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इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta) द्वारा

स्रोत: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (उद्गम)

Devanagarihipublished250 पृष्ठ

श्री वीरेन्द्र गुप्तः

संदर्भ जाति के उन्नायक

(गुप्तः, अब तो उजागर हैं, 'गुप्तः' की परिधि सीमा से बाहर)

भूषण कुल के कुल भूषण तुम

तुमने वह दीप जलाया है

जिसके प्रकाश में स्वजाति ने

निर्मल गौरव पाया है।

तुम धन्य हुए हम सुखी हुए

साहित्य तुम्हारा पढ़ करके।

जीवन क्या हो, यह कैसा हो,

यह सब है, अपने हाथों में

परिवार की वृद्धि कैसी हो

विस्तार सहित बतलाया है।

संतान हमारी कैसी हो

वह देव बने या दनुज बने

तन स्वस्थ रहे मन रहे निर्मल

अविरल गंगा की धार बने।

परमार्थी हो शुचि जीवन भी

स्व कर्म रूप दर्शाया है।

सुकुमार हृदय का नमन 'वीर'

स्वीकारो तुम, मैं धन्य बन्ने,

तेरे पथ पर ही चलने को

मन को अपने समझाया है।

इच्छानुसार सन्तान

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वीरेन्द्र गुप्तः

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri

भूषण कुल के मणि भूषण हो पावन वह दीप जलाया है, जगमग प्रकाश की आभा में जाति ने नाम कमाया है।

हे कर्मवीर छाया तेरी मिलती रहे, भविष्य में भी, बस यही विनय है ईश्वर से उर की अभिलाषा हम सबकी।

आशीष तुम्हारा पा करके खिल उठे हमारा यह जीवन, हम रहें धर्म निष्ठा में भरत हो प्रेम-पूर्ण व्यवहारी मन।

— ‘सुकुमार’

दीनदयाल नगर, एम.डी.ए., मुरादाबाद।

ज्योतिष एक विद्या (विज्ञान) है, गणित है।

इसके द्वारा विवाह, व्यापार, सन्तान, रोग आदि के विषय में जाना जा सकता है। यदि आप के पास जन्म-समय, तिथि, स्थान आदि हो तो अपनी समस्याओं के निदान हेतु आप इस पते पर सम्पर्क करें।

विजय कुमार ‘दिव्य’

(ज्योतिर्विद एवं आयुर्वेद रत्न)

ज्योतिष धाम

राजोगली, बर्तन बाजार, मुरादाबाद - २४४००१

दूरभाष - 9412247197, 9897694593

Email : ejyotishdham@yahoo.co.in

इच्छानुसार सन्तान

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वीरेन्द्र गुप्तः

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स्वस्थ एवम् सुसंस्कृत बच्चे राष्ट्र की निधि हैं और वही राष्ट्र के निर्माता हैं।

जिनके मुख मण्डल पर आभा, शरीर में बल, मन में प्रचण्ड इच्छाशक्ति और अपार उत्साह, बुद्धि में वेद का पाण्डित्य, जीवन में स्वावलम्बन और हृदय में ऋषि गाथायें अंकित हों, जिन्हें देखकर महापुरुषों की स्मृतियाँ झंकृत हो उठें।

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वेद दर्शनमूल्य१००/-
हिन्दी टीका सहित अनुपम ग्रन्थ।
इच्छानुसार सन्तानमूल्य१३०/-
मनचाही पुत्र-पुत्री, धर्मात्मा, जितेन्द्रिय
सन्तान प्राप्त करना।
पुत्र प्राप्ति का साधनमूल्य१०/-
पुत्र प्राप्ति के लिये मार्ग दर्शन।
नीव के पत्थरमूल्य१००/-
कहानियाँ
गर्भावस्था की उपासनामूल्य१/-
गर्भित बालक के संस्कार बनाना।
दस नियममूल्य७/-
आर्य समाज के नियमों की सरल भाषा
में विस्तार से व्यवस्था।
दैनिक पंच महायज्ञमूल्य१०/-
नित्य कर्म विधि
HOW TO BEGET A SONमूल्य२५/-
गायत्री साधनमूल्य१०/-

सूर्य गुणी

पुत्र दाता औषधि

इस प्रभावयुक्त द्विषौषधि का गर्भावस्था के ८१ से ८५ दिन के मध्य में सेवन कराने से पुत्र ही प्राप्त होता है।

वीरेन्द्र नाथ अश्विनी कुमार

प्रकाशन मन्दिर, मण्डी चौक, मुरादाबाद - २४४००१

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A small, bright yellow circular sticker is affixed to the left margin of the page, positioned roughly in the middle vertically.

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A painting of an elderly man with a mustache, wearing a white cap and a light-colored long-sleeved shirt. He is seated at a desk, holding a red pen and writing on a piece of paper. In the upper left corner, there is a portrait of a woman wearing a red turban. The background shows a window with a view of green trees.

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