विदुर नीति (महाभारत उद्योग पर्व - गीताप्रेस गोरखपुर)

विदुर नीति (महाभारत उद्योग पर्व - गीताप्रेस गोरखपुर)
Vidura Niti Gita Press
महात्मा विदुर / महर्षि वेदव्यास द्वारा
DevanagariHindipublished172 पृष्ठ
पृष्ठ 23, कुल 172 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 23
॥ श्रीहरिः ॥
विदुरनीति
हिन्दी-अनुवादसहित
पहला अध्याय
वैशम्पायन उवाच
द्वाःस्थं प्राह महाप्राज्ञो धृतराष्ट्रो महीपतिः ।
विदुरं द्रष्टुमिच्छामि तमिहानय माचिरम् ॥ १ ॥
वैशम्पायनजी कहते हैं—[ संजयके चले जानेपर ] महाबुद्धिमान् राजा धृतराष्ट्रने द्वारपालसे कहा—'मैं विदुरसे मिलना चाहता हूँ । उन्हें यहाँ शीघ्र बुला लाओ' ॥ १ ॥
प्रहितो धृतराष्ट्रेण दूतः क्षत्तारमब्रवीत् ।
ईश्वरस्त्वां महाराजो महाप्राज्ञ दिदृक्षति ॥ २ ॥
धृतराष्ट्रका भेजा हुआ वह दूत जाकर विदुरसे बोला— 'महामते ! हमारे स्वामी महाराज धृतराष्ट्र आपसे मिलना चाहते हैं' ॥ २ ॥
एवमुक्तस्तु विदुरः प्राप्य राजनिवेशनम् ।
अब्रवीद् धृतराष्ट्राय द्वाःस्थः मां प्रतिवेदय ॥ ३ ॥