विदुर नीति (महाभारत उद्योग पर्व - गीताप्रेस गोरखपुर)

विदुर नीति (महाभारत उद्योग पर्व - गीताप्रेस गोरखपुर)
Vidura Niti Gita Press
महात्मा विदुर / महर्षि वेदव्यास द्वारा
DevanagariHindipublished172 पृष्ठ
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( १० )
| श्लोक | विषय | पृष्ठ |
|---|---|---|
| ४ | इस लोकमें पुण्यकीर्ति होनेसे मनुष्यकी स्वर्गलोकमें प्रतिष्ठा ... ... ... | ७३-७४ |
| ५–३८ | केशिनीके लिये सुधन्वा और विरोचनमें अपनी-अपनी श्रेष्ठताको लेकर विवाद, दोनोंका निर्णयके लिये प्रह्लादके पास जाना, प्रह्लादके द्वारा सुधन्वाका सत्कार, उलटा न्याय देनेवाले वक्ताको प्राप्त होनेवाले दोष, प्रह्लादके द्वारा सुधन्वाकी श्रेष्ठताका निर्णय और सुधन्वाका विरोचनको प्राणदान | ७४–८३ |
| ३९ | विदुरका धृतराष्ट्रसे भूमिके लिये झूठ न बोलनेका अनुरोध ... ... ... | ८३ |
| ४०–४१ | उत्तम एवं कल्याणमयी बुद्धिसे रक्षा और सम्पूर्ण अर्थोंकी सिद्धि ... ... ... | ८३ |
| ४२–४५ | कपटीको वेद भी पापसे नहीं बचा सकते, सबके लिये त्याग देनेयोग्य दुर्गुण, साक्षी न बनानेयोग्य सात प्रकारके व्यक्ति तथा भयको दूर करनेवाले चार कर्म | ८३–८५ |
| ४६–४८ | ब्रह्महत्यारोंके समान पापी ... ... ... | ८५ |
| ४९–५० | किसकी कब परीक्षा होती है और कौन क्या हर लेता है | ८५–८६ |
| ५१–५२ | लक्ष्मीकी उत्पत्ति, वृद्धि, स्थिरता और सुरक्षाके हेतु तथा पुरुषको उद्दीप्त करनेवाले आठ सद्गुण ... | ८६ |
| ५३–५५ | राजाके द्वारा किये हुए सत्कारकी महत्ता तथा स्वर्गलोकका दर्शन करानेवाले आठ सद्गुण ... | ८७ |
| ५६–५७ | धर्मके आठ मार्ग ... ... ... | ८८ |
| ५८ | वृद्धोंसे सभाकी, धर्मसे वृद्धोंकी, सत्यसे धर्मकी और निश्छलतासे सत्यकी प्रतिष्ठा ... ... ... | ८८ |
| ५९–६५ | स्वर्गकी प्राप्ति करानेवाले दस साधन, पापकी निन्दा और पुण्यकी प्रशंसा ... ... ... | ८८–९० |