भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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त्रिप्रश्नाधिकार २४१ अन्तर होता जाता है । उदाहरण के लिए ध्रुवतारे १ (polaris) के विषुवांश २ और क्रान्ति यही हैं :- १८५० ई० की पहली जनवरी को { विषुवांश १ घ० ५ मि० २३ से० { क्रान्ति + ८८° ३०' ४६" १९०० ई० की { विषुवांश १ घंटा २३ मिनट ० सेकंड पहली जनवरी को { क्रान्ति + ८८° ४६' ५३" यह कहा जा सकता है कि विषुवांश और क्रांति के परिवर्तन का कारण यह है कि तारा स्वयं चलता है । दूसरा अनुमान यह हो सकता है कि विषुवांश और क्रान्ति जिन भुजयुग्मों (axes of coordinates) से निश्चय किये जाते हैं उन्हीं में परिवर्तन होता होगा । ५० वर्ष में ध्रुवतारे की क्रांति १६' ४" अधिक हुई जिससे स्पष्ट होता है कि ध्रुवतारे से ध्रुव का अन्तर प्रायः १६" प्रतिवर्ष कम हो रहा है अर्थात् या तो ध्रुवतारा ध्रुव की ओर जा रहा है या ध्रुव ध्रुव-तारे की ओर जा रहा है। जब अन्य तारों से ध्रुवतारा के अन्तरों की तुलना की जाती है तो देख पड़ता है कि इनमें परस्पर इतनी भिन्नता नहीं हो रही है जितनी ध्रुव और ध्रुवतारे में हो रही है । ध्रुवतारे में जो स्वयं गति (proper motion) है वह इतनी सूक्ष्म है कि इससे १६" प्रति वर्ष का अंतर नहीं पड़ सकता । यह भी देखा गया है कि ५० वर्षों में ध्रुव से अन्य तारों का भी अन्तर बहुत कम पड़ गया है परन्तु उनका परस्पर अंतर प्रायः जैसे का तैसा ही है। इन सब बातों से यही परिणाम निकलता है कि ध्रुव ओर ध्रुवतारे के बीच का अन्तर ध्रुवतारे की गति के कारण नहीं कम हो रहा है वरन् आकाशीय ध्रुव की गति के कारण कम हो रहा है । यदि ध्रुव अपना स्थान सदैव बदलता रहता है तो यह भी आवश्यक है कि विषुवद्वृत्त भी जो ध्रुव से सदैव ९० अंश दूर रहता है अपना स्थान निरन्तर बदला करे । पर विषुवद्वृत्त के चलते रहने पर भी क्रान्तिवृत्त से उसका जो मध्यम झुकाव है वह सदैव प्रायः एक सा रहता है । यह झुकाव मध्यम मान से केवल कुछ कलाएँ इधर उधर आन्दोलन करता है । सूर्य की परम क्रान्ति १८५० ई० में जितनी थी प्रायः उतनी ही १९०० ई० में थी इसलिए विषुवद्वृत्त और क्रान्ति वृत्त के बीच १. Balls' Spherical Astronomy pp. 171. साधारणतः लोग समझते हैं कि ध्रुवतारा एक ही जगह देख पड़ता है और इसी की परिक्रमा अन्य तारे करते हैं परन्तु यह ठीक नहीं है । ध्रुवतारा भी आकाशीय ध्रुव की जो अदृश्य है परिक्रमा करता है और उसके बहुत पास है इसलिए कुछ भेद नहीं जान पड़ता । २. देखो चित्र ४० और इसका वर्णन । १६