कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)
Kabir Sagar (11 Parts Complete)
कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
कबीरसाहबका चौका करके धर्मदासजीको परवाना देना आरती विधि
अनुरागसागर
( ११३ )
छन्द
चतुर्भुज बंकेज सहतेज, और चौथे तुम अहौ ॥ चार गुरुकडिहार जगके वचन यह निश्चय गहौ ॥ यही चार अंश संसारमें, जीव काज प्रगटाइया ॥ स्वसंवेदसोइनसंग दियो, जेहि सुनि काल भगाइया ॥७४॥
सोरठा-चरोंमें धर्मदास, जम्बुदीपके गुरु साहि ॥ व्यालिस वंश विलास तैं जीव तेहि शरणगहि ॥७८॥
आरतीविधिवर्णन
कबीर साहबका चौका करके धर्मदासको परवाना देना धर्मदास वचन
धर्मदास पद गहि अनुरागा । हो प्रभु मोहि कीन्ह सुभागा ॥ हे प्रभु ! नहि रसना प्रभुताई । अमित रसन गुण वरनिन जाई ॥ महिमा अमित अहै तुम स्वामी । केहि विधि बरनों अंतरयामी ॥ मैं सब विधि अयोग्य अविचारी । मुझ अधमहिं तुम लीन उबारी ॥ अब चौका भेद कहो मुहि स्वामी । काहि कहहु तिनका सुखभामी ॥ जो तुम कहो करौ मैं सोई । तामहैं फेर न परि हैं कोई ॥
कबीर वचन चौकाका साज
धर्मदास सुनु आरति साजा । जाते भागि चले यमराजा ॥ सात हाथको बस्तर लाओ । श्वेत चँदोबा छत्र तनाओ ॥ घर आंगन सब शुद्ध कराओ । चौका करि चन्दन छिड़काओ ॥ तापर आँटा चौक पुराओ । सवासेर तंदुल ले आओ ॥ स्वेत सिंहासन तहाँ बिछाई । नाना सुगंध धरु तहाँ लगाई ॥ स्वेत मिठाई स्वेतै पाना । पुंगीफल स्वेतहि परमाना ॥ लौंग इलायची कपुर सँवारो । मेवा अष्ट केरा पनवारो ॥
कबीरसाहबका धर्मदासको उपदेश देना
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नारायणदासजीका कबीरसाहबकी अवज्ञा करना
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द्वादश पन्थका वर्णन
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अनमङ्ग वृत्तका पन्थ ४
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अखिलभङ्ग दूतका पंथ ८
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धर्मदास साहबको आत्म अंशका दर्शन होना
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चूड़ामणिकी उत्पत्तिकी कथा
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ब्यालीस वंशके राज्यकी स्थापना
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चूड़ामणिको कबीरसाहबका उपदेश देना
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वंश का माहात्म्य
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भविष्य कथा प्रारम्भ
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निरंजनका अपने चार अंशको पंथ चलानेकी आज्ञा देना
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चार दूतों का नाम वर्णन
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