वेद स्वरूप विमर्श (स्वामी करपात्री जी महाराज - अपौरुषेय वेद-प्रामाण्य एवं वैदिक समन्वय)
Veda Swaroop Vimarsha of Swami Karpatri Maharaj
धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें? Wait, look at the letters: पृ थि व्या श्चे न्द्रे? No, श्चे न्द् र स्य! Yes, श्चे+न्द्र+स्य=श्चेन्द्रस्य! So it is literally printed: पृथिव्याश्चेन्द्रस्य! (पृथिव्याः च इन्द्रस्य च आकर्षणात् = पृथिव्याश्चेन्द्रस्य चाकर्षणात्). That explains both the श्चेandचाकर्षणात्! - L14: तत्रान्त्याधानेन पूर्वं शरीराग्निरूप आत्मा संस्क्रियते । - L15:प्राकृत्सीमकपदवाच्यै--> look at L15:प्राकृत्सीमकपदवाच्यै-- wait,प्राकृत्सीमकorप्राकृतसीमक? Look at कृत्: कृwith aत्half-t? Wait, look closely:प्रा कृ त् सी म क? Or प्राकृतसीमक? Wait, is that a त्or a broken letter?प्राकृत्सीमकपदवाच्यै--> wait, what doesप्राकृत्सीमकmean? Wait, could it beप्राकृतसीमक`? No,