कल्कि पुराण (संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)
Kalki Purana with Sanskrit Original & Hindi Translation
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४०६ ] [ कल्कि पुराण हिणी सेना से पृथिवी को कम्पित कर रहे थे ।३। विशाखयूप-नरेश भी अपनी एक लाख हाथी, एक करोड़ घोड़ो और सात हजार रथो मे सम्पन्न सेना के साथ थे ।४। उनके साथ दो लाख पैदल सैनिक धनुष बाणों से सुसज्जित थे । वायु के झोको से उनके स फे और दुकूल हिल रहे थे ।५। इनके अतिरिक्त पचास हजार लाल वर्ण के अश्व, दस हजार मदमत्त गज एव अनेको महारथी तथा नौ लाख पदाति थे ।६। अक्षौहिणीभिर्दशभि कल्कि परपुरञ्जय । समाबभौस्तथा देवैरेवमिन्द्रो दिवि स्वराट् ।७। भ्रातृपुत्रसुहृद्भिश्च मुदित सैनिकैर्वृत । ययौ दिग्विजयकाङ्क्षा जगतामीश्वर प्रभुः ।८। काले तस्मिन्द्विजो भूत्वा धर्म्मः परिजनैः सह । समाजागान कलिना बलिनापि निराकृत । ६। ऋत प्रसादभय सुख मुदमुथ स्वयम् । योभमर्थं तनोऽदर्प स्मृति क्षेम प्रतिश्रयम् ।१०। नरनारायणो चोभौ हरेरंशौ तपावनौ । धर्म्मस्त्वेतान्समादाय पुत्रान्स्त्रींश्चागतस्त्वरन् ।११। श्रद्धा मैत्री दया शान्तिस्तुष्टिः पुष्टिः क्रियोन्नतिः बुद्धिर्मेधा तितिक्षा च ह्रीमुर्त्तिर्धर्म्मपालकाः ।१२। एतास्तेन सहायता निजबन्धुगणैः सह । कल्किमालोकित तत्र निजकार्य्य निवेदितुम् ।१३। शत्रु पुरो के विजेता कल्किजी स्वर्ग मे सुशोभित सुरपति इन्द्र के समान दस अक्षौहिणी सेना के साथ अत्यन्त शोभा को प्राप्त हुए ।७। इस प्रकार भाई, पुत्र, सुहृद और सैन्य-समूह से सम्पन्न होकर जगदी- श्वर कल्किजी ने दिग्विजय की इच्छा से प्रस्थान किया ।८। तभी कलियुग के द्वारा निग्रह किया हुआ धर्म ब्राह्मण वेश मे वहा उपस्थित हुआ ।६। ऋत, प्रसाद, अभय, सुख प्रसन्नता, योग, अर्थ, अदर्प, स्मृति, क्षेम और प्रतिश्रय नामक उसके सेवक साथ थे ।१०। भगवान् विष्णु