भारतकोश
विदुर नीति (महाभारत उद्योग पर्व - गीताप्रेस गोरखपुर)

विदुर नीति (महाभारत उद्योग पर्व - गीताप्रेस गोरखपुर)

Vidura Niti Gita Press

महात्मा विदुर / महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished172 पृष्ठ

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श्लोकविषयपृष्ठ
५१-५४विदुरजीका धृतराष्ट्रको शान्ति और सुखके उपाय बताना ... ... ...१०६-१०७
५५-५७आपसमें वैर-विरोध रखनेवाले लोगोंको सुख-शान्तिकी दुर्लभता ... ...१०७-१०८
५८-६०जाति-बन्धुओंसे सम्भावित भय, सामूहिक शक्तिकी प्रबलता, आपसकी फूटसे दुःख और एकतासे सुख१०८-१०९
६१ब्राह्मणों, स्त्रियों, जाति-भाइयों और गोओंपर बल दिखानेसे पतन ... ...१०९
६२-६५संघ-शक्तिकी प्रशंसा ... ...१०९-११०
६६-६७कौन-कौन अवध्य हैं और मनुष्यमें क्या गुण है११०
६८-६९क्रोधको पीनेसे शान्ति, रोगीका सुखका अभाव११०-१११
७०-७४धृतराष्ट्रको उलाहना देते हुए विदुरका उनसे कौरव-पाण्डवमें मेल एवं सन्धि करानेका आग्रह१११-११२

पाँचवाँ अध्याय

श्लोकविषयपृष्ठ
१-६यमराजके दूत किन्हें नरकमें ले जाते हैं ...११३-११४
७-८जो जैसा करे उसके साथ वैसे बर्तावकी नीति, कौन क्या नष्ट करता है ...११४-११५
९-११मनुष्य पूरे सौ वर्षोंतक क्यों नहीं जीवित रह पाता, धृतराष्ट्रका यह प्रश्न और विदुरके द्वारा इसका उत्तर ... ...११५-११६
१२-१३ब्रह्महत्यारोंके समान पापी ...११६