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भारतकोश
योगवाशिष्ठ महारामायण

योगवाशिष्ठ महारामायण

Yog Vashishta Maha Ramayan

महर्षि वाल्मीकि द्वारा

स्रोत: योगवाशिष्ठ महारामायण (हिन्दी भाषा टीका) · Archive.org (उद्गम)

DevanagariHindipublished1,734 पृष्ठ

पृष्ठ 1442, कुल 1734 में से

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पृष्ठ 1442

☀ निर्वाण प्रकरण ☀ ६३७

स्वप्न में स्वप्न की सृष्टि दिखती है, परन्तु वास्तव में हुई नहीं, निद्रादोष से दिखती है, वैसे ही जाग्रत् सृष्टि भी वास्तव में नहीं हुई, अज्ञान से जीवों को भासित होती है। वास्तव में सब जीव ब्रह्मरूप हैं, पर अपने स्वरूप के प्रमाद से जीवत्वभाव को अङ्गीकार किया है। उस अङ्गीकार और अनात्म देहादिक में आत्मअभिमान से जीव जैसा निश्चय करता है, वैसी ही गति पाता है। देश, काल, क्रिया और द्रव्य का जैसा संकल्प अनुभवसत्ता में दृढ़ होता है, वैसा ही भासता है। उसमें चार अवस्था कल्पित होती हैं और जैसी-जैसी भावना होती है, उसके अनुसार अवस्था का अनुभव होता है। वे चार अवस्था ये हैं—एक घनसुषुप्ति; दूसरी क्षीणसुषुप्ति, तीसरी स्वप्न अवस्था और चौथी जाग्रत। पर्वत और पाषाण घनसुषुप्ति में हैं। जैसे सुषुप्ति अवस्था में कुछ नहीं फुरता, जड़ीभूत हो जाता है, वैसे ही इनको कुछ नहीं फुरता—घन सुषुप्ति में स्थित हैं। वृक्ष क्षीणसुषुप्ति में स्थित हैं। जैसे क्षीणसुषुप्ति में कुछ फुरना फुरता है, वैसे ही वृक्षों में भी फुरना होता है, इससे वे क्षीणसुषुप्ति में हैं। पक्षी, कीट, पतङ्ग आदि तिर्यक् जीव स्वप्न अवस्था में स्थित हैं। जैसे स्वप्न में पदार्थ दिखता है, परन्तु स्पष्ट नहीं दिखता, वैसे ही इनको थोड़ा सूक्ष्म ज्ञान है, इससे ये स्वप्न अवस्था में स्थित हैं। मनुष्य और देवता जाग्रतरूप जगत् का अनुभव करते हैं।

हे राम ! ये चारों अवस्था आत्मा में स्थित हैं। छोटे बड़े सबका अहंप्रत्ययरूप आत्मा है। उसमें जैसा संकल्प दृढ़ होता है, वैसा ही वह दिखता है। हे राम ! हमको एक दिन व्यतीत होता है और चींटी को उसी में युग का अनुभव होता है। हमको जो सूक्ष्म अणु होता है, उनको वही पर्वत के समान लगता है। हे राम ! स्वरूप सबका एक आत्मसत्ता ही है, परन्तु भावना में भिन्न-भिन्न भासित होता है। एक कीट है, जो बहुत सूक्ष्म है। जब वह चलता है, तब जानता है कि मेरा गरुड़ का सा वेग है और उसको वही सत् हो रहा है। बाल-खिल्यों का अंगुष्ठप्रमाण शरीर है। उनको वही बड़ा दिखता है और विराट् को वही अपना बड़ा शरीर लगता है। निदान जैसी जिसकी