भारतकोश
विदुर नीति (महाभारत उद्योग पर्व - गीताप्रेस गोरखपुर)

विदुर नीति (महाभारत उद्योग पर्व - गीताप्रेस गोरखपुर)

Vidura Niti Gita Press

महात्मा विदुर / महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished172 पृष्ठ

पृष्ठ 10, कुल 172 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 10

( ८ )

श्लोकविषयपृष्ठ
२१–२२प्रजा किसे नहीं चाहती तथा शीघ्र आरम्भ करने-योग्य कार्य ... ... ...५७-५८
२३–२६प्रजा किससे अनुराग रखती है, राजा अपनेको किस प्रकार रखे, लोग किस राजासे प्रसन्न रहते हैं तथा प्रजा किसे त्याग देती है, इन सब बातोंका विवेचन५८-५९
२७–२८अन्यायसे राज्यका नाश और धर्मसे धन-धान्य तथा ऐश्वर्यकी वृद्धि ... ...५९
२९धर्मके त्याग और अधर्मके अनुष्ठानसे हानि ...५९
३०–३१दूसरोंके राष्ट्रका नाश करनेकी अपेक्षा अपने राष्ट्रकी रक्षाके लिये किये गये प्रयत्नका औचित्य, धर्ममूलक लक्ष्मीकी स्थिरता ... ...६०
३२–३३सब ओरसे सारभूत बातोंको ग्रहण करनेकी आवश्यकता ... ...६०
३४–३७कौन कैसे देखते हैं, अविनयसे हानि और विनयसे लाभ तथा अपनेसे बलवान्‌के सामने नतमस्तक होनेकी नीतिका प्रतिपादन ...६०-६१
३८–४०कौन किसके रक्षक हैं एवं किससे किसकी रक्षा होती है—इसका विवेचन ... ...६१-६२
४१–४३कुलकी अपेक्षा सदाचारकी श्रेष्ठता, ईर्ष्या एक असाध्य रोग है, किससे डरे और क्या न पीये ...६२
४४–४६असत् पुरुषोंकी निन्दा और सत् पुरुषोंकी प्रशंसा६३
४७–४८शीलकी श्रेष्ठता ... ... ...६३-६४
४९–५१धनाढ्य, मध्यवित्त तथा दरिद्रोंके भोजन ...६४
५२–५३अधम, मध्यम तथा उत्तम पुरुषोंके भयका हेतु, ऐश्वर्यमदकी निन्दा ... ...६४-६५
५४–५५इन्द्रियोंको वशमें न रखनेसे हानि ... ...६५