भारतकोश
ब्रह्मचर्य ही जीवन है

ब्रह्मचर्य ही जीवन है

Brahmacharya Hi Jeevan Hai

स्वामी शिवानन्द द्वारा

स्रोत: Chatra Hitkari Pustakmala, Daraganj, Prayag (1926) · Kedarnath Gupta, Chatra Hitkari Pustakmala · 1926 (उद्गम)

DevanagariHindipublished199 पृष्ठ

पृष्ठ 160, कुल 199 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 160

१४४ ]

❁ ब्रह्मचर्य ही जीवन है ❁

की तरह खींचना होगा। इसी में पुरुषार्थ है ! इसी में कीर्ति है !! और इसी में ब्रह्मचर्य की रक्षा है !!! प्रतिज्ञा का स्मारक रखो। (इस ग्रन्थ का “मन व इन्द्रियां” यह प्रकरण बार बार पढ़ो और रोज पढ़ो)।

“डायरी”

नियम सोलहवाः—

“स्मरण वही” अथवा Diary यह एक मनुष्य का सब से घनिष्ट मित्र है। उसके पास हम जो चाहे सो जी खोल के बोल सकते हैं। यदि आपको आत्म-सुधार करना हो तो रोज दिन भर के भले घुरे कार्यों का वर्णन डायरी में ज्यों का त्यों लिखा करो और सोते समय उस पर गंभीर विचार किया करो, जिससे कि मनुष्य की श्रेष्ठता का तथा नीचता का परिचय भली भाँति हो जाय और उसको अपने कर्मों के लिए हर्ष व पछतावा होकर, वह श्रेष्ठ पुरुषों के समान बनने के लिये कटिबद्ध हो जाय। प्रत्येक मास के अनन्तर दोष और गुण की सूची लिखा करोगे तो उसे अवलोकन करने में बहुत ही सुभीता तथा कल्याण होगा।

डायरी के लिखने से मनुष्य में सत्य का संचार होता है, आत्म-सुधार का दृढ़-संकल्प हठात् घुस जाता है, समय का आदर होने लगता है, नियमितता शरीर में भिन जाती है और आत्म-विश्वास के साथ ही साथ आत्मिक-बल भी बढ़ने लगता है।

“दूसरों के दोष देखने से मनुष्य दोषी बनता है और अपने