भारतकोश
वेद स्वरूप विमर्श (स्वामी करपात्री जी महाराज - अपौरुषेय वेद-प्रामाण्य एवं वैदिक समन्वय)

वेद स्वरूप विमर्श (स्वामी करपात्री जी महाराज - अपौरुषेय वेद-प्रामाण्य एवं वैदिक समन्वय)

Veda Swaroop Vimarsha of Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

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(स्वरूपाद्) - look at the bottom, there is 'द्' and 'व्य'! द् + व्य = द्व्य! त - ि - र - ि - क -् - त - म् - ए - व = व्यतिरिक्तमेव! Yes!! "शब्दराशिस्वरूपाद्व्यतिरिक्तमेव वेदस्वरूप माह ।" Wait, "वेदस्वरूप माह" has a space between वेदस्वरूप and माह.

सर्वासां मूर्तीनामृग्जन्यत्वं स्पष्टमेवोक्तम् । मण्डलश्रुतौ तु मण्डलस्यैव ऋक्त्वमाम्नातम् । तत्र यजुपोऽग्निरूपत्वमुक्तम्, इह तु गतेर्यजुर्मयत्व- Wait, 'यजुपो' or 'यजुषो'? In L3: य - ज - ु - ष - ो (यजुषो). It's 'षो', perfectly normal ष.

मुक्तम् । पतेन बैलक्षण्येन प्रतीयते पूर्वोक्तेभ्योऽपि वेदेभ्य एतल्लक्ष्म्युक्ता Wait, 'पतेन' or 'एतेन'? Look at the first letter of L4: It is 'ए'! Look at 'ए' in 'एतल्लक्ष्म्युक्ता'. The first letter has the loop at the top left: wait, is it 'ए' or 'प'? It is 'ए' - 'एतेन बैलक्षण्य