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रघुवंशम् (मल्लिनाथ संजीवनी व श्रीकृष्णमणि त्रिपाठी हिन्दी व्याख्या)

Raghuvamsham of Kalidasa Hindi

महाकवि कालिदास द्वारा

स्रोत: Raghuvamsham with Mallinatha Sanjivani & Hindi Commentary by Dr. Shrikrishnamani Tripathi (उद्गम)

DevanagariHindipublished735 पृष्ठ
६७०रघुवंशमहाकाव्ये
सर्गाःछन्दांसि
१२अनुष्टुप् १-१०१, मालिनी १०२, वसन्ततिलका १०३, नाराचम् (सिंहविक्रीडितम्) १०४।
१३उपजातिः १, ३-८, १०-१५, १८, २०-२६, २८-३५, ३७, ३९-४६, ४८, ५०-६१, ६३, ६४, ६६, ६७, इन्द्रवज्रा २, १६, १७, २७, ३६, ३८, ४७, ६२, ६५, उपेन्द्रवज्रा ९, १९, ४९, वसन्ततिलका ६८-७८, प्रहर्षणी ७९।
१४उपजातिः १-५, ७-१२, १४, १६-२२, २४-४९, ५१-५५, ५७, ५९-६८, ७०-७२, ७४, ७६-८२, ८४-८६, इन्द्रवज्रा ६, १३, १५, २३, ५०, ५६, ५८, ६९, ७३, उपेन्द्रवज्रा ७५, ८३, मन्दाक्रान्ता ८७।
१५अनुष्टुप् १-१०२, मन्दाक्रान्ता १०३।
१६उपजातिः १, ३, ४, ६-१४, १६-१८, २०-३५, ३७-४०, ४२-४९, ५२-५९, ६१-६३, ६५, ६७-६९, ७१-७८, ८०-८५, इन्द्रवज्रा २, ५, १५, १९, ३६, ४१, ५०, ५१, ६०, ६४, ६६, ७९, उपेन्द्रवज्रा ७०, वसन्ततिलका ८६, मन्दाक्रान्ता ८७, ८८।
१७अनुष्टुप् १-८०, मन्दाक्रान्ता ८१।
१८उपजातिः १, २, ४-१५, १७-२०, २३, २५, २६, २८, २९, ३१, ३३-३७, ४१-४४, ४६-५१, इन्द्रवज्रा ३, १६, २२, २४, २७, ३०, ३२, ३८-४०, उपेन्द्रवज्रा २१, ४५।
१९रथोद्धता १-५५, वसन्ततिलका ५६, मन्दाक्रान्ता ५७।

रघुवंशमहाकाव्ये कालिदास-वर्णितानां राज्ञां वंश-विवरणम्

(दिलीपादारभ्याऽग्निवर्णपर्यन्तम्)

             दिलीपः
               │
              रघुः
               │
              अजः
               │
             दशरथः
  ┌──────┬─────┴─────┬──────┐
 रामः  लक्ष्मणः    भरतः   शत्रुघ्नः
  │
 ┌┴─────┐
कुशः   लवः
 │
अतिथिः
 │
निषधः
 │
नलः
 │
नभः
 │
पुण्डरीकः
 │
क्षेमधन्वा
 │
देवानीकः
 ↓

६७२ रघुवंशमहाकाव्ये

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( देवानीकः )
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┌───────┴───────┐
( पुत्री ) अहीनगुः
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पारियात्रः
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शीलः
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उन्नाभः
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शङ्खणः
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व्युषिताश्वः
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विश्वसहः
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हिरण्यनाभः
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कौशल्यः (सोमसुतः)
|
पुत्रः
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पौष्यः
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ध्रुवसन्धिः
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सुदर्शनः
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अग्निवर्णः

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