भारतकोश
वेद स्वरूप विमर्श (स्वामी करपात्री जी महाराज - अपौरुषेय वेद-प्रामाण्य एवं वैदिक समन्वय)

वेद स्वरूप विमर्श (स्वामी करपात्री जी महाराज - अपौरुषेय वेद-प्रामाण्य एवं वैदिक समन्वय)

Veda Swaroop Vimarsha of Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

DevanagariHindipublished237 पृष्ठ

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practice ("जन्मान्तराभ्यासनिहिताऽपि"), then in this birth: "इह जन्मनि अभ्यासेन विनापि"? Wait, look at line 52: "इह जन्मनि [blur] त्रयी मानुषे वि..." Wait, could it be: "इह जन्मनि अनभ्यासेन त्रयी मानुषे विलुप्तेऽपि, तथैव विशिष्टानां मनसि जन्मान्तराभ्यासनिहिताऽपि त्रयी तत्र तिष्ठत्येव" Look at "अनभ्यासेन": Is the first word "अनभ्यासेन"? Let's look at the letters: There is 'अ' or 'य' or 'स'? Wait, look at: "इह जन्मनि" followed by: letter 1: looks like 'अ' with a blot, or 'यथा'? letter 2: 'दा' or 'था'? Wait, could it be "यद्यप्यनभ्यासेन"? Wait, there are only 5-6 syllables before त्रयी: 1, 2, 3, 4, 5: "______ऽभ्यासेन" -> that's 5 letters! Let's see: [letter 1] [letter 2] ऽ भ्या से न If it is "यथाऽभ्यासेन" or "कदाऽप्यनभ्यासेन"? Wait, look at letter 1 and 2: It looks like "