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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

प्राप्त करते हैं. वे इसके बाद अपने पिता आकाश के पास जाते हैं. (१) अन्तश्चरति रोचनास्य प्राणादपानती. व्यख्यन्महिषो दिवम्.. (२) इस सूर्य के भीतर दीप्ति विचरण करती है एवं इनके प्राण के साथ ऊपर-नीचे जाती है. सूर्य महान् बनकर आकाश को व्याप्त करते हैं. (२) त्रिंशद्धाम वि राजति वाक्पतङ्गाय धीयते. प्रति वस्तोरह द्युभि:.. (३) सूर्य के तीस स्थान शोभा पाते हैं एवं गतिशील सूर्य के लिए स्तुति की जाती है. सूर्य प्रतिदिन अपनी किरणों से शोभा पाते हैं. (३) सूक्त—१९० देवता—सृष्टि ऋतं च सत्यं चाभीद्धात्तपसोऽध्यजायत. ततो रात्र्यजायत ततः समुद्रो अर्णव:.. (१) प्रज्वलित तप से यज्ञ और सत्य उत्पन्न हुए. इसके बाद रात तथा दिन उत्पन्न हुए. इसके पश्चात् जलपूर्ण सागर उत्पन्न हुए. (१) समुद्रादर्णवादधि संवत्सरो अजायत. अहोरात्राणि विदधद्विश्वस्य मिषतो वशी.. (२) जलपूर्ण सागर से संवत्सर उत्पन्न हुए. पलक झपकाने में संसार के स्वामी ईश्वर ने दिन एवं रात बनाए. (२) सूर्याचन्द्रमसौ धाता यथापूर्वमकल्पयत्. दिवं च पृथिवीं चान्तरिक्षमथो स्व:.. (३) ईश्वर ने पूर्वकाल के अनुसार सूर्य और चंद्रमा को बनाया. उसने इसके बाद द्युलोक, पृथ्वी एवं अंतरिक्ष को बनाया. (३) सूक्त—१९१ देवता—अग्नि व ज्ञान संसमिद्युवसे वृषन्नग्ने विश्वान्यर्य आ. इळस्पदे समिध्यसे स नो वसून्या भर.. (१) हे अभिलाषापूरक एवं स्वामी अग्नि! तुम सभी प्राणियों को भली प्रकार मिश्रित करते हो. तुम यज्ञवेदी पर प्रज्वलित होते हो. तुम हमें धन दो. (१) संगच्छध्वं सं वदध्वं सं वो मनांसि जानताम्. देवा भागं यथा पूर्वे सञ्जानाना उपासते.. (२) हे स्तोताओ! तुम लोग आपस में मिलो, एक साथ स्तोत्र बोलो. तुम्हारे मन समान बात ebook converter DEMO Watermarks*

को जानें. प्राचीन देव जिस प्रकार सम्मिलित होकर यज्ञ का भाग प्राप्त करते थे, उसी प्रकार तुम भी मिलकर संपत्ति का भोग करो. (२) समानो मन्त्रः समितिः समानी समानं मनः सह चित्तमेषाम्. समानं मन्त्रमभि मन्त्रये वः समानेन वो हविषा जुहोमि.. (३) पुरोहितों की स्तुतियां समान हों. ये लोग यज्ञ में एक साथ आवें. उनके मन और चित्त भी समान हों. हे पुरोहितो! मैं एक ही मंत्र से तुम सबको अभिमंत्रित करता हूं और एक ही प्रकार के हवि से तुम्हारा हवन करता हूं. (३) समानी व आकूतिः समाना हृदयानि वः. समानमस्तु वो मनो यथा वः सुसहासति.. (४) हे यजमानो व पुरोहितो! तुम्हारा व्यवसाय समान हो. तुम्हारे हृदय समान हों व तुम्हारा मन समान हो. तुम लोग एकरूप में संगठित बनो. (४) (ऋग्वेद संहिता संपूर्ण)

यजुर्वेद ऋग्वेद ॥ सामवेद ॥ .. वेद ॥ अथर्ववेद ॥ द ॥ सामवेद ॥ अथर्ववेद .. सामवेद ॥ अथर्ववेद ॥ यजु ऋग्वेद ॥ सामवेद ॥ अथर्ववेद , ऋग्वेद ॥ सामवेद ॥ अथर्ववेद ॥ ' ॥ सामवेद ॥ अथर्ववेद ॥ यजुव वेद ॥ सामवेद ॥ अथर्ववेद ॥ य. वेद ॥ सामवेद ॥ अथर्ववेद ॥ यजु ॥ ऋग्वेद ॥ सामवेद ॥ अथर्ववेद ामवेद ॥ अथर्ववेद ॥ यजुर्वेद ॥ ऋग्वेद ॥ सामवेद ॥ अथर्ववेद ` सामवेद ॥ अथर्ववेद ॥ यजुर्वेद ॥ ऋग्वेद ॥ सामवेद ॥ अ' अथर्ववेद ॥ यजुर्वेद ॥ ऋग्वेद ॥ सामवेद ॥ - ूर्वेद ॥ यजुर्वेद ॥ ऋग्वेद ॥ .. .. ॥ अथर्ववेद ॥ यजुर्वेद ॥ ऋग्वेद ॥ सामवेद ॥ अ-, . सामवेद ॥ अथर्ववेद ॥ यजुर्वेद ॥ ऋग्वेद ॥ सामवेद ॥ अ.. सामवेद ॥ अथर्ववेद ॥ यजुर्वेद । ऋग्वेद ॥ सामवेद ॥ अथर्ववेद ॥ वेद ॥ सामवेद ॥ अथर्ववेद ॥ य. '॥ ऋग्वेद ॥ सामवेद ॥ अथर्ववेद २ ॥ सामवेद ॥ अथर्ववेद ॥ यजु वेद ॥ सामवेद ॥ अथर्ववेद ॥ यजु ऋग्वेद ॥ सामवेद ॥ अथर्ववेद 'वेद ॥ सामवेद ॥ अथर्ववेद ॥ द ॥ सामवेद ॥ अथर्ववे 'ग्वेद ॥ अथर्ववेद ॥ यजु ऋग्वेद ॥ सामवे- -॥ अथर्ववेद ॥ डा. रेखा व्यास एम.ए. (संस्कृत), पी-एच.डी.