हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)
Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary
महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा
हारीतसंहिताविषयानुक्रमणिका ।
विषय. | पृष्ठ. | विषय. | पृष्ठ. अथ प्रथमस्थानम् । | | लंघनकी योग्यता .... | १३ मंगलाचरण .... | १ | जठराग्निका कर्म .... | ,, आत्रेयहारीतसंवाद .... | ,, | सामनिरामव्याधिका उपक्रम .... | १४ वैद्यशास्त्रपठनविधि .... | ५ | वैद्यकी योग्यता .... | ,, चिकित्सासंग्रह .... | ७ | पुण्यार्थ उपचार करनेयोग्य मनुष्य | शल्यतंत्र .... | ८ | उपचारसे धन लेने योग्य मनुष्य .... | १५ शालाक्य .... | ,, | यश मिलने योग्य मनुष्य .... | ,, कायचिकित्सा .... | ,, | चिकित्सा करनेको अयोग्य मनुष्य .... | ,, अगदोंके नाम .... | ९ | वैद्यकर्तव्यका उपसंहार .... | १६ बालचिकित्सा .... | ,, | देशकालबलाबल .... | ,, विषतन्त्रके नाम .... | ,, | देशके भेद .... | ,, भूतविद्याका नाम .... | ,, | अनूपदेशलक्षण .... | ,, वाजीकरण .... | ,, | जाङ्गलदेशलक्षण .... | १७ रसायनतन्त्र .... | १० | साधारणदेशलक्षण .... | ,, उपाङ्गचिकित्सा .... | ,, | कालज्ञान .... | १८ वैद्यशिक्षाविधान .... | ,, | कालका स्वरूप .... | ,, उपचार करनेकी योग्यता .... | ११ | उत्पातकालका स्वरूप .... | ,, देशकाल आदिका ज्ञान .... | ,, | प्रवर्त्तककालका स्वरूप .... | ,, उपचार करनेका फल .... | ,, | संहारकालका स्वरूप .... | १९ वैद्यका वैद्यत्व .... | ,, | कालका सनातनत्व .... | ,, दो प्रकारका उपचार उपक्रम .... | ,, | कालका नाशक स्वरूप .... | ,, दो प्रकारके वैद्य .... | ,, | अन्यकालोंके स्वरूप .... | ,, व्याधिके साध्य असाध्य विचार .... | १२ | ऋतुचर्य्या .... | ,, उपचारका फल .... | ,, | अयनोंका वर्णन .... | २० दोषके शेष रहजानेसे हानि .... | ,, | दक्षिणायनका लक्षण .... | ,, अपथ्यसे हानि .... | १३ | उत्तरायणका लक्षण .... | २१ | | वर्षार्ऋतुलक्षण. .... | ,, | | शरद्ऋतुका लक्षण .... | २२
( २ ) हारीतसंहिता-
| विषय. | पृष्ठ. | विषय. | पृष्ठ. |
|---|---|---|---|
| हेमन्तवर्णन .... | २४ | वायुका कोप .... .... | ३५ |
| शिशिरवर्णन .... | २५ | पित्तप्रकोपानदान.... .... | ३६ |
| वसंतऋतुका वर्णन .... | " | कफप्रकोपानदान.... .... | ३७ |
| ग्रीष्मवर्णन .... | २६ | द्वौ दोषोंके कोपकी उत्पत्ति .... | " |
| इसके वाद वयोज्ञानका कथन .... | २७ | सन्निपातकी उत्पत्ति .... | ३८ |
| मध्यमवयोर्लक्षण .... | " | रसोंके गुणदोषका वर्णन .... | " |
| प्रकृतिका ज्ञान .... | २९ | षड्रसके गुणदोषवर्णन .... | ३९ |
| वातादिप्रकृतिका ज्ञान .... | " | रसगुणोंके गुणकर.... .... | " |
| वातप्रकृतिका लक्षण .... | " | वातादिविरुद्धरस .... .... | " |
| पित्तप्रकृतिका लक्षण .... | " | दोषोंके विरोधीरसोंका वर्णन .... | " |
| कफप्रकृतिका लक्षण .... | ३० | वातादिकोंमें रसयोजना .... | ४० |
| समप्रकृतिका लक्षण .... | " | मधुररसका वर्णन .... .... | " |
| पूर्वदिशाका वायु .... | " | कडुए रसका वर्णन .... | " |
| आग्नेयदिशाका वायु .... | ३१ | चरपरे रसका वर्णन .... | " |
| दक्षिणदिशाका वायु .... | " | खट्टे रसका वर्णन.... .... | ४१ |
| नैर्ऋत्यदिशाका वायु .... | " | कसैले रसका वर्णन .... | " |
| पश्चिमदिशाका वायु .... | ३२ | खारे रसके वीर्य्यका वर्णन .... | " |
| वायव्यदिशाका वायु .... | " | पानीका वर्ण .... .... | ४२ |
| उत्तरदिशाका वायु .... | " | जलके भेद .... .... | " |
| ऐशानदिशाका वायु .... | " | गंगापानीकी परीक्षा .... | " |
| अन्य पंचविध वायुके गुण .... | " | गंगाजलके गुण .... .... | ४३ |
| वस्त्रवायुके गुण .... | " | सामुद्र पानीका लक्षण और गुण.... | " |
| वेणुवायुगुण .... | ३३ | चारप्रकारकी वृष्टि.... .... | " |
| कांस्यपात्रवायुके गुण .... | " | रात्रिको वर्षे हुए पानीके गुण-दोष वर्णन .... .... | " |
| रंभातालपत्रवायुके गुण .... | " | " | " |
| खसशिखिपूच्छव्यजनवायुके गुण.... | " | दुर्दिनमें वर्षेहुए पानीके गुण-दोषवर्णन .... .... | " |
| षड़तुओमें उत्तमदिक् वायु .... | ३४ | " | " |
| प्रतिदिन षड्ऋतु .... | " | दुर्दिनमें वर्षे हुए पानीके गुणदोष वर्णन .... .... | ४४ |
| सचिववायु .... | " | " | " |
| ऋतुभेदसेवातादिकोंका संचय, कोप, उपराम | ३५ | क्षणवृष्टिके गुण .... .... | " |
विषयानुक्रमणिका. ( ३ ) विषय. पृष्ठ. | विषय. पृष्ठ. श्रावणवृष्टिके गुण ..... .... ४४ | अंशूदकके गुणदोष .... ५४ भादुवाके वृष्टिके गुण.. .... ” | आरोग्योदकके गुणदोष .... ” आश्विनवृष्टिके गुण .... ” | शीतपानीके गुण ५५ कार्तिकके वृष्टिके गुण .... ४५ | गर्म पानीके गुण .... .... ” स्वातिजलके गुण.... .... ” | पानीविषयक विधि .... ” अकालवृष्टिके लक्षण और गुण ... ” | दुग्धवर्गवर्णन .... .... ५७ अकालमें वर्षाहुई वर्षाके पानीका लक्षण ” | दूधकी उत्पत्ति .... .... ” धारसंज्ञक आदि चारप्रकारके .... ” | पृथक् २ रंगकी स्त्रियोंके दूध .... ५८ कारजलकी उत्पत्ति .... .... ४६ | पृथक् २ रंगकी गायोंका दूध .... ५९ कारजलके गुण .... .... ” | गायके दूधके गुण .... ” तुषारपानीके गुण ... .... ” | बकरीके दूधके गुण .... ” पृथ्वी ऊपरके आठ प्रकारका जल ४७ | भेडके दूधके गुण .... ” नदीके पानीका गुण .... ” | भैंसके दूधके गुण .... ६० औद्भिद पानीका गुण दोष .... ४८ | ऊंटनीके दूधके गुण .... ” झिरनाके पानीका गुण .... ” | स्त्रियोंके दूधके गुण .... ” चौंड्य संज्ञक पानीका गुण .... ” | प्रभातके दूधके गुण .... ” कूंवाके पानीका गुण दोष .... ” | दिनके दूधका गुण .... ” तलावके पानीके गुण दोष .... ” | रात्रिके दूधका गुण .... ” सारसपानीके गुण दोष .... ४९ | दूधपीनेकी विधि .... ६१ बावडीके जलके गुण .... ” | गायके दहीके गुण .... ” नदियोंकी प्रकृति .... ” | बकरीके दहीके गुण .... ” सदा बहनेवाली नदीके गुण दोष ” | भैंसके दहीके गुण .... ६२ पत्थरोंवाली नदीके गुण दोष ५० | ऊंटनीके दहीके गुण .... ” बालूरेतवाली नदीके पानीके गुण दोष ” | स्त्रीके दहीके गुण .... ” उत्तरसे बहनेवाली नदियों और पानीके | भेडके दहीके गुण .... ” गुण दोष .... ” | वर्षाकालके दहीका गुण .... ” तापी आदिनदियोंके गुण दोष ५१ | शरदऋतुके दहीका गुण .... ६३ पृथिवीके भागका पानी .... ५२ | हेमंतऋतुके दहीका गुण .... ” पापोदकका गुण दोष .... ५३ | शिशिरऋतुके दहीका गुण .... ” रोगोदकके गुणदोष .... ” | वसंतऋतुके दहीका गुण .... ”
( ४ ) ॥ हारीतसंहिता ॥ विषय. . पृष्ठ. | विषय. . पृष्ठ. ग्रीष्मऋतुके दहीका गुण .... ६३ | हाथीके मूत्रका गुण .... ७१ दहीका वर्जना .... ,, | घोड़ेके मूत्रका गुण .... ,, दहीके खानेकी विधि .... ६४ | ऊंटके मूत्रका गुण .... ,, गायके छाछका गुण .... ,, | गधाके मूत्रका गुण .... ,, भैंसके तक्रका गुण .... ,, | नरके मूत्रका गुण .... ,, बकरीके तक्रका गुण .... ,, | प्रसूता और अप्रसूताके मूत्रका गुण ७२ तक्रवर्णन.... .... ६५ | मूत्रविशेष .... ,, साधारण तक्रका गुण .... ,, | इक्षुवर्ग .... ,, बहुत पानी वालेतक्रका गुण .... ,, | स्वादुईखका गुण .... ७३ विशेष वर्णन .... ६६ | सफेद ईखका गुण .... ,, हाथसे मर्दित किये तक्रका गुण .... ,, | काली ईखके गुण .... ,, तक्रनिषेध .... ,, | यंत्रसे निकालेहुए रसका गुण .... ,, तक्रपानविधि .... ,, | दांतोंसे पीड़ितकिये रसका गुण .... ,, नौनीघृतकी विधि .... ,, | बासीरसका गुण .... ७४ फेनविधि .... .... ६७ | पक्क रसका गुण .... ,, गायके घृतका गुण .... ,, | फांणित रसका गुण .... ,, बकरीके घृतका गुण .... ६८ | गुड़ का गुण .... ,, भैंसके घृतका गुण .... ,, | गुड़ की खांडका गुण .... ,, ऊंटनीके घृतका गुण .... ,, | साधारण खांडका गुण .... ७५ भेड़के घृतका गुण .... ,, | मिश्रीके खांडका गुण .... ,, घोड़ीके घृतका गुण .... ,, | सुंदर खांडका गुण .... ,, दूधसेही निकाले घृतका गुण .... ६९ | गुड़विशेषता .... ,, पुराने घृतका गुण .... ,, | कांजिकवर्ग .... ७६ नारीके घृतका गुण .... ,, | चावलोंके पानीका गुण .... ,, घृतका विशेष वर्णन .... ,, | तुषोदकका गुण .... ,, मूत्रवर्णन.... .... ७० | जव और गेहूंकी कांजीका गुण.... ,, गोमूत्रके गुण .... ,, | तैलयुक्त कांजीका गुण .... ,, बकरीके मूत्रका गुण .... ,, | युग्मंधर कांजीका गुण .... ७७ मेंढाके मूत्रका गुण .... ,, | कांजीका परिहार .... ,, भैंसाके मूत्रका गुण .... ७१ | कांजीकी प्रशंसा .... ,,
विषयानुक्रमणिका. ( ५ ) विषय. पृष्ठ. | विषय. पृष्ठ. चावलोंके मंडका गुण.. .... ७७ | सालपर्णी और टेसूके तेलका गुण.... ८३ लालचावलके मंडका गुण .... ७८ | वसावर्ग .... .... " सफेदचावलके मंडका गुण .... " | धान्यवर्ग .... .... ८४ जवोंके मंडका गुण .... " | शालिचावलका वर्णन.... .... " गेहूँके मंडका गुण .... .... " | शालियोंके गुणदोष .... .... " क्षुद्रअन्नके मंडके गुण .... .... " | क्षुद्रधान्यवर्ग .... .... ८५ कोदू अन्नके मंडका गुण .... " | श्यामाक और कोदूके गुणदोष .... ८६ क्षुद्रअन्नके कांजीका गुण .... " | विदलन्नका गुण .... .... " यूषवर्ग .... .... ७९ | जवोंका गुण .... .... " कुलथीके यूषका लक्षण गुण .... " | गेहूँका गुण .... .... " हरड़के यूषका गुण .... " | तिलोंका गुण .... .... " मूंगके यूषका गुण .... " | चनाका गुण .... .... ८७ चनाके यूषका गुण .... " | उड़दका गुण .... .... " उड़दके यूषका गुण .... .... ८० | मूंगका गुण .... .... " अन्ययूषोंके गुण .... .... " | तुवरका गुण .... .... " तेलवसावर्ग .... .... " | मोठका गुण .... .... " तिलोंके तेलका गुण .... " | कुलथीका गुण .... .... ८८ सरसोंके तेलका गुण .... .... ८१ | चौलाईका गुण .... .... " अलसीके तेलका गुण .... " | मटरका गुण .... .... " अरंडके तेलका गुण .... " | मसूरका गुण .... .... " तेलकी विशेषता .... .... ८२ | धान्यवर्गका उपसंहार .... .... " लालअरंडके तेलका गुण .... " | शाकवर्ग .... .... ८९ कुसुमके तेलका गुण .... " | जीवंती शाकके गुण.. .... " अन्यान्य तेल .... " | चौलाईके शाकके गुण .... " कुरंटाके तेलका गुण .... " | कासविंदके शाकके गुण .... " तेलकी विशेषता .... .... ८३ | जीवंती और मुकोह शाकके गुण .... " स्वच्छ तिवसाका तैल अच्छोड़का तेल .... " | बथुवा और चिल्ली शाकके गुण .... ९० नारियलका तेल महुवाके तेलका गुण .... " | केतकी और मेथी शाकके गुण .... " काकड़ी, खीरा, कोदला आदिके | सरसों और सौंफके शाकका गुण .... " तेलका गुण .... .... " | कंदेली और कुसुम्भा शाकके गुण .... "
( ६ ) हारीतसंहिता
विषय. पृष्ठ. | विषय. पृष्ठ. चूकाशाकके गुण .... ९० | अम्लीका गुण .... ९७ दूसरे शाकोंके गुण .... ९१ | दाखका गुण .... ,, कफकारक और वातल शाक .... ,, | नारियलका गुण .... ,, शाकोंके विशेष गुण .... ,, | केलाके फलका गुण .... ९८ अन्य प्रकारके शाक .... ,, | कैथका गुण .... ,, कोहेलाका गुण .... ,, | खजूरिआ अथवा छुहाराका गुण .... ,, कुरङ्गेके शाकका गुण .... ९२ | सुपारीका गुण .... ,, करेलाका गुण .... ,, | नागरपानका गुण .... ,, लालतूरिके पुष्पका गुण.. .... ,, | कत्थाका गुण .... ९९ तोरि ककोड़ा करेला कडुई .... ,, | चूनेका गुण .... ,, तोरैका गुण .... ,, | कत्था कपूरसे संयुक्त नागरपानका गुण ,, परवलका गुण .... ,, | मधुवर्ग .... .... ,, बैंगनका गुण .... ,, | शहदका गुण .... ,, बड़ी कटेलीका गुण .... ९३ | शहदकी विशेषता .... १०० कन्दशाकका गुण .... ,, | मद्यवर्ग .... .... १०१ जमीकन्दका गुण .... ,, | सीधुमदिराका गुण .... ,, अम्लिक कन्दका गुण .... ,, | गौड़ी मदिराका गुण .... ,, पिण्डशाकका गुण .... ,, | मत्स्यंडी मदिराका गुण .... १०२ आलूका गुण .... ,, | माध्वीकमदिराका गुण .... ,, प्याजका गुण .... ,, | साधारणमदिराका गुण .... ,, रतालूका गुण .... ९४ | पैष्टी मदिराका गुण .... ,, हस्तिकंदका गुण .... ,, | महुआवृक्षकी मदिराका गुण .... ,, वाराहकन्दका गुण .... ,, | ताड़की मदिराका गुण .... १०३ फलवर्ग .... .... ,, | मदिराकी विशेषता .... ,, आंबके फलका गुण .... ९५ | चौपायोंका और दुपायोंका मांसवर्ग.... ,, जामन, बेर, अनार, चिरौंजीके गुण ,, | सरीसृपवर्णन .... १०४ विशेष वर्णन .... ,, | आनूपवर्णन .... ,, बिजौराका गुण .... ,, | जांगलवर्णन .... ,, नींबूका गुण .... ९६ | जलचरजीववर्णन .... १०५ नारंगीका गुण .... ९७ | ग्रामचारी पशुवर्ग .... ,,
विषयानुक्रमणिका. (७) विषय. पृष्ठ. | विषय. पृष्ठ. ग्रामचारी पक्षी .... १०५ | जलचरोंका मांसवर्ग .... १११ हरिणीके मांसका गुण .... ” | आड़ीआदि पक्षियोंके मांसका कृष्णमृगके मांसका गुण .... १०६ | गुण .... ” चित्रांगके मांसका गुण .... ” | मकरमच्छके मांसका गुण .... ” छिकारके मांसका गुण .... ” | मच्छके मांसका गुण .... ११२ रक्तमृगके मांसका गुण .... ” | कछुवाके मांसका गुण .... ” गैंडा, रोज़, भैंस, ऊंट, घोड़ा इनके | खेंकड़ाके मांसका गुण .... ” मांसके गुण .... ” | मांसविशेषता .... .... ” शूकरके मांसका गुण .... १०७ | वर्जनीय मांस .... .... ” शशाके मांसका गुण .... ” | अन्नपानवर्ग .... .... ११३ शेहके मांसका गुण .... ” | मंडका गुण .... .... ” शल्यकनामवाले जीवके मांसका गुण ” | भातका गुण .... .... ११४ गोहके मांसका गुण .... ” | गुड़याणीका गुण .... .... ” मूषाके मांसका गुण .... १०८ | यवागूका लक्षण .... .... ” स्थलमें विचरनेवाले जीवोंका मांसवर्ग ” | मंडका विशेष गुण .... .... ” लावापक्षीके मांसका गुण .... ” | खीरका गुण .... .... ” तीतरके मांसका गुण .... ” | खिचड़ीका गुण .... .... ११५ नीलामोरके मांसका गुण .... १०९ | दालका गुण .... .... ” साधारणमोरके मांसका गुण .... ” | खलका गुण .... .... ” मुर्गाके मांसका गुण .... ” | अनारका पन्ना .... .... ” कपोतके मांसका गुण .... ” | पापड़का गुण .... .... ” परेवाके मांसका गुण .... ” | संडाकीका गुण .... .... ” ककेराके मांसका गुण .... ” | उड़द आदिके बड़ोंका गुण .... ११६ खातीचिड़ाके मांसका गुण .... ११० | शिखरनका गुण .... .... ” चकोर, तोता, मैना, इनके मांसका | घृतयुक्त दहीकें पतले शिखरनके गुण ” गुण .... .... .... ” | ग्रंथका लक्षण और गुण .... ” कुंजके मांसका गुण .... .... ” | मांसका गुण .... .... ” कोयलके मांसका गुण .... .... ” | मांसकी श्रेष्ठता .... .... ११७ विवृताक्षके मांसका गुण .... ” | भूँजे हुए मांसका गुण .... .... ” घरके बत्तकके मांसका गुण .... ” | अत्युष्णमंडका गुण .... .... ”
( ८ ) हारीतसंहिता विषय. पृष्ठ. | विषय. पृष्ठ. मांडाका गुण. .... .... ११७ | स्वप्नाध्यायका वर्णन .... १२७ पूरी और घेवरका गुण .... ” | वर्ज्यस्वप्न .... ” गूंझामालपूवाका गुण .... ” | कालसे स्वप्न .... १२८ सोमालिकाका.गुण .... .... ११८ | स्वप्नमें शुभद्रव्य .... ” फेनीका गुण.. .... .... ” | अशुभद्रव्य .... ” भिन्नबडाका गुण .... .... ” | शुभस्वप्नोंका वर्णन.... .... ” अभिन्नबडाका गुण.... .... ” | शुभस्वप्न .... १२९ लड्डूका गुण... .... .... ” | अशुभस्वप्नोंका वर्णन .... १३० यवपोलिकाका गुण.... .... ११९ | स्वास्थ्यारिष्ट .... १३२ अन्नके गुणोंका उपसंहार .... ” | ध्रुवादिक न देखनेका अरिष्ट .... ” थकेहुए मनुष्यको भोजननिषेध .... ” | द्वितीयाचंद्रका अदर्शनका अरिष्ट .... ” भोजनके उपरांत मेहनत और सुरतका | कर्णघोष न सुननेका अरिष्ट .... १३३ निषेध .... .... ” | मुखश्वासादिका अरिष्ट .... ” थंडा और गरम भोजनका निषेध .... ” | प्रभातमें मस्तकशूलका अरिष्ट.... ” श्रमित आदिकोंके भोजनका निषेध .... ” | सूर्यबिंबादिकके दर्शनका अरिष्ट.... ” भोजनमें फलादिकोंका नियम .... १२० | इंद्रधनुष देखनेका अरिष्ट .... ” भोजनके पीछे बैठनेका नियम .... ” | विपरीत देखने सुननेका अरिष्ट .... १३४ भोजनमें पानीका नियम.... .... ” | शरीरके स्पर्शसे अरिष्टकथन .... ” भोजनके ऊपर व्यायाम .... ” | प्रतिबिम्ब न देखनेसे अरिष्ट .... ” भोजनके उपरांत नेत्रादिकोंका मार्जन .... ” | व्याध्यरिष्टका लक्षण .... १३५ अड़कारका नियम .... .... १२१ | अष्टमहाव्याधियोंका नाम .... ” व्यायामादिकोंका नियम .... ” | आठ महारोगोंके उपद्रव .... ” दिनमें शयन करनेका निषेध .... ” | ज्वररोगीके अरिष्ट.... .... ” दिनमें शयनकराने लायक मनुष्य.. ” | दारुण उपद्रवका अरिष्ट .... १३७ इति प्रथमस्थानं समाप्तम् | अतीसारका अरिष्ट.... .... ” सूजनका अरिष्ट .... .... ” द्वितीयं स्थानम् । | शूलका अरिष्ट .... .... ” अथ कर्मविपाक .... .... १२३ | पांडुरोगीका अरिष्ट.... .... १३८ पापदोषप्रतीकार .... .... १२५ | क्षयरोगका अरिष्ट .... .... ” अन्य अन्य रोगोंका कारण .... १२६ | श्वासरोगका अरिष्ट .... ”
विषयानुक्रमणिका. (९) विषय. पृष्ठ. | विषय. पृष्ठ. बहुत दिनतकके रोगका अरिष्ट..... १३८ | रोहिणी नक्षत्र .... १४७ उदररोगका अरिष्ट .... १३९ | मृग नक्षत्र .... ,, गुल्मरोगका अरिष्ट .... ,, | आर्द्रा नक्षत्र .... ,, रक्तपित्तका अरिष्ट .... ,, | पुनर्वसु नक्षत्र .... १४८ बवासीररोगका अरिष्ट .... ,, | पुष्य नक्षत्र .... ,, विद्रधिरोगका अरिष्ट .... ,, | आश्लेषा नक्षत्र .... ,, भ्रमरोगका अरिष्ट .... १४० | मघा नक्षत्र .... ,, आर्तवका अरिष्ट .... ,, | पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र .... ,, कामला और पांडुरोगका अरिष्ट.... ,, | उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र.... १४९ भगंदरका अरिष्ट .... ,, | हस्त नक्षत्र .... ,, अश्मरीरोगका अरिष्ट .... ,, | चित्रा नक्षत्र .... ,, मूढ़गर्भका अरिष्ट .... १४१ | स्वाती नक्षत्र .... ,, अपस्माररोगका अरिष्ट .... ,, | विशाखा नक्षत्र .... ,, वातव्याधिका अरिष्ट .... ,, | अनुराधा नक्षत्र .... १५० प्रमेहका अरिष्ट .... ,, | ज्येष्ठा नक्षत्र .... ,, कुष्ठरोगका अरिष्ट .... ,, | मूल नक्षत्र .... ,, उन्मादरोगका अरिष्ट .... १४२ | पूर्वा नक्षत्र .... ,, पंचेन्द्रियविकारवर्णन .... ,, | उत्तराषाढा नक्षत्र .... ,, नक्षत्रज्ञानवर्णन .... १४३ | श्रवण नक्षत्र .... १५१ मृत्युयोगोंका वर्णन .... ,, | धनिष्ठा नक्षत्र .... ,, अमृतयोगकथन .... १४४ | पूर्वा भाद्रपदा .... ,, क्रययोगवर्णन .... ,, | रेवती नक्षत्र .... ,, योगविज्ञान .... १४५ | अश्विनी नक्षत्र .... १५२ विशेष वर्णन .... ,, | भरणी नक्षत्र .... ,, असाध्य नक्षत्र .... ,, | नक्षत्रारिष्टोंका उपसंहार .... ,, साध्य नक्षत्र .... ,, | अथ होमकी विधि .... ,, कष्टसाध्य नक्षत्र .... ,, | शांतिप्रकार .... १५३ नक्षत्रोंके पीडाकी मर्यादा .... १४६ | दूतकी परीक्षाका लक्षण .... १५५ नक्षत्रोंके भागानुसार रोगोंकी मर्यादा १४७ | वर्ज्यदूतके लक्षण.... .... ,, कृत्तिका नक्षत्र .... ,, | शुभदूतके लक्षण.... .... १५७
( १० ) हारीतसंहिता-
| विषय. | पृष्ठ. | विषय. | पृष्ठ.. |
|---|---|---|---|
| दूतलक्षणोंका उपसंहार .... | १९४ | लंघित करनेमें अयोग्य रोगी .... | १६५ |
| शकुनवर्णन .... .... | ,, | लंघित करनेमें योग्य रोगी .... | ,, |
| शुभशकुन .... .... | ,, | छः प्रकारके लंघन .... | १६६ |
| दुष्टशकुन .... .... | १९५ | विरतकज्वरलक्षण.... .... | ,, |
| मृगादिकोंका शकुन .... | ,, | दोषपरत्वसे लंघनकी मर्यादा.... | ,, |
| मृगोंके संख्याका शकुन .... | ,, | वयपरत्वसे दोषोंके कोपका प्रकार | ,, |
| मोरआदिकोंका शकुन .... | ,, | ज्वरवालेको क्वाथ देनेका समय.... | १६७ |
| काकशकुन... .... .... | १९६ | क्वाथका प्रकार .... .... | ,, |
| जाहशशादिकोंका शकुन .... | ,, | सातप्रकारसे क्वाथ देनेके समय .... | ,, |
| गमन समयके विविधपदार्थदर्शन शकुन | ,, | औषधादि देनेके समयकी संज्ञा | १६८ |
| शकुनाध्यायका उपसंहार .... | १९१ | क्वाथके सात प्रकार .... | ,, |
| इति द्वितीयस्थानं समाप्तम् ॥ | सात प्रकारके क्वाथोंका लक्षण.... | ,, | |
| सात प्रकारके क्वाथोंका कार्य .... | ,, | ||
| अथ तृतीयस्थानम्। | क्वाथरक्षणका उपदेश .... | ,, | |
| औषधपरिज्ञानविधान .... | १६१ | क्वाथसम्बन्धी अनिष्ट लक्षण .... | १६९ |
| ज्वरसे उत्पन्न होनेवाले रोग .... | १६२ | हीनक्वाथके लक्षण .... | ,, |
| ज्वरसे उत्पन्न होनेवाले अन्य | उत्तम क्वाथका लक्षण .... | ,, | |
| प्रकारके रोग.... .... | ,, | वातज्वरमें पाचनकी विधि .... | ,, |
| दिनमें शयन करनेसे होनेवाले रोग | ,, | पित्तज्वर और कफज्वरमें पाचनकी | |
| महाभयंकर रोग .... .... | १६३ | विधि .... .... | ,, |
| सर्वव्याधियोंका हेतु .... | ,, | पाचनका निषेध .... .... | १७० |
| वातादिदोषोंका पाचनकाल .... | ,, | ज्वरकी मर्यादा .... .... | ,, |
| पाचनादिक्रियाका समय .... | ,, | ज्वरमें पाचनादिदेनेकी मर्यादा.... | ,, |
| धातुगतदोषोंका पाचनकाल .... | १६४ | क्वाथके विपत्तिका प्रकार .... | ,, |
| अपकदोषमें औषधका निषेध .... | ,, | पथ्यकी आवश्यकता .... | ,, |
| लंघनका उपचार .... .... | ,, | ज्वरितको पथ्य भोजनका उपदेश | ,, |
| लंघनप्रकरण .... .... | ,, | मध्यलंघनितकी अन्नविधि .... | १७१ |
| शुद्धलंघनितका लक्षण .... | ,, | क्रमशांतिकी विधि.... .... | ,, |
| मध्यमलंघनितका लक्षण .... | ,, | क्वाथ पीनेकी विधि .... | ,, |
| अतिलंघनितका लक्षण .... | १६५ | ज्वरचिकित्सा .... .... | १७२ |
विषयानुक्रमणिका. (११) | विषय. पृष्ठ. | विषय. पृष्ठ. | | कुवैद्यनिंदा .... .... १७२ | ज्वरकी विशेषता .... .... १७९ | | वैद्यका लक्षण .... .... ,, | वातज्वरमें पाचन .... .... ,, | | वैद्यकशास्त्रोंकी पठनकी आवश्यकता .... ,, | पित्तज्वरका पाचन .... .... १८० | | रोग नहीं जाननेसे हानि .... १७३ | कफज्वरमें पाचन .... .... ,, | | वैद्यशास्त्रज्ञातांका फल .... ,, | संनिपातज्वरमें पाचन .... .... ,, | | रोगादिक जाननेकी आवश्यकता .... ,, | ज्वरमें पथ्य .... .... ,, | | देशकालादिक जाननेकीं | वातज्वरका निदान और चिकित्सा .... ,, | | आवश्यकता .... .... ,, | वातज्वरका पाचन.... .... १८१ | | रोगहेतु वातादि दोष .... .... ,, | अन्नहीन औषधका गुण और .... ,, | | रोगपरीक्षाकें प्रकार .... १७४ | निषेधका विशेष वर्णन .... .... ,, | | साध्यासाध्यका लक्षण .... ,, | पाचन हुए औषधका लक्षण .... ,, | | साध्यादिक होनेका कारण .... ,, | उछलनेवालें औषधका लक्षण .... ,, | | उपद्रवका लक्षण .... .... ,, | पाचन होनेमें शेष रहे औषधका लक्षण ,, | | रोग निर्मूल करनेकी आज्ञा .... १७५ | भोजनके उपरांत देनेके औषधका गुण १८२ | | सूक्ष्म भी रोग शत्रुसमान है .... ,, | वातज्वरमें पंचमूलका काथ .... ,, | | रोगके फैलनेके प्रथम ही प्रती- | पित्तज्वरके निदान और चिकित्सा .... ,, | | कार करना .... .... ,, | रोध्रादि काथ .... .... १८३ | | व्याधियोंका प्रकार.... .... १७६ | शक्राहादि काथ .... .... ,, | | तीनप्रकारके व्याधियोंका प्रकार .... ,, | दुरालभादि काथ .... .... ,, | | ज्वरकी व्यापकता.... .... ,, | पित्तपापडा काथ.... .... ,, | | जातिपरत्वमें ज्वरकी असाध्यता.... ,, | शुंठीदि काथ .... .... १८४ | | ज्वरकी बलिष्ठता .... .... ,, | गुडूच्यादि काथ .... .... ,, | | मनुष्य ज्वर सह सकता है तिसका कारण १७७ | द्राक्षादि काथ .... .... ,, | | सर्वरोगमें ज्वरकी श्रेष्ठता .... ,, | दाहतृषामूर्च्छाके उपर विदार्यादिकां | | पृथक् प्राणिभेदसे ज्वरके नामान्तर .... ,, | उपचार दाहज्वरकी उपाय.... .... ,, | | ज्वरके स्वरूपका लक्षण .... १७८ | ज्वरशोषकी उपाय .... .... १८५ | | ज्वरकी उत्पत्ति .... .... ,, | कफज्वरकी निदान और चिकित्सा .... ,, | | ज्वरकी निदानसहित संप्राप्ति .... ,, | कफज्वरका पाचन पिप्पल्यादि कल्क ,, | | ज्वरके हेतु .... .... १७९ | व्याघ्रादि कल्क .... .... १८६ | | प्रकट हुए ज्वरका लक्षण .... ,, | वासादि काथ .... .... ,, |
( १२ ) हारीतसंहिता-
| विषय. | पृष्ठ. | विषय. | पृष्ठ. |
|---|---|---|---|
| आमलक्यादि काथ .... | १८६ | भूनिम्बादि काथ .... | १९३ |
| पिप्पल्यादि काथ .... .... | ” | बृहद्राक्षादि काथ .... | १९४ |
| पिप्पलीका अवलेह .... | ” | लघुराक्षादि .... | ” |
| वातपित्तज्वरका निदान और चिकित्सा | ” | त्रिवृतादि मलभेदन .... | ” |
| वातपित्तज्वरका पाचन त्रिफलादिकाथ | १८७ | संनिपातस्वेदहर .... | १९५ |
| शालिपर्ण्यादि कल्क.... .... | ” | नस्यविधान .... | ” |
| किरातादि काथ .... .... | ” | प्रधमनविधि .... .... | ” |
| पंचभद्र काथ .... .... | ” | अंजनविधि .... .... | ” |
| पित्तकफज्वरका निदान और चिकित्सा | ” | निष्ठीवनविधि .... .... | १९६ |
| पित्तकफज्वरका पाचन शुंठ्यादिकाथ | १८८ | सन्निपातमें विशेषता .... | ” |
| द्राक्षादि काथ .... .... | ” | कर्णमूलका निदान और चिकित्सा | १९८ |
| गुडूच्यादि काथ .... .... | ” | कर्णशोथ ऊपर लेप.... .... | ” |
| अन्य गुडूच्यादि काथ .... | ” | दूसरा लेप .... .... | ” |
| पटोलादि काथ .... .... | १८९ | व्रणरोपण औषध .... .... | १९९ |
| अन्यपटोलादि काथ.... .... | ” | कर्णशोथवालेको पथ्य .... | ” |
| वातकफज्वरका निदान और चिकित्सा | ” | अंतर्दाहका कारण.... .... | २०० |
| आरग्वधपंचक .... .... | ” | अंतर्दाहकी चिकित्सा .... | ” |
| क्षुद्रादि पाचन .... .... | १९० | बाह्यदाहका कारण और चिकित्सा | ” |
| पर्पटादि काथ .... .... | ” | शरीर शीतल और आधा गरम होनेका | |
| दशमूल काथ .... .... | ” | कारण और चिकित्सा.... .... | ” |
| त्रिदोषजज्वरका निदान और चिकित्सा | ” | शीतल अंगमें गरम करनेकी चिकित्सा | २०१ |
| त्रिदोषजज्वरकी यशःप्रापक चिकित्सा | ” | गर्मीका उपचार .... .... | ” |
| सन्निपातज्वरका लक्षण और चिकित्सा | १९१ | शीतत्वका उपचार.... .... | २०२ |
| सन्निपातज्वरकी चिकित्सा .... | ” | ज्वरादिकोंका कारण वायु है .... | ” |
| दशांग काथ .... .... | १९२ | ज्वरमुक्तिका लक्षण.... .... | ” |
| भूनिम्बादि काथ .... .... | ” | ज्वर उतरनेका लक्षण .... | ” |
| शुंठ्यादि क्वांथ .... .... | ” | ज्वर नहीं उतरनेका और लौट | |
| मुस्तादि क्वाथ .... .... | १९३ | आनेका लक्षण.... .... | ” |
| बृहत्यादि काथ .... .... | ” | विषमज्वरका लक्षण और चिकित्सा | २०३ |
| शख्यादि पाचन .... .... | ” | एकाहिक ज्वरका लक्षण .... | ” |
विषयानुक्रमणिका. ( १३ ) विषय. पृष्ठ. विषय. पृष्ठ. तृतीयज्वरलक्षण .... .... २०३ अतीसारका लक्षण .... .... २१२ चातुर्थिकज्वरलक्षण.... .... ” ज्वरातिसार.... .... .... २१३ बेलाज्वरादिकका लक्षण .... २०४ अतीसारकी चिकित्सा .... ” भूतादिकसे उपजे रोग .... ” ज्वरातिसारके ऊपर उत्पलषट्क .... ” निदिग्धिकादि काथ.... .... ” शुं log्य्यादिकाथ.. .... .... २१४- गुडपिप्पली .... .... २०५ पाठादिकाथ .... .... ” लघुपंचमूलकाथ .... .... ” शुंठ्यादिपाचन .... .... ” जीर्णज्वरपर पटोलादि काथ .... ” वत्सकादिकाथ .... .... ” विषमज्वरका औषध.... .... ” पंचमूलीकाथ. .... .... ” चातुर्थिक ज्वरका उपाय .... ” उत्पलादिपाचन .... .... २१५. चातुर्थिकपर नस्य .... .... २०६ उशीरादिकाथ .... .... ” विषमज्वरपर लशुनकल्क .... ” जंब्वादिस्वरस .... .... ” विषमज्वरपर अष्टांगधूप .... ” काकमाचीका प्रयोग.... .... २१६ वेलाज्वरआदिकोंका उपाय .... ” जंबूट्वगादिका अवलेह .... ” ज्वरनाशक हनुमानका पूजन .... २०७ अतीसारका पूर्वरूप.... .... ” ज्वरनाशक मंत्र .... .... ” वातातिसारका लक्षण और चिकित्सा .... ” चारवर्णवाले ज्वरोंके चिह्न .... २०८ अतीसारका पाचनकल्क .... २१७ ब्राह्मण ज्वर ..... ” बालकादि कल्क ..... .... ” क्षत्रिय ज्वर ..... ” शालिपर्ण्यादि पानक .... ” वैश्य ज्वर .... .... ” तिंदुकादिरसपानक..... .... ” शूद्र ज्वर .... .... ” कुटजपुटपाक .... .... २१८ ब्राह्मणज्वरका लक्षण और शांति .... ” पित्तातिसारका लक्षण और चिकित्सा .... ” क्षत्रियज्वरका लक्षण और शांति.... २०९ शालिपर्ण्यादि पान .... .... २१९ वैश्यज्वरका लक्षण और शांति .... ” दशमूलका काथ .... .... ” शूद्रज्वरका लक्षण और शांति .... २१० धान्यपंचकादि काथ .... .... ” सर्वरोगोंपर उपचार .... ” शाल्मलीमूलकल्क .... .... ” ज्वरवालेको पथ्य आहारादि .... ” कफातिसार लक्षण .... ” ज्वरवालेको अपथ्य.... .... २११ कफातिसारकी चिकित्सा .... २२० ज्वरमुक्तोंका वर्तना.... .... ” त्र्यूषणादिक पाचन.... .... ” अतीसारचिकित्सा .... .... २१२ कालिङ्गादि कल्क .... .... ”
( १४ ) हारीतसंहिता- विषय. पृष्ठ. | विषय. पृष्ठ. वत्सकादि क्वाथ .... .... २२० | गुल्मचिकित्सा .... .... २२९ रक्तातिसारका लक्षण .... " | गुल्मके भेद .... .... २३० धान्यादि क्वाथ .... .... २२१ | गुल्मके निदान .... .... " दाड़िमादि क्वाथ .... .... " | यकृद्गुल्मका लक्षण .... .... २३१ गुड़बिल्वादियोग .... .... " | शुंठादिचूर्ण .... .... " वत्सकावलेह .... .... " | क्षारामृत .... .... " कुटजादि चूर्ण .... .... " | यकृद्रोगपर पाचन .... .... २३२ सन्निपातके अतिसारका लक्षण और | यकृद्गुल्मपथ्य .... .... २३३ चिकित्सा .... .... " | निंबादिक्वार्थ .... .... " कुटजाष्टक .... .... २२२ | सौराष्ट्रीकादिक्वाथ .... .... " अमृतवटक .... .... " | धवादिक्वाथ .... .... " बिल्वादि चूर्ण .... .... २२३ | कदलीजलपानक .... .... " गुदाके निकसनेको बंध करनेकी | विजोरा आदिक पान .... २३४ चिकित्सा .... .... " | खारका सेवन .... .... " अतीसारविशेषता .... २२४ | आमाजीर्णका उपाय .... " अतीसारका भेद संग्रहणीरोगका | दिवास्वापविधान .... .... " निदान और चिकित्सा .... " | हरीतक्यादि अंजन विषूचीपर .... २३५ ग्रहणीके प्रकार .... .... २२५ | रास्नादिभक्षण .... .... " ग्रहणीका उपद्रव तथा गुल्मादिकोंकी | स्वेदका उपयोग .... .... " संप्राप्ति .... .... " | गंधकादिकभक्षण .... .... " गुल्मसंज्ञक ग्रहणीरोगका लक्षण .... २२६ | कृमिरोगके प्रकार और तिन्होंके भेद .... " वातकी संग्रहणीका लक्षण .... " | जूमकी उत्पत्ति .... .... २३६ पित्तकी संग्रहणीका लक्षण .... " | कृमि उत्पन्न होनेका कारण .... " कफकी संग्रहणीका लक्षण .... " | छःप्रकारके अंतर्गत कृमि .... २३७ सन्निपातकी संग्रहणीका लक्षण .... " | कृमिरोगका लक्षण .... .... " वातग्रहणीका पाचन .... .... २२७ | सूचीमुखकृमिका लक्षण .... .... " पित्तग्रहणीका पाचन .... " | धान्यांकुरकृमिका लक्षण .... २३८ शुंठाद्यमृतप्राशन .... .... " | हारीतका प्रश्न .... .... " अभयावलेह .... .... २२८ | आत्रेयजीका उत्तर .... .... " द्राक्षादि पिण्डी .... .... २२९ | कृमिपातनका औषध .... .... २३९
विषयानुक्रमणिका. (१६) विषय. पृष्ठ. | विषय. पृष्ठ. कृमिनष्टकरनेकी औषध .... २४९ | बृहद्विङ्गु चूर्ण .... .... २५१ मंदाग्नि आदि अग्नियोंके निदान | पित्तशूलचिकित्सा .... .... " और चिकित्सा .... .... २५० | दाड़िमादिचूर्ण .... .... २५२ चार प्रकारके अग्निका लक्षण .... " | जीवंत्यादि घृत .... .... " चार प्रकारके अग्निका परिणाम विशेष २४१ | पित्तशूलका दूसरा उपचार .... " जठराग्निकी चिकित्सा .... २४२ | पित्तशूलमें भोजन .... .... " विषमाग्निकी चिकित्सा .... " | कफशूलचिकित्सा .... .... " तीक्ष्णाग्निकी चिकित्सा .... " | बिल्वादि क्वाथ .... .... २५३ हरीतक्यादिवटी .... .... २४३ | मातुलुंगादि रस .... .... " यवानी खांडवचूर्ण .... .... २४४ | तुबरादि चूर्ण .... .... " अरोचक चिकित्सा.... .... " | एरंडादि क्वाथ .... .... " शूलनिदान .... २४५ | वातपित्तशूलचिकित्सा.. .... २५४ वातशूलकी उत्पत्ति .... .... " | दुरालभादि कल्क .... " पित्तशूलनिदान .... .... २४६ | वातकफशूलचिकित्सा .... " कफशूलकी उत्पत्ति .... .... " | दार्वादि क्वाथ .... .... " द्विदोषजशूलकी उत्पत्ति .... २४७ | त्रिदोषशूलचिकित्सा .... .... " दशप्रकारके शूल .... .... " | सर्वशूलपर उपाय .... .... २५५ शूलोंकी साध्यासाध्यपरीक्षा .... " | शंखक्षार .... .... " शूलोंकी संख्या और पृथकरण .... " | सामान्यसे सब शूलोंकी चिकित्सा .... " वातशूलका लक्षण .... .... २४८ | चित्रकादि मोदक .... .... " पित्तशूलका लक्षण .... .... " | यवान्यादि चूर्ण .... .... २५६ कफशूलका लक्षण .... .... " | हिंग्वादिगुटी .... .... " द्वंद्वजशूलका कारण .... .... " | शूलरोगके उपद्रव .... .... " सब प्रकारके शूलोंकी चिकित्सा .... २४९ | शूलमें पथ्यापथ्य .... .... २५७ शूल तथा गुल्मपर हिंग्वादि क्वाथ .... " | पांडुरोगचिकित्सा .... .... " वातशूलपर हिंग्वादि क्वाथ .... " | पांडुरोगका निदान .... .... २५८ सैंधवादि चूर्ण .... .... २५० | पांडुरोगका पूर्वरूप .... .... " हिंग्वादि चूर्ण .... .... " | वातपांडुका लक्षण .... .... " तुंबुरु आदि चूर्ण .... .... " | पित्तपाण्डुका लक्षण .... .... " एरंडादि क्वाथ .... .... " | कफपांडुका लक्षण .... .... २५९
( १६ ) हारीतसंहिता-
| विषय. | पृष्ठ. | विषय. | पृष्ठ. |
|---|---|---|---|
| त्रिदोषजपांडुका लक्षण .... | २६९ | रसवृद्धिकारक औषध .... | २६९ |
| मट्टीखानेसे हुए पांडुका लक्षण .... | ,, | मेदोवृद्धिकारक औषध .... | ,, |
| लोहचूर्णवटी .... | २६० | अस्थिवृद्धिकारक औषध .... | ,, |
| शुंठादिमिश्रित लोहचूर्ण .... | ,, | शुक्रवृद्धिकारक औषध .... | ,, |
| मंडूकवटी .... | ,, | बलादि चूर्ण .... | २७० |
| वज्रमण्डूकवटक .... | २६१ | च्यवनप्राशनामक अवलेह .... | २७१ |
| दूसरा वज्रमण्डूकवटक .... | ,, | अगस्ति हरीतकी पाक .... | २७३ |
| अमृतवटक .... | २६२ | बलाक्वाथ .... | २७४ |
| पांडुरोगका पथ्यापथ्य .... | २६३ | पिप्पलीवर्धमान .... | ,, |
| क्षयरोगकी चिकित्सा .... | ,, | शिलाजतुचूर्ण .... | २७५ |
| क्षयरोगमें पापरूपी कारण .... | २६४ | जीवंत्यादि घृत .... | ,, |
| क्षयरोगके हेतु .... | ,, | पिप्पली आदि घृत .... | २७६ |
| क्षयरोगके प्रकार .... | २६५ | पंचकोल आदि घृत .... | ,, |
| वातक्षयका निदान .... | ,, | पाराशरघृत .... | २७७ |
| वातक्षयका लक्षण .... | ,, | बला आदि घृत .... | ,, |
| वातक्षयमें सेव्यपदार्थ .... | ,, | चन्दनादि तैल .... | २७८ |
| पित्तक्षयके हेतु .... | ,, | राजयक्ष्मारोगका निदान .... | २७९ |
| पित्तक्षयकी चिकित्सा .... | २६६ | राजयक्ष्माके लक्षण .... | ,, |
| कफक्षयका कारण .... | ,, | राजयक्ष्माका इलाज .... | २८० |
| कफक्षयका लक्षण .... | ,, | राजयक्ष्मावालेकी आयुष्यमर्यादा .... | ,, |
| कफक्षयकी चिकित्सा .... | ,, | अमृतप्राशन घृत .... | २८१ |
| त्रिदोषजक्षयकी चिकित्सा .... | ,, | तालकान्त्रातक .... | २८२ |
| धातु रस आदि सात ७ प्रकारके क्षयरोगके लक्षण .... | ,, | गुडूच्यादि चूर्ण .... | ,, |
| क्षयरोगपर पथ्यापथ्य .... | ,, | ||
| रसक्षयका लक्षण .... | २६७ | रक्तपित्तका निदान और चिकित्सा .... | २८३ |
| मांसक्षयका लक्षण .... | ,, | रक्तपित्तके उपद्रव .... | २८५ |
| मेदःक्षयका लक्षण .... | ,, | रक्तपित्तका लक्षण .... | ,, |
| अस्थिक्षयका लक्षण .... | ,, | रक्तपित्तकी चिकित्सा .... | २८६ |
| वीर्यक्षयका लक्षण .... | २६८ | ऊर्ध्वरक्तका उपाय .... | ,, |
| रसरक्त वृद्धिकारक औषध .... | ,, | वासादि क्वाथ .... | ,, |
विषयानुक्रमणिका. (१७) विषय. पृष्ठ. | विषय. पृष्ठ. निंबक्वाथ अथवा अडूसाका काथ .... २८६ | गुदामें अर्शका स्थान .... ३०० वासाकी प्रशंसा .... ,, | अर्शकी चिकित्साका प्रकार .... ,, तालीस चूर्ण .... २८७ | अर्शरोगके उपद्रव .... ,, अडूसाका काथ और कल्क .... ,, | असाध्यअर्श .... ३०१ नासामवृत्तरुधिरचिकित्सा .... २८८ | पाचनक्वाथ .... ,, हारितालकादि नस्य .... ,, | कल्कयोग .... ,, आम्रादि नस्य .... ,, | पत्रकादिक्वाथ .... ,, पलांड्वादि नस्य .... २८९ | पिप्पल्यादि योग .... ३०२ वासादि पानक .... ,, | वार्ताकयोग .... ,, दाडिमादि रस .... ,, | भल्लातकचतुष्टय .... ,, मुखमें प्रवृत्त हुए रुधिरकी चिकित्सा ,, | कल्याणनामकलवण .... ,, दाडिमपुष्पादि नस्य .... ,, | भल्लातक वटक .... ३०३ शतावरीघृत .... २९१ | प्राणदेनेवाला मोदक .... ,, मृद्वीका आदि घृत .... ,, | कांकायन गुटिका .... ३०४ कूष्मांडायवलेह .... २९२ | लवणोत्तमादि .... ३०५ अन्य कूष्माण्डका अवलेह .... २९३ | एलादिगुटिका .... ,, खंडखाद्यरसायन .... ,, | अर्शनाशकचतुःसम मोदक .... ,, रक्तातिसारचिकित्सा .... २९५ | त्रिकटुकाद्यमोदक .... ,, योनिप्रवाहचिकित्सा .... ,, | मरिचाद्यमोदक .... ३०६ अर्शचिकित्सा .... २९६ | सूरणपिंड .... ,, अर्शके प्रकार .... ,, | भीमवटक .... ,, वातार्शके हेतु और संप्राप्ति .... २९७ | चव्याद्यघृत .... ३०७ पित्तार्शका हेतु .... ,, | पिप्पल्याद्यतैल .... ,, कफार्शका हेतु .... ,, | मुस्ताद्यवटक .... ३०८ वातार्शका लक्षण .... २९८ | भल्लातकगुड़ .... ३०९ पित्तार्शका लक्षण .... ,, | अन्यभल्लातकगुड़ .... ,, कफार्शका लक्षण .... ,, | भल्लातकावलेह .... ३१० त्रिदोषार्शका लक्षण .... ,, | रक्त बवासीरकी चिकित्सा .... ३११ गुदरोगलक्षण .... ,, | वर्तियोग .... ३१२ अर्शके स्थान .... २९९ | देवादाल्यादिलेप .... ,,
१. प्रथम स्थान: परिभाषा, ऋतुचर्या व दिनचर्या स्थान
( १८ ) हारीतसंहिता-
| विषय. | पृष्ठ. | विषय. | पृष्ठ. |
|---|---|---|---|
| अर्शरोगपर शस्त्रादिकर्म | ३१२ | वात आदि दोषोंसे उपजी तृषाके क्रमसे लक्षण | ३२६ |
| अर्शरोगमें पथ्य | ३१३ | त्रिदोषकी तृषाका लक्षण | ,, |
| अथ खांसीकी चिकित्सा | ३१४ | अन्यतृषाओंके लक्षण | ,, |
| कासरोगके हेतु | ,, | असाध्य तृष्णाका लक्षण | ३२७ |
| कासरोगकी संप्राप्ति | ३१५ | वातकी तृषाकी चिकित्सा | ,, |
| कासरोगके प्रकार | ,, | पित्तकी तृषाकी चिकित्सा | ,, |
| वातसे उपजी खांसीका लक्षण | ३१६ | कफकी तृषाकी चिकित्सा | ३२८ |
| पित्तसें उपजी खांसीके लक्षण | ,, | त्रिदोषकी तृषाकी चिकित्सा | ,, |
| कफकी खांसीके लक्षण | ,, | तालुशोषकी चिकित्सा | ३२९ |
| त्रिदोषकी खांसीके लक्षण | ,, | दाड़िमकोल | ,, |
| क्षतजखांसीके लक्षण | ,, | तृष्णाआदिकोंकी साधारण चिकित्सा | ,, |
| रक्तकी खांसीके लक्षण | ३१७ | मूर्च्छाकी संप्राप्ति | ३३० |
| सबप्रकारकी खांसीयोंके लक्षण | ,, | मूर्च्छाका लक्षण | ३३१ |
| वातकी खांसीकी चिकित्सा | ३१८ | वातज आदि मूर्च्छालक्षण | ,, |
| कट्फल आदि औषध | ,, | पित्तज मूर्च्छालक्षण | ,, |
| द्राक्षादि औषध | ३१९ | कफजमूर्च्छा | ३३२ |
| बालकादिकल्क | ,, | सन्निपातजमूर्च्छा | ,, |
| मुस्तादिचूर्ण | ,, | रक्तगंधजमूर्च्छा | ,, |
| पित्तकी खांसीकी चिकित्सा | ,, | मद्यादिजन्यमूर्च्छा | ३३२ |
| लघुतालीस आदि औषध | ३२० | मूर्च्छा, भ्रम, निद्रा और तन्द्रा इन्होंका हेतु | ,, |
| बृहत्तालीसाद्य औषध | ३२१ | मूर्छाकी चिकित्सा | ३३३ |
| छर्दिलक्षण | ,, | रक्तमूर्च्छा आदिकोंका उपाय | ,, |
| वातछर्दीकी चिकित्सा | ३२२ | नष्टसंज्ञमूर्च्छितकी चिकित्सा | ३३४ |
| पित्तकी छर्दीकी चिकित्सा | ३२३ | मूर्च्छा, मद, भ्रम इन्होंकी चिकित्सा | ,, |
| कफकी छर्दीकी चिकित्सा | ३२४ | मूर्च्छादिकोंके साधारण उपाय | ,, |
| एलादिचूर्ण | ,, | निद्राचिकित्सा | ३३५ |
| छर्दीकी शमनक्रिया | ,, | मदात्ययचिकित्सा | ३३६ |
| छर्दरोगमें पथ्यापथ्य | ३२५ | वातादिदोषजन्य मदात्यय | ३३७ |
| तृषा और तालुशोषकी संप्राप्ति | ,, |
विषयानुक्रमणिका. (१९)
| विषय. | पृष्ठ. | विषय. | पृष्ठ. |
|---|---|---|---|
| मदात्ययकी चिकित्सा | .... ३३७ | सोलह प्रकारके समान वायुके कोप | ३५१ |
| सुपारीके मदका निदान और चिकित्सा | ३३८ | सोलह प्रकारके अपान वायुके लक्षण | ,, |
| कोदूं आदिसे उपजे मदात्ययकी चिकित्सा | " " | अर्दित अर्थात् लकुआके लक्षण | ,, |
| दाहकी संप्राप्ति आदिक | .... " | द्वंदज अर्दितका लक्षण | .... ३५२ |
| दाहकी चिकित्सा | .... ३३९ | असाध्य अर्दित | .... ,, |
| मृगीरोगकी संप्राप्ति आदिक | .... ३४० | अपान आदिक वातोंकी चिकित्सा | ३५३ |
| मृगी रोगकी चिकित्सा | .... ३४१ | स्नेहन नामक घृत | .... " |
| कूष्मांडलेह | .... " | निरूहण बस्ति | .... ,, |
| कूष्मांड घृत | .... " | पाचन तथा शमनका कथन | .... ३५४ |
| दीपघृत | .... ३४२ | सर्वांगवायुकी चिकित्सा | .... ,, |
| ब्राह्मीघृत | .... ,, | रसोतक योग | .... ३५५ |
| अन्य उपाय | .... ,, | वातको शमन करनेवाले काथ | .... " |
| त्र्यूषणादि गुटिका | .... ,, | बला आदिक औषध | .... ३५६ |
| चंदनादि चूर्ण | .... ३४३ | बलाआदितैल | .... ३५८ |
| द्राक्षावलेह | .... ३४४ | भृंगराजतैल | .... ,, |
| अन्य उपाय | .... ३४५ | आमपाककी चिकित्सा | .... ३५९ |
| उन्मादनिदान | : ,, | नारायणनामकतैल | .... ३६० |
| वातव्याधिचिकित्सा तहां सोलह प्रकारकी शिरोगत प्राणवायुका प्रकोप | .... ३४६ | आमवातचिकित्सा | .... ३६१ |
| विष्टंभी आमके लक्षण | .... ३६२ | ||
| गुल्मीआमका लक्षण | .... ,, | ||
| सोलह प्रकारके उदान वायुके कोप | ३४७ | स्नेही आमके लक्षण , | ,, |
| व्यानवायुके कोपके लक्षण | .... ३४८ | आमके लक्षण | .... ३६३ |
| समानवायुका प्रकोप | .... ,, | पकाम और सर्वांगआमके लक्षण | ,, |
| आक्षेपक वायुका लक्षण तथा अपतन्त्रक वायुके लक्षण | .... ३४९ | पाचनविधि | .... ३६४ |
| आमवातरोगको शमनकरनेवाली औषध | .... ३६५ | ||
| अप्रतानक वायुका प्रकोप | .... ,, | ||
| एकांग वायु | .... ३५० | आमवातमें वर्ज्य | .... ३६७ |
| एकांग पक्षघात वायु | .... ,, | गृध्रसीवातका निदान और लक्षण | ,, |
| तूनी तथा प्रतितूनी वायु | .... ,, | गृध्रसीवातकी चिकित्सा | .... ३६८ |
| व्यानवायुके कोपका लक्षण | .... ,, | वातरक्तका निदान और लक्षण | .... ३६९ |
(२०) हारीतसंहिता-
| विषय. | पृष्ठ. | विषय. | पृष्ठ. |
|---|---|---|---|
| वातरक्तकी चिकित्सा | ३६९ | प्रमेहके लक्षण .... | ३८५ |
| अम्लपित्तका निदान | ३७० | प्रमेहचिकित्सा .... | ३८६ |
| अम्लपित्तकी चिकित्सा .... | ,, | प्रमेहपिटिकाकी चिकित्सा .... | ३८८ |
| शोफचिकित्सा | ३७१ | प्रमेहमें पथ्यापथ्य .... | ३८९ |
| पुनर्नवादिकाथ | ३७३ | पीतप्रमेहपर हरिद्रादिकाथ | ३९० |
| अन्य उपाय .... | ,, | पित्तप्रमेहपर कमलादि काथ .... | ,, |
| गुल्मनिदान और लक्षण | ३७४ | आमलक्यादिचूर्ण .... | ,, |
| गुल्मचिकित्सा | ३७५ | खादिरादि चूर्ण .... | ,, |
| शुंठ्यादि काथ .... | ,, | कुष्ठादि चूर्ण.... .... | ३९१ |
| स्नेह विधि .... | ,, | मूत्रकृच्छ्रचिकित्सा .... | ,, |
| शुंठ्यादि पानक .... | ३७६ | मूत्ररोधचिकित्सा .... | ३९२ |
| विरूक्षण .... | ,, | मूत्रकृच्छ्रका कारण .... | ३९३ |
| वातगुल्मपाचन .... | ३७७ | मूत्रकृच्छ्रपर उपाय | ,, |
| पित्तगुल्म तथा कफके गुल्मका पाचन | ,, | अश्मरी अर्थात् पथरी रोगकी | |
| वातके गुल्ममें जुलाब .... | ,, | चिकित्सा .... | ३९५ |
| पित्तके गुल्ममें जुलाब .... | ३७८ | अश्मरीरोगपर चिकित्सा .... | ३९६ |
| कफगुल्मपर विरेचन .... | ,, | एलादि काथ .... | ,, |
| क्षारपान .... | ३७९ | गोक्षुरकादि चूर्ण .... | ,, |
| अजमोदादि औषध .... | ,, | अन्य उपाय .... | ३९७ |
| हिंग्वादिचूर्ण .... | ,, | वृषणचिकित्सा .... | ,, |
| पित्तगुल्मोदरचिकित्सा .... | ३८० | वृषण वृद्धिपर चिकित्सा .... | ३९८ |
| कफके गुल्मकी चिकित्सा .... | ,, | विसर्प रोगकी चिकित्सा .... | ३९९ |
| वातकफके गुल्मकी चिकित्सा.... | ३८१ | उपसर्ग चिकित्सा .... | ४०१ |
| सन्निपातके गुल्मकी चिकित्सा.... | ,, | मसूरिकाकी चिकित्सा .... | ४०२ |
| शोथचिकित्सा .... | ३८२ | व्रणचिकित्सा .... | ४०४ |
| शोथरोगमें वर्ज्य .... | ,, | जात्यादिघृत .... | ४०७ |
| रक्तगुल्ममें पाचन .... | ३८३ | श्लीपदरोगका निदान तथा लक्षण | ,, |
| रक्तगुल्ममें पथ्य .... | ,, | अर्बुदरोगकी चिकित्सा .... | ४०८ |
| जलोदरका निदान तथा लक्षण.... | ३८४ | क्षत तथा गंडमाला रोगका निदान | |
| जलोदररोगकी चिकित्सा .... | ,, | और लक्षण .... | ४०९ |