विदुर नीति (महाभारत उद्योग पर्व - गीताप्रेस गोरखपुर)

विदुर नीति (महाभारत उद्योग पर्व - गीताप्रेस गोरखपुर)
Vidura Niti Gita Press
महात्मा विदुर / महर्षि वेदव्यास द्वारा
DevanagariHindipublished172 पृष्ठ
पृष्ठ 21, कुल 172 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 21
( १९ )
| श्लोक | विषय | पृष्ठ |
|---|---|---|
| ५१-५६ | इन्द्रियोंको सर्वथा रोकने अथवा बिलकुल खुली छोड़ देनेसे हानि, आयु बढ़ानेवाले सद्गुण, वीर पुरुषोंका व्रत क्या है, कौन मनुष्य कभी अर्थसे हीन नहीं होता तथा कल्याणकारी कार्य और उन्हें करनेकी आवश्यकता ... ... | १५२-१५३ |
| ५७-५९ | अनिर्वेदका महत्त्व तथा क्षमाकी महिमा ... | १५४ |
| ६०-६४ | किस सुखका यथेष्ट सेवन करे, किनके यहाँ लक्ष्मीका वास नहीं होता, दुष्ट पुरुषोंके बर्ताव, लक्ष्मी किसके पास भयके मारे नहीं जातीं तथा राजलक्ष्मीका स्वभाव कैसा होता है ... ... | १५४-१५५ |
| ६५-६८ | किसका क्या फल है, किस कर्मका फल परलोकमें नहीं मिलता, सत्त्वसम्पन्न पुरुषोंकी निर्भयता तथा उन्नतिके मूल हेतु ... ... | १५५-१५६ |
| ६९-७१ | किनका कौन-सा बल है, व्रतको नष्ट न करनेवाली आठ वस्तुएँ तथा संक्षेपसे धर्मका स्वरूप ... | १५६-१५७ |
| ७२-७६ | किससे किसको जीते, किनपर विश्वास न करे, नित्य गुरुजनोंको प्रणाम करनेसे लाभ, कैसे धनकी ओर मन न लगावे और कौन-कौन शोचनीय हैं | १५७ |
| ७७-८१ | किसके लिये क्या बुढ़ापा है, किसका क्या मल है और किससे किसको जीतनेकी चेष्टा न करे ... | १५८ |
| ८२-८५ | किसका जीवन सफल है, लोभ या इच्छाका परित्याग करे, पृथ्वीके सम्पूर्ण भोग एक पुरुषके लिये पर्याप्त नहीं हैं, धृतराष्ट्रसे अपने पुत्रों और पाण्डवोंपर समान बर्ताव करनेका अनुरोध ... ... | १५९ |