चक्रदत्त (चक्रपाणिदत्त - पदार्थचन्द्रिका व हिन्दी व्याख्या सहित)
Chakradatta Hindi
महामहोपाध्याय चक्रपाणिदत्त द्वारा
स्रोत: Chakradatta Chikitsa Sangraha with Hindi Commentary (उद्गम)
६४६ चक्रदत्त—७८. सुस्थाधिकारमु.
अभ्यङ्गादुलु.
श्लो॥ अभ्यङ्गमाचरेन्नित्यं सजराश्रमवातहा, ६.
शिरः श्रवणपादेषु तं विशेषेण शीलयेत्,
बाह्याभ्यङ्गः कफग्रस्तकृतसंशुद्ध्यजीर्णिभिः. ७.
शरीरचेष्टा या चेष्टा स्थैर्यार्था बलवर्धनी,
देहव्यायामसंख्याता मात्रया तां समाचरेत्. ८.
वातपित्तामयी बालो वृद्धो जीर्णी च तां त्यजेत्,
उद्वर्तनं तथा कार्यं ततः स्नानं समाचरेत्, ९.
उष्णाम्बुनाधःकायस्य परिषेको बलावहः,
तेनैव तूत्तमाङ्गस्य बलहृत्केशचक्षुषोः. १०.
स्नानमर्दितनेत्रास्य कर्णरोगातिसारिषु,
आध्मानपीनसाजीर्णभुक्तवत्सु च गर्हितं. ११.
नीचरोमनखश्मश्रु र्निर्मलाङ्घ्रिमलायनः,
स्नानशीलः सुसुरभिः सुवेषो निर्मलाम्बरः. १२.
धारयेत्ससततं वस्त्रं रत्नं सिद्धमन्त्र महौषधीः.
अभ्यङ्गमनु प्रतिदिनमुनु सेविम्पवलयुनु. इदि वृद्धत्वमुनु परिश्रमनु पोगोट्टुनु. तल चेवुलु काळ्ळु मुन्नगु वानिकि अभ्यङ्गमनु एक्कुवगा चेयवलयुनु. कफग्रस्तुलु शोधन चेसि कोनिनवारलु अजीर्णमु गलवारलु वीरु बाह्याभ्यङ्गनमुఁ जेसिकोनुटमञ्चिदि. देहव्यायाममुलचेत दानि नुपचरिम्पवलयुनु वातपित्तरोगमुलकलनाडु बालुडु वृद्धुఁडु अजीर्णरोगि अभ्यङ्गनमुनु परित्यजिम्पवलयुनु. नलुगु पेट्टुकोनि स्नानमुनु चेयुवलयुनु. वेडिनीळ्ळतो अधः कायमुनु कडिगिकोनुट मञ्चिदि. शिरस्सुनु कूड निट्लेकडिगिन कन्नुलकुनु केशमुलकुनु बलमुनशिञ्चिपोवुनु. स्नानमर्दित नेत्रास्य रोगमुल वारिकिनि अतिसाररोगमु गलवारिकिनि अभ्यङ्गनमु मञ्चिदिकानु. परिशुद्ध जलमलो स्नानमुनु चेयवलयुनु. नियममुगा स्नानमु चेयुचु परिमळ द्रव्यमुलनु शुभ्रमलगु वस्त्रमुलनुधरिञ्चि सिद्ध मन्त्रमुलनु ओषधुलनु चेर्च पेट्टुकोनवलयुनु.
गमनाद्युपकरणमुलु.
श्लो. सातपत्रपदत्राणो विचरे द्युगमात्रदृक्,
निशीचात्ययिके कार्ये दण्डी मौनी सहायवान्. १३.
जीर्णे हितं मितं चाद्यान्न वेगान्धारयेद्बलात्,
न वेगितोऽन्यकार्यस्यान्नाजित्यासाध्यमामयं. १४.
दशधा पापकर्माणि कायवाङ्मनसैस्त्यजेत्,
| ఆంధ్రతాత్పర్యసహితము. | 647 |
|---|
కాలేహితం మితం బ్రూయాదవిసంవాదిపేశలం. 15. ఆత్మవత్సతతం పశ్యే-
దపి కీటపిపీలికాం, ఆత్మనః ప్రతికూలాని పరేషాం న సమాచరేత్. 16.
నక్తం దినానిమేయాంతి కథంభూతస్య సంప్రతి, దుఃఖభాజ్నభవేత్యే-
వం నిత్యంసన్నిహితస్మృతిః. 17.
గొడుగు చెప్పులు ధరించికొని పరికించుచు నడువవలయును. రాత్రులెద్దియైన నావశ్యకమగు కార్యముగలిగెనేని కఱ్ఱనుధరించి మానియై సహాయుని తీసికొని బయలువెడలవలయును. జీర్ణమగుచుండినచో హితముగను మితముగను భుజింపవలయును. త్వరపడరాదు. బలముకొలదివేగము నణపరాదు. సాధ్యమగు రోగమును పోగొట్టుకొనక అన్యకార్యమునకై వేగిరపడకూడదు. శరీరము వాఙ్మనస్సు వీటితో పదివిధములగు పాపకార్యములను త్యజింపవలెను. సమయమునందు హితముగను ప్రమాణముగను భుజింపవలయును. ఎవ్వరితోను విసంవాదముగా వరుసనాడరాదు. తనవలెనే అందఱను చూచికొనవలయును. కీటముల నైనను పిపీలికముల నైన నిట్టులే చూడవలయును. తనక ప్రతికూలములగ వానిని ఇతరుల కెవ్వరికిగాని చేయరాదు. నాకు ఇప్పటిరీతులన రాత్రిందివములు గడచుచున్నవి అని సన్నిహితస్మృతియై దుఃఖింపరాదు.
ఋతుచర్య.
శ్లో. మాసైర్ద్విసంఖ్యైర్మాఘాద్యైః క్రమాత్ షడృతవః స్మృతాః,
బలినః శీతసంరోధాద్ధేమంతే ప్రభలోఽనలః. 18.
సేవేతాతో హిమే స్నిగ్ధస్వాద్వమ్లలవణాన్ రసాన్,
గోధూమపిష్టమాంసేక్షుక్షీరోత్థవికృతిః సురాః. 19.
నవముష్ణం వసాం తైలం శౌచకార్యే సుఖోదకం,
యుక్త్యార్కకిరణాన్స్వేదం పాదత్రాణం చ సర్వదా. 20.
ప్రావారాజినకౌశేయప్రవేణీకుథకాస్తృతం,
ఉష్ణస్వభావై ర్లఘుభిః ప్రావృతః శయనం భజేత్. 21.
అంగారతాపసంతప్తగర్భభూవేశ్మని ప్రియాం,
పీవరోరు స్తనశ్రోణీమాలింగ్యగురుచర్చితాం. 22.
అయమేవ విధిః కార్యః శిశిరేఽపి విశేషతః,
తదాహి శీతమాధిక్యం రౌక్ష్యం చాదనకాలజం. 23.
కఫశ్చితోహి శిశిరే వసంతేఽర్కాంకుతాపితః,
హత్వాగ్నింకురుతే రోగాంస్తస్తత్ర ప్రయోజయేత్. 24.
తీక్షం వమననస్యాది కవలగ్రహమంజనం,
వ్యాయామోద్వర్తనం ధూమం శౌచకార్యే సుఖోదకం. 25.
స్నాతోనులిప్తః కర్పూరచందనాగురుకుంకుమైః,
పురాణయవగోధూమక్షౌద్రజాంగలశూల్యభుక్,
ప్రపిబేదాసవారిష్టసీధుమాధ్వీకమాధవాన్. 26.
648 चक्रदत्त—७८. सुस्थाधिकारमु.
माघादिमासमु॑लु रेंडेसि रेंडेसि चॊप्पुन ऒक्कॊक्क ॠतुवगुनु. बलमु गलवानिकि चलिवलन हेमन्तर्तुवुनन्दु जठरानलमु हॆच्चुनु. कावुन चल्लनिवि युनु स्निग्धमुलुनु स्वादुवुलुनु पुलुपुडुप्पु कलवियुनगु वानि सेविम्पवलयुनु. गोधुमपिण्डि मांसमु चॆऱकुपालु कल्लु क्रॊत्तबिय्यपुअन्नमु वस तैलमु वीटिनि काचकर्त्तानुसकै वॆच्चఁजेतियुनु नीटिनि चॆप्पुलनु नूत्नाहरण संस्पर्शर्शनु वलननु शुद्धिकेसि सेविम्पवलयुनु. प्रावारमु अजिनमु पट्टुबट्ट कंबळिमुन्नगुनव पऴचिनपान्पुनन्दु परुण्ड वलयुनु. बॊग्गुलवेडिमकि वॆच्चఁबडिन यिఁटिलोनुण्डवलयुनु. अगुरुचर्चितयुनु पृथुस्तनियुनगु भार्यनु आलिङ्गनमु चेसिकोनि युण्डवलयुनु. शिशिरर्तुवुलॊ कूड विशेशमुगा नीरीतिनने नडचिकोनवलयुनु. भोजनकालमुन वेडिगा भुजिम्पवलॆनु. वसन्तर्तुवुनन्दु सूर्यकिरणसन्तापितुఁडगु टचेत अग्निनशिश्चि रोगमुलु जनिञ्चुनु. कावुन तीक्ष्णमुलगु वमनमुलुनु नस्य विधुलनु चेयवलयुनु.
౩ वसन्त विहारादुलु. ౩
श्लो. वसन्ते ऽनुभवेत्तीक्ष्णां काननानांचयौवनं, गुरूष्णस्निग्धमधुरंदिवास्वप्नंचवर्जयेत्. २७.
मयूखैर्जगतिस्नेहं ग्रीष्मे पेपीयतेरविः, स्वादुशीतं द्रवं स्निग्धमन्नपानं तदाहितं.
शीतं सशर्करं मन्थं जाङ्गलान्मृगपक्षिणः, घृतं पयः सशाल्यन्नं भजन्ग्रीष्मे न सीदति. २९.
मध्यमल्पं नवापेयमथवा सुबहूदकं, मध्याह्नेचन्दनार्द्राङ्गः स्वप्याद्धारागृहेनिशि. ३०.
निशाकरकराकीर्णे प्रवातेसौधमस्तके, निवृत्तकामो व्यजनैः पाणिस्पर्शैः सचन्दनैः. ३१.
सेव्यमानो भजेत्पास्यं मुक्तामणिविभूषितः, लवणाम्लकटूष्णानि व्यायामं चात्र वर्जयेत्. ३२.
भूबाष्पान्मेघनिष्यन्दात्पाकादम्लाज्जलस्य च, वर्षास्वग्निर्भवेत्क्षीणे कुप्यन्ति पवनादयः. ३३.
भजेत्साधारणं सर्वमूष्मणस्तेजनं च यत्, आस्थापनं शुद्धतनुर्जीर्णं धान्यं कृतान् रसान्. ३४.
जाङ्गलं पिशितं यूषान्मध्वरिष्टं चिरन्तनं, दिव्यं कौपं शृतं वाम्भो भोजनं त्वतिदुर्दिने. ३५.
व्यक्ताम्ललवणस्नेहं संशुष्कं क्षौद्रवल्लघु, नदीजलोदमन्थाहःस्वप्नायासातपांस्त्यजेत्. ३६.
वर्षाशीतोचिताङ्गानां सहसै वार्करश्मिभिः, तप्तानामा...
आन्ध्रतात्पर्यसहितमु. 649
चितं पित्तं प्रायः शरदि कुप्यति. 20. तज्जयार्थं घृतं तिक्तं विरेको रक्तमोक्षणं, तिक्तस्वादुकषायं च क्षुधितोऽन्नं भजेल्लघु. 21.
वसन्तर्तुवुलो स्त्रीलु उद्यानवनमुलुनु उपभोगिम्पदगिनवि. पगुलु निद्दुर पोकूडदु. सूर्युरु किरणमुलचेत लोकमुनु पील्चिपिप्पि चेयुनुगनुक स्वादुवुगनु शीतमुगनु द्रवमुगनुण्डु अन्न पानमुलनु सेविम्पवलयुनु. जाङ्गलमुलगु पशुपक्ष्यादुल मांसमु पालु नेयि वरियन्नमुनु सेविञ्चुचुन्न ग्रीष्ममुन क्लेशमुनोन्दरु. कोञ्चेमन्त यैनकल्लुनु त्रागकूडदु. एक्कुव नीळ्ळुनु त्रागरादु. मध्याह्नमुलन्दु चन्दनमुनु पूसिकोनि धारागृहमुलन्दु निद्र पोवलयुनु. चन्द्रकिरणप्रसारितमगु मेडपैनि काममुनु वीडि चल्लगालि विसिरिकोचु मुक्तामणि मुन्नगुवानिचेत नलङ्कृतुडै युण्डवलयुनु.
वर्ष ॠतुवुललो अग्निबलमु क्षीणिञ्चुट चेत वातादुलु प्रकुपिञ्चुनु. साधारणमुगा वेट्टनिच्चु वस्तुवुलनु उपयोगिञ्चिकोनवलयुनु. परिशुद्धुँडै प्रातधान्यमुनु रसद्रव्यमुलनु अडविजन्तुवुलमांसमुलनु यूषमुलनु दिव्यमगु कूपोदकमुलु मुन्नगु वानिनि परित्यजिम्पवलयुनु.
वर्षाकालमुनन्दु नेम्मुतगिलिन अवयवमुलु गलवारलु वाडलो कूर्चुण्डिरेनि अय्यदि शरत्कालमुनन्दु विषमिञ्चुनु. दानिनितोलगिञ्चि कोनुटकै तिक्तमुगुघृतमुनु विरेचनमुनु रक्तस्रावमुनु तिक्तमुलु स्वादुवुलुनगु कषायमुलनु सेविम्पवलयुनु.
❧ शरत्कालपदार्थमुलु. ❧
श्लो. इक्षवः शालयो मुद्गाः सदोंभः क्वथितं पयः, शरद्येतानि पथ्यानि प्रदोषे चेन्दुरश्मयः. 22. शारदानि च माल्यानि वासांसि विमलानि च, तुषारक्षारसाहित्य दधितैलरसातपान्. 23. तीक्ष्ण मद्य दिवास्वप्न पुरोवातातपां स्त्यजेत्, शीते वर्षासु चाद्यं स्त्री न्वसं तें त्या न्रसा न्भजेत्. 24. स्वादू न्निदाघे शरदि स्वादुतिक्तकषायकान्, शरद्वसन्तयो रूक्षं शीतं घर्मघनान्तयोः. 25. अन्नपानं समांसेन विपरी
82
650 चक्रदत्त—७८. सुस्थाधिकारमु.
त मतोऽन्यथा, नित्यं सर्वरसाभ्यासः स्वस्वाधिक्य मृतावृतौ। २६।
ऋतोराद्यन्तसप्ताह ऋतुसन्धि रीति स्मृतः, तत्रपूर्वो विधि स्त्याज्यः सेवनीयोऽ परः क्रमः। २७।
इत्युक्त मृतुसात्म्यं य च्चेष्टाहारव्यपाश्रयं, उपशेते यदाचित्या दोकसात्म्यं त दुच्यते। २८।
देशाना मामयानां च विपरीतं गुणं गुणैः, सात्म्य मिच्छन्ति सात्म्यज्ञा श्चेष्टितं चाद्य मेव च। २९।
तच्च नित्यं प्रयुञ्जीत स्वास्थ्यंये नानुवर्तते, अजातानां विकाराणा मनुत्पत्तिं कथञ्च यत्। ३०।
नगरी नगर स्येव रथस्येवरथी यथा, स्व शरीरस्यमेधावी कृत्येष्ववहितो भवेत्। ३१।
चेఱकुलु वरिबिय्यमु पेसलु सरस्सुलोनि नीरु क्वथितोदकमु चन्द्रकिरणमुलु इय्यवि शरत्कालमुनन्दु पथ्यमुलु. शरदृत्तु सम्बन्धमुलगु माल्यमुलु निर्मलमुलगु वस्त्रमुलु तुषारोदकमुलु तृप्तिनि कलिगिञ्चु अन्नमु पेऱुगु तैलमु रसमु वीटिनिवदलि पेट्टवलयुनु. मऱियु तीक्ष्णमगु मद्यमु दिवास्वप्नमु पुरोवातमु एण्ड वीटिनि त्यजिम्पवलयुनु. शीतकालमुनन्दुनु वर्षाकालमुनन्दुनु मोदटि मूडिटिनि वसन्तमुनन्दु चिवरिरेण्डिटिनि सेविम्पवलयुनु. मोत्तमीदनन्न पानमुलनु विपरीतमुगा भुजिम्पवलेनु. ऋतुवुललो तोलुतनु कोननु एडुरोजुलु ऋतु संधियनఁबडुनु. देशकालमुलकुनु रोगमुलकुनु गुणमुलकुनु अनुगुणमुगा प्रवर्तिम्पवलेनु. स्वास्थ्यमुनु कलिगिञ्चु दानिनि प्रतिदिनमुनन्दु सेविम्पवलयुनु. लेनिचो लेनिरोगमुलनु पुट्टिञ्चुनु. पट्टणमुलनु पट्टणवासुलवलेनु रधमुनु रधिकुఁडुवलेनु तनशरीरमुनु कनिपेट्टि तानु बुद्धिमन्तुఁडै जाग्रत्तगा कापाडुकोनुचु मेलगवलयुनु.
ग्रन्थकर्तनुगूर्चिन प्रशंस.
श्लो.
गौडाधिनाथरसवत्यधिकारिपात्र
नारायणस्य तनयः सुनयोन्तरङ्गात्,
भानो रनु प्रथितलोध्र वलीकुलीनः
श्रीचक्रदत्त इह कर्त्रपदाधिकारी.
ఆంధ్రతాత్పర్యసహితము. 651
శ్లో. య స్సిద్ధయోగ లిఖితాధికసిద్ధయోగా
న్నత్తైవ నిక్షిపతి కేవల ముద్ధరే ద్వా,
భట్టత్రయత్రిపథవేధవిదా జనేన
దత్తః పతే త్సపది మూర్ధని తస్య శాపః.
గౌడరాజగారి రసవత్యధికారులలో యోగ్యుడగు నారాయణుని కొమారుఁడును, ఉత్తమకులోత్పన్నుండును చక్రదత్తుఁడను పేరుతోఁబఱగినట్టినేను ఈగ్రంథముయొక్క కర్తృపదమునకు అధికారిని. (అనఁగా దీనిని రచించినది గౌడరాజుగారి రసవత్యధికారియైన నారాయణుఁడనువాఁడని తాత్పర్యము.)
ఇందు వ్రాయఁబడిన సిద్ధయోగములలో అధికముగా చేర్చువారుగాని ఉన్నవాటిని తీసివేయువారు గాని ఎవ్వరు కలరో వారి తలపై వేదపాఠకులు ఇచ్చినశాపము బడును. కాన దీనియందు చేర్పులుగాని కూర్పులుగాని ఇతరులు చేయరాదని భావము.
ఇట్లు చక్రదత్తయందు నుప్తాధికారప్రకరణము ముగిసెను.
చక్రదత్త ముగిసెను.
చెన్నపురి : వావిళ్ల. రామస్వామిశాస్త్రులు అండ్ సన్స్ వారిచే
శ్రీ 'రామ' ప్రెస్సున ముద్రితము.—1926.
వైద్యగ్రంథములు.
| గ్రంథము | ప్రతి 1-కి రూ. | ఆ. |
|---|---|---|
| అనుపానమంజరి, సాంధ్రతాత్పర్యము | 0 | 8 |
| అజీర్ణమంజరి ,, | 0 | 4 |
| ఇలాజుల్ గుర్బా, యూనానివైద్యగ్రంథములలో మిక్కిలి యుత్తమమైనది, ఉర్దూకతర్జుమా, కాలికోబైండు | 3 | 0 |
| కాలజ్ఞానము, సాంధ్ర తాత్పర్యము | 0 | 4 |
| కుమారతంత్రము, రావణకృతము ,, | 0 | 6 |
| చక్రదత్త ,, | 3 | 12 |
| గదనిగ్రహము, సోఢలకృతము, సాంధ్ర తాత్పర్యము | 2 | 8 |
| నాడీజ్ఞానము ,, | 0 | 4 |
| భేషజకల్పము, సాంధ్రతాత్పర్యము | 0 | 6 |
| రసప్రదీపిక, ఆంధ్రతాత్పర్యసహితము | 0 | 12 |
| రాజమార్తాండము ,, | 0 | 10 |
| లోలంబరాజీయము, సాంధ్ర తాత్పర్యము | 0 | 8 |
| విషవైద్యచింతామణి ,, | 2 | 0 |
| వృక్షాయుర్వేదము ,, | 0 | 4 |
| వైద్యశతశ్లోకి ,, | 0 | 6 |
| శార్ఙ్గధరసంహిత, క్రొత్తకూర్పు ,, | 3 | 0 |
| శార్ఙ్గధరకృత త్రిశతీ, సాంధ్ర తాత్పర్యము | 0 | 8 |
| సుశ్రుతశారీరము | 2 | 0 |
| షడ్రసనిఘంటువు, అభిధానరత్నమాల, సటీక | 0 | 12 |
| బసవరాజీయము, సాంధ్ర తాత్పర్యము | 7 | 0 |
| సహదేవ పశువైద్యశాస్త్రము | 0 | 6 |
వావిళ్ల. రామస్వామిశాస్త్రులు అండ్ సన్స్,
292, ఎస్ప్లనేడ్, చెన్నపురి. ఈ.
ఆంధ్ర గ్రంథములు
వచన గ్రంథములు.
| గ్రంథము | ప్రతి 1-కి రు. ఆ. | గ్రంథము | ప్రతి 1-కి రు. ఆ. |
|---|---|---|---|
| ఆంధ్రవచనభాగవతము, ద్వాదశ స్కంధములు, ఒకేసంపుటం | 9 0 | ద్వాదశోపనిషత్తులు, వచనంతి | 8 |
| ,, మూడుసంపుటములు | 10 8 | భారతరమణీమణులు, 1 భా॥ | 0 12 |
| ఆంధ్రవచనభారతము— | డిటో రెండవభాగము | 0 10 | |
| ,, ఆదిసభాపర్వములు | 3 0 | యజుర్వేదకథాసంగ్రహము | 0 8 |
| ,, అరణ్యపర్వము | 3 0 | శ్రీమహాభక్తవిజయము, నూతనముద్రితము | 6 0 |
| ,, విరాటోద్యోగపర్వము | 3 0 | నీతిచంద్రిక, చిన్నయసూరి | 0 8 |
| ,, భీష్మద్రోణపర్వములు | 4 8 | పంచతంత్రము, వచనము, సులభశైలి | 0 8 |
| ,, కర్ణశల్యసౌప్తిక స్త్రీపర్వములు | 3 0 | నవనాథభక్తులచరిత్ర | 2 0 |
| ,, శాంతిపర్వము | 4 8 | నీతిరత్నాకరము | 0 8 |
| ,, అనుశాసనికము మొదలు స్వర్గారోహణపర్వము వరకుగల సంపుటము | 4 8 | సంగ్రహరామాయణము | 0 12 |
| సంగ్రహభారతము | 1 4 | ||
| సంగ్రహభాగవతము | 1 4 | ||
| ఆంధ్రవచనవాల్మీకిరామాయణము, 2 సంపుటములు | (అచ్చు) | ప్రాచీనదేశచరిత్రలు | 1 12 |
| పతివ్రతలచరిత్రలు | 2 0 | ||
| ఆంధ్రవాఙ్మయచరిత్రసంగ్రహము | 1 12 | దక్కనుపూర్వకథలు | 2 0 |
| భోజనికథలు | 0 8 | ||
| ఆంధ్రకవిత్వచరిత్ర, బసవరాజు అప్పారావుగారిది | 1 12 | హితోపదేశము, సులభశైలి | 0 12 |
| శ్రీగురుజాడ శ్రీరామమూర్తిగారి ఆంధ్రకవిజీవితములు | 4 0 | భోజకాళిదాసకథలు, 1 భా॥ | 0 12 |
| ,, 2 భా॥ | 0 12 | ||
| అరేబియన్నైట్సుకథలు | 1 4 | తెనాలిరామలింగనికథలు, జీవితము | 0 6 |
| న్యాయవిచారము, ప్రహసనం | 0 4 | సంస్కృతనాటకకథలు | 1 8 |
| తులసీదాసు రామాయణము | 8 0 | దశకుమారచరిత్రము | 1 8 |
| తిలకుగారి సెక్యూరిటీ కేసు, ఉపన్యాసములు | 0 14 | మదనకామరాజకథలు, చక్కనికూర్పు | 0 14 |
ప్రతి 1-కి రు. ఆ.
| గ్రంథము | రు. | ఆ. |
|---|---|---|
| రాజశేఖరుడు, గోపాలుడు | 0 | 8 |
| విక్రమార్కునికథలు | 0 | 8 |
| చార్ దర్వీశులకథలు | 0 | 8 |
| తాతాచార్యులకథలు | 0 | 6 |
| ఖైద్యులకథలు | 0 | 4 |
| బేతాళునికథలు | 0 | 8 |
| వీరాంగనలు | 0 | 12 |
| పరమానందశిష్యులకథలు | 0 | 3 |
| నలుగురుమంత్రులకథలు | 0 | 4 |
| అయిదుగురుదొంగలకథలు | 0 | 6 |
| రేచుక్క_పగటిచుక్క_కథ | 0 | 3 |
| సత్యసేనవిజయము | 0 | 4 |
| ఋశులచరిత్ర | 0 | 8 |
| పురాణగాథలు I | 0 | 12 |
| పురాణగాథలు II | 0 | 12 |
| బాజీరాయని చరిత్ర | 0 | 14 |
| రఘువంశకథ | 0 | 8 |
| విక్రమార్క చరిత్ర | 1 | 0 |
| వివేకానందవిజయము | 2 | 0 |
| హరిస్స్వామినోదకథలు | 0 | 12 |
| ఈసబునీతికథలు, 1-వ భా॥ | 0 | 6 |
| డిటో 2-వ భా॥ | 0 | 8 |
| పంజాబుఅల్లరి | 0 | 8 |
| శుకసప్తతికథలు | 0 | 6 |
| మర్యాదరామన్న కథలు | 0 | 3 |
| మైరావణచరిత్ర | 0 | 1 |
| షేక్స్పియర్ నాటకకథలు | 1 | 8 |
| అనంతసాగరము, బుక్కరాయ సముద్రచరిత్ర | 0 | 12 |
| ప్రహ్లాదచరిత్ర, ప్రతిమలతో | 0 | 6 |
| శకుంతల " | 0 | 6 |
ప్రతి 1-కి. రు. ఆ.
| గ్రంథము | రు. | ఆ. |
|---|---|---|
| నల | 0 | - |
| సావిత్రి | 0 | - |
| హరిశ్చంద్ర | 0 | - |
❧ నవలలు. ❧
| గ్రంథము | రు. | ఆ. |
|---|---|---|
| సీతారామము | 1 | - |
| ఐనన్హో, నవల | 0 | - |
| మదాలస ,, | (అచ్చు) | - |
| సుజనరంజని ,, | 0 | - |
| విజ్జలదేవి ,, | 1 | - |
| ఉన్మాదిని, నవల | 0 | - |
| రాధారాణి ,, | 0 | 4 |
| అస్తమయము ,, | 1 | 8 |
| దుర్గేశనందని ,, | 0 | 12 |
| కపాలకుండల ,, | 0 | 12 |
| లషణ ,, | 0 | 12 |
| టిప్పుసుల్తాన్ ,, | 1 | 8 |
| లీల ,, | 0 | 6 |
| రాజర్షి ,, | 1 | 0 |
| తారాబాయి ,, | 0 | 14 |
| దిలారామ ,, | 1 | 4 |
| కోవలన్ కణ్ణకి | 0 | 12 |
| మనోహరి ,, | 0 | 14 |
| వీరబాల ,, | 0 | 8 |
| ఆనందమఠ ,, | 0 | 12 |
| లాలాబాయి ,, | 0 | 8 |
| ఆంధ్రరాష్ట్రము ,, | 1 | 8 |
| రోషినార ,, | 0 | 12 |
| బాల్యాదిత్య ,, | 2 | 0 |
| దేశభక్తుడు | 1 | 0 |
| శంభుతోనొకనాటిసహవాసం | 0 | 8 |
| చంద్రగుప్తుడు, నవల | 2 | 0 |
19757
| గ్రంథము | ప్రతి 1-కి రు. | అ. | గ్రంథము / నిఘంటువులు | ప్రతి 1-కి రు. | అ. |
|---|---|---|---|---|---|
| నీతిసింధువు | ” | 0 10 | — నిఘంటువులు. — | ||
| వనజాక్షి | ” | 0 12 | శ్రీవేంకటేశాంధ్రము, పద్య కా॥ | 0 | 6 |
| స్వప్నయాత్ర | ” | 0 12 | బాలచంద్రోదయము | 0 | 8 |
| ముగ్గుసుమారులు | 1 | 4 | షడ్భాషామంజరి (ఆరుభాషల ఒకేబ్యులరి) | 1 | 8 |
| — వివిధ గ్రంథములు. — | ఆంధ్ర నామసంగ్రహము, ఆంధ్రనామ శేషము, సాంబనిఘంటువు, టీక, అకారాద్యనుక్రమణికతో | 1 | 4 | ||
| హిందీ ఇంగ్లీషు బాలశిక్ష | 0 | 4 | డిటో క్యాలికోబైండు | 1 | 8 |
| హిందీ తెనుఁగు బాలబోధ | 0 | 4 | శబ్దార్థచంద్రిక | 6 | 0 |
| పెద్దబాలశిక్ష బజారుప్రతి | 1 | 0 | తెనుగుసామెతలు with English Translation by Capton-Carr | 1 | 4 |
| డిటో అట్టబెండు | 1 | 8 | Translation Guide - English to Telugu & Vice Versa. | 2 | 8 |
| చిన్న బాలశిక్ష | 0 | 3 | Sankaranarayana's English-Telugu Dictionary. శంకరనారాయణగారి నిఘంటువు (ఇంగ్లీషుపదములకు తెనుఁగు అర్థముగలది) | 12 | 0 |
| ఆంధ్రకన్నడ బాలశిక్ష | 0 | 4 | English-Telugu Pocket Dictionary ఇంగ్లీషు - తెనుఁగు పాకెట్టుడిక్షనరి | 3 | 0 |
| ఆంధ్రద్రావిడ బాలశిక్ష | 0 | 4 | సంస్కృతాంధ్రనిఘంటువు | 3 | 8 |
| ఆంధ్రద్రావిడ మొదటివాచకం | 0 | 6 | — ఆంధ్ర వ్యాకరణాలంకారములు. — | ||
| ” రెండవవాచకము | 0 | 6 | అధర్వణకారికావళి | 1 | 8 |
| నేరములు చేయుజాతులచరిత్ర, ప్రతిమతో | 1 | 0 | అనంతునిఛందము | 1 | 0 |
| పాకశాస్త్రము, కంది సుబ్బరావుగారిది | 1 | 12 | అప్పకవీయము | 3 | 0 |
| చిత్ర లేఖనము (Drawing) | 1 | 4 | |||
| జంత్రి, భూమిశిస్తు, అధికపన్నుల విభజనలు విశదముగా నున్నవి | 0 | 8 | |||
| గాంధిమహాత్ముని హైందవ స్వరాజ్యము | 1 | 0 | |||
| ఆకాశవిమానములు, ప్రతిమలతో సహా | 0 | 8 | |||
| భావలహరి | 0 | 8 | |||
| వ్యవసాయబోధిని | 0 | 8 |
వావిళ్ల రామస్వామిశాస్త్రులు అండ్ సన్స్,
292, ఎస్ప్లనేడ్, చెన్నపురి.