भारतकोश
वेद स्वरूप विमर्श (स्वामी करपात्री जी महाराज - अपौरुषेय वेद-प्रामाण्य एवं वैदिक समन्वय)

वेद स्वरूप विमर्श (स्वामी करपात्री जी महाराज - अपौरुषेय वेद-प्रामाण्य एवं वैदिक समन्वय)

Veda Swaroop Vimarsha of Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

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line 21: Line 20: '...धर्माय भवति । यथार्थानृत' Wait, line 20 end has: 'यथार्थानृत' - wait, is there a hyphen? It's just 'यथार्थानृत'. Line 21: 'मन्यथाऽवस्थितस्यान्यथावचनम् प्रत्यवायाय तथा शब्दानृतमरूपं वाच-') Wait, let's look at line 21: 'मन्यथाऽवस्थितस्यान्यथावचनम्'? Look at the characters: 'म' 'न्य' 'था' 'व' 'स्थि' 'त' 'स्या' 'न्य' 'था' 'व' 'च' 'न' 'म्' There is an avagraha? 'मन्यथाऽवस्थित...' or 'मन्यथावस्थित...'? Looks like 'मन्यथाऽवस्थितस्यान्यथावचनम्'. Wait, before it: 'यथार्थानृत'? No, 'यथा ह्यनृत-'? Look at line 20 end: य - थ - ा - र्था - नृ - त: Is that 'यथार्थानृत'? Or 'यथा ह्यनृत-'? Let's zoom in on line 20 end: 'य' 'था' 'र्था' - wait, is there a repha? 'यथा ह्य