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रोगों की पहचान

Rogon Ki Pehchaan

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Jammu (उद्गम)

DevanagariHindipublished128 पृष्ठ

रोगों की पहचान

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  • ❑ अभ्रक भस्म, रस सिंदूर, प्रवाल भस्म—तीनों 50-50 ग्राम लें। चाँदी भस्म और सोना भस्म—दोनों 25-25 ग्राम लें। लोह भस्म, सिक्का भस्म, बंग भस्म—तीनों 35-35 ग्राम लें। अब सबको खरल में डाल दें। अब उसमें थोड़ा कमल के फूलों का रस डालें और रगड़कर उस रस को उन दवाइयों में इतनी अच्छी तरह मिलाएँ कि रस सूख जाए। फिर ऐसे ही थोड़ा दूध मिलाएँ, फिर बाँसा का रस मिलाएँ, फिर केले के फूलों का रस डालकर मिलाएँ, फिर गन्ने का रस डालकर मिलाएँ, फिर मालती के फूलों का रस डालकर मिलाएँ। इस तरह बारी-बारी से ये सब रस मिलाकर, सुखाकर अंत में 50-50 ग्राम की छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें। 2 गोलियाँ दिन में 2 ही बार दूध के साथ रोगी को देने से बहुत लाभ होगा।
  • ❑ मोचरस और हल्दी—दोनों को 110 ग्राम की मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। फिर उसमें 55 ग्राम आँवले का चूर्ण मिलाकर किसी बोटल में रख दें। अब दो-ढाई ग्राम की मात्रा में यह चूर्ण सुबह-शाम शहद में मिलाकर खाएँ।
  • ❑ सबसे पहले आँवले का रस निकालकर उसमें से 225 ग्राम रस एक बोटल में डाल दें। फिर हरे करेले का रस निकालकर इतनी ही मात्रा में उसी बर्तन में डाल दें। फिर नीम के पत्तों का रस निकालकर 110 ग्राम की मात्रा में उसमें डाल दें। फिर बेल के पत्तों का रस निकालकर 110 ग्राम की मात्रा में उसमें डाल दें। अब उसमें 12 ग्राम माजू सत्व और 12 ही ग्राम सूर्यतापी शिलाजीत डालकर अच्छी तरह से मिला लें। यह मधुमेह की बेहतरानी दवा बन गयी। दिन में 3 बार 3 ही चम्मच का सेवन करें।
  • ❑ निगुण्डी के पत्तों को छाया में सुखाकर 5 काली मिर्च के साथ खाएँ।
  • ❑ गूलर के वृक्ष की छाल के साथ 4 ग्राम प्रवाल भस्म, 7 ग्राम सोंठ,

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साहिब बन्दगी

डेढ़ ग्राम लोह भस्म, 4 ग्राम काली मिर्च, 30 ग्राम जामुन की गुठली की गिरी लेकर खरल में डाल दें और अच्छी तरह से कूट-पीस लें। यह दवा दही की लस्सी के साथ 2 ग्राम की मात्रा में ही लें।

10 ग्राम सौंफ को सवा गिलास पानी में उबालें। जब चौथा हिस्सा पानी शेष रह जाए तो उसे छानकर गाय के 10 ग्राम मक्खन के साथ सेवन करें। यह दवा डेढ़ महीने तक रोज सुबह-सुबह लें।

सावधानी बरतें

मिटाइयाँ, चीनी, शक्कर, चाय, काफी, चावल आदि से बचें। करेले की सब्जी खाएँ।

बदन दर्द होने पर

लहसुन की पाँच कलियाँ और ढाई ग्राम अजवायन-दोनों को 35 ग्राम सरसों के तेल में डालकर आग पर रखें। अजवायन काली हो जाने पर उतार लें। गुनगुना रह जाए तो छानकर उस तेल की मालिश करें।

विषैले कीड़ों के काटने पर

यदि सॉप ने काटा हो तो गर्म छाछ में 10 ग्राम मिरचाकंद बूटी मिलाकर दें।

यदि सॉप ने काटा हो तो करौंदे की जड़ को पानी में उबालें और वो पानी पिलाएँ।

यदि बिच्छू ने काटा हो तो आक के पत्ते या फल लेकर पीस लें और उसका लेप डंक वाले स्थान पर करें।

यदि सॉप ने काटा हो तो विषखपरा का रस पिलाएँ।

बेल की जड़ और कैथ की जड़ को पीसकर पिलाने से सर्प का विष उतर जाता है।

रोगों की पहचान

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  • मधुमक्खी या भौरै ने काटा हो तो पहले चाकू बगैरह को गर्म करके विष निकाल दें। अब प्याज़ का रस मिलाकर 8-10 मिनट उस स्थान को रगड़ें। अंत में प्याज़ की पट्टी बाँध दें।
  • ❑ यदि बिच्छू ने काटा हो तो दियासलाई की 10 तिल्लियों को लेकर उनका मसाला निकाल लें और पानी में घिसकर काटे गये स्थान पर लगाएँ।
  • ❑ यदि पागल कुत्ते ने काटा हो तो प्याज़ को घिसकर उसमें शहद मिलाकर लेप करें। यह प्राथमिक उपचार है।
  • ❑ यदि पागल कुत्ते काटा हो तो हंसपदी को पीसकर लेप करें।

सामान्य ज्वर

  • ❑ अंकोल पेड़ की जड़ की छाल 3 ग्राम लेकर उसका काढ़ा बनाएँ। यह काढ़ा ज्वर से ग्रसित रोगी को दें।
  • ❑ करौंदे की जड़ का काढ़ा बनाकर शरीर पर लेप करें।
  • ❑ कैसा भी ज्वर हो, 4 ग्राम पित्तापपड़ा, 6 काली मिर्च-दोनों को पीस लें। यह चूर्ण रोगी को खिलाकर ऊपर से गर्म जल के दो घूँट पिला दें।

कफ का बुखार होने पर

  • ❑ अदरक के रस का सेवन करें।
  • ❑ तुलसी का रस भी लाभकारी है।

पित्त से होने वाले बुखार पर

  • ❑ नींबू को काटकर उसके बीज निकाल दें। अब उसपर जरा-सी काली मिर्च का चूर्ण और सेंधा नमक डालकर आग पर रखें। यह नींबू रोगी को चूसने के लिए दें।
  • ❑ नीम की छाल के रस का सेवन करें।
  • ❑ लाल चंदन, खस, सुगन्धबाला, नागरमोथा, सोंठ, पित्तापपड़ा-

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साहिब बन्दगी

कुल 10 ग्राम लेकर चार बड़े गिलास जितने पानी में डालकर उबालें। जब आधा पानी रह जाए तो साफ़ कपड़े से छान लें। इस पानी को मिट्टी के बर्तन में रख लें। प्यास लगने पर रोगी को यही पानी पिलाएँ।

वायु से बुखार होने पर

लाल चंदन, धनिया, नीम की छाल, अंजीर, गिलोय, पद्माख-सब 5-5 ग्राम की मात्रा में लें। अब इस सबको एक बड़े गिलास पानी में डालकर उबालें और काढ़ा बन जाए तो उतार लें। फिर स्वादानुसार इसमें मिश्री डालकर रोगी को पिला दें। यह दवा सुबह देना बहुत लाभकारी है।

लौंग का पानी पीने से लाभ मिलता है।

तुलसी के पत्तों का रस भी लाभकारी है।

गिलोय का रस हितकारी है।

नागरमोथा, पित्तपापड़ा, चिरायता, गिलोय, सोंठ-सब 3-3 ग्राम मात्रा में लेकर उबालकर काढ़ा बना लें। यह काढ़ा रोगी को हफ्ता-भर पिलाएँ।

कैंसर होने पर

गेहूँ की पौध का रस निकालकर उसका सेवन करें। इस दवा का रोज़ सेवन करें।

आग से जल जाने पर

जौ को भूनकर अच्छी तरह पीस लें। अब इसे तिलों के तेल में मिलाकर जले हुए स्थान पर धीरे-धीरे लेप करें।

नारियल को पीसकर उसका लेप बना लें और जले हुए स्थान पर लगाएँ।

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उच्च रक्तचाप होने पर

  • ❑ ढाई ग्राम मेथी का चूर्ण सुबह-शाम खाली पेट ही जल के साथ लें।
  • ❑ सफेद खसखस को अच्छी तरह से पीस लें। अब तरबूज के बीज की गिरी को पीसकर दोनों को अच्छी तरह मिला लें। दोनों को मात्रा समान हो। अब चम्मच-भर यह दवा रोगी को सुबह खाली पेट पानी के साथ ही दें।
  • ❑ 6 ग्राम शहद में 6 ग्राम प्याज का रस मिलाकर रोगी को दें। यह दवा हररोज देना लाभकारी सिद्ध होगा।

नोट : यदि रोगी का रक्त चाप एकदम ज्यादा हो जाए तो ऐसे में पौनः कप पानी लेकर उसमें आधा नींबू निचोड़ें और रोगी को पिला दें। ढाई घण्टे के अन्तराल में रोगी को तीन बार यह दवा दें।

निम्न रक्तचाप होने पर

  • ❑ किशमिश के 30 दाने लेकर पौन कप पानी में रात को भिगो दें। सुबह उन्हें चबा-चबाकर खाएँ। महीना-डेढ़ महीना यह दवा करना लाभकारी सिद्ध होता है।
  • ❑ 8 बादाम की गिरी रात को पानी में भिगोकर सुबह उसकी ठंडाई बनाकर सेवन करें।

रोगों के निदान में कुछ लाजवाब फार्मूले

रोगों के निदान में कुछ

लाजवाब फार्मूले

गुर्दे की पीड़ा होने पर

जड़ समेत भांतल बूटी (जंगली गोभी) को स्वच्छ जल से अच्छी तरह से धोकर साफ़ करें, फिर गुनगुने पानी में भी आधा मिनट के लिए डालकर धोएँ। अब उसे निकालकर जलाएँ। जो राख बचे, उसे रख लें। अब एक बर्तन में पानी डालकर उस राख को उसमें डालकर अच्छी तरह से मिलाकर एक दिन और एक रात के लिए रख दें। अब पानी को किसी अन्य बर्तन में डालकर आग पर रखें। जब पानी समाप्त हो जाए तो उतार लें। जो राख बची, वो गुर्दे की पीड़ा की लाजवाब दवा है। इसे किसी बोतल में रख दें। जब भी किसी को गुर्दे की पीड़ा हो तो 130 मि. ग्रा. इस दवा को गर्म पानी में मिलाकर रोगी को दें। बहुत लाभकारी है।

बहरापन होने पर

लहसुन की 30 अलग की हुई फॉर्कें लें और उन्हें कड़वे बादामों के 80 ग्राम तेल में डालकर अच्छी तरह से गर्म कर लें। अब उस तेल को छानकर किसी काँच की बोतल में डाल दें। केवल दो-2 बूँदें यह तेल रोज़ रोगी के कानों में डालें। यह बहुत लाभकारी दवा है।

क्षय रोग होने पर

30 किलो पानी में 6 किलो बांस की जड़ का छिलका डालकर अच्छी तरह से उबाल लें। जब पानी तीसरे हिस्से से भी कम रह जाए तो

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उतारकर अच्छी तरह से छान लें। फिर इस पानी में 6 किलो चीनी मिलाकर पुनः आग पर रखकर चाशनी की तरह बनाएँ। इसके बाद सोंठ, पिपला चूर्ण, तालीसपत्र, सूखा धनिया, मीठा कुठ, काली मिर्च, छोटी इलायची, तेज पत्र, सफेद जीरा, कुटकी, कायफल, चव्च, हरीतकी छिलका, काला जीरा, दालचीनी, कमीला-सब 25-25 ग्राम लेकर अच्छी तरह से पीसकर उसमें डालकर मिलाएँ। फिर उसमें 550 ग्राम शहद डालकर मिला लें। यह दवा तैयार हो गयी। सुबह-शाम रोगी को 8-10 ग्राम की मात्रा में देकर ऊपर से बकरी का गुनगुना दूध पिला दें।

झूठे गुरु के पक्ष को, तजत न कीजे बार। पार न पावै शब्द का, भरमें बारबार ॥

भोजन द्वारा रोगों का निदान

भोजन द्वारा रोगों का निदान

बादाम से रोगों का निदान

सूखी खाँसी होने पर

  • ❑ 6 बादाम पानी में कम-से-कम 8 घण्टे के लिए भिगो दें। फिर उन्हें छील कर मिश्री मिलाकर पीस लें। अब इस दवा को खा लें।

पीलिया होने पर

  • ❑ 5 बादाम की गिरी, दो छुहारे, दो छोटी इलायची लेकर रात को भिगो दें। सुबह अच्छी तरह पीसकर मिश्री और मक्खन मिलाकर खाएँ।

आँख के रोग होने पर

  • ❑ बादाम की पाँच गिरी लेकर रात को भिगो दें। फिर उसका छिलका उतारकर पानी के साथ पीस लें। फिर उसमें मिश्री और दूध मिलाकर पी लें।

पेशाब में जलन होने पर

  • ❑ 10 गिरी बादाम की लेकर रात को पानी में भिगो दें। अब छीलकर 6 छोटी इलायची और मिश्री मिलाकर पानी के साथ पीस लें। अब इसे पानी में मिलाकर पी लें।

हकलाने पर

  • ❑ 10 गिरी बादाम की लेकर रात को पानी में भिगो दें। फिर उसका छिलका उतारकर पीस लें। अब इसे मक्खन और मिश्री

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मिलाकर खाएँ।

मासिक धर्म में रुकावट होने पर

  • ▣ एक बादाम को छुहारे के साथ पानी में रात को पानी में भिगो दें। सुबह पीसकर मिश्री और मक्खन मिलाकर रोज खाएँ।

नींबू से रोगों का निदान

मोटापा होने पर

  • ▣ सुबह खाली पेट गुनगुने पानी में शहद और नींबू मिलाकर पिएँ।

कब्ज होने पर

  • ▣ रात के समय 10 ग्राम नींबू का रस, 10 ग्राम शक्कर-दोनों को पानी में डालकर पी लें।

गठिया होने पर

  • ▣ सुबह पौन गिलास पानी में एक नींबू निचोड़कर पी लें।

खुजली होने पर

  • ▣ गुनगुने पानी में नींबू निचोड़कर स्नान करें।
  • ▣ नींबू के रस में करेले का रस मिलाकर लगाएँ।

जुएँ होने पर

  • ▣ नींबू का रस सिर में लगाकर धीरे-2 मलें। कुछ देर बाद स्नान कर लें।

गले में सूजन होने पर

  • ▣ गर्म पानी में एक नींबू निचोड़कर गराये करें। यह काम दिन में 3-4 बार कर लें।

नाखून न बढ़ने पर

  • ▣ गर्म पानी में नींबू निचोड़कर उसमें 6-7 मिनट तक उँगलियाँ डाले रखें। फिर वहाँ से निकालकर ठंडे पानी में डालें।

साहिब बन्दगी

१२ मुँह से दुर्गंध आने पर

□ पानी में नींबू निचोड़कर कुस्ने करें।

जुकाम होने पर

□ रात के समय गुनगुने पानी में एक नींबू निचोड़कर और शहद मिलाकर पिएँ।

पेट में कीड़े होने पर

□ नींबू के बीजों का १ ग्राम चूर्ण पानी के साथ लें।

हिचकी आने पर

□ नींबू के रस में शहद और थोड़ा-सा नमक मिलाकर पिएँ।

जोड़ों में दर्द होने पर

□ नींबू का रस दर्द वाले स्थान पर मलें।

दाद होने पर

□ नींबू के रस में अनार के पतों का रस मिलाकर लगाएँ।

गंज पड़ने पर

□ नींबू को काटकर गंज वाली जगह रोज रगड़ें।

हैजा होने पर

□ पौन गिलास पानी में नींबू और नमक मिलाकर रोगी को पिलाते जाएँ। उलटी की परवाह न करें। उलटी का होना जारी रहे तो आपकी दवा भी जारी रहनी चाहिए।

पेट दर्द होने पर

□ १० ग्राम नींबू के रस में, ५ ग्राम शहद और ५ ग्राम अदरक का रस मिलाकर पिएँ।

सिर में दर्द होने पर

□ नींबू की पत्तियों का रस निकालकर सूँघें।

□ एक कप चाय में एक नींबू निचोड़ कर पिएँ।

रोगों की पहचान

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मुँहासे होने पर

  • ▣ दूध की थोड़ी-सी मलाई (गर्म) पर एक नींबू निचोड़कर मुँह पर मलें।

तुलसी से रोगों का निदान

मलेरिया होने पर

  • ▣ सुबह-दुपहर-शाम तुलसी के पत्तों का 5 बूँद रस पानी के साथ दें।

मोटापा होने पर

  • ▣ तुलसी के पत्तों का रस और शहद पानी में मिलाकर नित्य पिएँ।

चक्कर आने पर

  • ▣ तुलसी के 21 पत्ते लेकर उन्हें पीस लें। फिर उसमें शहद मिलाकर चाटें।

गर्भ न ठहरने पर

  • ▣ तुलसी के बीजों का काढ़ा बनाकर नित्य लंबे समय तक पिएँ।

गले में दर्द होने पर

  • ▣ तुलसी के पत्तों के रस में शहद मिलाकर चाटें।

जोड़ों में दर्द होने पर

  • ▣ तुलसी के पत्तों के रस को दर्द वाली जगह मलें।

सिर दर्द होने पर

  • ▣ तुलसी के पत्तों का रस नींबू के रस में मिलाकर पिएँ।

पुराना ज्वर होने पर

  • ▣ तुलसी के पत्तों का एक तोला रस रोज़ पिएँ।
  • ▣ 6 तुलसी की पत्तियों में 3 काली मिर्च और एक पीपर, 8 ग्राम मिश्री मिलाकर सबको पानी के साथ पीस लें। यह दवा सुबह

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साहिब बन्दगी

खाली पेट 20 दिन तक देनी होगी।

पेट में कीड़े होने पर

0 तुलसी के पत्तों का रस पिएँ।

पुराना सिर दर्द होने पर

0 30 तुलसी के पत्ते, 10 नग तुरिया और 1 सफेद मिर्च को जल में पीस लें। इसका रस निकालकर रोज सेवन करें।

गुर्दे में दर्द होने पर

0 तुलसी की 22 ग्राम पत्तियों को छाया वाले स्थान में सुखा लें। फिर 12 ग्राम सेंधा नमक और 22 ग्राम अजवायन-तीनों को अच्छी तरह से पीस लें और चूर्ण बना लें। यह दवा दिन में दो बार गर्म पानी के साथ लें। बहुत लाभकारी है।

साँप के काटने पर

0 तुलसी के पत्तों को पीस लें। फिर उसमें मक्खन मिलाकर काटे हुए स्थान पर लगाएँ। जब लेप काला हो जाए तो वो लेप उतारकर दूसरा लेप लगा दें।

मुँह से दुर्गंध आने पर

0 भोजन के बाद तुलसी के पत्ते चबाया करें।

खाँसी होने पर

0 तुलसी के पत्ते और काली मिर्च को पीसकर उनकी छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें। दिन में 3 बार यह गोली खाएँ।

साँफ से रोगों का निदान

गर्भाशय में विकार होने पर

0 यदि मोटी स्त्री 5 ग्राम साँफ के चूर्ण को दुगुनी मात्रा में देसी घी के साथ कुछ महीने खाएँ तो बहुत लाभकारी सिद्ध हो।

रोगों की पहचान

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पेट दर्द

  • ▣ सौंफ के साथ संधा नमक मिलाकर जरा-से गर्म पानी के साथ लें।

आँव आने पर

  • ▣ सौंफ के 6 बूँद तेल में स्वाद के लिए चीनी या मिश्री मिलाकर दिन में तीन बार रोगी को दें।

गन्ने से रोगों का निदान

पथरी होने पर

  • ▣ गन्ना अधिक चूसें और उसका रस भी पिएँ।।

हिचकियाँ आने पर

  • ▣ गन्ने का रस पिएँ।

कूकर खाँसी

  • ▣ गन्ने के रस में 60 ग्राम मूली का रस मिलाकर पिएँ।

पीलिया होने पर

  • ▣ भुने हुए जौ खाकर गन्ने का रस पी लें।

शहद से रोगों का निदान

शहद स्त्रियों के कई दोष काटता है। यह बड़ा गुणकारी है। मूत्र संबंधी रोगों को यह जड़ से नष्ट करता है। पर आजकल असली शहद मुश्किल से मिलती है। असली शहद की पारख के लिए उसे कागज के ऊपर डालें। यदि असली है तो कागज के नीचे निशान नहीं पड़ेगा। दूसरी पारख है कि कुत्ते के आगे रखें। यदि कुत्ता नहीं खाए तो शहद असली है।

मोटापा होने पर

  • ▣ रोज सुबह पौन गिलास गर्म पानी में एक चम्मच शहद मिलाकर पिएँ।

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साहिब बन्दगी

टी. बी. होने पर

☐ शहद को मक्खन के साथ मिलाकर सुबह-शाम लें।

बच्चों के दाँत निकलने पर

☐ दाँत निकलते समय बच्चों के मसूड़ों पर शहद लगाएँ। इससे बच्चों को दर्द कम होता है।

आवाज़ बैठने पर

☐ आधा गिलास गर्म पानी में चम्मच-भर शहद मिलाकर गरारे करें।

लू लगने पर

☐ शहद में लौंग, इलायची, हल्दी, कालीमिर्च और जीरा सब समान मात्रा में मिलाकर सेवन करें।

पिप्ती की खराबी होने पर

☐ 22 ग्राम शहद में 5 ग्राम नागकेसर मिलाकर खाएँ। यह प्रयोग दिन में 2-3 बार करें।

पुराना बुखार होने पर

☐ शहद में गिलोय का चूर्ण मिलाकर सेवन करें।

मूत्र रोग होने पर

☐ सुबह खाली पेट शौच से पहले एक गिलास शीतल जल में एक चम्मच शहद मिलाकर नित्य पिएँ।

कान दर्द होने पर

☐ शहद में लौंग का तेल मिलाकर कान में डालें।

मिरगी के दौर पड़ने पर

☐ यदि किसी को बार-बार मिरगी के दौर पड़ते हैं तो करौंदों के रस में आधा चम्मच शहद मिलाकर हर रोज पिलाएँ।

रोगों की पहचान

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लकवा होने पर

  • ▣ 30 ग्राम गर्मागर्म पानी में दो चम्मच शहद डालें। जब पानी कुछ ठंडा हो जाए तो रोगी को पिला दें। यह दवा दिन में 3-4 बार करें।

उल्टियाँ होने पर

  • ▣ शहद में काली मिर्च का चूर्ण मिलाकर खाएँ।

मधुमक्खी के काटने पर

  • ▣ शहद में माचिस का मसाला मिलाकर लगाएँ।
  • ▣ शहद में आक का दूध मिलाकर लगाएँ।

लहसुन से रोगों का निदान

हार्ट अटैक आने पर

  • ▣ लहसुन की पाँच कलियाँ चबा लें।

मिरगी रोग होने पर

  • ▣ लहसुन की 7-8 कलियाँ दूध में उबालकर नित्य लें।

स्वप्न दोष होने पर

  • ▣ लहसुन की दो कलियाँ सोते समय चबाकर खा लें।

गंज होने पर

  • ▣ लहसुन का रस गंज वाली जगह लगाएँ।

लकवा होने पर

  • ▣ 30 ग्राम लहसुन पीसकर एक गिलास दूध में डालकर उबालें। जब खीर की तरह गाढ़ा हो जाए तो उतार लें। ठंडा हो जाने पर इसका सेवन करें। यह प्रयोग रोज सुबह करें।

पीलिया होने पर

लहसुन की पाँच कलियों को एक प्याली गर्म दूध में मिलाकर

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साहिब बन्दगी

पिएँ और ऊपर से एक कप दूध और पी लें। यह दवा दिन में 5 बार लें।

पेट का कैंसर

□ लहसुन को अच्छी तरह से पीसकर पानी में मिलाकर सेवन करें।

हड्डी टूटने पर

□ लहसुन का प्रयोग करें। यह हड्डी जोड़ने में बड़ी सहायता करता है।

उच्च रक्तचाप होने पर

□ लहसुन और अदरक की चटनी भोजन के साथ नित्य लें।

अदरक से रोगों का निदान

कान दर्द होने पर

□ अदरक के रस को गर्म करके कान में डालें।

लकवा होने पर

□ दो गिलास पानी में उड़द की दाल और अदरक डालकर उबालें। जब आधा-पौन गिलास पानी रह जाए तो उसे ठंडा करके पी लें।

गठिया होने पर

□ 12 ग्राम सूखे अदरक को 120 ग्राम पानी में उबालें। जब पानी ठंडा हो जाए तो उसमें एक चम्मच शहद मिलाकर पी लें। यह प्रयोग नित्य करें।

कमर दर्द होने पर

□ अदरक के रस में बराबर मात्रा में घी मिलाकर पिएँ।

अपच होने पर

□ भोजन से पहले और बाद में अदरक के रस में नींबू का रस और

रोगों की पहचान

89

संधा नमक मिलाकर पी लें।

आवाज़ बैठने पर

▣ अदरक के रस में शहद मिलाकर चाटें।

मुँह की दुर्गंध

▣ अदरक के रस को गर्म पानी में मिलाकर कुछे करें।

मासिक धर्म में पीड़ा होने पर

▣ सोट में पुराना गुड़ मिलाकर काढ़ा बनाकर पिएँ।

पसलियों में दर्द

▣ 32 ग्राम सोट को पीस लें। अब सवा गिलास पानी में उबालकर अच्छी तरह छान लें। यह पानी रोगी को दिन में तीन बार पिलाएँ।

आँवले से रोगों का निदान

मधुमेह होने पर

▣ ताजे आँवले के रस में शहद मिलाकर रोगी को सुबह-शाम दें।

हृदय रोग होने पर

▣ आँवले का मुरब्बा दूध के साथ लें।

▣ पिसा हुआ आँवला गाय के दूध के साथ लें।

पेट में कीड़े होने पर

▣ ताजे आँवले का रस नित्य पिएँ।

खूनी बवासीर होने पर

▣ आँवले के चूर्ण को दही में मिलाकर खाएँ।

मोतियाबिंद होने पर

▣ ताजे आँवले का रस रोज आँखों में डालें।

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साहिब बन्दगी

बाल सफेद होने पर

▯ आँवले के चूर्ण को पानी में घोल लें। फिर इसमें नींबू का रस मिला लें। इस पानी से रोज बाल धोएँ।

बाल गिरने पर

▯ सूखे आँवले को रात में पानी में भिगो दें। सुबह उस पानी से बाल धोएँ।

दस्त होने पर

▯ 20 ग्राम पानी में आँवले को भिगो दें। जब वो नरम पड़ जाए तो थोड़ा-सा नमक मिलाकर पीसें। फिर सफेद चने जितनी गोलियाँ बना लें। दिन में दो बार 2-2 गोलियाँ पानी के साथ खाएँ।

बच्चों के तुतलाने पर

▯ आँवला चबाने को दें।

बार बार पेशाब आने पर

▯ आँवले के रस को पानी में मिलाकर सेवन करें।

पथरी होने पर

▯ सूखे हुए आँवले के चूर्ण को मूली के साथ खाएँ।

प्याज़ से रोगों का निदान

विषधारियों के काटने पर

▯ प्याज़ को पीसकर उसका लेप करें।

नकसीर आने पर

▯ प्याज़ का रस नाक में डालें।

खूनी बवासीर होने पर

▯ 90 ग्राम प्याज़ के रस में 45 ग्राम शक्कर मिलाकर पी लें।

रोगों की पहचान

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पीलिया होने पर

  • ▣ प्याज को काट नींबू रस में भिगो लें। फिर ऊपर से नमक, काली मिर्च डालकर दिन में दो बार सेवन करें।

टी. बी. होने पर

  • ▣ कच्चे प्याज का सेवन नित्य करें। भोजन के साथ सलाद रूप में प्याज खाना न भूलें।

सिर में गंज होने पर

  • ▣ प्याज का रस रोज गंज वाली जगह रगड़ें।

मिरगी का दौरा आने पर

  • ▣ जैसे ही मिरगी का दौरा आए, एक प्याज को हाथ से तोड़कर आधे टुकड़े को रोगी की नाक के आगे रखें।
  • ▣ मिरगी के रोगी को रोज सुबह खाली पेट प्याज का थोड़ा रस पिलाएँ।

पथरी होने पर

  • ▣ 40 ग्राम प्याज का रस सुबह खाली पेट पिएँ।

कुत्ते के काटने पर

  • ▣ प्याज को पीसकर शहद में मिला लें। यह लेप काटे वाली जगह लगाएँ।

मासिक में रुकावट होने पर

  • ▣ प्याज का सूप निकालकर थोड़ा-सा गुड़ मिला लें। इसे गर्म-गर्म ही पी लें।

सहजन के द्वारा रोगों का निदान

पथरी होने पर

  • ▣ सहजन की सब्जी खाएँ। अत्यंत लाभकारी है।

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साहिब बन्दगी

घाव होने पर

☐ सहजन की पत्तियों का लेप करें।

जोड़ों में दर्द होने पर

☐ सहजन की सब्जी खाएँ।

हींग से रोगों का निदान

सिर दर्द होने पर

☐ गर्म पानी में हींग डालकर उसका लेप करें।

पेट में कीड़े होने पर

☐ नित्य ज़रा-सी हींग का सेवन करें।

लकवा होने पर

☐ हींग में कड़वी लौकी के बीज पीसकर लेप करें।

पीलिया होने पर

☐ ज़रा-सी हींग को ग्वारपाठे के रस में मिलाकर रोगी को नित्य पिलाएँ।

चक्कर आने पर

☐ पानी में हींग घोलकर माथे पर लगाएँ।

कील मुँहासे होने पर

☐ थोड़ी-सी हींग पीसकर नारियल के तेल में मिला मुँह पर मलें।

टमाटर से रोगों का निदान

अपच होने पर

☐ टमाटर का रस पिएँ।

भूख कम लगने पर

☐ टमाटर का सूप पिएँ।