९ |
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| ममावतारैर्वसुधा नभस्तलं<br>पातालमम्भोनिधयो दिवं च।<br>दिशः समस्ता गिरयोऽम्बुदाश्च<br>व्याप्ता भरद्वाज ममानुरूपैः॥ ५७<br>ये दिव्या ये च भौमा<br>जलगगनचराः स्थावरा जङ्गमाश्च<br>सेन्द्राः सार्काः सचन्द्रा<br>यमवसुवरुणा ह्याग्नयः सर्वपालाः।<br>ब्रह्माद्याः स्थावरान्ता द्विजखगसहिता<br>मूर्तिमन्तो ह्यमूर्ता-<br>स्ते सर्वे मत्प्रसूता बहुविविधगुणाः<br>पूरणार्थं पृथिव्याः॥ ५८<br>एते हि मुख्याः सुरसिद्धदानवैः<br>पूज्यास्तथा संनिहिता महीतले।<br>यैर्दृष्टमात्रैः सहसैव नाशं<br>प्रयाति पापं द्विजवर्य कीर्तनैः॥ ५९ | भरद्वाजजी! मेरे अनुरूप मेरे अवतारोंसे पृथ्वी, आकाश, पाताल, समुद्र, स्वर्ग, सभी दिशाएँ, पर्वत तथा मेघ व्याप्त हैं। ब्रह्मन्! दिव्य, पार्थिव, जलचर, आकाशचर, स्थावर, जङ्गम, इन्द्र, सूर्य, चन्द्र, यम, वसु, वरुण, सभी अग्नियाँ, समस्त प्राणियोंके पालक, ब्रह्मासे लेकर स्थावरतक पशु-पक्षिसहित सभी मूर्त और अमूर्त पदार्थ, भाँति-भाँतिके गुणोंसे सम्पन्न—ये सभी पदार्थ पृथ्वीकी पूर्तिके लिये मुझसे ही उत्पन्न हुए हैं। पृथ्वीपर स्थित ये सभी मुख्य पदार्थ देवों, सिद्धों एवं दानवोंके पूजनीय हैं। द्विजश्रेष्ठ! इनके कीर्तन एवं दर्शनमात्रसे पाप शीघ्र नष्ट हो जाता है॥ ५६—५९॥ |
॥ इस प्रकार श्रीवामनपुराणमें अठासीवाँ अध्याय समाप्त हुआ ॥ ८८ ॥
नवासीवाँ अध्याय
वामनभगवान्का विविध स्थानोंमें निवास-वर्णन और कुरुजाङ्गलके लिये प्रस्थान करना
| श्रीभगवानुवाच<br><br>आद्यं मात्स्यं महद्रूपं संस्थितं मानसे ह्रदे।<br>सर्वपापक्षयकरं कीर्तनस्पर्शनादिभिः॥ १<br><br>कौर्ममन्यत्सन्निधानं कौशिक्यां पापनाशनम्।<br>हयशीर्षं च कृष्णांशे गोविन्दं हस्तिनापुरे॥ २<br><br>त्रिविक्रमं च कालिन्द्यां लिङ्गभेदे भवं विभुम्।<br>केदारे माधवं शौरिं कुब्जाम्रे हृष्टमूर्धजम्॥ ३ | श्रीभगवान् बोले—मेरा प्रथम विशाल मत्स्यरूप मानसरोवरमें स्थित है। वह कीर्तन और स्पर्श आदिसे सभी पापोंका विनाश करनेवाला है। दूसरा पापका विनाश करनेवाला मेरा कूर्मावतार कौशिकी नदीमें स्थित है। कृष्णांशमें हयशीर्ष और हस्तिनापुरमें गोविन्द नामसे विराजमान हैं। कालिन्दीमें त्रिविक्रम तथा लिङ्गभेदमें व्यापक भव, केदारतीर्थमें माधव, शौरि और कुब्जाम्रमें हृष्टमूर्धज स्थित हैं। |