योगिनी हृदयम् (अमृतानन्दनाथ विमर्शिनी एवं पं. व्रजवल्लभ द्विवेदी सविस्तार सटीक)
Yogini Hridayam with Amritanandanatha Dipika by Vraj Vallabha Dwivedi
अमृतानन्दनाथ (भाष्यकार: पं. व्रजवल्लभ द्विवेदी) द्वारा
पृष्ठ 389, कुल 485 में से
संदर्भ में पढ़ेंतृतीयः ] दीपिकाभाषानुवादसहितम् ३४१ नामव्युत्पत्तिपुरःसरं १चक्रेशीमाह— मातृमानप्रमेयाणां पुराणां परिपोषिणी । त्रिपुरामालिनी ख्याता चक्रेशी सर्वमोहिनी ॥ १५० ॥ २परसंवित्स्पन्दरूपत्वान्मातृमानमेयान्येव पुराणि, तेषां पुराणां परिपोषिणी प्रधानेनोपबृंहिणी। अत एव त्रिपुरामालिनी ख्याता निरुक्ता। ३चक्रेशी षष्ठचक्रेशी सर्वमोहिनी। ४एतत्कृतमोहवशादेव हि मातृमानप्रमेयरूपा ५प्रथा। तदुक्तं परा- पञ्चाशिकायाम्—"६स्वाङ्गरूपेषु ७भावेषु मायातत्त्वं विभेदधीः" (श्लो० २१) इति ॥१५०॥ विद्याशक्तिविशुद्धिं च सिद्धिं प्राकाम्यसंज्ञिताम् । एताः सर्वोपचारेण पूजयेद् देवताः क्रमात् ॥ १५१॥ मन्त्राः पुरुषवाच्याधिष्ठिताः, विद्याः स्त्रीरूपवाच्याधिष्ठिताः। अत एव नाम की व्युत्पत्ति के साथ चक्रेश्वरी का वर्णन करते हैं— माता, मान और प्रमेय लक्षण पुरत्रय की यह पोषिका है। इसीलिये यह सर्वमोहिनी चक्रेशी त्रिपुरामालिनी कहलाती है ॥ १५०॥ माता, मान और प्रमेय लक्षण पुरत्रय परा संवित् का ही स्पन्दन है। इन तीन पुरों को यह त्रिपुरामालिनी परिपुष्ट करती है, प्रधानतः इनका उपबृंहण करती है। इसीलिये यह इस नाम से प्रसिद्ध है। यह षष्ठ चक्र की स्वामिनी सबको मोह में डाले रहती है। यह चक्रेशी जिस मोह को पैदा करती है, उसी के कारण माता, मान और प्रमेय स्वरूप पुरत्रय की कल्पना सजीव हो उठती है। परापंचाशिका में बताया गया है—"यह सारा भाव जगत् शिव का अपना ही स्वरूप है। मायातत्त्व के ही कारण इनमें परस्पर भेदबुद्धि जग जाती है" ॥१५०॥ इस षष्ठ चक्र में त्रिपुराविद्या की शक्ति से प्राप्त हुई प्राकाम्य नामक सिद्धि के साथ चक्रेशी की और आवरण देवताओं की भी सभी उपचारों से पूजा करे ॥१५१॥ १पुरुष-देवता के वाचक मन्त्र और स्त्री-देवता की वाचक विद्या कहलाती है। इसी १. चक्रेश्वरो—क. ग.। २. 'पर''''बृंहिणी' इत्यस्य स्थाने 'सर्वेषां स्वप्रथाप्रदानेनोप- बृंहिणी' इति पाठः—ख. ने. ज. ब. उ.। ३. चक्रे षष्ठचक्रे—क. ग.। ४. अत एव तत्कृत—ख. ने. ज. उ.। ५. भेदप्रथा—झ.। ६. स्वांश—क. ग.। ७. भानेषु—क. ग., भागेषु—ख. ने. ज. झ. उ.। १. ऋजुविमर्शिनी (पृ० ४२-४३) मूल तथा टिप्पणी देखिये।