रोगों की पहचान
Rogon Ki Pehchaan
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Jammu (उद्गम)
रोगों की पहचान
61
श्वेत प्रदर होने पर
- ▣ हल्दी, मिजछ, आँवला और लौथ को पीसकर चूर्ण बना लें। अब उसे किसी बारीक कपड़े में लपेटकर योनि में रखें।
- ▣ 40 ग्राम सीसम के पत्ते और फल, 3 इलायची, 10 काली मिर्च और थोड़ी मिश्री मिलाकर अच्छी तरह से कूट-पीस लें। यह दवा दिन में एक बार हफ्ता-भर लें।
- ▣ शहद के साथ नवजीवन-रस का सेवन करें।
- ▣ 25 ग्राम कच्चे गूलर को पीसकर उसमें इतना ही शहद और इतनी ही मिश्री मिलाकर खाएँ और ऊपर से गाय का एक कप दूध पी लें।
- ▣ दूध में नवायस लोह (छोटे चम्मच का तीसरा हिस्सा) डालकर सुबह-शाम पिएँ।
बंध्यत्व होने पर
- ▣ पसाल का एक पत्ता पीस कर दूध में डालकर पिएँ।
- ▣ दो-ढाई चम्मच घी सुबह-शाम खाली पेट दूध के साथ सेवन करें।
- ▣ कैथ के गोद को पीसकर दूध में डाल पिएँ।
गर्भ धारण के समय पीड़ा होने और गर्भ गिरने की शंका होने पर
- ▣ यदि पहला महीना हो तो कमल की डण्डी, सिंघाड़ा, नीलकमल और कसेरू-सबको जल के साथ कूट-पीस लें। अब इस दवा को दूध में मिलाकर पिएँ।
- ▣ यदि दूसरा महीना हो तो खजूर, बेलपत्र, कसेरू, जीरा, सिंघाड़ा-सबको जल के साथ कूट-पीस लें। अब इस दवा को दूध के साथ लें।
७२
साहिब बन्दगी
यदि तीसरा महीना हो तो चंदन, पद्माख, तगर, खस-सबको जल के साथ कूट-पीस लें। अब इस दवा को बकरी के दूध के साथ लें।
यदि चौथा महीना हो तो सिंघाड़ा, केले की जड़, केले के पत्ते, अनारदाना, दाख-सबको जल के साथ कूट-पीस कर छान लें। अब इस दवा को बकरी के दूध के साथ लें।
यदि पाँचवाँ महीना हो तो नीलोफर, कमलगट्टा, कमल की डण्डी, नागकेसर-सबको कूट-पीस लें। इस दवा को बकरी के दूध के साथ लें।
यदि छठा महीना हो तो कमलगट्टा, बच, नागकेसर, दाख, इलायची, मुनक्का-सबको जल में कूट-पीसकर जल के साथ ही लें।
यदि सातवाँ महीना हो तो साठी की जड़, बड़ की जड़, सूर्यमुखी की जड़, पीपल की जड़, लाल चंदन, भौंगरा-सबको कूट-पीसकर बकरी के दूध के साथ लें।
यदि आठवाँ महीना हो तो कमल का फूल, गज पापरि, कमलगट्टा की गिरी, धनिया-सबको कूट-पीसकर शीतल जल में डालकर छान लें। इस दवा को दूध में मिलाकर पी लें।
यदि नौवाँ महीना हो तो गज पीपरि, बायबिडंग, जीरा, ढाक के पत्ते, सोंठ, इलायची-सबको कूट-पीसकर बकरी के दूध के साथ लें।
यदि दसवाँ महीना हो तो केसर, केले की जड़, कमलगट्टा, मुलहटी, पद्माख, कमल का दूध, मिश्री-सबको जल के साथ पीस लें। इस दवा को भी दूध में मिलाकर पी लें।
कान के बहने पर
शहद में नीम के पत्तों का रस बराबर मात्रा में मिलाकर रोगी के कान में डालें।
रोगों की पहचान
63
कान में दर्द होने पर
- ▣ शहद में अदरक का रस, तेल और थोड़ा सेंधा नमक मिलाकर रोगी के कानों में डालें।
- ▣ गोमूत्र को गर्म करके रोगी के कानों में डालें।
बहरापन होने पर
- ▣ शहद में अदरक का रस, तेल और थोड़ा सेंधा नमक मिलाकर रोगी के कानों में डालें। यह दवा बहरेपन में भी लाभदायक है।
गला बैठने पर
- ▣ अड़सू की जड़, पीपल, छोटी हरड, ब्राह्मी और बच-सबको पीसकर चूर्ण बना लें। 3 ग्राम यह चूर्ण एक चम्मच शहद में मिलाकर चाटें।
- ▣ यदि बोलने से आवाज बैठी हो तो आधा ग्राम सुहागा मुँह में रखकर चूसें।
- ▣ यदि खान-पान की गड़बड़ी से गला बैठा हो तो 1 ग्राम मुलहठी के चूर्ण को मुँह में रखकर चूसें।
दांतों में दर्द होने पर
- ▣ ज्वार के दानों को जला लें। अब उनमें थोड़ा सेंधा नमक डालकर अच्छी तरह पीस लें। यह दवा दांतों पर वहाँ मलें, जहाँ दर्द हो रहा हो।
- ▣ नौशादर, गेरू मिट्टी और काली मिर्च-सबको बराबर मात्रा में लेकर बहुत ही बारीक पीस लें। अब इस चूर्ण से मंजन करें और बाद में इसी को पानी में डालकर कुले भी करें।
- ▣ अड़ुसे के पत्तों को उबालकर उस पानी से कुले करें।
- ▣ विजयसार के पत्तों को सुखाकर अच्छी तरह पीस लें। अब
64
साहिब बन्दगी
सरसों के तेल में मिलाकर दाँतों पर लगाएँ।
अनन्नास के रस को रूई के साथ दाँतों में लगाएँ।
अकरकरा को पीसकर छान लें। इसे दाँतों में जहाँ दर्द हो, वहाँ लगाएँ।
हल्दी को तवे पर भून कर दाँतों के नीचे दबाएँ।
दाँतों में बदबू आने पर
नीम की दातून करें। हफ्ते-भर में लाभ मिलेगा।
दाँतों में कीड़े होने पर
मूसाकर्णी के रस को शहद में मिलाकर कुछे करें।
मसूड़ों में सूजन होने पर
चमेली के पत्तों को पानी में उबालकर काढ़ा बना लें। इस पानी से फिर कुछे करें।
लीवर में वृद्धि होने पर
प्रवाल पिष्टी, गुरुचि और मंडूक भस्म सबको शहद में मिलाकर सेवन करें।
जामुन के ताजे पत्तों का रस निकालकर सेवन करें।
दिन में दो बार पुनर्नवा मण्डूर की गोली जल के साथ लें।
पित्ती की बीमारी होने पर
गेहूँ का सिरका तथा अजवायन-दोनों को पीसकर रोगी के शरीर पर लेप करें।
गाय का घी लेकर उसमें गेरू और जरा-सा सेंधा नमक डालकर रोगी के शरीर पर लेप करें। फिर उसे गर्म कपड़ों में मोटी चादर या कंबल देकर सुला दें।
रोगों की पहचान
65
दस्त होने पर
- ❑ अतीस का चूर्ण ढाई ग्राम शहद में मिलाकर चाटें।
- ❑ पोदीने के रस में थोड़ी सौंफ मिलाकर रोगी को दें।
- ❑ कच्चे अमरूद को पीसकर उसमें मिश्री मिकाकर रोगी को खिलाएँ।
प्लीहा वृद्धि होने पर
- ❑ भोजन के बाद 25 मि. ग्रा. रोहितकारिष्ट एक चम्मच पानी के साथ लें।
- ❑ पपीते का सेवन करें।
सिर दर्द होने पर
- ❑ अगस्त (हथिया) वृक्ष के पत्तों का रस निकालकर उसकी 2 बूँदें नाक में डालें।
- ❑ नीम की छाल, त्रिफला, हल्दी, चिरायता, गुरुच-सबको उबालकर काढ़ा बना लें। इस काढ़े में योगराज गुग्गल और गुड़ मिलाकर रोगी को पिलाएँ।
आधे सिर में दर्द होने पर
- ❑ गाय का ताजा घी लेकर उसमें रूई को आगे से तर करें। फिर 3 बूँद रोगी की नाक में डाल दें। यह काम दिन में दो बार (सुबह-शाम) करें। यह प्रयोग बहुत ही लाभकारी है।
- ❑ रीठे के छिलकों को पानी में डाल अच्छी तरह से मलकर झाग पैदा करें। फिर आग पर रखकर गर्म करें और उतारकर गुनगुना रह जाने पर 3-3 बूँदें दोनों नथुनों में डालें।
लकवा होने पर
- ❑ 10 ग्राम अश्वक्र भस्म, 5 ग्राम सोना भस्म, 5 ग्राम प्रवाल पिष्ठी,
66
साहिब बन्दगी
5 ग्राम मोती पिष्टी, 50 ग्राम रस सिंदूर-सबको घृतकुमारी रस में पीस लें। फिर चाँदी भस्म, लौह भस्म, वंग भस्म, जायफल, असगंध, शतावरी, जावित्री, लौंग-सब ढाई-ढाई ग्राम लें और मकोय के रस के साथ घोंट लें। इस सभी के चूर्ण की 230 मि. ग्रा. की छोटी-2 गोलियाँ बनाएँ। यह गोली रोगी को दूध के साथ प्रतिदिन दें।
□ एक पाव गेहूँ की भूसी, 100 ग्राम मेथी, 30 ग्राम सहजने की छाल, 120 ग्राम गुड़, सवा किलो गाय का दूध, 20 ग्राम लहसुन-सबको लेकर इनकी खीर तैयार करें और रोगी को खिलाएँ।
बच्चों के दाँत निकलते समय होने वाली पीड़ा
□ जरा-से पीपर चूर्ण को शहद में मिलाकर बच्चों के मसूड़ों पर मलें।
बिस्तर पर मूत्र करने पर
□ 175 मि. ग्रा. तारकेश्वर रस सुबह-शाम दें।
टॉसिल होने पर
□ गुनगुने पानी में फिटकरी घोलकर गररो करवाएँ।
हिचकियाँ आने पर
□ ग्वारपाठे का रस निकालकर उसमें सोठ मिलाकर लें।
काली खाँसी होने पर
□ श्वेत लाल भस्म और शृंग भस्म-दोनों को शहद में मिलाकर रोगी को चटाएँ।
□ 250 मि. ग्रा. फिटकरी को भूनकर उसमें इतनी ही मिश्री मिलाकर सुबह-शाम खाएँ। बच्चों को कम मात्रा में दें।
रोगों की पहचान
67
मुँह के छाले होने पर
- ▣ पीपल के पत्ते और उसकी छाल-दोनों को पीसकर छाले वाली जगह लेप करें।
- ▣ 12 ग्राम चमेली के पत्ते के साथ 3 इलायची, 8 काली मिर्च और ढाई ग्राम मिश्री मिलाकर कूट-पीस लें। इस दवा को पानी के साथ पी लें।
- ▣ चिरमिता के पत्ते चबाएँ।
चेचक होने पर
- ▣ तुलसी की 10 पत्तियाँ मिर्च के साथ पीस लें। इस दवा को गुनगुने पानी के साथ रोगी को सुबह-शाम दें।
उल्टियाँ होने पर
- ▣ पोदीने के रस में थोड़ी साँफ़ डालकर रोगी को पिलाएँ।
- ▣ यदि उल्टियाँ रुकने का नाम न ले रही हों तो एक कप दूध में पौन चम्मच चूने का पानी मिलाकर सुबह-शाम दें।
- ▣ खून की उल्टियाँ होने पर 5 ग्राम मिश्री में ढाई ग्राम जीरा मिलाकर पीस लें। यह चूर्ण रोगी को देकर ऊपर से पानी पिला दें।
खून बहने पर
- ▣ चोट लगने से या किसी तेज़ हथियार से कट लग जाने से खून बहने पर तारपीन के तेल में रूई को तर करके कटे हुए स्थान पर रखना चाहिए।
स्वप्रदोष होने पर
- ▣ सवा ग्राम शुद्ध शिलाजीत में 2 ग्राम मिश्री मिलाकर अच्छी तरह पीस कर छान लें। अब 600 मि. ग्रा. यह दवा दिन में केवल दो
68
साहिब बन्दगी
बार गाय के दूध के साथ लें।
6 ग्राम त्रिफला (आँवला, हरड और बहेड़ा), ढाई ग्राम कच्ची हल्दी का चूर्ण—दोनों को लेकर अच्छी तरह पीस कर स्वच्छ कपड़े से छान लें। 4 ग्राम इस दवा का दिन में दो बार पानी के साथ सेवन करें।
नपुंसकता होने पर
16 ग्राम छोटा गोखरू लेकर अच्छी तरह पीसकर चूर्ण बना लें। फिर छानकर गाय के थोड़े से घी में भून लें। अब 270 ग्राम शहद मिलाकर दवा तैयार करें। 15 ग्राम यह दवा खाकर दूध पी लें।
वीर्य की कमी होने पर
हररोज उड़द का लडू खाकर दूध पी लें।
6-7 लहसुन की कलियाँ चबाकर खाएँ और ऊपर से दूध पी लें। पर यह शीतक्र्तु में ही ठीक है।
दाद होने पर
सहजन, लहसुन, गोरोचन, कसीम और गुग्गल को पीसकर लेप करें। अमलतास की हरि पत्तियों को पीसकर दाद वाले स्थान पर मलें।
सेम के पत्तों के रस में थोड़ी मिश्री घिसकर दाद वाली जगह लगाएँ।
अमलतास, हल्दी, हरा आँवला, सप्तपर्ण कनेर, विलावर, चमेली के पत्ते, खादिर, बायबिडंग—सबको किसी बर्तन में उबालकर काढ़ा बना लें। दिन में 3 बार इस काढ़े का सेवन करें।
सूज़ाक होने पर
10 ग्राम सत्यनाशी की जड़ की छाल लेकर अच्छी तरह पीस लें।
रोगों की पहचान
69
इसे जल के साथ सेवन करें।
- ▣ यवक्षार, छोटी इलायची, सिलखड़ी-सब बराबर मात्रा में लेकर पीसकर आपस में मिला लें। 7 ग्राम यह दवा बकरी के दूध की कच्ची लस्सी के साथ सुबह-शाम रोगी को दें। बहुत लाभकारी है।
- ▣ 50 ग्राम सोनफली के पत्ते, 3 इलायची, 6 काली मिर्च, 3 ग्राम जेठी मद, 12 ग्राम मिश्री-सबको कूट-पीसकर अच्छी तरह मिला लें। यह दवा रोगी को डेढ़ हफ्ता पिलाएँ।
- ▣ त्रिफले के काढ़े की कुनकुने जल में मिलाकर मूत्र मार्ग को धोएँ।
- ▣ 2 किलो रसपिंडी को उबालकर उसे आटे की तरह मसल लें। फिर उसे डेढ़ किलो देसी घी में पकाएँ। जब बादामी रंग आ जाए तो उसमें डेढ़ किलो गुड़, 3 पाव खोया, 3 पाव मैदा और साथ में बादाम, इलायची बगैरह डालकर उसे जमा लें। बाद में उसके लड्डू बना लें। एक लड्डू रोज खाएँ। कम-से-कम ढाई-तीन हफ्ते यह दवा खाएँ।
- ▣ मूत्र आने पर मूत्रेन्द्रिय के चमड़ें को पकड़कर आगे खींचकर उसका मुँह बंद कर लें और पेशाब करें। आध-पौन मिनट बाद छोड़ें। यह क्रिया लाभकारी है।
सावधानी बरतें
- ▣ संभोग भूलकर भी मत करें।
- ▣ गर्म मिर्च-मसालों को त्याग करें।
मुँहासे होने पर
- ▣ बच, मजीठ, लोध्र, धनिया, सुगन्धहबाला, कूट, अगर्-सब 60 ग्राम लेकर अच्छी तरह पीस लें। अब 175 ग्राम मसूर का आटा और 30 ग्राम हल्दी मिला लें। अब सबको 2 बार छान लें। अब
70
साहिब बन्दगी
एक साधारण चम्मच-भर चूर्ण निकालकर एक छोटी प्याली में डालें। अब इसमें थोड़ा पानी मिलाकर लेप तैयार करें। 20-25 मिनट बाद इसे अपने चेहरे पर लगा लें। यह लेप कम-से-कम आधा घण्टा लगाए रखें और फिर रगड़कर साफ करें। अंत में तौलिये को गर्म पानी में गीला करके सेंक दें।
गाय के कच्चे दूध के साथ जायफल को किसी पत्थर पर घिसकर मुँह पर लेप करें।
जैतून का तेल मुँहासों पर लगाएँ।
खाज खुजली होने पर
10 ग्राम नारियल तेल को गर्म करके उसमें 16 ग्राम कपूर मिला लें। यह दवा खुजली वाले स्थान पर लगाएँ।
चंदन के तेल में नींबू का रस मिलाकर मालिश करें।
शरीर से दुर्गंध आने पर
बेल की जड़ को हरड के साथ पीसकर उसका लेप बनाकर बगल में लगाएँ।
बेल के पत्तों का रस शरीर पर मलें।
हरड, आम की छाल, लोश्र, खस और चंदन का लेप शरीर पर लगाकर नहाना शरीर की बदबू से छुटकारा दिलाता है।
जोड़ों में दर्द होने पर
त्रयोदशांग गुगल की 2 गोली सुबह-शाम गर्म पानी के साथ लें।
सरसों के तेल में प्याज का रस मिलाकर दर्द वाले स्थान पर मलें।
राई के तेल की मालिश भी लाभकारी सिद्ध होती है।
गठिया होने पर
नागौरी असगंध की जड़ के साथ मिश्री बराबर मात्रा में ले अच्छी तरह पीस-छानकर किसी शीशी में रख लें। दिन में दो बार यह
रोगों की पहचान
71
चूर्ण 5 ग्राम की मात्रा में दूध के साथ लेना बहुत ही लाभकारी रहता है।
गंजापन होने पर
- ❑ शहद में कटेरी का रस मिलाकर गंज वाले स्थान पर लगाएँ।
- ❑ सीताफल के पत्तों को पीस कर गंज वाली जगह लगाएँ।
बाल झड़ने पर
- ❑ एक नींबू के रस में उससे डेढ़गुना नारियल का तेल मिलाकर सिर पर धीरे-धीरे बालों की जड़ों में मलें।
घाव हो जाने पर
- ❑ नीम के पत्तों को गर्म पानी से धोकर घाव वाले स्थान की सफाई करें। अब तेल और शहद मिलाकर उसमें रूई डालकर तर करें और फिर घाव वाली जगह लगाएँ।
- ❑ पीपल की छाल को घिसकर घाव वाले स्थान पर लेप करें।
घाव में कीड़े हो जाने पर
- ❑ लहसुन को पीसकर घाव वाले स्थान पर बाँध दें।
- ❑ सीताफल के पत्तों को पीस कर घाव वाले स्थान पर लेप करें।
- ❑ करौंदे की जड़ को पानी में पीस लें। अब उस लेप को घाव वाली जगह करें।
- ❑ नीम की छाल और और हींग का लेप घाव वाली जगह करें।
बाल सफेद होने पर
- ❑ नारियल के पानी में नींबू के छिलके डालकर 7 दिन तक धूप लगाएँ। आठवें दिन इसे छान लें। यह दवा बालों की जड़ों में रगड़ना बहुत लाभकारी सिद्ध होता है।
72
साहिब बन्दगी
आँवला चूर्ण एक चम्मच खाकर ऊपर से दो चम्मच पानी पी लें।
प्रमेह होने पर
गिलोय को कूट-पीसकर उसका रस निकाल लें। 25 ग्राम उस रस में शहद मिलाकर पिड़ें।
80 ग्राम कच्ची फली, 3 इलायची, 6 काली मिर्च 125 ग्राम मिश्री-सबको लेकर अच्छी तरह से कूट-पीस लें। इस दवा को एक-डेढ़ हफ्ते तक पिड़ें।
बतासे में बड़ का दूध निकालकर डालें और पी लें। यह दवा हफ्ता-भर लें।
भिंड़ी की जड़ को लेकर पानी में उबाल लें। फिर उसमें गाय का घी और खांड मिलाकर सेवन करें।
बंशलोचन, सोंठ, अनारदाना, लौंग, इचायची, तज, कपूर, पत्रज, जायफल, कालीमिर्च-सबको पीसकर चूर्ण बना लें। अब इन सबके बराबर कांतिसार तथा इतनी ही मिश्री मिला लें। अब यह प्रमेह के लिए बढ़िया चूर्ण तैयार हो गया। 9 ग्राम यह चूर्ण रोज बकरी के दूध के साथ लें।
आँवले को कूट-पीसकर उसका रस निकाल लें। 22 ग्राम उस रस में शहद और हल्दी मिलाकर पिड़ें।
सावधानी बरतें
खट्टी चीजें बिलकुल न खाएँ।
मधुमेह रोग होने पर
इसमें रक्त में शकर की मात्रा बढ़ जाने से पेशाब के साथ शकर आती है, मूत्र का रंग भी सफेद हो जाता है। प्रमेह रोग ही धीरे-धीरे बढ़कर मधुमेह रोग में बदल जाता है। ऐसे में रोगी का वजन गिरने लगता है, वो कमजोर होने लगता है।
रोगों की पहचान
73
- ❑ अभ्रक भस्म, रस सिंदूर, प्रवाल भस्म—तीनों 50-50 ग्राम लें। चाँदी भस्म और सोना भस्म—दोनों 25-25 ग्राम लें। लोह भस्म, सिक्का भस्म, बंग भस्म—तीनों 35-35 ग्राम लें। अब सबको खरल में डाल दें। अब उसमें थोड़ा कमल के फूलों का रस डालें और रगड़कर उस रस को उन दवाइयों में इतनी अच्छी तरह मिलाएँ कि रस सूख जाए। फिर ऐसे ही थोड़ा दूध मिलाएँ, फिर बाँसा का रस मिलाएँ, फिर केले के फूलों का रस डालकर मिलाएँ, फिर गन्ने का रस डालकर मिलाएँ, फिर मालती के फूलों का रस डालकर मिलाएँ। इस तरह बारी-बारी से ये सब रस मिलाकर, सुखाकर अंत में 50-50 ग्राम की छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें। 2 गोलियाँ दिन में 2 ही बार दूध के साथ रोगी को देने से बहुत लाभ होगा।
- ❑ मोचरस और हल्दी—दोनों को 110 ग्राम की मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। फिर उसमें 55 ग्राम आँवले का चूर्ण मिलाकर किसी बोटल में रख दें। अब दो-ढाई ग्राम की मात्रा में यह चूर्ण सुबह-शाम शहद में मिलाकर खाएँ।
- ❑ सबसे पहले आँवले का रस निकालकर उसमें से 225 ग्राम रस एक बोटल में डाल दें। फिर हरे करेले का रस निकालकर इतनी ही मात्रा में उसी बर्तन में डाल दें। फिर नीम के पत्तों का रस निकालकर 110 ग्राम की मात्रा में उसमें डाल दें। फिर बेल के पत्तों का रस निकालकर 110 ग्राम की मात्रा में उसमें डाल दें। अब उसमें 12 ग्राम माजू सत्व और 12 ही ग्राम सूर्यतापी शिलाजीत डालकर अच्छी तरह से मिला लें। यह मधुमेह की बेहतरानी दवा बन गयी। दिन में 3 बार 3 ही चम्मच का सेवन करें।
- ❑ निगुण्डी के पत्तों को छाया में सुखाकर 5 काली मिर्च के साथ खाएँ।
- ❑ गूलर के वृक्ष की छाल के साथ 4 ग्राम प्रवाल भस्म, 7 ग्राम सोंठ,
74
साहिब बन्दगी
डेढ़ ग्राम लोह भस्म, 4 ग्राम काली मिर्च, 30 ग्राम जामुन की गुठली की गिरी लेकर खरल में डाल दें और अच्छी तरह से कूट-पीस लें। यह दवा दही की लस्सी के साथ 2 ग्राम की मात्रा में ही लें।
10 ग्राम सौंफ को सवा गिलास पानी में उबालें। जब चौथा हिस्सा पानी शेष रह जाए तो उसे छानकर गाय के 10 ग्राम मक्खन के साथ सेवन करें। यह दवा डेढ़ महीने तक रोज सुबह-सुबह लें।
सावधानी बरतें
मिटाइयाँ, चीनी, शक्कर, चाय, काफी, चावल आदि से बचें। करेले की सब्जी खाएँ।
बदन दर्द होने पर
लहसुन की पाँच कलियाँ और ढाई ग्राम अजवायन-दोनों को 35 ग्राम सरसों के तेल में डालकर आग पर रखें। अजवायन काली हो जाने पर उतार लें। गुनगुना रह जाए तो छानकर उस तेल की मालिश करें।
विषैले कीड़ों के काटने पर
यदि सॉप ने काटा हो तो गर्म छाछ में 10 ग्राम मिरचाकंद बूटी मिलाकर दें।
यदि सॉप ने काटा हो तो करौंदे की जड़ को पानी में उबालें और वो पानी पिलाएँ।
यदि बिच्छू ने काटा हो तो आक के पत्ते या फल लेकर पीस लें और उसका लेप डंक वाले स्थान पर करें।
यदि सॉप ने काटा हो तो विषखपरा का रस पिलाएँ।
बेल की जड़ और कैथ की जड़ को पीसकर पिलाने से सर्प का विष उतर जाता है।
रोगों की पहचान
75
- ❑ मधुमक्खी या भौरै ने काटा हो तो पहले चाकू बगैरह को गर्म करके विष निकाल दें। अब प्याज़ का रस मिलाकर 8-10 मिनट उस स्थान को रगड़ें। अंत में प्याज़ की पट्टी बाँध दें।
- ❑ यदि बिच्छू ने काटा हो तो दियासलाई की 10 तिल्लियों को लेकर उनका मसाला निकाल लें और पानी में घिसकर काटे गये स्थान पर लगाएँ।
- ❑ यदि पागल कुत्ते ने काटा हो तो प्याज़ को घिसकर उसमें शहद मिलाकर लेप करें। यह प्राथमिक उपचार है।
- ❑ यदि पागल कुत्ते काटा हो तो हंसपदी को पीसकर लेप करें।
सामान्य ज्वर
- ❑ अंकोल पेड़ की जड़ की छाल 3 ग्राम लेकर उसका काढ़ा बनाएँ। यह काढ़ा ज्वर से ग्रसित रोगी को दें।
- ❑ करौंदे की जड़ का काढ़ा बनाकर शरीर पर लेप करें।
- ❑ कैसा भी ज्वर हो, 4 ग्राम पित्तापपड़ा, 6 काली मिर्च-दोनों को पीस लें। यह चूर्ण रोगी को खिलाकर ऊपर से गर्म जल के दो घूँट पिला दें।
कफ का बुखार होने पर
- ❑ अदरक के रस का सेवन करें।
- ❑ तुलसी का रस भी लाभकारी है।
पित्त से होने वाले बुखार पर
- ❑ नींबू को काटकर उसके बीज निकाल दें। अब उसपर जरा-सी काली मिर्च का चूर्ण और सेंधा नमक डालकर आग पर रखें। यह नींबू रोगी को चूसने के लिए दें।
- ❑ नीम की छाल के रस का सेवन करें।
- ❑ लाल चंदन, खस, सुगन्धबाला, नागरमोथा, सोंठ, पित्तापपड़ा-
76
साहिब बन्दगी
कुल 10 ग्राम लेकर चार बड़े गिलास जितने पानी में डालकर उबालें। जब आधा पानी रह जाए तो साफ़ कपड़े से छान लें। इस पानी को मिट्टी के बर्तन में रख लें। प्यास लगने पर रोगी को यही पानी पिलाएँ।
वायु से बुखार होने पर
लाल चंदन, धनिया, नीम की छाल, अंजीर, गिलोय, पद्माख-सब 5-5 ग्राम की मात्रा में लें। अब इस सबको एक बड़े गिलास पानी में डालकर उबालें और काढ़ा बन जाए तो उतार लें। फिर स्वादानुसार इसमें मिश्री डालकर रोगी को पिला दें। यह दवा सुबह देना बहुत लाभकारी है।
लौंग का पानी पीने से लाभ मिलता है।
तुलसी के पत्तों का रस भी लाभकारी है।
गिलोय का रस हितकारी है।
नागरमोथा, पित्तपापड़ा, चिरायता, गिलोय, सोंठ-सब 3-3 ग्राम मात्रा में लेकर उबालकर काढ़ा बना लें। यह काढ़ा रोगी को हफ्ता-भर पिलाएँ।
कैंसर होने पर
गेहूँ की पौध का रस निकालकर उसका सेवन करें। इस दवा का रोज़ सेवन करें।
आग से जल जाने पर
जौ को भूनकर अच्छी तरह पीस लें। अब इसे तिलों के तेल में मिलाकर जले हुए स्थान पर धीरे-धीरे लेप करें।
नारियल को पीसकर उसका लेप बना लें और जले हुए स्थान पर लगाएँ।
रोगों की पहचान
77
उच्च रक्तचाप होने पर
- ❑ ढाई ग्राम मेथी का चूर्ण सुबह-शाम खाली पेट ही जल के साथ लें।
- ❑ सफेद खसखस को अच्छी तरह से पीस लें। अब तरबूज के बीज की गिरी को पीसकर दोनों को अच्छी तरह मिला लें। दोनों को मात्रा समान हो। अब चम्मच-भर यह दवा रोगी को सुबह खाली पेट पानी के साथ ही दें।
- ❑ 6 ग्राम शहद में 6 ग्राम प्याज का रस मिलाकर रोगी को दें। यह दवा हररोज देना लाभकारी सिद्ध होगा।
नोट : यदि रोगी का रक्त चाप एकदम ज्यादा हो जाए तो ऐसे में पौनः कप पानी लेकर उसमें आधा नींबू निचोड़ें और रोगी को पिला दें। ढाई घण्टे के अन्तराल में रोगी को तीन बार यह दवा दें।
निम्न रक्तचाप होने पर
- ❑ किशमिश के 30 दाने लेकर पौन कप पानी में रात को भिगो दें। सुबह उन्हें चबा-चबाकर खाएँ। महीना-डेढ़ महीना यह दवा करना लाभकारी सिद्ध होता है।
- ❑ 8 बादाम की गिरी रात को पानी में भिगोकर सुबह उसकी ठंडाई बनाकर सेवन करें।
रोगों के निदान में कुछ लाजवाब फार्मूले
रोगों के निदान में कुछ
लाजवाब फार्मूले
गुर्दे की पीड़ा होने पर
जड़ समेत भांतल बूटी (जंगली गोभी) को स्वच्छ जल से अच्छी तरह से धोकर साफ़ करें, फिर गुनगुने पानी में भी आधा मिनट के लिए डालकर धोएँ। अब उसे निकालकर जलाएँ। जो राख बचे, उसे रख लें। अब एक बर्तन में पानी डालकर उस राख को उसमें डालकर अच्छी तरह से मिलाकर एक दिन और एक रात के लिए रख दें। अब पानी को किसी अन्य बर्तन में डालकर आग पर रखें। जब पानी समाप्त हो जाए तो उतार लें। जो राख बची, वो गुर्दे की पीड़ा की लाजवाब दवा है। इसे किसी बोतल में रख दें। जब भी किसी को गुर्दे की पीड़ा हो तो 130 मि. ग्रा. इस दवा को गर्म पानी में मिलाकर रोगी को दें। बहुत लाभकारी है।
बहरापन होने पर
लहसुन की 30 अलग की हुई फॉर्कें लें और उन्हें कड़वे बादामों के 80 ग्राम तेल में डालकर अच्छी तरह से गर्म कर लें। अब उस तेल को छानकर किसी काँच की बोतल में डाल दें। केवल दो-2 बूँदें यह तेल रोज़ रोगी के कानों में डालें। यह बहुत लाभकारी दवा है।
क्षय रोग होने पर
30 किलो पानी में 6 किलो बांस की जड़ का छिलका डालकर अच्छी तरह से उबाल लें। जब पानी तीसरे हिस्से से भी कम रह जाए तो
78
रोगों की पहचान
79
उतारकर अच्छी तरह से छान लें। फिर इस पानी में 6 किलो चीनी मिलाकर पुनः आग पर रखकर चाशनी की तरह बनाएँ। इसके बाद सोंठ, पिपला चूर्ण, तालीसपत्र, सूखा धनिया, मीठा कुठ, काली मिर्च, छोटी इलायची, तेज पत्र, सफेद जीरा, कुटकी, कायफल, चव्च, हरीतकी छिलका, काला जीरा, दालचीनी, कमीला-सब 25-25 ग्राम लेकर अच्छी तरह से पीसकर उसमें डालकर मिलाएँ। फिर उसमें 550 ग्राम शहद डालकर मिला लें। यह दवा तैयार हो गयी। सुबह-शाम रोगी को 8-10 ग्राम की मात्रा में देकर ऊपर से बकरी का गुनगुना दूध पिला दें।
झूठे गुरु के पक्ष को, तजत न कीजे बार। पार न पावै शब्द का, भरमें बारबार ॥
भोजन द्वारा रोगों का निदान
भोजन द्वारा रोगों का निदान
बादाम से रोगों का निदान
सूखी खाँसी होने पर
- ❑ 6 बादाम पानी में कम-से-कम 8 घण्टे के लिए भिगो दें। फिर उन्हें छील कर मिश्री मिलाकर पीस लें। अब इस दवा को खा लें।
पीलिया होने पर
- ❑ 5 बादाम की गिरी, दो छुहारे, दो छोटी इलायची लेकर रात को भिगो दें। सुबह अच्छी तरह पीसकर मिश्री और मक्खन मिलाकर खाएँ।
आँख के रोग होने पर
- ❑ बादाम की पाँच गिरी लेकर रात को भिगो दें। फिर उसका छिलका उतारकर पानी के साथ पीस लें। फिर उसमें मिश्री और दूध मिलाकर पी लें।
पेशाब में जलन होने पर
- ❑ 10 गिरी बादाम की लेकर रात को पानी में भिगो दें। अब छीलकर 6 छोटी इलायची और मिश्री मिलाकर पानी के साथ पीस लें। अब इसे पानी में मिलाकर पी लें।
हकलाने पर
- ❑ 10 गिरी बादाम की लेकर रात को पानी में भिगो दें। फिर उसका छिलका उतारकर पीस लें। अब इसे मक्खन और मिश्री
80