भारतकोश
विदुर नीति (महाभारत उद्योग पर्व - गीताप्रेस गोरखपुर)

विदुर नीति (महाभारत उद्योग पर्व - गीताप्रेस गोरखपुर)

Vidura Niti Gita Press

महात्मा विदुर / महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished172 पृष्ठ

पृष्ठ 9, कुल 172 में से

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श्लोकविषयपृष्ठ
१२४-१२६किसका थोड़ा-सा भी काम बिगड़ने नहीं पाता, कौन अपनी जातिवालोंमें अधिक ख्याति लाभ करता है और कौन सूर्यके समान शोभा पाता है५१-५२
१२७-१२८विदुरका धृतराष्ट्रसे पाण्डवोंके गुण बताकर उन्हें आधा राज्य देनेके लिये अनुरोध करना ...५२

दूसरा अध्याय

श्लोकविषयपृष्ठ
१-३धृतराष्ट्रका व्याकुल होकर अपने हितकी बात पूछना५३-५४
४-५विदुरके द्वारा हितकी बात कहनेकी प्रतिज्ञा ...५४
६-७असत् उपायोंसे सफलता मिले तो भी उधर मन न लगावे और अच्छे उपायोंसे असफलता होती हो तो भी इसके लिये मनमें ग्लानि न करे—इसका प्रतिपादन५४-५५
८-९प्रयोजन, परिणाम और उन्नतिका विचार करके कार्य करनेकी आज्ञा ... ...५५
१०-११कौन राज्यमें स्थिर नहीं रहता और कौन राज्य पाता है, इसका विवेचन ... ...५५
१२-१३उद्दण्डतासे सम्पत्तिका नाश और परिणामका विचार न करनेसे हानि ...५५-५६
१४पचने योग्य और परिणाममें हितकर अन्न खानेकी सलाह ... ...५६
१५-१६वृक्षके कच्चे और पके फलोंको तोड़नेसे हानि और लाभ ... ... ...५६
१७-१८राजाको प्रजाकी रक्षा करते हुए ही उससे धन लेना चाहिये, इस विषयमें भ्रमर और मालीका दृष्टान्त५७
१९-२०लाभ-हानिका विचार करके कार्य करे या न करे, व्यर्थ कर्मोंका आरम्भ न करे ... ...५७
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