भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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त्रिप्रश्नाधिकार २८३ ज्या (अक्षांश) = $\frac{पलभा}{विषुवतकर्ण}$ [श्लोक १३] ज्या (क्रान्ति) = $\frac{१२\timesअग्रज्या}{विषुवतकर्ण}$ [श्लोक २२] कोज्या (अक्षांश) = $\frac{१२}{विषुवतकर्ण}$ [श्लोक १३] समीकरण (ग) से सिद्ध है कि ज्या (अग्रा) $\times$ ज्या (नतांश) $\times$ कोज्या अक्षांश $=$ ज्या (क्रान्ति) $-$ कोज्या (नतांश) $\times$ ज्या अक्षांश इसमें ज्या (अग्रा), ज्या (अक्षांश) इत्यादि के मान उत्थापन करने से $\frac{१}{\sqrt{२}}\timesज्या(नतांश)\times\frac{१२}{विषुवतकर्ण}$ $=\frac{१२\timesअग्र ज्या}{विषुवतकर्ण}-कोज्या (नतांश)\times\frac{पलभा}{विषुवतकर्ण}$ इसी समीकरण के दूसरे पक्ष में जो अग्र ज्या है वह सूर्य की उदयकालिक अग्रा की ज्या है। इस समीकरण के प्रत्येक पद के हर में विषुवतकर्ण है इसलिए इस सामान्य संख्या को हटा देने में कोई अंतर नहीं पड़ेगा। यदि पलभा, नतांश और अग्र ज्या को क्रम से प, न और अ अक्षरों से सूचित किया जाय और विषुवतकर्ण हटा दिया जाय तो $\frac{१}{\sqrt{२}}\timesज्या (न)\times१२=१२\timesअ-कोज्या (न)\timesप$ दोनों पक्षों का वर्ग करने से, ३ $\times$ ज्या$^२$ (न) $\times$ १२$^२$ $=$ १२$^२$ $\times$ अ$^२$ $\times$ प$^२$ $\times$ को ज्या$^२$(न) $-$ २ $\times$ १२ $\times$ अ $\times$ प $\times$ कोज्या (न) परंतु १६वें श्लोक के आधार पर ज्या$^२$ (न) $=$ त्रिज्या$^२$ $-$ कोज्या$^२$ (न) इसलिए उपयुक्त समीकरण का रूप यह होगा ३ $\times$ १२$^२$ $\times$ [त्रिज्या$^२$ $-$ कोज्या$^२$ (न)] $=$ १२$^२$ अ$^२$ + प$^२$ $\times$ कोज्या$^२$ (न) $-$ २ $\times$ १२ $\times$ अ $\times$ प $\times$ कोज्या (न)

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