भारतकोश
विदुर नीति (महाभारत उद्योग पर्व - गीताप्रेस गोरखपुर)

विदुर नीति (महाभारत उद्योग पर्व - गीताप्रेस गोरखपुर)

Vidura Niti Gita Press

महात्मा विदुर / महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished172 पृष्ठ

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( १७ )

श्लोकविषयपृष्ठ
३३-३५मूर्ख और दुष्टके बर्ताव तथा उसपर विपत्तिकी सम्भावना१३८
३६-३७सम्पूर्ण भूतोंको अपना बना लेनेवाले गुण, श्रेष्ठ राजाको बिना धनके भी सहायक मिलते हैं१३८
३८-३९लक्ष्मीको बढ़ानेवाले सात गुण तथा त्याग देने-योग्य राजा१३८-१३९
४०-४१निर्दोषको सतानेसे हानि, जिससे अपनी हानि हो उन्हें प्रसन्न रखनेकी आवश्यकता१३९
४२-४३किनके हाथोंमें पड़े हुए पदार्थ संशयमें पड़ जाते हैं तथा कौन लोग विपत्तिके समुद्रमें डूबते हैं१३९
४४-४५कौन पण्डित है, किस मनुष्यका जीवन खतरेमें होता है१४०
४६-४७पाण्डवोंको त्यागकर दुर्योधनको राज्य देना उसके पतनका कारण होगा—यह विदुरजीकी चेतावनी१४०
सातवाँ अध्याय
मनुष्य प्रारब्धके अधीन है—यह धृतराष्ट्रका कथन१४१
२-४विदुरका उपदेश—समयके विपरीत बोलनेसे अपमान, कौन प्रिय होता है, प्रिय और अप्रिय व्यक्तिके कार्योंमें दृष्टिभेद१४१-१४२
एक दुर्योधनके न त्यागनेसे सौ पुत्रोंके नाशकी सम्भावना१४२
६-७क्षय और वृद्धिकी व्याख्या१४२
८-९गुणहीन धनियोंके त्यागकी आशा, धृतराष्ट्रका पुत्रको त्यागनेमें अपनी असमर्थता बताना१४३