भारतकोश
वेद स्वरूप विमर्श (स्वामी करपात्री जी महाराज - अपौरुषेय वेद-प्रामाण्य एवं वैदिक समन्वय)

वेद स्वरूप विमर्श (स्वामी करपात्री जी महाराज - अपौरुषेय वेद-प्रामाण्य एवं वैदिक समन्वय)

Veda Swaroop Vimarsha of Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

DevanagariHindipublished237 पृष्ठ

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श्शब्दा" -> look at: इ - त्य - द - य - श् - श - ब्दा = "इत्यदयश्शब्दा" (typo in original for इत्यादयः शब्दाः). Yes, 'इत्यदयश्शब्दा'! Wait, "अध्ययनोध्यापनसौकर्याय" -> look at 'नो': 'अध्ययनोऽध्यापन...' or 'अध्ययनोध्यापन...'? It's 'अध्ययनोध्यापनसौकर्याय'.

Let's check line 31: भवति । प्रथमं श्रुत्यकेगोचरा ये शब्दराशयोऽभवन् श्रुतिशब्दवाच्याः Wait, "श्रुत्यकेगोचरा" -> look at: श्रु - त्य - के - गो - च - रा -> wait, is that 'श्रुत्येकगोचरा'? Look at 'त्य': it has an e-matra? No, the e-matra is on 'क': 'के'? Wait, or is it 'श्रुत्येकगोचरा'? Look at 'त्य': त्य. Then 'के'? No, 'त्ये' + 'क'! The e-matra is on 'त्य': 'त्ये' + 'क' = 'श्रुत्येकगोचरा'! Wait, look at line 31: श्रु - त्ये - क - गो - च - रा. The slant line is over 'त्य'! So it is `श्रुत्येकगोच