भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)
Bhavaprakasha Chikitsa Bhaga with Vidyotini Commentary
आचार्य भावमिश्र (टीकाकार: पं. ब्रह्मशंकर मिश्र एवं रूपलालजी वैश्य) द्वारा
निघण्टुभाग पृष्ठ | पृष्ठ हरीतक्यादिवर्गः २०८ | वारिवर्गः ८९५ कर्पूरादिवर्गः ३६२ | दुग्धवर्गः ९०६ गुडूच्यादिवर्गः ४४८ | दधिवर्गः ९१४ पुष्पवर्गः ६४० | तक्रवर्गः ९१८ वटादिवर्गः ६७२ | नवनीतवर्गः ९२१ आम्रादिफलवर्गः ७०८ | घृतवर्गः ९२२ धातूपधातु-रसोपरस-रत्नोपरत्न विषोपविषवर्गः ७५७ | मूत्रवर्गः ९२५ धान्यवर्गः ७८९ | तैलवर्गः ९२६ शाकवर्गः ८१५ | सन्धानवर्गः ९३० मांसवर्गः ८५५ | मधुवर्गः ९३५ कृतान्नवर्गः ८७३ | इक्षुवर्गः ९३९ अनेकार्थनामवर्गः ९४५
भावप्रकाशः द्वितीयभाग (७) मानपरिभाषादिप्रकरण
पृष्ठ | परिशिष्ट मानपरिभाषा ९५५ | पृष्ठ भेषजविधानप्रकरणम् ९५९ | अस्थियों के विषय में संक्षिप्त विवरण १०८३ धात्वादिशोधन-मारणविधिः ९७० | अकारादिक्रमानुसार निघण्टुभाग-स्थित द्रव्यों के व्यवहारोपयोगी स्नेहपानविधिः १००२ | अङ्ग तथा उनकी मात्राएँ ११०१ पञ्चकर्मविधिः १००७ | धूमपानादिविधिः १०३४ | रोगि-परीक्षा १०६३ |
विषय-सूची
१. आयुर्वेदप्रवक्तृप्रादुर्भावप्रकरण | पृष्ठ पृष्ठ | रजस्वला स्त्रियों के नियम २० आयुर्वेद का लक्षण १ | रजस्वला के नियम पालन नहीं करने पर दोष २१ आयुर्वेद की निरुक्ति १ | स्नानोत्तर रजस्वला स्त्री का कर्तव्य २१ आयुर्वेद का उत्पत्ति क्रम २ | रजस्वला के साथ सम्भोग निषेध २१ २. सृष्टिप्रकरणम् | स्त्री योनि की नाड़ियाँ और उसकी विशेषता २२ | सम-विषम रात्रियों में स्त्री संभोग करने का फल २२ ग्रन्थोपक्रम १० | पुरुष के लिए स्त्री सम्भोग का विधान २३ प्रकृति के स्वरूपविशेष ११ | स्त्री सम्भोग में अयोग्य पुरुष २३ प्रकृति-पुरुष के समान धर्म ११ | स्त्री के लिये पुरुष सम्भोग का विधान २३ प्रकृति-पुरुष के विभिन्न धर्म ११ | सम्भोग के अयोग्य स्त्री २३ प्रकृति के नाम तथा गुण १२ | रजस्वला के साथ सम्भोग निषेध २३ सत्त्वगुण से युक्त मन के लक्षण १२ | गर्भस्थिति का क्रम २३ रजोगुण से युक्त मन के लक्षण १३ | गर्भाशय के स्वरूप २४ तमोगुण से युक्त मन १३ | गर्भ में जीव के प्रवेश करने का प्रकार २५ महत्तत्व की उत्पत्ति १३ | गर्भाशय का द्वार बन्द होने का समय २५ अहङ्कार की उत्पत्ति और भेद १४ | यमज सन्तान उत्पन्न होने का कारण २५ त्रिविध अहङ्कार के कार्य १४ | पुत्र, पुत्री और नपुंसक सन्तान होने के कारण २६ बुद्धि और कर्मेन्द्रिय से मन की अभिन्नता १४ | सद्यः गर्भवती हुई स्त्री के लक्षण २७ बुद्धीन्द्रियों के विषय १५ | गर्भवती स्त्रियों के लक्षण २७ कर्मेन्द्रिय और मन के विषय १५ | पुत्र गर्भवती स्त्रियों के लक्षण २७ पंचतन्मात्रों की उत्पत्ति के विषय १५ | कन्या गर्भवती स्त्रियों के लक्षण २८ पंचमहाभूतों की उत्पत्ति १६ | नपुंसक गर्भ के लक्षण २८ आकाश के गुण १६ | नपुंसकों के भेद तथा लक्षण २८ वायु, अग्नि, जल तथा पृथ्वी के गुण १६ | अनस्थि सन्तानोत्पत्ति के लक्षण ३० आठ प्रकृतियों में पहिली प्रकृति १७ | सन्तानों में चेष्टादिभेद के कारण ३१ सप्त प्रकृतियाँ १७ | गर्भ के लक्षण ३१ सोलह विकार १८ | हृदय के स्वरूप ३२ जीवात्मा के निवासस्थान १८ | शरीरस्थ दोषों का स्वरूप ३४ जीवात्मा और शरीरी १८ | दोष शब्द की निरुक्ति ३४ जीवविषयक गुण १९ | त्रिदोषों में वायु के स्वरूप ३५ ३. गर्भप्रकरणम् | उदानादि वायुओं के नाम, स्थान तथा कर्म ३६ रजस्वला स्त्री के स्वरूप २० | पित्त के स्वरूप ३७ गर्भग्रहण के योग्य समय २० | CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammu. Digitized by S3 Foundation USA
१२ भावप्रकाशस्य पूर्वखण्डे पृष्ठ | पृष्ठ पित्तों के नाम ३७ | शुक्र के स्वरूप ६२ पाचकादि पित्तों के स्थान तथा कर्म ३७ | जीव का आश्रय ६२ श्लेष्मा (कफ) का स्वरूप ४१ | गर्भ उत्पन्न करने वाले शुक्र के लक्षण ६२ क्लेदनादि कफों के स्थान ४१ | शुक्र के स्थान ६२ अवलम्बन, रसक, स्नेहन तथा श्लेषण नामक | शुक्र के निकलने के मार्ग ६३ कफों के कर्म ४२ | शुक्र के क्षरण होने में कारण ६३ धातु शब्द की निरुक्ति ४३ | आर्तव के स्वरूप ६३ धातुओं के कार्य ४३ | गर्भग्रहण के योग्य आर्तव ६४ रस धातु की निरुक्ति ४३ | धातुगुण-वर्णन ६४ रस के स्वरूप ४३ | धातुओं के मल ६४ रस के स्थान और कर्म ४४ | उपधातु का लक्षण ६५ रक्त के स्वरूप ४४ | आशय के लक्षण ६५ रक्त के स्थान ४५ | वाग्भटोक्त आशयों का क्रम ६५ मांस के स्वरूप ४५ | कलाओं के स्वरूप ६६ मांसपेशियों की संख्यायें ४५ | मर्मस्थल के लक्षण ६६ मांसपेशियों के कर्म ४७ | मर्मों की संख्या तथा स्थान ६६ मेद का स्वरूप और स्थान ४७ | मर्मों के कार्य ६६ हड्डियों के स्वरूप और संख्याएँ ४८ | सद्यःप्राणहरण करने वाले मर्मस्थल ६७ हड्डियों के प्रयोजन ४९ | शृङ्गाटक मर्म ६७ मज्जा के स्वरूप और स्थान ५० | अधिपति मर्म ६७ शुक्र की उत्पत्ति ५० | कण्ठशिरा या शिरामातृका मर्म ६७ आमाशय का स्थान ५१ | गुदमर्म ६७ कफ का स्वरूप ५१ | हृदय मर्म ६७ ग्रहणी का लक्षण ५२ | बस्ति मर्म ६८ पंचमहाभूतों में चरकोक्त पञ्चाग्नि का निर्देश ५३ | नाभि मर्म ६८ आहार से रसादि का निर्माण ५३ | कालान्तर में प्राणहरण करने वाले मर्म ६८ मूत्र और पुरीषोत्सर्ग में कारण ५४ | वक्षो मर्म ६८ आहार रस का कार्य ५४ | स्तनरोहित मर्म ६८ ओज के लक्षण ५८ | अपलाप मर्म ६८ स्त्रियों का वीर्य विकृत गर्भ में कारण ५९ | अपस्तम्भ मर्म ६८ शरीर में आहार-रस का सञ्चार ६० | सीमन्त मर्म ६९ वाजीकरण ओषधियों का प्रयोजन ६० | तल मर्म ६९ शुक्रवर्धक पदार्थ ६१ | क्षिप्र मर्म ६९ बालकों के अदृश्य शुक्र में कारण ६१ | इन्द्रबस्ति मर्म ६९ वृद्धावस्था में शुक्रवृद्धि का ह्रास ६२ | बृहती मर्म ६९ पार्श्वसन्धि मर्म ६९ CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmmu. Digitized by S3 Foundation USA
विषय-सूची १३ पृष्ठ | पृष्ठ कटीकतरुण मर्म ७० | कण्डराओं के स्वरूप और स्थान ८३ नितम्ब मर्म ७० | रन्ध्रों की संख्या और स्थान ८३ विकलता करने वाले मर्मस्थल ७० | स्रोतों के लक्षण ८४ लोहिताक्ष मर्म ७० | जालों के लक्षण और संख्या ८४ आणि मर्म ७० | कूर्चों के लक्षण और संख्या ८४ जानु मर्म ७१ | रज्जुओँ के लक्षण और संख्या ८५ ऊर्वी मर्म ७१ | सेवनियों के लक्षण और संख्या ८५ कूर्च मर्म ७१ | सङ्घातों की संख्या ८५ विटप मर्म ७१ | सीमन्तों के लक्षण और संख्या ८५ कूर्परमर्म ७१ | त्वचाओं के लक्षण और संख्या ८५ कुकुन्दर मर्म ७१ | रोम तथा रोमकूप ८७ कक्षधर मर्म ७१ | प्रत्येक मास में गर्भ की अवस्था ८७ विधुर मर्म ७१ | गर्भिणी की इच्छा विशेष ८९ कृकाटिका मर्म ७२ | गर्भ में अङ्गोत्पत्ति ९० अंस मर्म ७२ | पितृज-मातृज शरीराकृति ९१ अंसफलक मर्म ७२ | गर्भ के विशेष उपकारक ९१ अपाङ्ग मर्म ७२ | गर्भ के जीवित रहने के हेतु ९२ नीला और मन्या मर्म ७२ | दृष्टिमण्डल तथा रोमकूपों की वृद्धि निषेध ९३ फण मर्म ७२ | नख और केशों की वृद्धि में हेतु ९३ आवर्त्त मर्म ७३ | शरीर में चेतन तथा अचेतन अङ्ग ९३ गुल्फ मर्म ७३ | गर्भ में मलादि त्याग न करने में कारण ९३ मणिबन्ध मर्म ७३ | गर्भस्थ सन्तान के रोदन न करने के कारण ९४ कूर्चशिरा मर्म ७३ | गर्भवती स्त्रियों के कर्म ९४ विशल्यघ्न मर्म ७३ | गर्भिणी के न करने योग्य कर्म ९४ उत्क्षेप मर्म ७३ | प्रसव का समय ९५ स्थपनी मर्म ७४ | प्रसूतिकार्गृह का स्वरूप ९५ सन्धियों के लक्षण तथा संख्या ७४ | आसन्नप्रसवा के लक्षण ९५ कोष्ठगत सन्धियाँ ७५ | आसन्नप्रसवा स्त्री के उपचार ९५ ग्रीवा तथा उसके ऊपर की सन्धियाँ ७५ | आसन्नप्रसवा की परिचारिका ९६ आठ प्रकार की सन्धियाँ ७५ | जनयित्री स्त्रियों के करने योग्य कर्म ९६ शिराओं का वर्णन ७६ | प्रसवव्यथा से रहित गर्भिणी के कांखने से वैगुण्य ९६ शिराओं के भेद ७७ | ४. बालप्रकरणम् स्नायु के स्वरूप तथा संख्या ७९ | बालक के जन्म होने के बाद की विधि ९७ धमनियों की संख्या और स्थान ८० | प्रसूता स्त्री के नियम ९७ | प्रसूता स्त्री के नियम पालन का समय ९७
१४ भावप्रकाशस्य पूर्वखण्डे पृष्ठ पृष्ठ दूध का स्वरूप ९७ अधोवायु रोकने से हानि १११ स्तनों से दूध उतरने का समय ९८ मूत्र के वेग को रोकने से हानि १११ दूध निकलने के कारण ९८ दातौन करने की विधि ११२ दूध के कम निकलने के कारण ९८ जीभ सफा करने की विधि ११३ दूध के बढ़ने के कारण ९८ कुल्ला करने की विधि ११४ कलम नामक धान्यविशेष का लक्षण ९८ नस्य लेने की विधि ११४ दूध के दूषित होने के कारण ९९ अंजन लगाने की विधि ११४ दूषित दूध के लक्षण ९९ अंजन लगाने के अयोग्य व्यक्ति ११५ दूषित दुग्ध की शोधन विधि ९९ नाखून कटाने और बाल बनवाने की विधि ११५ शुद्ध दूध के लक्षण ९९ नाक के बाल उखाड़ने में दोष ११५ धात्री के लक्षण १०० बालों में कंघी लगाने के गुण ११५ दूध पिलाने के अयोग्य धात्री के लक्षण १०० दर्पण में मुख देखने के गुण ११५ बालकों को दूध पिलाने की विधि १०० व्यायाम के गुण ११६ अविधि स्तनपान कराने का दोष १०१ बलार्ध का लक्षण ११६ स्तन्य के अभाव में गो अथवा बकरी के दुग्ध १०१ व्यायाम करने के अयोग्य व्यक्ति ११६ अन्नप्राशन का समय १०१ अत्यन्त व्यायाम करने से दोष ११६ बालक की परिचर्या १०१ तेल लगाने के गुण ११६ बालकों के लिये हितकर १०२ सर्वाङ्ग में तेल लगाने के गुण ११७ बालकों के कवलादि करने का समय १०२ शिर में तेल लगाने के गुण ११७ बाल्यादि अवस्थाओं की सीमा १०२ कानों में तेल डालने के गुण ११७ प्रकृतियों के लक्षण १०४ कान में तेल डालने का समय ११७ वात-पित्त-कफ प्रकृति के लक्षण १०४ पैरों में तेल लगाने के गुण ११७ द्वन्द्वज तथा त्रिदोषज प्रकृति के लक्षण १०५ शरीर में तेल लगाकर स्नान के गुण ११८ वाग्भटोक्त वात-पित्त-कफ प्रकृति के लक्षण १०५ अभ्यङ्ग के अयोग्य जन ११८ ५. दिनचर्यादिप्रकरणम् उबटन लगाने के गुण ११८ देशों के भेद १०९ स्नान की विधि ११८ अनूपदेश के लक्षण १०९ आँवला मिश्रित जल के गुण ११९ जांगल देश के लक्षण १०९ स्नान करने के अयोग्य जन ११९ साधारण देश के लक्षण १०९ स्नानोत्तर देह पोंछने के गुण ११९ दिनादिचर्या ११० वस्त्रधारण करने का विधान ११९ स्वस्थ पुरुष का लक्षण ११० ग्रीष्म ऋतु में वस्त्र धारण विधान १२० दिनचर्या-विधि ११० वर्षारितु में वस्त्रधारण विधान १२० पुरीषोत्सर्ग के वेग को रोकने से हानि १११ नवीन वस्त्रधारण करने के गुण १२० मलिन वस्त्रधारण करने के दोष १२० CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmmu. Digitized by S3 Foundation USA
विषय-सूची १५ पृष्ठ | पृष्ठ शीतकाल में प्रलेप के योग्य द्रव्य १२० | गुरु अन्न का भोजन निषेध १२८ उष्ण काल में प्रलेप के योग्य द्रव्य १२० | छः प्रकार का आहार १२८ वर्षाकाल में प्रलेप के योग्य द्रव्य १२१ | स्वभाव और संस्कार से गुरु तथा स्वभाव से प्रलेप के गुण १२१ | लघु भोज्य पदार्थों के परिमाण १२९ सुगन्धित पुष्प तथा पत्र धारण के गुण १२१ | शुष्कादि द्रव्यों के भोजन से दोष १३० भूषण धारण करने के गुण १२१ | सत्तू खाने की विधि १३० रत्नों के धारण करने के गुण १२१ | सत्तू खाने में वर्ज्य कर्म १३० सूर्यादि नवग्रहों को प्रसन्न करनेवाले रत्न १२२ | बहुत तथा कम भोजन करने के दोष १३१ सुन्दर वस्त्रादि धारण करने के गुण १२२ | असमय में भोजन करने के दोष १३१ सिद्ध मन्त्र, महौषधादि धारण के गुण १२२ | भोजन का समय व्यतीत होने पर भोजन करने भोजन समय मङ्गल वस्तु दर्शन के गुण १२२ | से दोष १३१ मङ्गलप्रद वस्तु १२२ | भोजन का प्रमाण १३१ खड़ाऊँ धारण करने के गुण १२२ | भोजन के बीच में थोड़ा-थोड़ा जलपान की विधि १३२ स्वाभाविक मानुषी इच्छा १२३ | भोजन के आरम्भ, मध्य अथवा अन्त में जल भोजन की इच्छा रोकने से हानि १२३ | पीने का फल १३२ प्यास रोकने से हानि १२३ | प्यासे के लिये भोजन और भूखे के लिये जलपान नींद रोकने से हानि १२३ | का निषेध १३२ भूख लगने पर भोजन न करने से हानि १२३ | भोजन के अन्त में दुग्धपान विधि १३२ भूख लगने पर भोजन करने का गुण १२३ | भोजनोपरान्त आचमन विधि १३४ भोजन का समय १२३ | भोजनोपरान्त कर्म १३५ प्रातःकालीन भोजन का समय १२४ | भोजनोपरान्त वातादि की वृद्धि १३५ भोजन का अनियमित समय १२४ | भोजनोपरान्त कफ वृद्धि का प्रतीकार १३६ आहार परिपाक के लक्षण १२४ | पान खाने का समय १३६ भोजन करने योग्य स्थान १२४ | पान के गुण १३६ भोजन के समय शुभाशुभ दृष्टि १२५ | सुपारी के गुण १३७ भोजन करने योग्य पात्र १२५ | खैर, चूना युक्त पान के गुण १३७ जलपात्र का विधान १२५ | पान के अग्र तथा मध्य भागों का परित्याग न भोजन के समय सबसे पहले भोज्य वस्तु १२६ | करने से दोष १३७ भोजन के समय ब्रह्मादि का स्मरण १२७ | पान के दो पीक थूकने के बाद खाने का विधान १३८ भोजन का क्रम १२७ | अधिक पान खाने से दोष १३८ स्वाद अन्न के लक्षण और गुण १२७ | पान खाने के अयोग्य पुरुष १३८ अत्यन्त गर्म, शीतल, सूखा और गीला | भोजन के बाद टहलने के गुण १३८ भोजन करने से दोष १२८ | भोजनोपरान्त शयन विधि १३८ अत्यन्त शीघ्रता तथा धीरे-धीरे अन्न | सर्वदा बायें करवट लेटने का विधान १३८ खाने के दोष १२८ | शय्या का विधान १३९
१६ भावप्रकाशस्य पूर्वखण्डे पृष्ठ | पृष्ठ शय्या के विषय में अन्य मत १३९ | सन्ध्या काल के निषिद्ध कर्म १४८ शरीर दबवाने के गुण १३९ | रात्रि की चाँदनी, ओस और अन्धकार के गुण १४९ धीरे तथा जोरों से बहती हुई वायु सेवन के गुण १३९ | रात्रि भोजन का विधान १४९ पूर्वी वायु (पुरवइया हवा) के सेवन से गुण दोष १३९ | इच्छा होने पर मैथुन न करने से दोष १४९ दक्षिणी तथा पश्चिमी वायु सेवन के गुण-दोष १४० | स्त्रियों की बालादि अवस्था का विचार १४९ उत्तरी वायु के गुण-दोष १४० | बाला, तरुणी और प्रौढा स्त्री सेवन का समय १४९ आग्नेय, नैर्ऋत्य, वायव्य, ईशान तथा चौतरफा | सद्यः बल उत्पन्न करने वाले पदार्थ १५० बहने वाली वायु के गुण १४० | सद्यः बल को हरण करने वाले पदार्थ १५० पङ्खे की वायु के गुण १४० | तरुणी और वृद्धा स्त्रीसंभोग का फल १५० दिन में सोने का निषेध १४१ | नियम पूर्वक स्त्री संभोग के गुण १५० दिन में सोने योग्य जन १४१ | ऋतु भेद से स्त्री सेवन का प्रकार १५० शयन, मर्दन आदि का गुण १४१ | वसन्तादि ऋतुओं में स्त्रीसेवन के मध्यन्तर काल १५० उदर में अन्न के ठहरने के कारण १४१ | ऋतुभेद से स्त्रीसेवन के समय १५१ खाये हुए अन्न के उदर में न ठहरने के हेतु १४२ | स्त्रीसम्भोग का निषिद्ध समय १५१ भोजन के बाद परित्याग करने के योग्य अन्यान्य | स्त्रीसम्भोग करने योग्य स्थान १५१ कर्म १४२ | स्त्रीसम्भोग के अयोग्य स्थान १५१ अजीर्ण होने के कारण १४२ | स्त्रीसम्भोग करने के समय पुत्रार्थी पुरुषों का अध्यशन के लक्षण १४३ | वेषादि १५१ प्रातःकाल अजीर्ण मालूम पड़ने पर भोजन का | मैथुन करने के अयोग्य पुरुष १५१ उपयाय १४३ | मैथुन के योग्य स्त्री १५२ दिन में स्त्री सम्भोग का निषेध १४४ | मैथुन के अयोग्य स्त्री १५२ बैठे रहने, रास्ता चलने एवं धीरे-धीरे | रजस्वला स्त्री के साथ सम्भोग करने से दोष १५२ टहलने के गुण-दोष १४४ | संन्यासिनी आदि स्त्रियों के साथ संभोग करने में पगड़ी, मुरेठा आदि धारण करने के गुण-दोष १४४ | दोषान्तर १५२ जूता पहनने के गुण १४४ | गर्भिणी आदि स्त्रियों के साथ संभोग करने में जूता न पहने से अवगुण १४४ | दोषान्तर १५२ छाता तथा दण्ड धारण करने के गुण १४५ | भूखे प्यासे आदि होकर तथा मध्याह्न में स्त्री पालकी, नौका, हाथी और घोड़े की सवारी | संभोग करने से दोष १५३ करने के गुण १४५ | रुग्णावस्था या प्रातःकाल में स्त्रीसंभोग से दोष १५३ धूप तथा छाया सेवन के गुण १४५ | पशु आदि की योनि में मैथुन करने के दोष १५३ वर्षा तथा कुहेसा के सेवन के गुण १४५ | वेग रोकने से या विपरीत मैथुन करने से दोष १५४ अग्नि तथा धूप सेवन के गुण १४५ | स्खलित होते हुये शुक्र के रोकने का दोष १५४ सत्पुरुषों के आचरण १४६ | मैथुन करने के बाद हितकारक द्रव्य १५४ सन्ध्या समय में वर्ज्य कर्म १४८ | अत्यन्त मैथुन करने से होने वाले रोग १५४ चाँदनी, ओस और अन्धकार के गुण १४८ |
विषय-सूची १७ पृष्ठ | पृष्ठ रात्रि में सोने तथा जागने के गुण-दोष १५४ | चिकित्सा की विधि १६६ सुखपूर्वक नींद आने के लिये औषध १५४ | बिना समझे चिकित्सा करने में दोष १६७ उषाकाल (सूर्योदय के पूर्व) जल पीने के गुण १५४ | रोग तथा औषध दोनों का ज्ञान उषःकाल में नासिका से जल पीने के गुण १५५ | होने पर गुण १६७ नासाजलपान में जल का परिमाण १५५ | चिकित्सा करने की पद्धति १६८ नासा जलपान के विशेष गुण १५६ | अतिरिक्त तथा हीन चिकित्सा का निषेध १६९ नासा जलपान के अयोग्य जन १५६ | परस्पर भिन्न स्वरूपवाली चिकित्साओं ऋतुभेद और ऋतुचर्या १५६ | का एकत्र विधान १६९ दक्षिणायन तथा उत्तरायण के लक्षण और गुण १५७ | चिकित्सा करने से फल १७० ऋतुओं के गुण-दोष १५७ | धनियों से धन लेकर चिकित्सा का विधान १७० ऋतुभेद से दोषों के उपचयापचयादि १५७ | निःशुल्क चिकित्सा कराने में दोष १७० अकाल दोषों की वृद्धि १५९ | वैद्य की चिकित्सा वृद्धि का प्रसार १७० दोषों के चय होने के लक्षण १५९ | रोगी के लक्षण १७१ वर्षा ऋतु के नियम १६० | चिकित्स्य रोगी के लक्षण १७१ शरद् ऋतु के नियम १६० | अचिकित्स्य रोगी के लक्षण १७१ हेमन्त ऋतु के नियम १६१ | अचिकित्स्य रोगियों की चिकित्सा का निषेध १७२ शिशिर ऋतु के नियम १६१ | दूत के लक्षण १७२ वसन्त ऋतु के नियम १६२ | दूत के शकुन विचार १७३ ग्रीष्म ऋतु के नियम १६२ | चिकित्सक के लक्षण १७३ ऋतुचर्याओं का आचरण करने से लाभ १६२ | निषिद्ध वैद्य के लक्षण १७३ ६. मिश्रप्रकरण | वैद्य का कर्तव्य १७४ रोग के लक्षण १६३ | आगन्तुक हेतु १७५ चार प्रकार के रोग १६३ | रोगी के प्रथम आयु का विचार १७६ व्याधियों के भेद १६३ | दीर्घायु रोगी के लक्षण १७६ कर्मज व्याधि १६३ | स्वल्प आयुवाले रोगियों के लक्षण १७६ दोषज व्याधि १६४ | गतायु को ओषधि से लाभ नहीं होने के कारण १७९ कर्म तथा दोष दोनों से उत्पन्न व्याधि १६४ | चिकित्सा में द्रव्य की आवश्यकता १८१ कर्मजादि रोगों के क्षीण होने के कारण १६४ | रोगी की परिचर्या करने वाले (परिचारक) साध्यादि भेद से तीन प्रकार के रोग १६५ | का लक्षण १८१ याप्य के लक्षण १६५ | औषध के लक्षण १८१ साध्य-याप्य रोगों से युक्त रोगी की | औषध ग्रहण करने की परिभाषा १८१ आवश्यक चिकित्सा १६५ | औषधियों की परीक्षा १८४ उपद्रव के लक्षण १६५ | स्वभावतः हितकारक द्रव्य १८५ अरिष्ट के लक्षण १६५ | स्वभावतः अहितकर द्रव्य १८६ चिकित्सा के लक्षण १६५ | २ भाव.I
इस पृष्ठ पर छपा हुआ मूल पाठ (संस्कृत श्लोक, योग, रोग-वर्णन आदि) अत्यधिक धुंधला (faded/overexposed) होने के कारण पढ़ने योग्य नहीं है। केवल पृष्ठ के निचले भाग का कुछ अंश ही दिखाई दे रहा है:
... १. भाव ... CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA
भावप्रकाशनिघण्टु विषय-सूची हरीतक्यादिवर्ग | पृष्ठ | पृष्ठ हरीतकी के नाम और भेद | २०७ | मेथी तथा वनमेथी के नाम तथा गुण | २३९ हरीतकी के उत्पत्तिस्थान | २०८ | चनसूर के नाम तथा गुण | २४१ हरीतकी के लक्षण | २०८ | चतुर्बीज (चारदाना) के नाम तथा गुण | २४२ हरीतकी के प्रयोग | २०८ | हींग के नाम तथा गुण | २४२ हरीतकी के गुण और प्रभाव | २०९ | वच के नाम तथा गुण | २४४ हरड़ में रसों के रहने के स्थान | २१० | खुरासानी वच नाम तथा गुण | २४६ उत्तम हरड़ के लक्षण | २१० | महाभरी वच नाम तथा गुण | २४८ हरीतकी के प्रयोग भेद से गुण भेद | २१० | चोबचीनी के नाम तथा गुण | २४८ हरीतकी का रासायनिक प्रयोग | २१० | हपुषाद्वयम के नाम तथा गुण | २५० हरीतकी-सेवन करने के अयोग्य व्यक्ति | २११ | वायविडङ्ग के नाम तथा गुण | २५२ बहेड़े के नाम तथा गुण | २१३ | तुम्बुरु फल के नाम तथा गुण | २५६ आंवले के नाम तथा गुण | २१४ | वंशलोचन के नाम तथा गुण | २५८ त्रिफला के लक्षण नाम तथा गुण | २१६ | समुद्रफेन के नाम तथा गुण | २५९ सोंठ के नाम तथा गुण | २१६ | अष्टवर्ग के लक्षण तथा गुण | २६० अदरख के नाम तथा गुण | २१७ | जीवक तथा ऋषभक के उत्पत्ति-स्थान, लक्षण, | पीपर के नाम तथा गुण | २१८ | नाम तथा गुण | २६० मरिच के नाम तथा गुण | २२० | मेदा और महामेदा के उत्पत्तिस्थान, लक्षण, | त्रिकटु के लक्षण, नाम तथा गुण | २२२ | नाम तथा गुण | २६१ पिपरामूल के नाम तथा गुण | २२२ | काकोली तथा क्षीरकाकोली के उत्पत्तिस्थान, | चतुरूषण के लक्षण, नाम तथा गुण | २२२ | लक्षण, नाम तथा गुण | २६१ चव्य के नाम तथा गुण | २२३ | ऋद्धि तथा वृद्धि के उत्पत्तिस्थान, लक्षण, | गजपीपल के नाम तथा गुण | २२४ | नाम तथा गुण | २६२ चीता के नाम तथा गुण | २२४ | अष्टवर्ग की प्रतिनिधि औषधियाँ | २६२ पञ्चकोल के लक्षण तथा गुण | २२७ | मुलहठी के नाम तथा गुण | २६३ षडूषण के लक्षण नाम तथा गुण | २२७ | कबीला के नाम तथा गुण | २६५ अजवायन के नाम तथा गुण | २२७ | अमलतास के नाम तथा गुण | २६७ अजमोदा (बड़ी अजवायन) के नाम तथा गुण | २२९ | कुटकी के नाम तथा गुण | २६८ खुरासानी अजवायन के गुण | २३१ | चिरायता के नाम तथा गुण | २७१ सफेद जीरा, स्याह जीरा तथा कलौंजी (मंगरैला) | | इन्द्रयव के नाम तथा गुण | २७४ के नाम तथा गुण | २३३ | मैनफल के नाम तथा गुण | २७५ धनियाँ के नाम तथा गुण | २३५ | रास्ना के नाम तथा गुण | २७६ सोया और सौंफ के नाम तथा गुण | २३७ | नाकुलीकन्द के नाम तथा गुण | २८० | | मोइया के नाम तथा गण | २८३ १९
२० भावप्रकाशस्य पूर्वखण्डे पृष्ठ | पृष्ठ तेजवती के नाम तथा गुण २८६ | बिरिया संचर नमक के नाम तथा गुण ३४९ मालकांगनी के नाम तथा गुण २८६ | काला नमक के नाम तथा गुण ३५१ कूठ के नाम तथा गुण २८८ | खनिज लवण अर्थात् रेहगवा नोन के नाम, कूठ के भेद पोहकर मूल नाम तथा गुण २९१ | उत्पत्ति तथा गुण ३५१ सत्यानाशी (चोक) के नाम तथा गुण २९२ | चनाखार के नाम तथा गुण ३५२ काकड़ासिङ्गी के नाम तथा गुण २९४ | जवाखार, सज्जी तथा सोरा के नाम तथा गुण ३५३ कायफल के नाम तथा गुण २९५ | सुहागा के नाम तथा गुण ३५८ भारङ्गी के नाम तथा गुण २९७ | क्षारद्वय, क्षारत्रय तथा क्षाराष्टक का वर्णन और गुण ३६० पाषाणभेद के नाम तथा गुण ३०० | चूक के नाम तथा गुण ३६१ धाय के नाम तथा गुण ३०३ | कर्पूरादिवर्गः मंजीठ के नाम तथा गुण ३०५ | कर्पूर के नाम तथा गुण ३६२ कुसुम के नाम तथा गुण ३०६ | चीनिया कपूर के नाम तथा गुण ३६४ लाख के नाम तथा गुण ३०७ | कस्तूरी के नाम, भेद तथा गुण ३६६ हलदी के नाम तथा गुण ३०८ | लता कस्तूरी के नाम तथा गुण ३७० कपूरहलदी या आमाहरदी के नाम तथा गुण ३१० | गन्धमार्जार का वीर्य अर्थात् जबादकस्तूरी के गुण ३७२ वनहरदी के गुण ३११ | चन्दन के नाम तथा गुण ३७३ दारुहरदी के नाम तथा गुण ३१२ | पीतचन्दन के नाम तथा गुण ३७७ रसोत के बनाने की विधि, नाम तथा गुण ३१५ | लाल चन्दन के नाम तथा गुण ३७७ बाकुची के नाम और उसके फल के गुण ३१७ | पतङ्ग के नाम तथा गुण ३७९ चकवड़ के नाम और उसके फल के गुण ३१८ | मलयागिरि चन्दन की उत्तमता ३८० अतीस के नाम तथा गुण ३१९ | अगर तथा काले अगर के तेल के नाम तथा गुण ३८० शावरलोध्र और पटियालोध के | देवदारु के नाम तथा गुण ३८२ नाम तथा गुण ३२१ | सरल (धूप) अर्थात् चीड़ के नाम तथा गुण ३८३ लहसुन की उत्पत्ति ३२३ | तगर तथा पिण्ड तगर के भेद एवं दोनों के नाम लहसुन सेवन करनेवालों के लिये हितकर | तथा गुण ३८५ तथा अहितकर पदार्थ ३२४ | पद्माख के नाम तथा गुण ३८७ पियाज के नाम तथा गुण ३२७ | गूगल के नाम लक्षण तथा गुण ३८९ भिलावा के नाम तथा उसके पके फल, | चीड़ के गोंद (गन्धाविरोजा) के नाम तथा गुण ३९३ मींगी और वृन्त के गुण ३३० | राल के नाम तथा गुण ३९५ भांग के नाम तथा गुण ३३३ | कुन्दुरु (सुगन्ध द्रव्य) जो कि शल्लकी का गोंद है पोस्ता के नाम तथा गुण ३३६ | उसके नाम तथा गुण ३९६ अफीम की उत्पत्ति, नाम तथा गुण ३३९ | शिलारस के नाम तथा गुण ३९९ खसखस के दाने के नाम तथा गुण ३४४ | जायफल के नाम तथा गुण ४०० सेंधानमक के नाम तथा गुण ३४५ | जावित्री के नाम तथा गुण ४०२ सांभर नमक के नाम तथा गुण ३४८ | लौंग के नाम तथा गुण ४०२ समुद्रनोन (पांगा) के नाम तथा गुण ३४८ | बड़ी इलायची के नाम तथा गुण ४०५
भावप्रकाशनिघण्टु विषय-सूची २१ पृष्ठ पृष्ठ छोटी इलायची के नाम तथा गुण ४०६ गुडूच्यादिवर्गः तज के नाम तथा गुण ४०८ गिलोय की उत्पत्ति, नाम तथा गुण ४४८ दालचीनी के नाम तथा गुण ४०९ पान के नाम तथा गुण ४५० तेजपात के नाम तथा गुण ४११ बेल के नाम तथा गुण ४५३ नागकेशर के नाम तथा गुण ४१२ गम्भारी के नाम तथा गुण ४५५ त्रिजातक तथा चातुर्जातक के गुण ४१४ पाढल तथा घण्टापाढल के नाम तथा गुण ४५७ केशर के नाम लक्षण तथा गुण ४१५ अगेथू या अरनी के नाम तथा गुण ४५९ गोरोचना के नाम तथा गुण ४१७ सोनापाठा या अरलू के नाम तथा गुण ४६१ सुगन्धि द्रव्य नख तथा नखी के नाम तथा गुण ४१८ बृहत् पञ्चमूल के लक्षण तथा गुण ४६२ सुगन्धबाला के नाम तथा गुण ४१९ सरिवन के विविध नाम तथा गुण ४६३ वीरण के नाम तथा गुण ४२० पिठवन के नाम तथा गुण ४६४ खस के नाम तथा गुण ४२१ बड़ी कटेरी नाम तथा गुण ४६५ जटामांसी के नाम तथा गुण ४२१ भटकटैया के नाम तथा गुण ४६६ शैलेय के नाम तथा गुण ४२३ गोखरू के नाम तथा गुण ४६९ मोथा तथा नागरमोथा के नाम तथा गुण ४२४ लघु पञ्चमूल के नाम तथा गुण ४७१ कचूर के नाम तथा गुण ४२६ दशमूल के लक्षण तथा गुण ४७१ मुरा के नाम तथा गुण ४२८ जीवन्ती के नाम तथा गुण ४७१ कपूरकचरी के नाम तथा गुण ४२८ मुगवन के नाम तथा गुण ४७३ प्रियङ्गु तथा गन्धप्रियङ्गु के नाम तथा गुण ४२९ बनउर्दी के नाम तथा गुण ४७४ प्रियङ्गु का फल के नाम तथा गुण ४२९ जवनीय गण के लक्षण तथा गुण ४७४ रेणुका के नाम तथा गुण ४३२ एरण्ड के पत्ते, फुनगी, फल तथा मीगी के गुण ४७५ गठिवन के नाम तथा गुण ४३३ सफेद आक तथा लाल आक के नाम तथा गुण ४७८ थुनेर के नाम तथा गुण ४३४ सेहुण्ड (थूहर) के नाम तथा गुण ४८२ भटेऊर के नाम तथा गुण ४३५ शातला के नाम तथा गुण ४८५ तालीसपत्र के नाम तथा गुण ४३६ कलिहारी के नाम तथा गुण ४८७ शीतल चीनी के नाम तथा गुण ४३९ सफेद और लाल करवीर (कनेर) के नाम तथा गुण ४८९ गन्धकोकिला एवं गन्धमालती के गुण ४४१ धत्तूर के नाम तथा गुण ४९१ लमज्जक के विविध नाम तथा गुण ४४१ अडूसा के नाम तथा गुण ४९४ एलवालुक के नाम तथा गुण ४४२ पित्तपापड़ा के नाम तथा गुण ४९७ केवटीमोथा के नाम तथा गुण ४४४ नीम के पत्ते तथा फलों के गुण ५०२ स्पृक्का के नाम तथा गुण ४४५ महानिम्ब के नाम तथा गुण ५०५ पर्पटी के नाम तथा गुण ४४६ फरहद के नाम तथा गुण ५०७ नलिका के नाम तथा गुण ४४६ कचनार तथा लाल कचनार के नाम तथा गुण ५०९ पुण्डेरी के नाम तथा गुण ४४७ सहिजन के भेद, नाम तथा गुण ५१२ सफेद तथा नीले फूल की कोयल के नाम तथा गुण ५१४ सम्हालू के पत्ते के गुण ५१६
२२ भावप्रकाशस्य पूर्वखण्डे पृष्ठ पृष्ठ कुडा के नाम तथा गुण ५१८ काली निसोत के नाम तथा गुण ५६५ करञ्ज के भेद, नाम तथा गुण ५२१ छोटी दन्ती तथा बड़ी दन्ती के नाम तथा गुण ५६६ करंजी के नाम तथा गुण ५२४ जमालगोटा के नाम तथा गुण ५६७ सफेद तथा लाल गुञ्जा के नाम तथा गुण ५२५ इन्द्रायण तथा बड़ी इन्द्रायण के नाम तथा गुण ५६९ कौंच के नाम तथा गुण ५२७ नील के नाम तथा गुण ५७२ मांसरोहिणी के नाम तथा गुण ५२९ सरफोंका के नाम तथा गुण ५७३ चिह्नक के नाम तथा गुण ५३० विधारा के नाम तथा गुण ५७४ टङ्कारी के नाम तथा गुण ५३१ जवासा और धमासा के नाम तथा गुण ५७६ वेतस के नाम तथा गुण ५३१ मुण्डी तथा महामुण्डी के नाम तथा गुण ५७८ जलवेतस के नाम तथा गुण ५३३ चिरचिरा के नाम तथा गुण ५८० इज्जल के नाम तथा गुण ५३४ तालमखाना के नाम तथा गुण ५८२ अंकोल के नाम तथा गुण ५३५ हड़संहारी के नाम तथा गुण ५८३ बलाचतुष्टय के विविध नाम तथा गुण ५३६ सफेद तथा लाल पुनर्नवा के नाम तथा गुण ५८६ लक्ष्मणा के लक्षण नाम तथा गुण ५४२ घीकुआँर के नाम तथा गुण ५८४ सोनबेल के नाम तथा गुण ५४३ प्रसारणी के नाम तथा गुण ५८९ कपास के नाम तथा गुण ५४३ अनन्तमूल के नाम तथा गुण ५९० बाँस के नाम तथा गुण ५४५ भाङ्गरा के नाम तथा गुण ५९३ नरसल के नाम तथा गुण ५४६ शणपुष्पी के विविध नाम तथा गुण ५९४ सरपत तथा मूँज के नाम तथा गुण ५४८ त्रायमाणा के नाम तथा गुण ५९५ कास के नाम तथा गुण ५४९ मूर्वा के नाम तथा गुण ५९७ गोंद पटेर के नाम तथा गुण ५४९ मकोय के नाम तथा गुण ६०१ एरका के नाम तथा गुण ५५० काकनासा के नाम तथा गुण ६०२ कुश तथा डाभ के नाम तथा गुण ५५० काकजङ्घा के नाम तथा गुण ६०४ रोहिस (कटृण) के नाम तथा गुण ५५१ नागपुष्पी के नाम तथा गुण ६०६ शरबाण के नाम तथा गुण ५५२ मेढ़ांशिंगी के नाम तथा गुण ६०६ हरी दूब के नाम तथा गुण ५५३ हंसराज के नाम तथा गुण ६०७ सफेद दूब के नाम तथा गुण ५५४ सोमलता के नाम तथा गुण ६०८ गांडर दूब के नाम तथा गुण ५५४ अमरबेल के नाम तथा गुण ६१० वाराहीकन्द के लक्षण नाम तथा गुण ५५४ पातालगरुडी के नाम तथा गुण ६११ विदारीकन्द के नाम तथा गुण ५५५ बन्दा के नाम तथा गुण ६१२ काली मूसली के नाम तथा गुण ५५७ वटपत्री के नाम तथा गुण ६१३ शतावरी के नाम तथा गुण ५५९ हिङ्गुपत्री के नाम तथा गुण ६१४ असगन्ध के नाम तथा गुण ५६० वंशपत्री के नाम तथा गुण ६१४ पाठ के नाम तथा गुण ५६२ मत्स्याक्षी के नाम तथा गुण ६१४ सफेद निसोत के नाम तथा गुण ५६४ सर्पाक्षी के नाम तथा गुण ६१५ CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammnu. Digitized by S3 Foundation USA
भावप्रकाशनिघण्टु विषय-सूची २३ पृष्ठ | पृष्ठ शङ्खपुष्पी के नाम तथा गुण ६१६ | वारिपर्णी के नाम तथा गुण ६४६ अर्कपुष्पी के नाम तथा गुण ६१८ | शतपत्री के नाम तथा गुण ६४८ लज्जावन्ती के नाम तथा गुण ६१८ | वासन्ती के नाम तथा गुण ६४९ अलम्बुषा के नाम तथा गुण ६१९ | वार्षिकी के नाम तथा गुण ६५० दुद्धी के नाम तथा गुण ६२० | जाई-पीलीजाई के नाम तथा गुण ६५१ भुँइ आमला के नाम तथा गुण ६२२ | जूही तथा सुवर्णजूही के नाम तथा गुण ६५२ ब्राह्मी और मण्डूकपर्णी के नाम तथा गुण ६२३ | चम्पा के नाम तथा गुण ६५३ गूमा के नाम तथा गुण ६२५ | मौलसिरी के नाम तथा गुण ६५४ हुरहुर तथा ब्रह्मसुवर्चला के नाम तथा गुण ६२६ | कदम्ब के नाम तथा गुण ६५५ वन ककोड़ा के नाम तथा गुण ६२७ | कूजा के नाम तथा गुण ६५६ सनाय के नाम तथा गुण ६२८ | मल्लिका के नाम तथा गुण ६५७ देवदाली के नाम तथा गुण ६३० | माधवी के नाम तथा गुण ६५७ जलपीपल के नाम तथा गुण ६३१ | केवड़ा के नाम तथा गुण ६५८ गोजिह्वा के नाम तथा गुण ६३२ | किङ्किरात के नाम तथा गुण ६५९ नागदमनी के नाम तथा गुण ६३४ | कर्णिकार के नाम तथा गुण ६५९ वीरतरु के नाम तथा गुण ६३४ | अशोक के नाम तथा गुण ६६० नकछिकनी के नाम तथा गुण ६३५ | अम्लाटन के नाम तथा गुण ६६१ कुकुरवँदा के नाम तथा गुण ६३६ | कटसरैया के नाम तथा गुण ६६१ सुदर्शन के नाम तथा गुण ६३६ | कुन्द के नाम तथा गुण ६६३ मूसाकर्णी के नाम तथा गुण ६३७ | मुचुकुन्द के नाम तथा गुण ६६३ मोरशिखा के नाम तथा गुण ६३८ | तिलक के नाम तथा गुण ६६४ पुष्पवर्ग: | दुपहरिया के नाम तथा गुण ६६५ कमल के नाम तथा गुण ६४० | अढ़ौल के नाम तथा गुण ६६५ पद्मिनी के लक्षण, नाम तथा गुण ६४१ | सेन्दुरिया के नाम तथा गुण ६६६ कमल के नवीन पत्ते आदि के नाम ६४२ | अगस्तिया के नाम तथा गुण ६६७ संवर्तिका के गुण ६४२ | तुलसी के नाम तथा गुण ६६८ कर्णिका के गुण ६४२ | मरुआ के नाम तथा गुण ६६९ किञ्जल्क के गुण ६४२ | दवना के नाम तथा गुण ६६९ मृणाल के गुण ६४३ | वनतुलसी के नाम तथा गुण ६७० स्थलकमल के नाम तथा गुण ६४३ | वटादिवर्ग: कुमुद के नाम तथा गुण ६४४ | बरगद के नाम तथा गुण ६७२ कुमुदिनी के नाम तथा गुण ६४४ | पीपल के नाम तथा गुण ६७२ कह्लार के नाम तथा गुण ६४४ | गजदण्डसहोरा के नाम तथा गुण ६७३ | बेलिया पीपर के नाम तथा गुण ६७४ | गूलर के नाम तथा गुण ६७५
२४ भावप्रकाशस्य पूर्वखण्डे पृष्ठ | पृष्ठ कठूमर के नाम तथा गुण ६७६ | तिरिच्छ के नाम तथा गुण ७०५ पाखर के नाम तथा गुण ६७६ | सागोन के नाम तथा गुण ७०६ सिरस के नाम तथा गुण ६७७ | आम्रादिफलवर्गः क्षीरिवृक्ष के नाम तथा गुण ६७८ | आम के नाम तथा गुण ७०८ साखू के नाम तथा गुण ६७९ | आम की मंजरी के गुण ७०८ सर्जक के नाम तथा गुण ६७९ | अमावट के लक्षण तथा गुण ७१० सलई के नाम तथा गुण ६८० | आम के गुठली की मींगी के गुण ७१० शीसम के नाम तथा गुण ६८१ | अम्बाडा के नाम तथा गुण ७११ अर्जुन के नाम तथा गुण ६८१ | कलमी आम के नाम तथा गुण ७११ विजयसार के नाम तथा गुण ६८२ | कोशाम्र आम के नाम तथा गुण ७१२ खैर के नाम तथा गुण ६८३ | कटहर के नाम तथा गुण ७१३ रोहेडा के नाम तथा गुण ६८६ | बड़हर के नाम तथा गुण ७१४ बबूर के नाम तथा गुण ६८७ | केला के नाम तथा गुण ७१४ रीठा के नाम तथा गुण ६८८ | फूट के नाम तथा गुण ७१६ पित्तौजिया के नाम तथा गुण ६८९ | नारियल के नाम तथा गुण ७१६ हिङ्गोत के नाम तथा गुण ६८९ | नारियल के जल के गुण ७१६ जिङ्गिनी के नाम तथा गुण ६९० | तरबूज के नाम तथा गुण ७१८ तमाल के नाम तथा गुण ६९१ | खरबूजा के नाम तथा गुण ७१८ तून के नाम तथा गुण ६९२ | खीरा के नाम तथा गुण ७१९ भोजपत्र के नाम तथा गुण ६९३ | सुपारी के नाम तथा गुण ७२० ढाक के नाम तथा गुण ६९४ | ताड़ के नाम तथा गुण ७२१ सेमर के नाम तथा गुण ६९५ | नवीन ताड़ी के नाम तथा गुण ७२१ मोचरस के नाम तथा गुण ६९६ | बेल के नाम तथा गुण ७२२ काला सेमर के नाम तथा गुण ६९७ | कैथ के नाम तथा गुण ७२३ धौरा के नाम तथा गुण ६९७ | नारङ्गी के नाम तथा गुण ७२४ धामिन के नाम तथा गुण ६९८ | तेंन्दू के नाम तथा गुण ७२४ करील के विविध नाम तथा गुण ६९९ | कुचिला अथवा मकरतेन्दुआ के नाम ७२५ सहोरा के नाम तथा गुण ६९९ | बड़ी जामुन के नाम तथा गुण ७२७ बरना के नाम तथा गुण ७०० | छोटी जामुन के नाम तथा गुण ७२८ कटभी के नाम तथा गुण ७०१ | छोटी बेर के नाम, भेद, लक्षण और गुण ७२८ मोखा के नाम तथा गुण ७०२ | पानी आंवला के नाम तथा गुण ७३० ढाढोन के नाम तथा गुण ७०३ | हरफारेवड़ी के नाम तथा गुण ७३१ शमी के नाम तथा गुण ७०३ | करौंदा के नाम तथा गुण ७३२ छतिवन के नाम तथा गुण ७०४ | चिरौंजी के नाम तथा गुण ७३२ | खिरनी के नाम तथा गुण ७३३
भावप्रकाशनिघण्टु विषय-सूची २५ पृष्ठ | पृष्ठ कण्टाई के नाम तथा गुण ७३४ | उत्तम सुवर्ण के लक्षण ७५७ कमलगट्टा के नाम तथा गुण ७३४ | निकृष्ट सुवर्ण के लक्षण ७५८ मखाना के नाम तथा गुण ७३४ | शुद्ध शोधित स्वर्णभस्म के गुण ७५८ सिंघाड़ा के नाम तथा गुण ७३५ | अशुद्ध शोधित स्वर्णभस्म के दोष ७५८ भेंट के नाम तथा गुण ७३६ | चांदी की उत्पत्ति ७५९ महुआ के नाम तथा गुण ७३६ | चांदी के नाम ७५९ फालसा के नाम तथा गुण ७३७ | चांदीभस्म के गुण ७५९ सहतूत के नाम तथा गुण ७३८ | अशुद्ध चांदीभस्म के दोष ७५९ अनार के नाम तथा गुण ७३९ | ताँबा की उत्पत्ति ७६० लिसोड़ा के नाम तथा गुण ७४० | ताँबा के नाम ७६० निर्मली के नाम तथा गुण ७४१ | उत्तम निकृष्ट ताँबा के लक्षण ७६० दाख के नाम तथा गुण ७४१ | शुद्ध ताम्रभस्म के गुण ७६० खजूर के नाम तथा गुण ७४३ | रांगा के नाम ७६१ सुलेमानी खजूर के नाम तथा गुण ७४३ | शुद्ध रांगाभस्म के गुण ७६१ छुहारा के नाम तथा गुण ७४४ | जस्ता के नाम ७६१ बादाम के नाम तथा गुण ७४४ | सीसा की उत्पत्ति और गुण ७६१ सेव के नाम तथा गुण ७४५ | अशुद्ध वंग (राँगा) तथा सीसा के दोष ७६२ नाशपाती के नाम तथा गुण ७४६ | लोहा की उत्पत्ति ७६२ पीलु के नाम तथा गुण ७४७ | लोहा के गुण-दोष ७६२ अखरोट के नाम तथा गुण ७४७ | लोहभस्म सेवन करने वाले के लिये त्याज्य पदार्थ ७६३ बिजौरा नींबू के नाम तथा गुण ७४८ | सारलौह के लक्षण ७६३ चकोतरा नींबू के नाम तथा गुण ७४९ | कान्तलौह के लक्षण ७६३ जम्बीरी नींबू के नाम तथा गुण ७५० | किट्टी के लक्षण ७६४ कागजी नींबू नाम तथा गुण ७५० | उपधातुओं की संख्या ७६४ मीठे नींबू के नाम तथा गुण ७५१ | सोनामाखी के नाम ७६४ मोसम्बी के नाम तथा गुण ७५२ | अशुद्ध सोनामाखी के दोष ७६५ कमरख के नाम तथा गुण ७५२ | रूपामाखी के नाम ७६५ इमली के नाम तथा गुण ७५३ | अशुद्ध रूपामाखी के दोष ७६५ अम्लवेतस के नाम तथा गुण ७५४ | तूतिया तथा खपरिया के नाम तथा गुण ७६५ कोकम के नाम तथा गुण ७५५ | काँसा के नाम तथा गुण ७६५ चतुरम्ल के लक्षण तथा गुण ७५६ | पीतल के नाम तथा गुण ७६६ फलविषयक परिभाषा ७५६ | सिन्दूर के नाम तथा गुण ७६६ धातूपधातुरसोपरसरत्नोपरत्नविषोपविषवर्गः | शिलाजीत की उत्पत्ति, लक्षण तथा गुण ७६६ धातुओं की संख्या ७५७ | रस शब्द की निरुक्ति ७६७ धातु शब्द की निरुक्ति ७५७ | पारे की उत्पत्ति, भेद तथा नाम ७६७ सोने की उत्पत्ति ७५७ |
२६ भावप्रकाशस्य पूर्वखण्डे पृष्ठ पृष्ठ पारे की सर्वश्रेष्ठता ७६८ पोखराज नाम ७८१ असंस्कृत पारे के सेवन का निषेध ७६९ नीलम के नाम ७८१ उपरसों की संख्या ७६९ गोमेद के नाम ७८१ हिङ्गुल के नाम तथा गुण ७६९ लहसुनिया के नाम ७८१ गन्धक की उत्पत्ति, भेद तथा गुण, अशुद्ध मोती के नाम व गुण ७८१ गन्धक के दोष ७७० मूँगा के नाम ७८२ अभ्रक की उत्पत्ति, भेद तथा गुण अशुद्ध रत्नों के गुण ७८२ अभ्रक के दोष ७७१ उपरत्नों का निरूपण व गुण ७८२ हरताल के नाम, भेद, लक्षण तथा गुण ७७२ विष के नाम और भेद ७८३ मैनशिल के नाम व गुण ७७३ वत्सनाभ विष का निरूपण ७८३ अशुद्ध मैनशिल के दोष ७७३ हारिद्र विष का निरूपण ७८४ सुरमा के नाम व गुण ७७३ सक्तुक विष का निरूपण ७८४ सुहागा के गुण ७७४ प्रदीपन विष का निरूपण ७८४ फिटकरी के नाम तथा गुण ७७४ सौराष्ट्रिक विष का निरूपण ७८४ रेवटी के नाम तथा गुण ७७४ शृङ्गिक विष का निरूपण ७८४ चुम्बक के नाम तथा गुण ७७४ कालकूट विष का उत्पत्ति स्थान ७८६ गेरू के नाम तथा गुण ७७५ हालाहल विष का स्वरूप ७८६ खड़िया के नाम तथा गुण ७७५ ब्रह्मपुत्र विष का स्वरूप ७८६ बालू के नाम तथा गुण ७७५ विष के भेद तथा गुण-दोष ७८६ खपरिया के नाम तथा गुण ७७५ विषों के शोधन का निरूपण ७८७ कसीस के नाम तथा गुण ७७५ उपविषों का निरूपण ७८७ सोरठी मिट्टी के नाम तथा गुण ७७५ धान्यवर्गः काली मिट्टी के नाम तथा गुण ७७६ धान्यों के भेद ७८९ कीचड़ के नाम तथा गुण ७७६ शालिधान्यादि के भेद, लक्षण तथा गुण ७८९ कौड़ी के नाम तथा गुण ७७६ वापित तथा अवापित शालि के गुण ७९० शङ्ख के नाम तथा गुण ७७६ रक्तशालि के गुण ७९१ बोल के नाम तथा गुण ७७६ व्रीहिधान्य के लक्षण व गुण ७९१ कंकुष्ठ के नाम तथा गुण ७७७ षष्टिक (साठी चावल) के लक्षण, भेद व गुण ७९२ रेवन्द चीनी के नाम तथा गुण ७७८ जौ लक्षण सहित भेद व गुण ७९४ रत्न शब्द की निरुक्ति, नाम व संख्या ७७९ गेहूँ के नाम लक्षण गुण ७९५ हीरा के नाम भेद व गुण ७८० मधूली के गुण ७९५ अशुद्ध हीरा के दोष ७८० शिम्बी धान्य के नाम व गुण ७९६ हीरे के भस्म के गुण ७८० मूंग के गुण ७९६ पन्ना के नाम ७८१ उरद के गुण ७९७ चुन्नी (माणिक) के नाम ७८१ बोड़ा व भटवां सु के नाम व गुण ७९८ मोठ के नाम तथा गुण ७९९
भावप्रकाश निघण्टु विषय-सूची २७ पृष्ठ | पृष्ठ मसूरी के नाम तथा गुण ८०० | नोनिया शाक के नाम तथा गुण ८२२ अरहर के नाम तथा गुण ८०१ | तीनपतिया शाक के नाम तथा गुण ८२३ चना के नाम तथा गुण ८०२ | चूक शाक के नाम तथा गुण ८२३ मटर के नाम तथा गुण ८०२ | हुरकुच शाक के नाम तथा गुण ८२५ खेसारी के नाम तथा गुण ८०३ | चौपतिया शाक के नाम तथा गुण ८२५ कुलथी के नाम तथा गुण ८०४ | मुरई के पत्ते का शाक के नाम तथा गुण ८२६ तिल के नाम तथा गुण ८०४ | गूमा के पत्ते के शाक के नाम तथा गुण ८२६ तीसी के नाम तथा गुण ८०५ | अजवाइन के पत्ते के शाक के नाम तथा गुण ८२७ तोरी के नाम तथा गुण ८०६ | चकवड़ के पत्ते के शाक के नाम तथा गुण ८२७ सरसों के नाम तथा गुण ८०७ | थूहर के पत्ते के शाक के नाम तथा गुण ८२७ राई के नाम तथा गुण ८०८ | पित्तपापड़ा के नाम तथा गुण ८२७ क्षुद्रधान्य के नाम तथा गुण ८०८ | गोजिह्वा के पत्ते के शाक के विविध नाम तथा गुण ८२७ कङ्गनी के नाम तथा गुण ८०९ | परवल के पत्ते के शाक के नाम तथा गुण ८२७ चीना के नाम तथा गुण ८०९ | गिलोय के पत्ते के शाक के नाम तथा गुण ८२८ सावाँ के नाम तथा गुण ८१० | कसौंदी के पत्ते के शाक के नाम तथा गुण ८२८ कोदो के नाम तथा गुण ८१० | चने के शाक का गुण ८२९ सरपत के बीज के नाम तथा गुण ८११ | मटर के नाम तथा गुण ८२९ बांस के बीज के नाम तथा गुण ८११ | सरसों के नाम तथा गुण ८२९ कुसुम के नाम तथा गुण ८१२ | इति पत्रशाकानि गरहेडुआ के नाम तथा गुण ८१२ | पुष्पशाकों के गुण ८३० तीनी के नाम तथा गुण ८१२ | अगस्त के फूल का गुण ८३० जुआर के नाम तथा गुण ८१३ | केले के फूल का गुण ८३० धान्यविषयक परिभाषा ८१३ | सहजना के फूल का गुण ८३० शाकवर्गः | सेमल के फूल का गुण ८३० शाक का निरूपण ८१५ | इति पुष्पशाकानि सभी प्रकार के शाकों के सामान्य गुण ८१५ | कुम्हड़ा के नाम तथा गुण ८३१ बथुआ के नाम तथा गुण ८१५ | कुष्माण्डी के नाम तथा गुण ८३१ पोई के नाम तथा गुण ८१७ | लौकी के नाम तथा गुण ८३२ मरसा के नाम तथा गुण ८१७ | कड़वी तुम्बी के नाम तथा गुण ८३३ चौलाई के नाम तथा गुण ८१८ | ककड़ी के नाम तथा गुण ८३४ जल चौलाई के नाम तथा गुण ८१९ | चचेण्डा के नाम तथा गुण ८३४ पालक के नाम तथा गुण ८१९ | करेला के नाम तथा गुण ८३५ नाडीका शाक के नाम तथा गुण ८२० | नेनुआ के नाम तथा गुण ८३६ पटुआ शाक के नाम तथा गुण ८२१ | तोरई के नाम तथा गुण ८३६ कलमी शाक के नाम तथा गुण ८२१ | परबल के नाम तथा गुण ८३७ | परवल के जड़ादि का गुण ८३७
२८ भावप्रकाशस्य पूर्वखण्डे कुन्दूरी के नाम तथा गुण ८३८ प्रसहसंज्ञक पक्षियों की गणना ८५८ सेम के नाम तथा गुण ८३९ ग्राम्य पशुओं की गणना ८५८ कोलशिम्बी के नाम तथा गुण ८३९ कूलेचरसंज्ञक जीवों की गणना ८५८ सहेजन की फली के नाम तथा गुण ८४० प्लवसंज्ञक पक्षियों की गणना ८५९ बैंगन के नाम तथा गुण ८४० कोशस्थ प्राणियों की गणना ८५९ डिण्डिस के नाम तथा गुण ८४१ पांव वाले प्राणियों की गणना ८६० पिंडार के नाम तथा गुण ८४१ मछलियों के नाम तथा गणना ८६० ककोड़ा के नाम तथा गुण ८४२ विविध मृगों के मांस के गुण ८६१ डोडिका (करेरुवा) के नाम तथा गुण ८४३ खरगोश के नाम तथा गुण ८६२ कटेरी के नाम तथा गुण ८४३ साही के नाम तथा गुण ८६२ सरसों का नाल (डण्डी) का गुण ८४३ बटेर के नाम तथा गुण ८६२ सूरन कन्द के नाम तथा गुण ८४४ लवा पक्षी के नाम तथा गुण ८६३ आलूक के नाम तथा गुण ८४५ बगेरा के नाम तथा गुण ८६३ अरुई के नाम तथा गुण ८४७ तीतर के भेद तथा लक्षण ८६३ मूली के नाम तथा गुण ८४७ गौरैया के नाम तथा गुण ८६३ गाजर के नाम तथा गुण ८४८ मुर्गा के नाम तथा गुण ८६३ केलाकन्द के नाम तथा गुण ८४९ हरियल के नाम तथा गुण ८६४ मानकन्द के नाम तथा गुण ८४९ पण्डुक के नाम तथा गुण ८६४ वाराहीकन्द के नाम तथा गुण ८५० मोर के नाम तथा गुण ८६४ हस्तिकर्ण के नाम तथा गुण ८५१ कबूतर के नाम तथा गुण ८६४ केमआँ के नाम तथा गुण ८५१ पक्षियों के अण्डों के गुण ८६५ कसेरू के भेद तथा गुण ८५२ बकरा, बकरी के मांस के गुण ८६५ शालूक कन्दों के नाम तथा गुण ८५३ मेढा के मांस के गुण ८६६ निषिद्ध शाक ८५३ दुम्बा के मांस के गुण ८६६ इति कन्द शाकानि बैल के मांस के गुण ८६६ संस्वेदज शाक के नाम तथा गुण ८५३ घोड़े के मांस के गुण ८६६ मांसवर्गः भैंसे के मांस के गुण ८६६ छत्रक के लक्षण तथा गुण ८५४ मेढ़क के मांस के गुण ८६७ मांस वर्ग के नाम तथा गुण ८५५ कछुये के मांस के गुण ८६७ जाङ्गल मांस के भेद, नाम तथा गुण ८५५ तत्काल मारे गये जीवों के मांस के गुण ८६७ आनूप मांस के भेद नाम तथा गुण ८५५ स्वयं मृत जीवों के मांस के गुण ८६७ जांगल जीवों की गणना, नाम तथा गुण ८५६ बुड्ढे जीवों के मांस के गुण ८६७ बिलों में रहने वाले प्राणियों की गणना ८५६ सर्पदष्ट जीवों के मांस के गुण ८६७ गुफा में रहने वाले जीवों की गणना ८५६ विष आदि से मरे मांस के गुण ८६८ वृक्ष पर चढ़ने वाले प्राणियों की गणना ८५७ जीवों के प्रधानता से मांस के गुण ८६८ कुरेद-२ कर खाने वाले पक्षियों की गणना ८५७ मछलियों में रोहू मछली के लक्षण ८६८ प्रतुद पक्षियों की गणना ८५७ शिलीन्ध्र मछली का मांस ८६९
भावप्रकाशनिघण्टु विषय-सूची २९ भाकुर मछली का मांस ८६९ | जौ की रोटी के गुण ८७७ मोचिका मछली का मांस ८६९ | चमसी बनाने की विधि ८७७ पाठीन मछली का मांस ८६९ | झर्झरी (धुआँस की रोटी) बनाने की विधि ८७७ शृंगी मछली का मांस ८६९ | चने की रोटी के गुण ८७७ हिल्सा मछली का मांस ८६९ | पीठी बनाने की विधि ८७७ सौरी मछली का मांस ८७० | बेढई बनाने की विधि तथा गुण ८७७ गर्गरा मछली का मांस ८७० | पापड़ बनाने की विधि तथा गुण ८७८ कविका मछली का मांस ८७० | तेल, घृत में पूरी बनाने की विधि तथा गुण ८७८ वर्मी मछली का मांस ८७० | उरद का सूखा बरा बनाने की विधि तथा गुण ८७९ दण्ड मछली का मांस ८७० | काञ्जी बरा बनाने की विधि तथा गुण ८७९ एरङ्गी मछली का मांस ८७० | इमली के बरे बनाने की विधि तथा गुण ८७९ पपता मछली का मांस ८७० | मूङ्ग के बरे बनाने की विधि तथा गुण ८८० गरह्नी मछली का मांस ८७० | पेठे की बरी बनाने की विधि तथा गुण ८८० मद्गुर मछली का मांस ८७० | मुद्गवटी की बरी (मूंग) बनाने की विधि तथा गुण ८८० टेंगरा मछली का मांस ८७१ | अलीकमत्स्य बनाने की विधि तथा गुण ८८० प्रोष्ठी मछली का मांस ८७१ | कढ़ी बनाने की विधि तथा गुण ८८१ छोटी मछलियों का मांस ८७१ | अदरक-बड़ा बनाने की विधि तथा गुण ८८१ मछली के अण्डे ८७१ | बेसन बनाने की विधि तथा गुण ८८२ सूखी मछलियों का मांस ८७१ | फुलौरी बनाने की विधि तथा गुण ८८२ भूंजी मछली का मांस ८७१ | शुद्ध मांस बनाने की विधि तथा गुण ८८२ कूँएं में रहने वाली मछलियों के मांस ८७२ | वेशवार के द्रव्य ८८२ विशेष-विशेष ऋतुओं में विशेष-विशेष | सेहण्डुक मांस बनाने की विधि तथा गुण ८८३ मछलियों के मांस का गुण ८७२ | अखनी बनाने की विधि तथा गुण ८८३ कृतान्नवर्गः | हरीसा बनाने की विधि तथा गुण ८८३ परिभाषा ८७३ | तला हुआ मांस बनाने की विधि तथा गुण ८८४ भात बनाने की विधि तथा गुण ८७३ | कबाब की विधि तथा गुण ८८४ दाल बनाने की विधि तथा गुण ८७३ | मांस का सिंघाड़ा बनाने की विधि तथा गुण ८८४ खिचड़ी बनाने की विधि तथा गुण ८७४ | सिद्धमांसरस का गुण ८८४ तापहरी बनाने की विधि तथा गुण ८७४ | शाक बनाने की विधि ८८५ खीर बनाने की विधि तथा गुण ८७४ | मण्ठक बनाने की विधि तथा गुण ८८५ सेमई बनाने की विधि तथा गुण ८७५ | गुजिया बनाने की विधि तथा गुण ८८५ मैदा बनाने की विधि तथा गुण ८७५ | कर्पूरनालिका बनाने की विधि तथा गुण ८८६ मण्डा बनाने की विधि तथा गुण ८७५ | फेनी बनाने की विधि तथा गुण ८८६ पोलिका (मैदे की रोटी) बनाने की विधि तथा गुण ८७६ | खास्ता पूरी बनाने की विधि तथा गुण ८८७ लप्सी बनाने की विधि तथा गुण ८७६ | सेव के लड्डू बनाने की विधि तथा गुण ८८७ रोटी बनाने की विधि तथा गुण ८७६ | बूँदी लड्डू बनाने की विधि तथा गुण ८८७ बाटी बनाने की विधि तथा गुण ८७६ | मोतीचूर के लड्डू बनाने की विधि तथा गुण ८८७