श्रीमद्भगवद्गीतारहस्य अथवा कर्मयोगशास्त्र (लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक)
Srimad Bhagavad Gita Rahasya by Bal Gangadhar Tilak
लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक द्वारा
पारिभाषिक शब्दोंकी सूचि ९०५ विद्या २०८, २७७, २७८, ३६१, ३६२, सत्य ३३, २१८, २१९, २२४ ३६३, ३६४, ४१८ सत्यानृतविवेक ३५, ३६ विनाश ३४३ सत्त्व १५८ विवर्तवाद २४२, २४३ सदसद्विवेकदेवतापक्ष १२६, १३१ विशिष्टाद्वैत १६, १८ सदसद्विवेकबुद्धि १२५ विशेष (पंचमहाभूत) १७८, १८२ समता ३९५ वृत्ति १०१ समत्वबुद्धियोग ३८२ वेदान्ती २९३ संकल्प १३४ वेदान्ती (कर्मयोगी) ३५३ सर्वभूतहित ८४, ८६ वेदान्ती (संन्यासी) ३५३ सग १३३, ३२८, ३३० वैदिकधर्म ५८० संग्रह (कोशार्थ) ३३१ वैष्णव पंथ १६, १७ संग्रह (राष्ट्रोंका) ३३१ व्यक्त १५९ संघात १४७ व्यवसाय १३५ संचित २७३ व्यवसायात्मक बुद्धि १३५ संन्यास ३०४, ३०६, ३५०, ४३६, व्याकरणात्मक मन १३५ ४४८, ४५६, ४६४, ५०० व्यावहारिक धर्मनीति ६५ संन्यासनिष्ठा १४ श संन्यासी ३०७ शारीर आत्मा २४८ संन्यासी स्थितप्रज्ञ ३७४ शारीरक सूत्र १२ संपत् (आसुरी) ११० शास्त्र ७६, ४७३ संभूति ३६१ शास्त्रीय प्रतिपादन पंथ ६२ संसार २६६ शांति ११९, १२० सात्वत धर्म ९ शुक्लमार्ग २९८ सात्त्विक बुद्धि १४०, १४१ शुद्ध द्वैत १८ साम्य ४७२ शुद्ध वासना ३७१ सांख्य (दो अर्थ) १५३ शैवपंथ १६ सांख्य (धात्वर्थ) १७५ श्रद्धा ४२३ सांख्य (ज्ञानी) ३०४, ३५४, ३६५, श्रेय ९३, ११८ ४४८, ४५०, ४५६, ४६५ स सिद्धावस्था २५१ सच्चा (पूरा) ज्ञान २१५, २५१ सुखदुःख ९६ सत् २२७, २४६, २४७, २५३ ,, (आध्यात्मिक) १६१ सत्कार्यवाद १४६, २३८, २४५ ,, (आधिदैविक) १६१ सत्तासामान्यत्व २१८ ,, (आधिभौतिक) १६१
९०६ गीतारहस्य अथवा कर्मयोगशास्त्र सुखवाद (आधिभौतिक) ७६ विचार १४३, १५० सूक्ष्म १६० क्षेत्रक्षेत्रज्ञविचार १३२, १४३ सूक्ष्मशरीर २६३ क्षेत्रज्ञ (आत्मा) १४९ स्थितप्रज्ञ ३७६, ४६३ ज्ञ सेश्वर नैयायिक १५२ ज्ञ १६३ स्थूल १६० ज्ञान २०२, २७८, २७९, २८० स्मार्त ३४४, ३४५ ज्ञान और विज्ञान ३१३, ४६१, ४६२, स्मार्त कर्म ५४ ४६३ स्मार्त यज्ञ ५४ ज्ञानकर्मसमुच्चयपक्ष ४३२ स्वधर्म ४९७ ज्ञानकांड २१२ स्वार्थ (सिज्विक-हेल्वेशियस) ८२, ८८ ज्ञानकी पूर्णावस्था २३०, २३१ स्वार्थ (केवल, चार्वाक) ७७, ५८, ७९ ज्ञाननिष्ठा १४, ३०४, ४१३, ४५६ स्वार्थ (दूरदर्शी, हॉब्स) ८०, ८१ ज्ञान-भक्तियुक्त कर्मयोग ४७४ स्वार्थ (उदात्त-भूतदयासे प्रेमयुक्त) ८३ ज्ञानमय कोश २६३ ह ज्ञानमार्ग ४१४, ४१५, ४२९, ४६२ हीनयान ५८ ज्ञानी २९७ क्ष ज्ञानेंद्रियोका व्यवहार १३३, १३८ क्षराक्षरविचार अथवा व्यक्ताव्यक्त-
हिंदू धर्म-ग्रंथोंका संक्षिप्त परिचय हिंदू धर्मके मूलभूत ग्रंथोंमें, महत्त्व और कालानुक्रमकी दृष्टिसे, वेद श्रेष्ठ और आद्य ग्रंथ हैं, और संहिता, ब्राह्मण तथा उपनिषदोंका उन्हींमें समावेश किया जाता है। यज्ञयागादिके कर्मकाण्ड और परमार्थ-विचारोंके ज्ञानकाण्ड, इन दोनोंका मूल उक्त त्रयीमें है। तथापि ज्ञानकाण्डके मूलभूत आधार-ग्रंथ उपनिषद् हैं। हिंदू- धर्मके सामाजिक व्यवहारोंका नियंत्रण स्मृतिग्रंथोंके द्वारा किया जाता है; परंतु उनका मूल आधार गृह्यसूत्र हैं। गृह्यसूत्रोंके अतिरिक्त औरभी अनेक सूत्र-ग्रंथ हैं; परंतु उनका संबंध धर्मव्यवहारोंसे नहीं है, बल्कि केवल विश्वके रहस्यका उद्- घाटन करनेवाली विविध विचार-परंपराओंसे है। इन विविध विचार-परंपराओं- कोही षड्दर्शन कहते हैं। गौतमके न्यायसूत्र, सांख्यसूत्र, वैशेषिकसूत्र, जैमिनीके पूर्वमीमांसासूत्र, बादरायणके वेदान्त अथवा ब्रह्मसूत्र, पतंजलीके योगसूत्र इत्यादिका षड्दर्शनमें समावेश होता है; परंतु षड्दर्शनके सिवाभी अन्य अनेक सूत्र-ग्रंथ हैं। उन्हींमें पाणिनीसूत्र, शाण्डिल्यसूत्र, नारदसूत्र इत्यादिकी गणना होती है। प्राचीन मूर्तिपूजारहित और निर्मल पारमार्थिक स्वरूपके वैदिक धर्ममें परिवर्तन होकर उपास्य देवताओंको माननेकी प्रवृत्ति जारी होनेके बाद पुराणोंका जन्म हुआ। महाभारत और रामायण पुराण नहीं, किंतु इतिहास हैं। पुराणोंमेंही गीताओंका समावेश होता है। गीतारहस्य-ग्रंथमें इस विषयका प्रसंगानुसार ऊहापोह किया गया है; परंतु पाठकोंको उसका एकत्र ज्ञान करा देनेके उद्देश्यसे तालिकाके रूपमें निम्नलिखित जानकारी दी जाती है। ( १ ) वेद अथवा श्रुतिग्रंथ :- वेद :- अथर्व, ऋग्वेद । संहिता :- ( ऋचाओंका अथवा मंत्रोंका संग्रह । कर्म अथवा यज्ञकांड ) तैत्तिरीय, मनु, वाजसनेयी, सूत । ब्राह्मण :- ( आरण्यक । कर्म अथवा यज्ञकांड ) आर्षेय, ऐतरेय, कौषिक, कौषीतकी, तैत्तिरीय, शतपथ । उपनिषद् :- ( ज्ञानकांड) अमृतबिंदु, ईश ( ईशावास्य), ऐतरेय, कठ, केन, कैवल्य, कौषीतकी ( कौ. ब्राह्मण ), गर्भ, गोपालतापनी, छांदोग्य, छुरिका, जाबाल-संन्यास, तैत्तिरीय, ध्यानबिंदु, नारायणीय, नृसिंहोत्तरतापनीय, प्रश्न, बृहदारण्यक, महानारायण, मांडूक्य, मुंडक ( मुंड ), मैन्नी ( मैत्रा- यणी ), योगतत्त्व, रामतापनी, वज्रसूची, श्वेताश्वतर, सर्व । ( २ ) शास्त्र :- १. धर्मग्रंथ -- गृह्य-सूत्र, स्मृति-ग्रंथ ( मनु, याज्ञवल्क्य और हारीत ) ।
९०८ गीतारहस्य अथवा कर्मयोगशास्त्र २. सूत्र ( षड्दर्शन ) :- जैमिनी ( मीमांसा अथवा पूर्वमीमांसा ), ब्रह्म ( वेदान्त, शारीरक अथवा उत्तर-मीमांसा ), न्याय ( गौतम ), योग ( पातंजल ), सांख्य ( सांख्यकारिका ), वैशेषिक । ( ३ ) अन्य सूत्र :- आपस्तंब, आश्वलायन, गृह्यशेष, तैत्तिरीय, नारद, नारद- पंचरात्र, बोधायनधर्म, बोधायनगृह्य, शांडिल्य । ( ४ ) व्याकरण :- पाणिनी । ( ५ ) इतिहास :- रामायण, महाभारत ( हरिवंश ) । ( ६ ) पुराण :- अष्टादश-महापुराण, अष्टादश-उपपुराण और गीताएँ । अष्टादश-पुराण :- अग्नि, कूर्म, गणेश, गरुड, गौडीय पद्मोत्तर, देवी-भागवत, नारद, नृसिंह, पद्म, ब्रह्मांड, भागवत, मत्स्य, मार्कंडेय, लिंग, वराह, विष्णु, स्कंद, हरिवंश । गीताएँ :- अवधूत, अष्टावक्र, ईश्वर, उत्तर, कपिल, गणेश, देवी, पराशर, पांडव, पिंगल, ब्रह्म, बोध्य, भिक्षु, मंकि, यम, राम, विचित्र्यु, व्यास, वृत्त, शिव, शंपाक, सूत, सूर्य, हरि, हंस, हारीत । ( ७ ) पाली-ग्रंथ :- अमितायुसुत्त, उदान, चुल्लवग्ग, तारानाथ, तेविज्जसुत्त ( तैविद्यसूत्र ), थेरगाथा, दशरथजातक, दीपवंस, धम्मपद, ब्रह्मजालसुत्त, ब्राह्मणधम्मिकमुत्त, महापरिनिब्बाणसुत्त, महावंस, महावग्ग, मिलिंदप्रश्न, वत्थुगाथा, सद्धर्मपुंडरीक, सुत्तनिपात, सेल्लसुत्त, सब्बासवसुत्त ।
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Central Archaeological Library, NEW DELHI. 70833 Call No. 181.41 Til Author—Tilak, Bal Gangadhar Srimad Bhagavad-Gita- Title—rahasya athava Karma- yoga-shastra. Borrower No. Date of Issue Date of Return