लघुसिद्धान्तकौमुदी (वरदराजाचार्य - भैमी एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)
Laghu Siddhanta Kaumudi of Varadaraja with Hindi Commentary
आचार्य वरदराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३४४ भैमीव्याख्योपेतायां लघुसिद्धान्तकौमुद्याम् 'सुलू' कहते हैं। विशेष्यलिङ्ग के आश्रित होने से यह शब्द त्रिलिङ्गी है। नपुंसक में पूर्ववत् (२४३) सूत्र से ह्रस्व होकर सुधिशब्दवत् प्रक्रिया होती है। प्रवृत्तिनिमित्त के एक होने से तृतीयादि अजादि विभक्तियों में इसे भी वैकल्पिक पुंवद्भाव हो जाता है। पुंवत्पक्ष में ओः सुपि (२१०) से यण् होता है। रूपमाला यथा— प्रथमा सुलूं सुलुनौ सुलूनि द्वितीया ,, ,, ,, तृतीया सुल्वा, सुलुना सुलुभ्याम् सुलुभिः चतुर्थी सुल्वे, सुलुने ,, सुलुभ्यः पञ्चमी सुल्वः, सुलुनः ,, ,, षष्ठी ,, ,, सुल्वोः, सुलुनोः सुल्वाम्, सुलनाम् सप्तमी सुल्वि, सुलनि ,, ,, सुलुषु सम्बोधन हे सुलो!, हे सुल! हे सुलनी! हे सुलूनि! इसी प्रकार निम्नस्थ शब्द भी भाषितपुंस्क हैं। पुंवत्पक्ष में इनका उच्चारण भानुवत् तथा पुंवद्भाव के अभाव में मधुवत् होता है--[* यह णत्वविधि का चिह्न है] (१) ऋजु = सरल, सीधा (१७) लघु = छोटा, हल्का (२) कटु = तीखा (मरिचवत्) (१८) वन्दारु* = वन्दनशील (३) कमण्डलु¹ = साधुओं का पात्र (१९) वर्तिष्णु = वर्तनशील, होने वाला (४) खम्बु² = शस्त्र (२०) वर्धिष्णु = वृद्धिशील (५) गुरु* = बड़ा, (२१) विजिगीषु* = जीतने का इच्छुक (६) चिकीर्षु* = करने का इच्छुक (२२) विभु = व्यापक (७) जानु = घुटना, जानुशब्दोऽयं क्वचिदि (२३) व्यसु = मरा हुआ, मृत (८) जिज्ञासु = जानने की इच्छा वाला (२४) शीधु = गन्ने से निर्मित मद्य (९) जीवातु³ = जीवन औषध (२५) श्रद्धालु = श्रद्धा रखने वाला (१०) तनु = सूक्ष्म, पतला (२६) सञ्जु = मिले हुए घुटनों वाला (११) दयालु = दया करने वाला (२७) सहिष्णु = सहन करने वाला (१२) दिदृक्षु* = देखने का इच्छुक (२८) संशयालु = संशयशील (१३) पटु = चतुर (२९) साधु = सरल, सीधा (१४) पिपासु = पीने का इच्छुक (३०) सानु⁴ = पहाड की चोटी (१५) प्रज्ञु = टेढ़े घुटनों वाला (३१) स्पृहयालु = इच्छा करने वाला (१६) मृदु = कोमल (३२) स्वादु = स्वादिष्ट १ अस्त्री कमण्डलु कुण्डी—इत्यमरप्रामाण्याद्भाषितपुंस्कोऽयम् । २ शङ्खः स्यात्कम्बुरस्त्रियाम् इत्यमरप्रामाण्याद्भाषितपुंस्कोऽयम् । ३ पुन्नपुंसकयोर्दातु-जीव तु-स्याणु-शौघव..—इति त्रिकाण्डशेष । ४ क्ष्माप्रस्थः सानुरस्त्रियाम्—इत्यमर. ।