भारतकोश
विदुर नीति (महाभारत उद्योग पर्व - गीताप्रेस गोरखपुर)

विदुर नीति (महाभारत उद्योग पर्व - गीताप्रेस गोरखपुर)

Vidura Niti Gita Press

महात्मा विदुर / महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished172 पृष्ठ

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( २० )

श्लोकविषयपृष्ठ
आठवाँ अध्याय
१–३किसको शीघ्र सुयश एवं सुखकी प्राप्ति होती है, कौन दुःखोंसे मुक्त हो सुखपूर्वक सोता है और ब्रह्महत्याके समान तीन कुकर्म ...१६०
मृत्यु क्या है, लक्ष्मीका वध कैसे होता है और विद्याके तीन शत्रु कौन हैं ...१६०-१६१
५–६विद्यार्थियोंके सात दोष, सुखार्थी या विद्यार्थी ...१६१
७–११किसकी किससे तृप्ति नहीं होती, कौन किसको नष्ट कर देता है और घरमें रखनेयोग्य वस्तुएँ ...१६१-१६२
१२–१३जीवनके लिये भी धर्मका त्याग न करे तथा धर्म और संतोषकी महत्ता ...१६२-१६३
१४–१८एक दिन सभी मृत्युके अधीन होते हैं, संसारके सगे-सम्बन्धी मृतकका साथ नहीं देते, कर्म ही उसके साथ जाता है, अतः धर्मसंग्रहकी आवश्यकता ...१६३-१६४
१९–२२अज्ञानसे छूटने और जन्म-मृत्युरूप भयसे बचनेका उपाय ...१६४-१६५
२३–२५कौन कभी मोहमें नहीं पड़ता, किससे किसकी रक्षा करे तथा कौन ब्राह्मण ब्रह्मलोकसे भ्रष्ट नहीं होता ...१६६
२६–२८कौन क्षत्रिय ऊर्ध्वलोकमें जाता है, कौन वैश्य स्वर्गमें दिव्य सुख भोगता है तथा कौन शूद्र स्वर्ग-सुखका अनुभव करता है ...१६६-१६७
२९–३२युधिष्ठिरको क्षात्रधर्ममें प्रतिष्ठित करनेके लिये धृतराष्ट्रसे विदुरका अनुरोध, विदुरकी बातें स्वीकार करते हुए भी धृतराष्ट्रका दुर्योधनके सामने अपनी विवशता बताना और प्रारब्धको प्रबल एवं पुरुषार्थको निरर्थक मानना ...१६७-१६८