भारतकोश
विदुर नीति (महाभारत उद्योग पर्व - गीताप्रेस गोरखपुर)

विदुर नीति (महाभारत उद्योग पर्व - गीताप्रेस गोरखपुर)

Vidura Niti Gita Press

महात्मा विदुर / महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished172 पृष्ठ

पृष्ठ 16, कुल 172 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 16

( १४ )

श्लोकविषयपृष्ठ
१४-१६स्वर्गलोकके अधिकारी विद्वान्‌के गुण, अप्रिय किंतु हितकर वचन बोलनेवालेकी दुर्लभता तथा राजाका सच्चा सहायक ... ...११६-११७
१७-१८आत्म-कल्याणके लिये सब कुछ त्यागने तथा धन एवं स्त्रीद्वारा भी आत्मरक्षा करनेका आदेश ...११७
१९-२१जुएको वैरका कारण बताते हुए विदुरका धृतराष्ट्रसे पाण्डवोंके प्रति किये जानेवाले दुर्व्यवहारके लिये उलाहना ... ... ...११७-११८
२२-२३राजा भृत्योंका विश्वासपात्र कैसे बनता है, सेवकोंकी जीविका बन्द करनेसे हानि ...११८-११९
२४-२७सुयोग्य सहायकोंकी आवश्यकता, स्वामीके कृपापात्र सेवकके गुण, त्यागनेयोग्य भृत्यके दुर्गुण तथा दूतके आठ गुण ... ...११९-१२०
२८-२९सावधान मनुष्य क्या-क्या न करे ...१२०-१२१
३०किनके साथ लेन-देनका व्यवहार न करे ...१२१
३१-३२पुरुषको उद्दीप्त करनेवाले आठ गुण तथा राजसम्मानकी महत्ता ... ...१२१-१२२
३३-३४स्नानसे दस और स्वल्पाहारसे छः लाभ ...१२२
३५-३६किसको अपने घरमें न ठहरने दे और किन लोगोंसे कभी सहायताकी याचना न करे ...१२२-१२३
३७सेवन करनेके अयोग्य छः प्रकारके मनुष्य ...१२३
३८-३९धन और सहायक एक-दूसरेके आश्रित हैं, वानप्रस्थ-आश्रम कब ग्रहण करे ...१२३-१२४