बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
उपसंहार प्रत्येक मनुष्य या सही शब्दों में कहा जाय तो प्रत्येक प्राणी में ईश्वर का अंश विद्यमान है और इसीलिए हम ईश्वर पुत्र कहे जाते हैं। ईश्वर से यहाँ सारा कार्य व्यवस्थित है, सोच समझ कर किया हुआ है, यदि आप का निर्माण हुआ है तो उसके पीछे कोई बहुत बड़ा रहस्य है कोई बहुत बड़ी आवश्यकता है। हकीकत में देखा जाय तो इस पूरे संसार में जिस रूप में आपका निर्माण और प्रादुर्भाव हुआ है वह केवल आपका ही हुआ है। आपके समान केवल इस पूरे विश्व में आप ही हैं। यह हो सकता है कि विश्व में कुछ आपसे घटकर हो सकते हैं या कुछ आपसे बढ़ कर हो सकते हैं परन्तु जिन तत्वों के अनुपात से आपका निर्माण हुआ है वह अपने आप में अन्यतम है। इसीलिये यह कहा जाता है कि ये आपके हाथ में जो रेखाएं हैं वे केवल आपके हाथ ही में है। संसार में किसी भी दो व्यक्तियों के हाथों में एक सी रेखाएं मिल ही नहीं सकतीं और इसी वजह से हर व्यक्ति का व्यक्तित्व अपने आप में अलग हो जाता है। आपके सामने प्रभु ने पूरा संसार फैलाकर रखा है। अब यह आप पर निर्भर है कि इस विश्व में आप अपना क्या स्थान बनायें, किस प्रकार से स्थान बनायें, और इसके लिए यह देखना आवश्यक है कि आप अपने जीवन के क्षणों का किस प्रकार से उपयोग करते हैं। एक-एक क्षण प्रभु की तरफ से आपको वरदान स्वरूप है जो क्षण बीत गया है वह क्षण वापस आ ही नहीं सकता। चाहे हम उस क्षण को प्राप्त करने के लिए लाखों करोड़ों रुपये व्यय कर दें। जब एक क्षण लाखों करोड़ों रुपयों से भी कीमती है तो आपको यह कोई अधिकार नहीं है कि आप उस क्षण का लापरवाही के साथ उपयोग करें। व्यर्थ के वाद-विवाद में या व्यर्थ की क्रिया कलापों में उस क्षण का उपयोग करें। आपको सोचना चाहिए कि आप के जीवन के प्रत्येक क्षण का उपयोग है और आपको प्रत्येक क्षण का उपयोग सही-सही रूप में करना है। यह आप पर निर्भर है कि आप उन क्षणों का अपने साथ और अपने आपका विश्व के साथ किस प्रकार से सामंजस्य करते हैं। यह विश्व निरन्तर गतिशील है और यदि आप भी उसी के साथ-साथ गतिशील हैं तो निश्चय ही आपका विकास है। परन्तु यदि आपकी गति उससे कम हुई तो आप पिछड़ जायेंगे, पीछे रह जायेंगे और यह विश्व आपसे बहुत अधिक आगे बढ़ जायेगा। इसके बाद आप भले ही कितना ही प्रयत्न करें, विश्व की गति के साथ-साथ आप अपनी गति का सामंजस्य नहीं कर पा सकेंगे। यह पूरा जीवन आपका स्वयं का है। ये पूरे जीवन के क्षण आपके सामने खुले हुए पड़े हैं। आपको चाहिए कि आप एक-एक क्षण का उपयोग करें। प्रत्येक
( ३४८ ) - अवसर को आते ही पहिचान लें । और उसको अपनी मुट्ठी में बन्द कर लें । प्रत्येक काल, के क्षणांश के धड़कन को आप अनुभव करें और अपने अनुकूल बनाने की कोशिश करें । ये आपके हाथ में है और यदि आपने इस प्रकार से किया तो आप देखेंगे कि आपके हाथ की रेखाएं बदल रही हैं । आपके हाथ की रेखाएं ऊपर की ओर उठ रही हैं । आपके कदम उन्नति की तरफ अग्रसर हो रहे हैं । सफलता, प्रसिद्धि और सम्मान सामने जयमाला लिये हुए खड़ा है । आवश्यकता है आपके कदम बढ़ाने की जयमालाएं वरण करने की वे आपकी प्रतीक्षा कर रही हैं । व्यग्रता के साथ इन्त- जार कर रही है । जीवन के प्रत्येक कार्य के दो पहलू हैं; सकारात्मक और नकारात्मक । हम किसी भी कार्य को इन दो रूपों में ही देख सकते हैं । या यों कहा जाय कि हम निर्माण और ध्वंस के बीच में खड़े हैं । यह आप पर निर्भर है कि आप अपने जीवन की घड़ियों का सृजन करते हैं या ध्वंस करते हैं । हकीकत में देखा जाय तो आप जड़ नहीं हैं चेतन हैं । गतिशील हैं सक्रिय हैं । और सक्रियता का तात्पर्य यह है कि आप गतिशील रहें और हर क्षण अपने आपको गतिशील बनाये रखें । निरन्तर आपके पग उन्नति की तरफ अग्रसर होते रहें । आप उठें, सक्रिय बनें, सृजन करें । आप निश्चिन्त रहें कि यह आपके चारों तरफ अभाव और निराशा की जो खाई है वह अपने आप ही मिट जायेगी । ये रास्ते में जो कांटे पड़े हैं वे अपने आप फूलों में परिवर्तित हो जायेंग । पर इसके लिये आत्म-विश्वास की जरूरत है । हिम्मत साहस और धैर्य की आवश्यकता है । निरन्तर आगे बढ़ने की इच्छा-शक्ति की आवश्यकता है । आपके पास समय, शक्ति, श्रम, स्वास्थ्य और जीवन है। आप दोनों हाथों से इनका उपयोग कीजिये । आपको जितना श्रम और समय मिला है उतना ही समय गांधी को, लिंकन को, टैगोर को, ईशा को या टॉलस्टाय को भी मिला था । फिर क्या कारण है कि वे इस संसार के आकाश में आज भी चमक रहे हैं और आप गुम- नाम से अंधेरे में भटक रहे हैं। फिर क्या कारण है कि आप पीछे हैं, फिर क्या बात है कि आपके कदम लड़खड़ा रहे हैं। उठिये, आगे बढ़िए, सफलता की मंजिल सामने ही है, विजय श्री आपको पुकार रही है, प्रसिद्धि और सम्मान आपके स्वागत के लिए खड़े हैं और सफलता जयमाला लिए आपको वरण करने के लिए तैयार है। हृदय में जोश और स्नायुओं में साहस भरकर आगे बढ़िये । आपका प्रत्येक के कदम मजबूत हो, इस धुंधलके में भी आपकी दृष्टि आर-पार देख सके। आपके हाथ में है कि आप अपनी दुर्बल रेखाओं को बदल दें । अपने दुर्भाग्य को सौभाग्य में परिणित कर दें । काम करने का यही समय है । इसी क्षण से समय है और सही रूप में आपके जीवन के समय की यही पुकार है ।
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