भारतकोश
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सेहत संजीवनी

Sehat Sanjivani

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: June 2009 First Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Post-Raya, Distt.-Samba (J & K) · 2009 (उद्गम)

DevanagariHindipublished104 पृष्ठ

सेहत संजीवनी

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इन्द्रियव, खस, चन्दन, लोध, सोँचन नमक, अनारदाना, आम की बहुत पुरानी गुठली, मंजीठ, कमलगुट्टा, जामुन की गुठली, छोटी इलायची, मंजीठ-सब 25-25 ग्राम लेकर कूटपीस लें। इस चूर्ण में मिश्री मिला लें। यह चूर्ण चावल के धोवन के साथ फांक लें।

  • ☐ संग्रहणी रोग को दूर करता है।
  • ☐ अतिसार की बढ़िया दवा है।
  • ☐ बवासीर का नाश करता है।

भगंदरविजय चूर्ण ( आमवात, भगंदर... )

  • ☐ जवाखार, पीपरामूल, इन्द्रियव, अजमोद, सफेद जीरा, काला जीरा, चिरायता, हींग, त्रिकुटा, हल्दी, बच, नमक, चील, सज्जी, गजपीपल, बायबिडंग, त्रिफला-सब 25-25 ग्राम ले कूटपीसकर छान लें। पानी के साथ इस चूर्ण का सेवन बड़ा हितकारी है।
  • ☐ आमवात को ठीक करता है।
  • ☐ भगंदर रोग दूर करता है।
  • ☐ प्रमेह में लाभकारी है।
  • ☐ पांडुरोग की अच्छी दवा है।
  • ☐ संग्रहणी रोग दूर करता है।
  • ☐ हृदयशूल में यह लाभकारी है।
  • ☐ वायु रोग दूर करता है।

शुंख्यादि चूर्ण ( मन्दाग्नि, परमा... )

  • ☐ बावची, इलायची, पीपल, अदरक, वंशलोचन, कचूर, जायफल, लवंग, तेजपात, तज, मिर्च, अनारदाना-सब बराबर मात्रा में ले

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साहिब बन्दगी

कूटपीसकर चूर्ण कर लें। फिर चूर्ण के बराबर मात्रा में लोहरस और इतनी ही मिश्री मिला लें। यह चूर्ण 5-6 ग्राम सुबह लें और ऊपर से बकरी का दूध पीना न भूलें।

  • □ मन्दाग्नि को नष्ट करता है।
  • □ सभी प्रकार के परमों को खत्म करता है।

अतिसार चूर्ण ( अतिसार... )

  • □ अतीस, जायफल, बेलगिरी, नागरमोथा, सुर्गधवाला, काकड़ासिंधी, कुड़ा की छाल, गजपीपल, इचायची, धाय के फूल-सब 8-8 ग्राम ले कूटपीसकर छान लें। थोड़ा-सा यह चूर्ण शहद के साथ खाएँ।
  • □ अतिसार को दूर करता है।
  • □ अतीस, काला नमक, हरड, सेंधा नमक, बच, हींग-सब बराबर मात्रा में लेकर कूटपीस लें। यह चूर्ण गर्म पानी के साथ थोड़ा-सा खाएँ।
  • □ अतिसार के लिए बढ़िया चूर्ण है।

अपूर्व चूर्ण ( पाचन क्रिया... )

  • □ भुना हुआ सुहागा, लौंग, त्रिफला, सोचन नमक, सेंधा नमक, भुनी हुई हींग, चीता, त्रिकुटा-सबको कूटपीसकर छान लें। फिर सहजने के रस में छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें।
  • □ ये गोलियाँ भूख को बढ़ाने वाली हैं।
  • □ पाचन क्रिया को ठीक करती हैं।

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त्रिफला चूर्ण ( उदर रोग... )

  • □ एक किलो मुलहठी, एक किलो मुहुआ के फूल, एक किलो त्रिफला, एक किलो दालचीनी-सबको कूटपीसकर किसी स्वच्छ कपड़े से छान लें। फिर दवा के जितने शहद और इतने ही घी में मिलाकर रात को सोने से पहले खाएँ।
  • □ उदर रोगों को ठीक करता है।
  • □ आँखों के रोगों में भी लाभकारी है।
  • □ मुँह, छाती, नाक, कान आदि से संबंधित रोगों में भी लाभ देता है।

चौहारम चूर्ण ( वायु, भूख... )

  • □ पैसा भर बबूल के पत्ते, पैसा भर सिंहोर के पत्ते, 2 पैसा भर तुलसी के पत्ते, एक पैसा भर आँवले के पत्ते-सबको सुखा लें। फिर एक पैसा भर सज्जीखार, 2-2 पैसा पाँचों नमक, एक पैसा भर जवारखार, एक पैसा भर मिर्च, एक पैसा भर नागरमोथा, एक पैसा भर पीपर-सबको कूटपीसकर किसी साफ कपड़े से छान लें। 5 ग्राम यह चूर्ण पानी के साथ सेवन करें।
  • □ भूख खोलता है।
  • □ पेट का फूलना बंद करता है।
  • □ वायु रोग को दूर करता है।

हर प्रकार के बुखार का चूर्ण

  • □ देवदारु की लकड़ी, बड़ी, अदरक, छोटा धनिया-सब बराबर मात्रा में लेकर अच्छी तरह से पीस लें। अब इन्हें किसी साफ कपड़े से छानकर रख लें। यह हर तरह के बुखार का चूर्ण तैयार

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साहिब बन्दगी

हो गया। सुबह-शाम यह 5 ग्राम चूर्ण गर्म पानी के साथ लें। अत्यंत उपयोगी है।

हरीतक्यादि चूर्ण ( वातरोग... )

  • □ लोहारस, हरड, बहेड़ा-सब बराबर मात्रा में ले कूटपीसकर छान लें। 5 ग्राम यह चूर्ण खाएँ।
  • □ वातरोग को नष्ट करता है।

अजमोदादि चूर्ण ( आमवात... )

  • □ 9 ग्राम बायबिडंग, 9 ग्राम देवदारु, 9 ग्राम पीपलमूल, 9 ग्राम सौफ, 9 ग्राम संधा नमक, 9 ग्राम चीता, 9 ग्राम पीपल, 9 ग्राम अजमोद, 85 ग्राम अदरक, 85 ग्राम भिदारा, 50 ग्राम हर-सबको कूटपीसकर चूर्ण कर लें। फिर गर्म पानी के साथ सेवन करें।
  • □ आमवात की बढ़िया दवा है।
  • □ हरों के चूर्ण में अरंडी का तेल मिलाकर पीएँ।
  • □ बायबिडंग, नागरमोथा, त्रिफला-कूट-सब बराबर मात्रा में ले कूटपीसकर चूर्ण कर लें। फिर गिलोय के रस के साथ छोटी-छोटी (4-4 ग्राम बराबर) गोलियाँ बना लें। सुबह-शाम 1-1 गोली खाएँ।

पंचवटिकादि चूर्ण ( उदर रोग... )

  • □ 25 ग्राम कलमीसोरा, 25 ग्राम पाँचों नमक, 25 ग्राम पीपल, 25 ग्राम मिर्च, 25 ग्राम नौसादर-सबको कूटपीसकर चूर्ण कर लें। 5 ग्राम यह चूर्ण खाएँ।

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□ उदर रोगों का नाश करता है।

उदररोगनाशक चूर्ण ( उदर रोग )

□ पीपर, पाँचों नमक, आँवला, हर, बहेड़ा, मिर्च, अदरक, काला जीरा, सफेद जीरा, फिटकरी, चिरायता, लौंग, अजवाइन, जवाखार, झाऊ के पत्ते-सब बराबर मात्रा में ले कूटपीसकर कपड़े से छान लें। फिर नींबू के रस का छींटा देकर खाएँ। 5 ग्राम यह चूर्ण सेवन करें।

□ सर्व उदर रोग की दवा है।

चित्रकादि चूर्ण ( खाँसी... )

□ पीपल, पीपलामूल, चीता, गजपीपल-सबको कूटपीसकर छान लें। फिर शहद के साथ 5-6 ग्राम खाएँ।

□ खाँसी को नष्ट करता है।

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सेहत संजीवनी लेप

सेहत संजीवनी लेप

( दर्द... )

  • ❑ 25 ग्राम प्याज, 25 ग्राम शहद, 12 ग्राम गुड़, 25 ग्राम सीका चूर्ण, 25 ग्राम आंबा हल्दी, 12 ग्राम चूना-सबको मिलाकर गर्म करें।
  • ❑ कहीं भी दर्द हो इसका लेप करके ऊपर से रई लपेट दें।

( घाव )

  • ❑ 10 ग्राम राल को पीसकर उसमें 120 ग्राम घी मिलाएँ। फिर पानी की सहायता से आधा पौन घण्टा हाथों से अच्छी तरह मलें। फिर 18 ग्राम फिटकरी, 18 ग्राम कल्था, 18 ग्राम नीलाथोथा-सबको कूटपीसकर मिला लें।

( पक्षाघात )

  • ❑ कालीमिर्च को अच्छी तरह से बारीक पीस लें। फिर इसे तेल में मिलाकर गर्म करें और लेप करें।
  • ❑ पक्षाघात की बहुत बढ़िया दवा है।

( फोड़ा )

  • ❑ 1 तोला नीलाथोथा की भस्म, 25 ग्राम कपूर, 25 ग्राम मोम, 12

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सेहत संजीवनी

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ग्राम केवला, 12 ग्राम सफेदा, 25 ग्राम राल, 12 ग्राम सिंदूर-सबको कूटपीसकर किसी साफ कपड़े से छान लें। अब घी में मिलाकर लेप तैयार कर लें।

  • □ सर्व प्रकार के फोड़े-फुंसी या जख्म को ठीक करता है।
  • □ एलुबा, कुचला, गूगल-सबको पानी में पीसकर गर्म करें और जहाँ फोड़ा या फुंसी हो, वहाँ लेप करें।

( सफेद कुष्ठ )

  • □ बायबिडंग, भिलावों, अमलतास, असगंध, चीता, जमालगोटे की जड़, निंबोली-सबको पीसकर लेप बना लें।
  • □ कुष्ठ रोग को खत्म करता है।

( बिवाइयाँ )

  • □ 12 ग्राम घी को गर्म करके 3 ग्राम मोम में मिलाएँ। फिर 12 ग्राम राल डालकर मिला लें। बिवाइयों के लिए बढ़िया लेप है। लगाने से पहले पाँव अच्छी तरह से धोकर साफ कर लें।

( छाती का कफ )

  • □ आंबाहल्दी, महुए के फूल, बनारसी राई-सब बराबर मात्रा में लेकर आग पर रखें। फिर इसे सहनेयोग्य होने पर रोगी को छाती पर लेप करें। ।

( अण्डकोष )

  • □ आंबा हल्दी, अजवाइन, टेसू के फूल, खुरासानी सबको बराबर मात्रा में ले कूटपीसकर गर्म करें। लेप तैयार हो जाने पर अण्डकोष

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साहिब बन्दगी

पर लेप करें।

( भगन्दर... )

  • □ तिल, पीपल, त्रिफला, निसोत, कूट, शहद, जमालगोटे की जड़, तूतिया, हल्दी, सेंधा नमक-सबको कूटपीसकर लेप तैयार कर लें।
  • □ शरपुंखी, आक का दूध, कूड़ा, सेंधा नमक, मजीठ, हल्दी, चीता-सबको कूटपीसकर तेल में मिलाकर लेप करें। पोस्ता की गिरी, नागकेसर-दोनों 8-8 ग्राम लेकर काढ़ा तैयार करें। यह काढ़ा पीना बड़ा लाभकारी है।

( पेट दर्द... )

  • □ बबूना, सफेद जीरा, काला जीरा, रेंडी का तेल, आंबा हल्दी-सबको कूटपीसकर मिला लें। फिर गेहूँ की रोटी बनाकर उसपर यह दवा लगाकर गर्म करें और दर्द वाली जगह पर लगा दें।

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महत्वपूर्ण संजीवनी मुरब्बे

महत्वपूर्ण संजीवनी मुरब्बे

हरों को मुरब्बा ( संग्रहणी... )

  • □ 100 हरेँ और थोड़ी साफ मिट्टी लेकर पानी में डालें। 2-3 दिन आग पर रखें। फिर साफ करके शहद में डाल दें। 10 दिन रहने दें। फिर शहद की अलग से चासनी बनाकर सारे हरेँ उसमें डाल दें। इसके बाद 25 ग्राम लौंग, 25 ग्राम बड़ी इलायची, 25 ग्राम अदरक, 25 ग्राम जायफल, 25 ग्राम तज, 25 ग्राम रूपी मस्तंगी, 5 ग्राम केसरी, 2 ग्राम कस्तूरी लेकर सबको कूटपीसकर उसमें मिलाएँ। 1 महीने 1 हफ्ते बाद यह मुरब्बा खाएँ।
  • □ संग्रहणी रोग को दूर करता है।
  • □ आँखों की ज्योति बढ़ाता है।
  • □ सारे शरीर के लिए लाभकारी है।

बेल का मुरब्बा ( खूनी बवासीर... )

  • □ बेल के 5 किलो मगज लें और उसमें थोड़ा-सा घी डालकर पानी में भिगोएँ। फिर एक किलो मिश्री, 2 किलो शहद डालकर चासनी बना लें। फिर 4 ग्राम नागरमोथा, 2 ग्राम कपूर, 5 ग्राम वालछड़, 3 ग्राम छड़ीला, 2 ग्राम मोहरा खताई, 3 ग्राम इलायची-सबको कूटपीसकर छान लें। फिर इसे चासनी में डाल दें और

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साहिब बन्दगी

1 महीना 1 हफ्ता तक पढ़ा रहने दें। फिर उसके बाद प्रयोग में लाएँ।

  • □ संग्रहणी का नाश करता है।
  • □ खूनी बवासीर की बढ़िया दवा है।
  • □ पेट के मरोड़ के लिए भी लाभकारी है।
  • □ सभी रोगों में लाभ करता है।

आँवले का मुरब्बा ( सर्व रोग )

  • □ एक किलो आँवले लेकर 24 घण्टे पानी में भिगो दें। फिर एक दिन फिटकरी के पानी में डाले रखें। फिर उसके बाद ऐसे ही एक दिन चूने के पानी में भी भिगोकर आँवले साफ कर लें। फिर आधा किलो मिश्री और आधा किलो शहद की चासनी बनाकर सारे आँवले उसमें डाल दें। इसके बाद 12 ग्राम गुलाब का अर्क, 12 ग्राम अगर, 12 ग्राम केवड़ा का अर्क, 12 ग्राम कस्तूरी-सबको कूटपीसकर किसी साफ कपड़े से छान लें। अब चासनी में मिलाकर 2 हफ्ते रखें। 12 ग्राम यह मुरब्बा बड़ा गुणकारी है।
  • □ सर्व रोगों पर यह मुरब्बा दें।

बच का मुरब्बा ( लकवा... )

  • □ 2 किलो बच को 24 घण्टे पानी में डालकर रखें। फिर डेढ़ किलो शहद की चासनी बनाकर सारी बच उसमें डाल दें और आग पर रखें। 7 दिन बाद खाएँ। 10 मासे ही लें।
  • □ लकवा में लाभकारी है
  • □ छाती को बल प्रदान करता है।
  • □ महीना-भर खाएँ तो सर्व रोग दूर होते हैं।

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गाजर का मुरब्बा ( कलेजे की गर्मी... )

  • □ 6 किलो गाजर की छाल छूरकर साफ करें। छोटे-छोटे टुकड़े करके दिन-भर के लिए पानी में भिगो दें। फिर पानी से निकालकर 3 किलो शहद में डालें और आग पर रखें। फिर 2 किलो शहद लेकर चासनी तैयार कर लें और उसमें गाजर को डाल दें। फिर उसमें बड़ी इलायची, पीपरी, अदरक, बालछड़, मिर्च, कंफर के बीज, रूमीमस्तंगी-सब 25-25 ग्राम ले कूटपीसकर छान लें और मिला लें। 7 दिन बाद खाएँ। 15 ग्राम की मात्रा लें।
  • □ कलेजे की गर्मी को दूर करता है।
  • □ कमर व छाती के दर्द को भी आराम देता है।

ॐ ॐ ॐ

सेहत संजीवनी पाक

सेहत संजीवनी पाक

केसर पाक

  • ❑ 3 ग्राम कस्तूरी, 3 ग्राम मृगांक रस, 3 ग्राम अश्वक रस, 3 ग्राम बंग रस, 3 ग्राम चांदी रस, 12 ग्राम केसर, 12 ग्राम लोह रस—सबको एक साथ अच्छी तरह घोंटकर मिला लें। फिर 25 ग्राम चिरौंजी, 25 ग्राम जायफल, 25 ग्राम बादाम, 25 ग्राम पिस्ता, 25 ग्राम अदरक, 25 ग्राम मिर्च, 25 ग्राम पीपल, 25 ग्राम जाविव्री, 120 ग्राम असगंध—सबको कूटपीसकर घी में भून लें। फिर 2 किलो मिश्री की चासनी बनाएँ।

अब पाँच किलो दूध का खोवा बनाएँ और फिर ऊपर का रस और चासनी और सब दवा एक में मिला लें। 5 ग्राम यह दवा खाकर ऊपर से आधा किलो दूध पी लें।

  • ❑ नपुंसकता को दूर करती है।
  • ❑ शरीर की क्रांति को बढ़ाता है।

कुमारी पाक

  • ❑ साढ़े तीन किलो गाय के दूध में 1 किलो कुमारी कन्द मिलाकर पकाएँ और फिर उसे छाया में सुखा दें। अब कूटपीसकर चूर्ण कर लें। फिर 50 ग्राम जायफल, 50 ग्राम जाविव्री, 50 ग्राम लौंग,

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150 ग्राम अदरक, 150 ग्राम पीपल, 150 ग्राम मिर्च, 50 ग्राम गोखरू, 50 ग्राम इलायची, 50 ग्राम नागकेसर, 50 ग्राम चीनी, 50 ग्राम ककड़ी के बीज, 50 ग्राम लौंग, 50 ग्राम दालचीनी, 50 ग्राम तमालपत्र-सबको कूटपीसकर किसी साफ कपड़े से छान लें। फिर इसे घी में भून लें। अब 1 किलो शहद, आधा किलो घी, आधा किलो दूध, 1 किलो मिश्री-चारों को लोहे की कड़ाही में डालकर धीमी आँच में पकाएँ। फिर 12 ग्राम सिंदूर का रस, 12 ग्राम लोहरस, 12 ग्राम सोनारस-सबको एक में मिलाकर 6-6 ग्राम की गोलियाँ बना लें।

  • □ श्वास रोग को दूर करता है।
  • □ आमवात को भी दूर करता है।
  • □ अजीर्ण रोग का नाश करता है।
  • □ प्रदर रोग को शांत करता है।

सेवती पाक

  • □ हजार सफेद सेवती के फूल लेकर 400 ग्राम घी में डालकर पकाएँ। फिर 350 ग्राम शहद, 3 किलो मिश्री, 50 ग्राम दालचीनी, 50 ग्राम इलायची, 50 ग्राम नागकेसर, 350 ग्राम मुनक्का, 25 ग्राम गिलोय का सत्त, 25 ग्राम वंगभस्म, 3 रत्ती कपूर, 50 ग्राम तमालपत्र, 25 ग्राम वंसलोचन, 25 ग्राम सफेद जीरा, 25 ग्राम सीसा भस्म-सबको कूटपीसकर किसी साफ कपड़े से छान लें। फिर यह सब ऊपर के दवा में मिलाकर पाक तैयार करें। 5-6 ग्राम इस पाक का सेवन सुबह के समय करें।
  • □ क्षय रोग का नाश करता है।
  • □ प्रमेह रोग को दूर करता है।
  • □ नेत्ररोगों को दूर करता है।

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साहिब बन्दगी

  • □ कुष्ठरोग को समाप्त करता है।
  • □ खाँसी को नष्ट करता है।
  • □ प्रमेह को दूर करता है।
  • □ रक्तविकार को हरता है।

अदरक पाक

  • □ 1 किलो घी, ढाई किलो मिश्री, 5 किलो अदरक, 100 किलो दूध-सबको कूटपीसकर मिला लें और आग पर रखें। चासनी हो जाने पर उसमें 25-25 ग्राम पीपल, कचूर, जायफल, इलायची, नागकेसर, मिर्च, अदरक, पाषाणभेद, मण्डूरभस्म, कांतिभस्म, काला अगर, जावित्री, तमालपत्र, सोनामाखीभस्म, लोहाभस्म-सब कूटपीसकर किसी साफ कपड़े से छान लें और घी में भूनकर चासनी में मिला लें। यह दवा बड़ी हितकारी है।
  • □ सफेद बालों को काला करती है।
  • □ आमवात को दूर करती है।

एरंडीपाक

  • □ 2 किलो एरंडी के बिना छिलके के बीज, 15 किलो दूध लेकर आग पर रखें। दूध का खोवा हो जाए तो उतारकर बीजों को पीस लें। फिर उसमें 5 किलो मिश्री और दूध का निकला हुआ खोवा मिलाएँ। चासनी तैयार हो जाए तो उतार लें। फिर 25-25 ग्राम नागकेसर, पित्तापपड़ा, शतावरी, सांठी, दालचीनी, इलायची, पीपल, लौंग, लोहारस, हर्ष, तमालपत्र, पीपल, मिर्च, अदरक, चांदीरस, जायफल, जावित्री, अदरक का रस, असगंध, षड्गंधा, राक्षा-सबको कूटपीसकर किसी कपड़े से छान लें। फिर उसे

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घी में भूँजकर चासनी में मिला लें। अब छोटी-छोटी (12 ग्राम) गोलियाँ बना लें। सुबह-शाम 1-1 गोली खाएँ।

  • □ 18 तरह के कुछ रोग का नाश करता है।
  • □ वायुरोग का नाश करता है।
  • □ उदर रोगों का मिटाता है।
  • □ क्षयरोग को समाप्त करता है।
  • □ 4 तरह के संग्रहणी रोगों को दूर करता है।
  • □ नेत्रों को ताकत देता है।
  • □ 20 प्रकार के प्रमेह को नष्ट करता है। इस दवा का जितना चाहे, लाभ लें।

लौंगदि पाक

  • □ 50 ग्राम लौंग, 50 ग्राम मिर्च, 50 ग्राम कमलगट्टा, 50 ग्राम पिस्ता, 50 ग्राम चिरौंजी, 50 ग्राम जाविव्री, 50 ग्राम केसर, 50 ग्राम असगंध, 50 ग्राम अदरक, 50 ग्राम नागकेसर, 50 ग्राम दालचीनी, 50 ग्राम पिप्ली, 50 ग्राम बादाम, 50 ग्राम किसमिस, 50 ग्राम जटामांसी, 50 ग्राम गरी, 50 ग्राम छोहरा, 25 ग्राम लोहसार, 35 ग्राम अबरख, 25 ग्राम चांदीरस लेकर सबको कूटपीसकर छान लें। फिर 2 किलो घी में सबको डालकर पकाएँ। 10 किलो दूध का खोवा बना लें और 4 किलो मिश्री की चासनी बना लें। इस चासनी में सब मिला लें।
  • □ खाँसी को दूर करता है।
  • □ दमा में लाभकारी है।
  • □ श्वास रोग को नष्ट करता है।
  • □ शरीर को बलवान बनाता है।

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साहिब बन्दगी

सेमर पाक

  • ❑ आधा किलो सेमर की जड़ का छिलका लेकर छाया में सुखा लें। फिर कूटपीसकर छान लें। फिर 7 किलो दूध में डालकर पका लें। खोवा हो जाए। फिर 5 किलो मिश्री की चासनी बना लें। फिर 12-12 ग्राम चिरौंजी, बादाम, पीपल, अदरक, नागकेसर, जायफल, लौंग, जटामांसी, इलायची, पिस्ता, केसर-सबको कूटपीसकर छान लें। फिर घी में भूनकर चासनी में डाल दें। सारी दवा और खोवा चासनी में ही डाल दें। फिर उसके छोटे-छोटे लड्डू बना लें।
  • ❑ खून को साफ करता है।
  • ❑ कमर दर्द को हरता है।
  • ❑ शरीर को पुष्ट करता है।

त्रिफला पाक ( प्रमेह, जुकाम... )

  • ❑ 200 ग्राम आँवला, 100 ग्राम बहेड़ा, 50 ग्राम हरड-सबका चूर्ण करें और एक पाव पानी में भिगो दें। फिर एक पाव घी में धीमी आँच से पकाएँ। फिर इसमें 1 किलो मिश्री मिलाकर चासनी बना लें। फिर इसमें 8-8 ग्राम पत्रज, पोहकरमूल, इलायची, नागरमोथा, तज, पीपर, अदरक, मिर्च, चित्रक, 1 पाव शहद, 6 ग्राम केसर, 6 ग्राम शिलाजीत, 25 ग्राम धनिया मिला लें। यह दवा 25 ग्राम ही सेवन करें।
  • ❑ सब तरह के प्रमेह रोग को दूर करता है।
  • ❑ जुकाम की बढ़िया दवा है।
  • ❑ रक्त-विकार को दूर करता है।
  • ❑ सिर के रोगों में लाभकारी है।

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छोहारा पाक

  • □ 120 ग्राम छोहारा, 120 ग्राम जटमांसी, 120 ग्राम तेजपात, 50 ग्राम पिस्ता, 120 ग्राम केवांच बीज, 120 ग्राम दालचीनी, 120 ग्राम कमलगट्टा, 120 ग्राम नागकेसर, 120 ग्राम जायफल, 120 ग्राम दालचीनी, 50 ग्राम बादाम, 50 ग्राम चिरौंजी, 120 ग्राम जावित्री, 120 ग्राम चव्च, 120 ग्राम केसर, 120 ग्राम अदरक, 25 ग्राम बंगरस, 25 ग्राम लोहसार रस, 25 ग्राम अश्वकरस सबको कूटपीसकर किसी कपड़े से छान लें। फिर घी में भून लें। फिर 10 किलो दूध का खोवा तैयार करें और 5 किलो मिश्री की चासनी बना लें। इस चासनी में सारी दवाइयाँ खोवे सहित मिला लें। फिर इस दवा की 30-30 ग्राम के समान छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें।
  • □ भूख को खोलता है।
  • □ शरीर को पुष्ट करता है।

सौभाग्यशुंठी पाक

  • □ डेढ़ किलो गाय का दूध, 350 ग्राम अदरक का चूर्ण, ढाई किलो चीनी लेकर आग पर रखें और चासनी तैयार कर लें। फिर 25-25 ग्राम पीपली, तमालपत्र, दालचीनी, अदरक, इलायची, मिर्च-सब कूटपीसकर किसी कपड़े से छान लें। फिर घी में भूनकर ऊपर की चासनी में मिला लें।
  • □ आमवात रोग का नाश करता है।
  • □ सफेद बालों को काला करता है।

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साहिब बन्दगी

सुपारी पाक

□ आधा किलो सुपारी 2 किलो पानी में डालकर आग पर रखें। फिर उसे उतारकर सुखा लें। बाद में इसको कूटपीसकर चूर्ण कर लें। फिर आग पर रखकर 10 किलो दूध में डालकर पकाएँ। दूध के खोवा बन जाने पर उतार लें। फिर 10 किलो मिश्री की चासनी बनाएँ और उसमें 30 ग्राम जावित्री, 30 ग्राम जायफल, 30 ग्राम बिलारीकन्द, 30 ग्राम श्याममुसरी, 30 ग्राम गोखरू, 30 ग्राम केसर, 30 ग्राम गुरसकरी, 30 ग्राम इलायची, 30 ग्राम शतावरी, 30 ग्राम केवाँच बीज, 30 ग्राम तेजपात, 30 ग्राम वंसलोचन, 30 ग्राम अगर, 30 ग्राम सालम मिश्री, 30 ग्राम केसर, 4 ग्राम कस्तूरी, 30 ग्राम असगन्ध-सबको कूटपीसकर किसी कपड़े से छान लें। फिर घी में भून कर ऊपर की चासनी डालें। फिर इसमें 4 ग्राम लोहरस, 4 ग्राम मृगांकरस, 4 ग्राम बंगरस, 4 ग्राम चंद्रोदयरस, 4 ग्राम अभ्रकरस डालकर सबको मिला लें। फिर इसकी छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें।

□ नपुंसकता को दूर करता है।

□ वीर्य स्तंभन करता है।

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सेहत संजीवनी रस

सेहत संजीवनी रस

आनन्दभैरव रस ( सर्व रोग... )

  • ❑ शुद्ध संखिया, चौकिया सोहागा, शिंगरफ, पीपर, काली मिर्च-सब बराबर मात्रा में ले कूटपीसकर किसी साफ कपड़े से छान लें। फिर 2 दिन तक नीबू के रस में घोंटें। रस तैयार है।
  • ❑ सर्व रोगों में बहुत लाभकारी है।

अजीर्णकंटकरस ( पेट के रोग... )

  • ❑ शुद्ध चौकिया सोहागा, सेंधा नमक, संखिया-सब बराबर मात्रा में ले कूटपीसकर छान लें। फिर एक किलो नीबू का रस, एक पाव अदरक का रस, एक पाव दही-सबको ऊपर के चूर्ण में मिला लें और घोंटें और छोटी-2 गोलियाँ बना लें। एक गोली सुबह और एक गोली शाम को खाएँ।
  • ❑ अजीर्ण, वातरोग को नष्ट करता है।
  • ❑ भूख को भी खोलता है।

मृगांक रस ( सर्व रोग... )

  • ❑ 12 ग्राम पारा, 12 ग्राम आँवलासार गन्धक लेकर कूटपीस लें। फिर 7 बूँदें रेड़ी के तेल की उसमें डालें। फिर नौसादर और रॉंगा

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साहिब बन्दगी

को गलाकर उसमें डालें। ढाई दिन तक उसे अच्छी तरह कूटपीस लें। अब मुलतानी मिट्टी से किसी काँच की शीशी को 6 कपड़िमिट्टी कर लें यानी 6 पर्तें मिट्टी की चढ़ा लें। अब उस शीशी को सुखा लें। बाद में शीशी में ऊपर की दवा डालें। कोयला जलाएँ और उसमें उस शीशी को रखें। शीशी का मुख खुला रहना चाहिए। बीच-बीच में 12-13 मिनट में शीशी को किसी चीज से हिलाते रहें। अलग-अलग रंग का धुआँ निकलेगा। फिर उस आग को बुझा दें। जब शीशी ठंडी हो जाए तो उसमें से रस निकाल लें। यह संजीवनी रस है। सभी रोगों पर दें।

वंगरस ( नपुंसकता... )

  • □ 60 ग्राम शुद्ध राँगा लेकर आग पर रखें। पीपल और अमली के छाल दोनों का चूर्ण करके पहले से ही रख लें और फिर राँगा में वो चूर्ण डालते जाएँ। 45 मिनट तक राँगा को जलाकर भस्म करें। वंगरस तैयार हो जायेगा।
  • □ नपुंसकता के लिए बढ़िया दवा है।

वसंतराज रस ( श्वास, खाँसी... )

  • □ त्रिफला, कपूर, कुटकी, इलायची, हर्र, त्रिकुटा, लोहारस, जायफल, चिरायता, लौंग-सबको कूटपीस कर छान लें। फिर सहजने के रस में 10 घण्टे घोंटें।
  • □ श्वास रोग को दूर करता है।
  • □ खाँसी का भी नाश करता है।

ॐ ॐ ॐ