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भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)

Bhavaprakasha Chikitsa Bhaga with Vidyotini Commentary

आचार्य भावमिश्र (टीकाकार: पं. ब्रह्मशंकर मिश्र एवं रूपलालजी वैश्य) द्वारा

DevanagariHindipublished1,167 पृष्ठ

भावप्रकाश निघण्टु विषय-सूची २७ पृष्ठ | पृष्ठ मसूरी के नाम तथा गुण ८०० | नोनिया शाक के नाम तथा गुण ८२२ अरहर के नाम तथा गुण ८०१ | तीनपतिया शाक के नाम तथा गुण ८२३ चना के नाम तथा गुण ८०२ | चूक शाक के नाम तथा गुण ८२३ मटर के नाम तथा गुण ८०२ | हुरकुच शाक के नाम तथा गुण ८२५ खेसारी के नाम तथा गुण ८०३ | चौपतिया शाक के नाम तथा गुण ८२५ कुलथी के नाम तथा गुण ८०४ | मुरई के पत्ते का शाक के नाम तथा गुण ८२६ तिल के नाम तथा गुण ८०४ | गूमा के पत्ते के शाक के नाम तथा गुण ८२६ तीसी के नाम तथा गुण ८०५ | अजवाइन के पत्ते के शाक के नाम तथा गुण ८२७ तोरी के नाम तथा गुण ८०६ | चकवड़ के पत्ते के शाक के नाम तथा गुण ८२७ सरसों के नाम तथा गुण ८०७ | थूहर के पत्ते के शाक के नाम तथा गुण ८२७ राई के नाम तथा गुण ८०८ | पित्तपापड़ा के नाम तथा गुण ८२७ क्षुद्रधान्य के नाम तथा गुण ८०८ | गोजिह्वा के पत्ते के शाक के विविध नाम तथा गुण ८२७ कङ्गनी के नाम तथा गुण ८०९ | परवल के पत्ते के शाक के नाम तथा गुण ८२७ चीना के नाम तथा गुण ८०९ | गिलोय के पत्ते के शाक के नाम तथा गुण ८२८ सावाँ के नाम तथा गुण ८१० | कसौंदी के पत्ते के शाक के नाम तथा गुण ८२८ कोदो के नाम तथा गुण ८१० | चने के शाक का गुण ८२९ सरपत के बीज के नाम तथा गुण ८११ | मटर के नाम तथा गुण ८२९ बांस के बीज के नाम तथा गुण ८११ | सरसों के नाम तथा गुण ८२९ कुसुम के नाम तथा गुण ८१२ | इति पत्रशाकानि गरहेडुआ के नाम तथा गुण ८१२ | पुष्पशाकों के गुण ८३० तीनी के नाम तथा गुण ८१२ | अगस्त के फूल का गुण ८३० जुआर के नाम तथा गुण ८१३ | केले के फूल का गुण ८३० धान्यविषयक परिभाषा ८१३ | सहजना के फूल का गुण ८३० शाकवर्गः | सेमल के फूल का गुण ८३० शाक का निरूपण ८१५ | इति पुष्पशाकानि सभी प्रकार के शाकों के सामान्य गुण ८१५ | कुम्हड़ा के नाम तथा गुण ८३१ बथुआ के नाम तथा गुण ८१५ | कुष्माण्डी के नाम तथा गुण ८३१ पोई के नाम तथा गुण ८१७ | लौकी के नाम तथा गुण ८३२ मरसा के नाम तथा गुण ८१७ | कड़वी तुम्बी के नाम तथा गुण ८३३ चौलाई के नाम तथा गुण ८१८ | ककड़ी के नाम तथा गुण ८३४ जल चौलाई के नाम तथा गुण ८१९ | चचेण्डा के नाम तथा गुण ८३४ पालक के नाम तथा गुण ८१९ | करेला के नाम तथा गुण ८३५ नाडीका शाक के नाम तथा गुण ८२० | नेनुआ के नाम तथा गुण ८३६ पटुआ शाक के नाम तथा गुण ८२१ | तोरई के नाम तथा गुण ८३६ कलमी शाक के नाम तथा गुण ८२१ | परबल के नाम तथा गुण ८३७ | परवल के जड़ादि का गुण ८३७

२८ भावप्रकाशस्य पूर्वखण्डे कुन्दूरी के नाम तथा गुण ८३८ प्रसहसंज्ञक पक्षियों की गणना ८५८ सेम के नाम तथा गुण ८३९ ग्राम्य पशुओं की गणना ८५८ कोलशिम्बी के नाम तथा गुण ८३९ कूलेचरसंज्ञक जीवों की गणना ८५८ सहेजन की फली के नाम तथा गुण ८४० प्लवसंज्ञक पक्षियों की गणना ८५९ बैंगन के नाम तथा गुण ८४० कोशस्थ प्राणियों की गणना ८५९ डिण्डिस के नाम तथा गुण ८४१ पांव वाले प्राणियों की गणना ८६० पिंडार के नाम तथा गुण ८४१ मछलियों के नाम तथा गणना ८६० ककोड़ा के नाम तथा गुण ८४२ विविध मृगों के मांस के गुण ८६१ डोडिका (करेरुवा) के नाम तथा गुण ८४३ खरगोश के नाम तथा गुण ८६२ कटेरी के नाम तथा गुण ८४३ साही के नाम तथा गुण ८६२ सरसों का नाल (डण्डी) का गुण ८४३ बटेर के नाम तथा गुण ८६२ सूरन कन्द के नाम तथा गुण ८४४ लवा पक्षी के नाम तथा गुण ८६३ आलूक के नाम तथा गुण ८४५ बगेरा के नाम तथा गुण ८६३ अरुई के नाम तथा गुण ८४७ तीतर के भेद तथा लक्षण ८६३ मूली के नाम तथा गुण ८४७ गौरैया के नाम तथा गुण ८६३ गाजर के नाम तथा गुण ८४८ मुर्गा के नाम तथा गुण ८६३ केलाकन्द के नाम तथा गुण ८४९ हरियल के नाम तथा गुण ८६४ मानकन्द के नाम तथा गुण ८४९ पण्डुक के नाम तथा गुण ८६४ वाराहीकन्द के नाम तथा गुण ८५० मोर के नाम तथा गुण ८६४ हस्तिकर्ण के नाम तथा गुण ८५१ कबूतर के नाम तथा गुण ८६४ केमआँ के नाम तथा गुण ८५१ पक्षियों के अण्डों के गुण ८६५ कसेरू के भेद तथा गुण ८५२ बकरा, बकरी के मांस के गुण ८६५ शालूक कन्दों के नाम तथा गुण ८५३ मेढा के मांस के गुण ८६६ निषिद्ध शाक ८५३ दुम्बा के मांस के गुण ८६६ इति कन्द शाकानि बैल के मांस के गुण ८६६ संस्वेदज शाक के नाम तथा गुण ८५३ घोड़े के मांस के गुण ८६६ मांसवर्गः भैंसे के मांस के गुण ८६६ छत्रक के लक्षण तथा गुण ८५४ मेढ़क के मांस के गुण ८६७ मांस वर्ग के नाम तथा गुण ८५५ कछुये के मांस के गुण ८६७ जाङ्गल मांस के भेद, नाम तथा गुण ८५५ तत्काल मारे गये जीवों के मांस के गुण ८६७ आनूप मांस के भेद नाम तथा गुण ८५५ स्वयं मृत जीवों के मांस के गुण ८६७ जांगल जीवों की गणना, नाम तथा गुण ८५६ बुड्ढे जीवों के मांस के गुण ८६७ बिलों में रहने वाले प्राणियों की गणना ८५६ सर्पदष्ट जीवों के मांस के गुण ८६७ गुफा में रहने वाले जीवों की गणना ८५६ विष आदि से मरे मांस के गुण ८६८ वृक्ष पर चढ़ने वाले प्राणियों की गणना ८५७ जीवों के प्रधानता से मांस के गुण ८६८ कुरेद-२ कर खाने वाले पक्षियों की गणना ८५७ मछलियों में रोहू मछली के लक्षण ८६८ प्रतुद पक्षियों की गणना ८५७ शिलीन्ध्र मछली का मांस ८६९

भावप्रकाशनिघण्टु विषय-सूची २९ भाकुर मछली का मांस ८६९ | जौ की रोटी के गुण ८७७ मोचिका मछली का मांस ८६९ | चमसी बनाने की विधि ८७७ पाठीन मछली का मांस ८६९ | झर्झरी (धुआँस की रोटी) बनाने की विधि ८७७ शृंगी मछली का मांस ८६९ | चने की रोटी के गुण ८७७ हिल्सा मछली का मांस ८६९ | पीठी बनाने की विधि ८७७ सौरी मछली का मांस ८७० | बेढई बनाने की विधि तथा गुण ८७७ गर्गरा मछली का मांस ८७० | पापड़ बनाने की विधि तथा गुण ८७८ कविका मछली का मांस ८७० | तेल, घृत में पूरी बनाने की विधि तथा गुण ८७८ वर्मी मछली का मांस ८७० | उरद का सूखा बरा बनाने की विधि तथा गुण ८७९ दण्ड मछली का मांस ८७० | काञ्जी बरा बनाने की विधि तथा गुण ८७९ एरङ्गी मछली का मांस ८७० | इमली के बरे बनाने की विधि तथा गुण ८७९ पपता मछली का मांस ८७० | मूङ्ग के बरे बनाने की विधि तथा गुण ८८० गरह्नी मछली का मांस ८७० | पेठे की बरी बनाने की विधि तथा गुण ८८० मद्गुर मछली का मांस ८७० | मुद्गवटी की बरी (मूंग) बनाने की विधि तथा गुण ८८० टेंगरा मछली का मांस ८७१ | अलीकमत्स्य बनाने की विधि तथा गुण ८८० प्रोष्ठी मछली का मांस ८७१ | कढ़ी बनाने की विधि तथा गुण ८८१ छोटी मछलियों का मांस ८७१ | अदरक-बड़ा बनाने की विधि तथा गुण ८८१ मछली के अण्डे ८७१ | बेसन बनाने की विधि तथा गुण ८८२ सूखी मछलियों का मांस ८७१ | फुलौरी बनाने की विधि तथा गुण ८८२ भूंजी मछली का मांस ८७१ | शुद्ध मांस बनाने की विधि तथा गुण ८८२ कूँएं में रहने वाली मछलियों के मांस ८७२ | वेशवार के द्रव्य ८८२ विशेष-विशेष ऋतुओं में विशेष-विशेष | सेहण्डुक मांस बनाने की विधि तथा गुण ८८३ मछलियों के मांस का गुण ८७२ | अखनी बनाने की विधि तथा गुण ८८३ कृतान्नवर्गः | हरीसा बनाने की विधि तथा गुण ८८३ परिभाषा ८७३ | तला हुआ मांस बनाने की विधि तथा गुण ८८४ भात बनाने की विधि तथा गुण ८७३ | कबाब की विधि तथा गुण ८८४ दाल बनाने की विधि तथा गुण ८७३ | मांस का सिंघाड़ा बनाने की विधि तथा गुण ८८४ खिचड़ी बनाने की विधि तथा गुण ८७४ | सिद्धमांसरस का गुण ८८४ तापहरी बनाने की विधि तथा गुण ८७४ | शाक बनाने की विधि ८८५ खीर बनाने की विधि तथा गुण ८७४ | मण्ठक बनाने की विधि तथा गुण ८८५ सेमई बनाने की विधि तथा गुण ८७५ | गुजिया बनाने की विधि तथा गुण ८८५ मैदा बनाने की विधि तथा गुण ८७५ | कर्पूरनालिका बनाने की विधि तथा गुण ८८६ मण्डा बनाने की विधि तथा गुण ८७५ | फेनी बनाने की विधि तथा गुण ८८६ पोलिका (मैदे की रोटी) बनाने की विधि तथा गुण ८७६ | खास्ता पूरी बनाने की विधि तथा गुण ८८७ लप्सी बनाने की विधि तथा गुण ८७६ | सेव के लड्डू बनाने की विधि तथा गुण ८८७ रोटी बनाने की विधि तथा गुण ८७६ | बूँदी लड्डू बनाने की विधि तथा गुण ८८७ बाटी बनाने की विधि तथा गुण ८७६ | मोतीचूर के लड्डू बनाने की विधि तथा गुण ८८७

३० भावप्रकाशस्य पूर्वखण्डे दुग्धकूपिका बनाने की विधि तथा गुण ८८८ | नादेयजल के लक्षण तथा गुण ८९९ जलेबी बनाने की विधि तथा गुण ८८८ | नदीजल के गुण-भेद ८९९ श्रीखण्ड बनाने की विधि तथा गुण ८८९ | औद्भिदजल के लक्षण तथा गुण ८९९ सरबत बनाने की विधि तथा गुण ८८९ | नैर्झरजल के लक्षण तथा गुण ९०० आम का पन्ना बनाने की विधि तथा गुण ८८९ | सारसजल के लक्षण तथा गुण ९०० इमली का पन्ना बनाने की विधि तथा गुण ८९० | तडागजल के लक्षण तथा गुण ९०० नीबू का पानक बनाने की विधि तथा गुण ८९० | वाप्यजल के लक्षण तथा गुण ९०० धनिये का पानक बनाने की विधि तथा गुण ८९० | कौपजल के लक्षण तथा गुण ९०० काञ्जी बनाने की विधि तथा गुण ८९० | चौञ्च्यजल के लक्षण तथा गुण ९०१ जाली बनाने की विधि तथा गुण ८९१ | पाल्वलजल के लक्षण तथा गुण ९०१ छाछ की विधि तथा गुण ८९१ | विकिरजल के लक्षण तथा गुण ९०१ भोजन के अन्त में दूध पीने के गुण ८९१ | कैदारजल के लक्षण तथा गुण ९०२ सत्तू बनाने की विधि तथा गुण ८९१ | वर्षाजल के लक्षण तथा गुण ९०२ यवमिश्रित चने के सत्तू बनाने की विधि तथा गुण ८९२ | हेमन्तादि जल के लक्षण तथा गुण ९०२ चावल के सत्तू के गुण ८९२ | अंशूदकजल के लक्षण तथा गुण ९०२ सत्तू के विषय में सामान्य परिभाषायें ८९२ | मासभेद से जल के लक्षण तथा गुण ९०३ बहुरी बनाने की विधि तथा गुण ८९२ | जलग्रहण करने का समय ९०३ खील बनाने की विधि तथा गुण ८९३ | जल पीने की विधि ९०३ चिउड़ा बनाने की विधि तथा गुण ८९३ | शीतल जलपान के गुण और निषेध ९०३ होरहा बनाने की विधि तथा गुण ८९३ | थोड़ा जल पीने का निर्देश ९०४ ऊंबी बनाने की विधि तथा गुण ८९३ | जलपान की आवश्यकता ९०४ घुघुरी बनाने की विधि तथा गुण ८९४ | गुणकारी जल के लक्षण ९०४ तिलकुट बनाने की विधि तथा गुण ८९४ | दूषित जल की शुद्धि ९०५ पिण्याक बनाने की विधि तथा गुण ८९४ | पीये हुए जल के पचने का समय ९०५ चावल के गुण बनाने की विधि तथा गुण ८९४ | दुग्धवर्गः वारिवर्गः | दूध के नाम और गुण ९०६ जल के नाम, गुण तथा भेद ८९५ | दूध पीने योग्य मनुष्य ९०६ धाराजल के लक्षण गुण तथा भेद ८९५ | गोदुग्ध के गुण ९०६ गंगाजल के लक्षण तथा गुण ८९६ | काली गायों के दुग्ध गुण ९०६ शरद् ऋतु में जल का निर्विष होना ८९६ | नई व्याई तथा बकेन गायों के दुग्ध-गुण ९०७ वर्षारृतु में जल का सविष होना ८९७ | मृतवत्सा गायों के दुग्ध-गुण ९०७ अनार्तवसंज्ञक धारा-जल के गुण ८९७ | देशविशेष से गाय का गोदुग्ध के गुण ९०७ करका जल के लक्षण तथा गुण ८९७ | आहारादि विशेष से गोदुग्ध के गुण ९०७ तौषार जल के लक्षण तथा गुण ८९७ | भैंस के दूध के गुण ९०७ हैमजल के लक्षण तथा गुण ८९७ | विभिन्न दुग्ध एवं मट्ठा आदि का पोषणात्मक ९०८ भौमजल के लक्षण तथा गुण ८९८ | संगठन जांगलजल के लक्षण तथा गुण ८९८ | बकरी के दूध के गुण ९०९

१. प्रथम खण्ड: ज्वर, रक्तपित्त, कास, श्वास, हिक्का एवं राजयक्ष्मा चिकित्सा

भावप्रकाशनिघण्टु विषय-सूची ३१ हरिणियों के दूध के गुण ९०९ भैंस के दुग्ध से बने मक्खन के गुण ९२१ भेड़ी के दूध के गुण ९०९ दुग्ध से बने मक्खन के गुण ९२१ घोड़ी, ऊंटनी तथा हथिनी के दुग्ध के गुण ९०९ ताजा मक्खन के गुण ९२१ स्त्री दुग्ध के गुण ९०९ पुराने मक्खन के गुण ९२१ गाय का धारोष्णादि दूध के गुण ९१० घृतवर्गः पीयूष, किलाट, क्षीरशाक तक्रपिंड तथा मोरट घृत के नाम तथा गुण ९२२ के लक्षण तथा गुण ९१० गौ, महिष तथा बकरी के घृत के गुण ९२२ मलाई के गुण ९११ ऊँटनी के घृत के गुण ९२३ मीठा मिश्रित दूध के गुण ९११ भेड़ी के घृत के गुण ९२३ प्रातः-सायं दुग्धपान के गुण ९११ स्त्री-दुग्ध से घृत के गुण ९२३ समय विशेष में दुग्धपान का विशेष गुण ९१२ घोड़ी के घृत के गुण ९२३ मथित दुग्ध के गुण ९१२ दूध से निकाले हुए घृत के गुण ९२३ दुग्ध-फेन के गुण ९१२ पुराने व नवीन घृत के गुण ९२४ निन्दित दुग्ध के लक्षण ९१३ घृत प्रयोग करने के विषय ९२४ दधिवर्गः मूत्रवर्गः दही के गुण तथा भेद ९१४ गोमूत्र के गुण ९२५ मन्द दही के लक्षण तथा गुण ९१४ मनुष्य के मूत्र का गुण ९२५ गाय, भैंस तथा बकरी के दही के गुण ९१५ मूत्र की सामान्य परिभाषा ९२५ मखनिया दही के गुण ९१५ तैलवर्गः गालित दही के गुण ९१५ तैल का लक्षण और गुण ९२६ चीनी आदि मिश्रित दही के गुण ९१६ तिल-तैल का गुण ९२६ रात्रि में दही खाने का निषेध ९१६ घृत तथा तैल की परिभाषा ९२७ ऋतु विशेष में दही खाने के विधि तथा निषेध ९१६ सरसों तथा राई के तैल के गुण ९२७ बिना विधि के दही सेवन का निषेध ९१६ तुवरी तथा अलसी के तैल के गुण ९२७ साढ़ी तथा मस्तु (दही) के लक्षण और गुण ९१७ अलसी कुसुम के तैल के गुण ९२८ तक्रवर्गः पोस्ता तथा रेड़ी के तैल के गुण ९२८ तक्र के नाम, विधि तथा गुण ९१८ राल के तैल के गुण ९२९ वृत निकाले हुए तक्र के गुण ९१८ सभी प्रकार के गुण ९२९ रोगादि भेद से तक्र भेद का विधान तथा कच्चे- सन्धानवर्गः पके तक्र के गुण ९१९ कांजी के लक्षण तथा गुण ९३० रोगादि भेद से तक्र सेवन का विधि-निषेध ९१९ कांजी सेवन के अयोग्य मनुष्य ९३० गवादि के दही से बने तक्र के गुण ९२० तुषोदक के लक्षण तथा गुण ९३० नवनीत वर्गः सौवीर के लक्षण तथा गुण ९३१ मक्खन के नाम तथा गोदुग्ध से बने मक्खन आरनाल के लक्षण तथा गुण ९३१ के गुण ९२१

३२ भावप्रकाशस्य पूर्वखण्डे धान्याम्ल के लक्षण तथा गुण ९३१ शिण्डाकी के लक्षण तथा गुण ९३१ शुक्त के लक्षण तथा गुण ९३१ मद्य के लक्षण, भेद तथा गुण ९३२ अरिष्ट के लक्षण तथा गुण ९३२ सुरा के लक्षण तथा गुण ९३२ वारुणी के लक्षण तथा गुण ९३३ सीधु के लक्षण तथा गुण ९३३ आसव के लक्षण तथा गुण ९३३ नई-पुरानी मदिरा के गुण ९३४ मद्य पीने का प्रकार ९३४ मद्य-गन्ध दूर करने का उपाय ९३४ मधुवर्गः मधु के नाम तथा गुण ९३५ माक्षिक मधु के लक्षण तथा गुण ९३५ भ्रामरजातीय लक्षण तथा गुण ९३६ क्षौद्रजातीय लक्षण तथा गुण ९३६ पौत्तिकजातीय लक्षण तथा गुण ९३६ छात्रजातीय लक्षण तथा गुण ९३६ आर्ध्यजातीय लक्षण तथा गुण ९३७ औद्दालक जातीय लक्षण तथा गुण ९३७ दालजातीय लक्षण तथा गुण ९३७ नये मधु के गुण ९३७ परिभाषा शीतल तथा उष्ण मधु का विधि-निषेध ९३८ मोम के नाम तथा गुण ९३८ इक्षुवर्गः गन्ने के नाम तथा रस के गुण ९३९ पौँड्रक तथा भीरुक संज्ञक इक्षुरस के गुण ९३९ कोशकार इक्षुरस के गुण ९३९


कांतार संज्ञक के गुण ९४० वंशक संज्ञक के गुण ९४० शतपोरक संज्ञक के गुण ९४० तापस संज्ञक के गुण ९४० कांड संज्ञक के गुण ९४० सूचीपत्रादि संज्ञक के गुण ९४० मनोगुप्ता संज्ञक के गुण ९४० नवीन तथा पक्कापक्व के गुण ९४१ अंगभेद से पक्कापक्व ९४१ अंगभेद से पक्कापक्व ९४१ चूसे हुए के गुण ९४१ पिरे हुए के गुण ९४१ बासी के गुण ९४१ पकाया हुआ ईंख का रस ९४१ इक्षु-रस से बने पदार्थों के गुण फाणित (चरका, राब, छोवा आदि) के लक्षण तथा गुण ९४२ मत्स्यण्डी (खंडराब) के लक्षण तथा गुण ९४२ गुड़ के लक्षण तथा गुण ९४२ नवीन और पुराने गुड़ के लक्षण ९४३ अनुपान भेद से गुड़ के गुण ९४३ खांड़ के गुण ९४३ चीनी के लक्षण और गुण ९४३ पुष्पसिता के लक्षण और गुण ९४३ मधु-खण्ड के लक्षण और गुण ९४३ परिभाषा ९४४ अनेकार्थनामवर्गः दो अर्थ वाले शब्द ९४५ तीन अर्थ वाले शब्द ९४९ चार अर्थ वाले शब्द ९५२ बहुत अर्थ वाले शब्द ९५३

निघण्टु-विवरण में आये हुए द्रव्यों की अकाराद्यनुक्रमणिका विषयाः पृ० विषयाः पृ० विषयाः पृ० अ अशोक ६६० एरङ्गी मछली ८७० अंकोल ५३५ अष्टवर्ग २६२ एरका ५५० अखरोट ७४७ असगन्ध ५६० एरण्ड ४७५ अगस्त ८३० आ एलवालुक ४४२ अगर ३८० आक लाल (अर्क) ४७९ क अजमोदा २२९ आक सफेद ४७९ ककड़ी ८३४ अजवायन (जंगली) २३० आम्रावर्त्त (अमावट) ७१० ककोड़ा (खेंकसा) ८४२ अजवायन (यवानी) २२७ आम्र नवपल्लव ७१० कंकुष्ठ ७७७ अञ्जन (सुरमा) ७७३ आम ७०८ कङ्गुनी ८०९ अडूसा ४९४ आमला २१४ कंटकारी ४६७ अतिबला (कंघी) ५४० आमाहल्दी ३११ कचनार ५०९ अतीस ३१९ आलुकभेद ८४६ कचूर ४२६ अदरख २१७ आरग्वध (अमलतास) २६७ कट्फल (कायफल) २९५ अदरख-बड़ा ८८१ इ कटभी ७०१ अनन्तमूल ५९० इक्षु (ईख) ९३९ कटसरैया ६६२ अनार ७३९ इज्जल (समुद्रफल) ५३४ कटहर ७१३ अपराजिता ५१५ इन्द्रयव २७४ कटुतुंबी (कड़बी तुम्बी) ८३३ अफीम ३३९ इन्द्रायण ५७० कटुपर्णी (चोक) २९२ अभ्रक अभरक ७७१ इन्द्रायण भेद ५७१ कठूमर ६७६ अम्बाड़ा ७११ इमली ७५३ कड़वा परवल ८२८ अमरवेल ६१० इल्लीस (हिल्सा) ८६९ कदम ६५५ अम्लवेतस ७५४ उ कदली कन्द ८६४ अर्कपुष्पी ६१८ उड़द ७९७ कन्दूरी (कुन्दरू) ८३८ अर्जुन ६८१ उन्नाव ७२९ कनेर लाल ४८९ अरनी ४५९ उपविष ७८७ कनेर सफेद ४८९ अरहर ८०१ उशबा, सार्सापरिला २५० कनेर (पीत) ४९० अरारी (करञ्जी) ५२१ ऋ कपास ५४३ अरुई ८४७ ऋष्य (मृग) ८६९ कपिकच्छू (केवाँच) ५२८ अलम्बुषा ६१९ ए कपूर ३६२ अलाबू (लौकी) ८३३ एकपुतिया लहसुन कपूर कचरी ४२८ (दूसरी जाति) ३२६ कमरुख ७५२ एण (मृग) ८६९ कमलकन्द, भसींडा ८५३ ३ भाव. I

३४ भावप्रकाशस्य पूर्वखण्डे विषया: पृ० विषया: पृ० विषया: पृ० कमलगट्टा ७३४ किङ्किरात ६५९ कोदो ८१० कर्कटशृङ्गी (काकड़ासिंगी) २९४ किरात (चिरायता) २७१ कोलशिग्बी ८३९ कर्णिका ६४२ कीचड़ ७७६ कोशस्थ जीव ८५९ कर्णिकार ६५९ कुकुरवंदा ६३६ कोशाम्र आम ७१२ करका-जल ८९७ कुचला ७२५ कौड़ी ७७६ करञ्ज (कंटकरञ्ज) ५२३ कुटकी २६८ क्षारद्वय-क्षारत्रय-क्षाराष्टक ३६० करञ्ज (वृक्षकरञ्ज) ५२२ कुन्द ६६३ क्षुद्राग्रिमन्थ ४५९ करञ्ज ५२१ कुन्दुरु ३९७ ख करील ६९९ कुमुद ६४५ खडिया ७७५ कचूर करू ४२६ कुम्हड़ी ८३१ खपरिया ७७५ करेला ८३५ कुरङ्ग ८६१ खरगोश ८६२ करेली ८३५ कुल्माषा (घुघुरी) ८९४ खरबूजा ७१८ करोंदा ७३२ कुलथी ८०४ खर्जूरी-पिण्ड खर्जूरी (खजूर) ७४३ करोंदी ७३१ कुलिञ्जन २४६ खिरनी ७३३ कलम्बी ८२१ कुश (दर्भ) ५५० खीरा ७१९ कलमी आम ७११ कुष्ठ (कूट) २८८ खुरासानी अजवाइन २३१ कलिहारी ४८७ कुसुम के बीज ३०६,८१२ खेसारी ८०३ कबिला २६५ कुसुम्भ ३०६ खैर ६८३ कस्तूरी ३६६ कूजा ६५६ ग कसीस ७७५ कूड़ा ५१८ गजदण्डसहोरा ६७३ कसेरू ८५२ कूटशाल्मली ६९७ गजपीपल २२४ कसेरू छोटा ८५२ कूलेचर जीव ८५८ गठिवन ४३३ कसोंदी ८२८ कूष्माण्डी (कोहला) ८३२ गण्डदूर्वा (गांडरदूब) ५५४ काकजंघा ६०४ कृष्ण जीरक २३४ गन्धक ७७० काकनासा ६०२ कृष्णसारिवा ५९१ गन्धकोकिला ४४१ काम्पिल्ल (कबीला) २६५ केमुक ८५९ गन्धप्रसारिणी ५८९ कालकूट विष ७८६ केला ८३० गन्धमालती ४४१ कालशाक (नाड़ी का शाक) ८२० केवटीमोथा ४४४ गम्भारी ४५५ काला अडूसा ४९७ केवड़ा ६५८ गर्गर मत्स्य ८७० कालाजाजी (कलौंजी) २३४ केशर ४१५ गरई मछली ८७० काला मोखा ७०३ कैंथ ७२३ गरहेडुवा ८१२ काली मिट्टी ७७६ कैरविणीफल (बेंरा) ७३६ गाँजा ३३३ कास ५४९ कोकम ७५५ गाजर ८४८ कांसा ७६५ केवांच (कपिकच्छू कौंच) ५२८ गिलोय ४४८

निघण्टु-विवरण में आये हुए द्रव्यों की अकाराद्यनुक्रमणिका ३५ विषया: पृ० | विषया: पृ० | विषया: पृ० गिलोय शाक ४४७ | चमेली ६५१ | जम्बीरी नींबू ७५० गुञ्जा (श्वेत, रक्त) ५२५ | चव्य २२३ | जल ८९५ गुड़ ९४२ | चांदी ७५९ | जलकुम्भी ६४६ गुड़हर ६६५ | चावल ८९४ | जलचौलाई ८१९ गुलाब ६४८ | चित्रक २२५ | जलपीपल ६३१ गुहाशय जीव ८५६ | चिपिटा (चिउड़ा) ८९३ | जलमहुआ ७३७ गूग्गुल ३८९ | चिरचिरा ५८० | जलवेतस (जलमाला) ५३३ गूमा ८२६ | चिरबिल्व (करंजभेद) ५२५ | जलसिरिस ७०३ गूलर ६७५ | चिरौंजी ७३२ | जव ७९४ गेरू ७७४ | चिह्नुक ५३० | जवाखार ३५३ गेहूँ ७९५ | चीना ८०९ | जबाद कस्तूरी ३७२ गोखरू (छोटा) ४६९ | चीता २२४ | जवासा ५७६ गोखरू (बड़ा) ४७० | चीनिया कपूर ३६४ | जस्ता ७६१ गोजिह्वा ८२७ | चुम्बक ७७४ | जामुन ७२७ गोंदपटेर (गुन्द्र) ५४९ | चूक ३६१,८२३ | जावित्री ४०२ गोमेद ७८१ | चूका ८२४ | जायफल ४०० गोलोचन ४१७ | चोबचीनी २४८ | जारूल ७०६ गोह ८५६ | चौपतिया ८२५ | जिंगीनी ६९० गौरखटिका (सफेद खड़िया) ७७५ | चौलाई ८१८ | जीवन्ती ४७१ ग्राम्य (पशु) ८५८ | छ | जुआर ८१३ घ | छत्रक ८५४ | जूही ६५२ घीकुआर ५८४ | छरीला ४२४ | ज्योतिष्मती (मालकाँगनी) २८६ घृत ९२२ | छुहारा ७४४ | झ च | छोंकर ७०३ | झड़बेर ७३० चकवड़ ३१८ | छोटी इलायची ४०६ | ट चकोतरा (नीबू) ७४९ | छोटी जामुन ७२८ | टङ्कारी ५३१ चचेण्डा ८३४ | छोटी दूधी ६२१ | टिंडा ८४१ चंचु ८२४ | ज | ड चणक (चना) ८०१ | जंगली उशबा २४९ | डोडिका (करेरुआ) ८४३ चन्दन ३७३ | जंगली तोरई ८३७ | ढ चन्द्रिका (हालों) २४१ | जंगली प्याज ३२८ | ढाक ६९४ चना ८०२ | जटामांसी ४२१ | ढाढोन ७०३ चनाखार ३५२ | जबाद कस्तूरी ३७२ | त चम्पा ६५३ | जमालगोटा ५६७ | तक्र ९१८

३६ भावप्रकाशस्य पूर्वखण्डे विषया: पृ० | विषया: पृ० | विषया: पृ० तगर ३८५ | थ | नरसल ५४६ तज ४०८ | थुनेर ४३४ | नलिका ४४६ तमाल ६९१ | थूहर ८२७ | नाकुली २८० तरबूज ७१८ | थूहरभेद ८२७ | नागकेसर ४१२ ताड़ ७२१ | द | नागदन्ती ५६९ तामा ७६० | दण्ड मत्स्य ८७० | नागदमनी ६३४ तालमखाना ५८२ | दन्ती (छोटी तथा बड़ी) ५६६ | नागपुष्पी ६०६ तालीसपत्र ४३६ | दवना ६७० | नागबला ५४० त्रायमाण ५९६ | दही ९१४ | नागरमोथा ४२४ तिधारा थूहर ४८४ | दाख ७४१ | नाढ़ी हिंगु (डिकामली) तिनिश ७०५ | दानकुनी ६१७ | नारङ्गी ७२४ तिरफल २५७ | दारुहलदी ३१२ | नारियल ७१६ तिरिच्छ ७०५ | दालचीनी ४०९ | नाशपाती ७४६ तिल ८०४ | दुद्धी ६२० | निर्गुण्डी ५१६ तिलक ६६४ | दुपहरिया ६६५ | निर्मली ७४१ तिलकुट ८९४ | दुर्गन्ध खैर ६८५ | निष्पाव ७९९ तिलखली ८१२ | दूब ५५३ | निसोत ५६४ तीनी ८१२ | दूर्वा श्वेत ५५४ | नींबू ७५१ तीसी ८०५ | देवदारु ३८२ | नीम ५०२ तीरी ८०६ | देवदाली ६३० | नील ५७२ | ध | नीला चित्रक २२६ तुम्बरु २५६ | धतूरा ४९१ | नीलदूर्वा ५५३ तुलसी ६६८ | धनियाँ २३५ | नीलम ७८१ तूत ७३८ | धमासा ५७८ | नोनिया ८२२ तूतिया ७६५ | धातकी ३०३ | नेनुआ ८३६ तून ६९२ | धान्यवर्ग ७८९ | नेवारी ६५० तेजपात ४११ | धामिन ६९८ | न्यङ्कु (मृग) ८६१ तेजवती (तेजबल) २८६ | धूप (सरल) ३८३ | प तेंदू ७२४ | धव ६९७ | पट्टशाक (पटुआ शाक) ८२१ तेल ८७८ | न | पटोल-पत्र ८२८ तोरई ८३६ | नकछिकनी ६३५ | पठानी लोध ३२३ तोरी ८०६ | नख-नखी ४१९ | पतङ्ग ३७९ त्रिफला २१६ | नवनीत (मक्खन) ९२१ | पमार ८२७ | नरकट ५४७ | पद्माख ३८७

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निघण्टु-विवरण में आये हुए द्रव्यों की अकाराद्यनुक्रमणिका ३७ विषया: पृ० | विषया: पृ० | विषया: पृ० पन्ना ७८१ | पुनर्नवा (सफेद तथा लाल) ५८६ | बहेड़ा २१३ परवल ८२७ | पुष्करमूल २९१ | बाकुची ३१७ पर्णमृग (जीव) ८५७ | पृश्निपर्णी (पिठवन) ४६४ | बादाम ७४४ पर्पट ४९७ | पृषत (चित्तल मृग) ८६१ | बान्दा ६१२ पर्पटी ४४६ | पेठा ८८० | बाणपुष्प ६६१ पाखर ६७६ | पोय ८१७ | बालू ७७५ पाठा ५६२ | पोस्ता (पोस्तादाना) ३३६, ९२८ | बाँस ५४५,८११ पाठीन (बोआरी-मछली) ८६९ | प्रतुद (पक्षी) ८६४ | बिजौरा नींबू ७४८ पाढ़ल ४५७ | प्रदीपन विष ७८४ | बिदारीकन्द ५५५ पाढ़ल सफेद (घंटा पाढ़र) ४५८ | प्रसह (पक्षी) ८५८ | बिरियासंचर नमक ३४९ पाताल गरुडी ६११ | प्रियङ्गु ४२९ | बृहती (बड़ी कटोरी) ४६५ पादिन.(जीव) ८६० | प्रोष्ठी (पोठी मछली) ८७१ | बृहदग्निमंथ ४६० पान ४५० | प्लव (तैरने वाली पक्षी) ८५९ | बेंत ५३३ पानी आमला ७३० | फ | बेर ७३० पारद (पारा) ७६७ | फटकरी ७७४ | बेल ४५३,७२२ पारसीक यवानी २३१ | फरहद ५०७ | बेला ६५० पारसीक वचा (खुरासानी वचा) २४६ | फाणित (राब) ५४२ | बेलिया पीपल ६७४ पारिजाता ५०८ | फालसा ७३७ | बोल ७७६ पारीष पीपल ६७३ | फूट ७१६ | ब्रह्मपुत्र विष ७८६ पालक ८१९ | ब | ब्राह्मी ६२३ पाषाणभेद ३०० | बकायन (महानिम्ब) ५०५ | व्रीहिधान्य ७९१ पिण्ड-खजूरी ७४३ | बन्दा ६१२ | भ पिडालु ८४२ | बड़ ६७२ | भकुर (भाकुर मछली) ८६९ पित्तौजिया ६८९ | बड़हल ७१४ | भटेउर (चोरक) ४३५ पित्तपापड़ा ४९७,८२७ | बड़ी इलायची ४०५ | भंटा ८४१ पिपलामूल २२२ | बड़ी गुमची ३७९ | भद्रमुंज ५८४ पियाज ३२७ | बड़ी चोबचीनी २४९ | भसींडा ८५३ पीतचन्दन ३७७ | बड़ी जामुन ७२७ | भांग ३३३ पीतल ७६६ | बथुआ ८१५ | भांगरा ५९३ पीपर २१८ | बबूल ६८७ | भार्गी (भारंगी) २९७ पीपर २१९ | बरना ७०० | भिलावा ३३० पीलु ७४७ | बर्बरी (सबजा) ६७१ | भूआमला ६२२ पुण्डेरी ४४७ | बला चतुष्टय ५३६ | भूतृण ५५२ पुखराज ७८१ | बला (बरियारा) ५३७ | भोजपत्र ६९३ CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammnu. Digitized by S3 Foundation USA

३८ भावप्रकाशस्य पूर्वखण्डे

विषया:पृ०विषया:पृ०विषया:पृ०
मुण्डी५७८राजावर्त्त (रेवटी)७७४
मकर तेन्दुआ७२५मुद्रपर्णी४७३राजीव (मृग)८६१
मकोय६०१मुरा४२८रामदाना८१९
मखाना७३४मूँग७९६राल३९५
मञ्जिष्ठा (मजीठ)३०५मूँगा७८२रास्ना२७७
मटर८०२, ८२९मूँज (भद्रमुंज)५४८रीठा६८८
मण्डूकपर्णी६२४मूत्र९२५रूपामाखी७६५
मत्स्य (मछली)८६०मूर्वा५९७रेणुका४३२
मत्स्याक्षी६१४मूसली काली५५७रेह का नमक३५२
मदन (मैनफल)२७५मूसली सफेद५५८रोहिस घास५५१
मद्गुर मत्स्य८७०मूसा८५६रोहू मछली८६८
मदिरा९३२मूसाकर्णी६३७रोहेड़ा६८६
मधु९३५मेथी२३९
मयूरशिखा६३९मेढ़ाशिंगी६०६लक्ष्मणा५४२
महुआ७३६मैनसिल७७३लज्जालु६१९
मरिच२२०मोखा७०२लता कस्तूरी३७१
मरसा लाल-सफेद८१७मोचरस६९६लहसुन३२३
मल्लिका६५७मोचिका (मोथ)८६९लाख३०७
मसूरी८००मोठ७९९लामज्जक४४१
महानिम्ब (बकायन)५०५मोती७८१लाल चन्दन३७७
महाबला (सहदेई)५३८मोखा७०२लाल चिरचिरा५८१
महाभरी वच२४८मोरशिखा६३८लाल चीता२२६
महाशफरी (मछली)८७०मोसंबी७५२लिसोड़ा७४०
माचिका (मोइया)२८३मौलसिरी६५४लोणा छोटी-बड़ी८२२
माधवी६५७लोध३२१
मानकन्द८४९यष्टीमधु (मुलेठी)२६४लोहबान३९८
मांस वर्ग८५५लौंग४०३
माँसरोहिणी५२९रक्तपुष्प अडूसा४९५
मानिक (चुन्नी)७८१रक्तशालि७९१वनमेथी२४०
माषपर्णी४७४रक्तार्क (अर्क)४७९वङ्गम (राँगा)७६१
मीठा नींबू७५२रक्तालू८४६वंशपत्री६१४
मुचुकुन्द६६३रसौत३१५वंशलोचन२५८
मुण्डी५७९राई८०८वच२४४
राजमाष (लोबिया)७९८वटपत्री६१३

निघण्टु-विवरण में आये हुए द्रव्यों की अकाराद्यनुक्रमणिका ३१ विषया: पृ० | विषया: पृ० | विषया: पृ० वत्सनाभ ७८३ | शालिधान्य ७८९ | सर्जक ६७९ वनककोड़ा ६२८ | शिम्बीधान्य ७९६ | सर्पाक्षी ६१५ वनतुलसी ६७० | शिलाजीत ७६६ | सहदेवी ५३९ वनहलदी ३११ | शिलारस ३९९ | सहिजना ५१२ वर्मीमत्स्य ८७० | शिलीन्ध्र (शिलिन्द मछली) ८६९ | सागोन ७०६ वर्षाभू (पथरी) ५८७ | शीतलचीनी ४३९ | सांभर मृग ८६१ वायविडङ्ग २५२ | शीसम ६८१ | सातला ४८५ वाराही कंद ५५४, ८५० | शुक्लजीरक २३३ | साम्भर नमक ३४८ विकङ्कत (कंटाई) ७३४ | शृङ्गिक विष ७८५ | सालई ६८० विजयसार ६८२ | शृङ्गी (सींगी मछली) ८६९ | साँवा ८१० विडङ्ग भेद २५४ | श्वेतदूर्वा ५५४ | सिंघाड़ा ७३५ विदारीकन्द ५५५ | श्वेतार्क ४७९ | सितोपला (मिश्री) ९४३ विदारीकन्द (क्षीरविदारी) ५५७ | श्वेतसारिवा ५९१ | सेन्दुरिया ६६६ विशाला ५७२ | ष | सिन्दूर ७६६ विक्किर (पक्षी) ८६२ | षष्टिक धान्य ७९२ | सिरस ६७७ वीरतरु ६३४ | स | सिवार ६४७ विष्णुक्रान्ता ६१६ | सत्तुक विष ७८४ | सिहोरा ७०० वीरण खस ४२० | सज्जी ३५४ | सीसा ७६१ वृद्धदारक ५७५ | सतौना ७०४ | सुगन्धबाला ४१९ वृद्धदारु ५७५ | सत्तू ८९१ | सुगन्धवास्तुक . ८१६ वेतस (वेदमूश्क) ५३१ | सनाय ६२९ | सुदर्शन ६३७ वैदूर्यम ७८१ | सन्तानिका (मलाई) ९११ | सुरमा ७३३ व्याघ्रेरण्ड ४७७ | सपादमत्स्य ८७१ | सुपारी ७२० श | सप्तला (तितली) ४८७ | सुहागा ३५८, ७७४ शङ्ख ७७६ | सफेद खैर ६८५ | सूरनकन्द ८४४ शङ्खपुष्पी ६१६ | सफेद पाढ़ल (घंटापाढ़र) ४५८ | सेंधानमक ३४५ शङ्खालुक ८४५ | सफेद सुरमा ७७३ | सेम ८३९ शणपुष्पी ५९४ | समुद्र नमक ३४८ | सेमर ६९५, ८३० शतावरी ५५९ | समुद्रफेन २५९ | सेव ७४५ शर्करा ९४३ | सम्हालू-निर्गुण्डी ५१६ | सोआ २३७ शल्लकी ३९७ | सरफोंका ५७३ | सोंचर नमक ३५१ शष्कुलीमत्स्य (सौरी) ८७० | सरसों ८०७, ८२९ | सोंठ २१६ शाल ६७९ | सरल निर्यास ३९३ | सोया २३७ शालपर्णी ४६३ | | सोनापाठा ४६१

४० भावप्रकाशस्य पूर्वखण्डे विषयाः पृ० । विषयाः पृ० । विषयाः पृ० सोनामाखी ७६४ । स्वर्णवल्ली ५४३ । हस्तिकर्ण ८५१ सोम ६०८ । ह । हंसराज ६०७ सोमलता ६०८ । हड़संघारी ५८३ । हपुषा (हाऊबेर) २५० सोरा (सुवर्चिका) ३५६ । हरताल ७७२ । हारिद्र विष ७८४ सोहागा ७७४ । हरफारेवड़ी ७३१ । हालाहल (हलाहल विष) ७८६ सौंफ २३८ । हरसिंगार ५०८ । हिङ्गुपत्री ६१४ सौराष्ट्रिकविष (सौराष्ट्रविष) ७८४ । हरिन ८६१ । हिङ्घोट ६८९ स्थलपद्म ६४३ । हरिया शुकचिन २५० । हिल्सा मछली ८६९ स्पृक्का ४४५ । हरीतकी २०७ । हींग २४२ सुवर्णकेतकी (पीला केवड़ा) ६५८ । हलदी ३०८ । हुरकुच ८२५ सुवर्णगैरिक (सोनागेरु) ७७४ । हस्त्यालुक ८४५ । होलक ८९३

द्वितीयो भागः विषय-सूची मानपरिभाषाप्रकरणम् मागध मान ९५५ गीले तथा सूखे द्रव्यों के मान के विषय में परिभाषा ९५७ कुडवसंज्ञक मानपात्र का लक्षण ९५७ कालिङ्गमान ९५७ भेषजविधानप्रकरणम् कषाय के भेद ९५९ स्वरस बनाने की विधि ९५९ चावल के धोवन की विधि ९६० हिम बनाने की विधि ९६० मन्थ बनाने की विधि ९६० फाण्ट बनाने की विधि ९६१ कल्क बनाने की विधि ९६१ चूर्ण बनाने की विधि ९६१ अनुपान की मात्रा ९६१ भावना की विधि ९६२ पुटपाक की विधि ९६२ उष्णोदक की विधि ९६२ क्षीरपाक की विधि ९६२ क्वाथ बनाने की विधि ९६२ क्वाथ पीने की मात्रा ९६३ क्वाथ में साफ शक्कर आदि डालने की मात्रा ९६४ औषध भक्षण की विधि ९६४ अवलेह बनाने की विधि ९६४ गोली बनाने की विधि ९६४ घृत और तेल बनाने की विधि ९६५ सिद्ध हुए स्नेह के लक्षण ९६७ स्नेह परिपाक के लक्षण पूर्वक तीन प्रकार ९६७ दुग्धपाक तथा आमपाक के दोष ९६८ मृदु आदि पाकों के विषय ९६८ घी, तेल तथा गुड़ के बासी होने की महत्ता ९६८ सन्धानविधि ९६८ आसव तथा अरिष्ट के लक्षण ९६८ सामान्य रूप से अरिष्ट की विधि ९६८ सुरा तथा सुरा की जातियाँ ९६९ वारुणी के लक्षण ९६९ शुक्त का लक्षण ९६९ चुक्र का लक्षण ९६९ तुषोदक, सौवीर, आरनल, काञ्जिक तथा शिण्डाकी के लक्षण ९७० धात्वादिशोधनमारणविधिप्रकरणम् मारण करने के योग्य सुवर्ण का लक्षण ९७० मारण के अयोग्य सुवर्ण ९७० सुवर्ण की शोधन विधि ९७० अशुद्ध सुवर्ण के दोष ९७१ सुवर्ण के मारण की विधि ९७१ मारे हुए सोने का गुण ९७३ नहीं मारे हुए सोने के दोष ९७३ महापुट का प्रकार ९७३ गजपुट का प्रकार ९७३ वाराह तथा कौक्कुट पुट का प्रकार ९७४ कपोतपुट का प्रकार ९७४ गोबर का लक्षण ९७४ गोबर के पुट का प्रकार ९७४ भाण्डपुट का प्रकार ९७५ यन्त्र के प्रकार बालुकायन्त्र का प्रकार ९७५ दोलायन्त्र ९७५ स्वेदनयन्त्र ९७५ विद्याधरयन्त्र ९७५ भूधरयन्त्र ९७६ डमरुयन्त्र ९७६ मारणयोग्य चांदी के लक्षण ९७६ मारण के अयोग्य चांदी ९७६ चांदी के शोधने की विधि ९७६ अशुद्ध चाँदी के दोष ९७६ चाँदी मारने के विधि ९७७ मारी हुई चाँदी के गुण ९७७ CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmmu. Digitized by S3 Foundation USA

४२ भावप्रकाशस्य पूर्वखण्डे मारण के योग्य तामा के लक्षण ९७७ | शुद्ध किये हुए शिलाजीत के गुण ९८८ मारण के योग्य तामा के लक्षण ९७७ | रस की स्वेदन विधि ९८८ तामा के शोधने की विधि ९७८ | रस की मर्दन विधि ९८९ तामे के ८ दोष ९७८ | रस की मूर्च्छन विधि ९८९ तामे के मारने की विधि ९७८ | मूर्च्छन विधि ९९० मारे हुए तामे के गुण ९७९ | रस की ऊर्ध्वपातन विधि ९९० रांगा का स्वरूप ९७९ | रस की अधःपात विधि ९९० अशुद्ध वङ्ग के दोष ९७९ | पारे के दोषों को दूर करने की शोधन विधि ९९१ रांगा तथा सीसा के शोधन की विधि ९७९ | पारे के मारने की विधि ९९१ रांगा के मारण की विधि ९८० | रसकर्पूर बनाने की विधि ९९२ मारे हुए रांगा के गुण ९८० | सिन्दूररस बनाने की विधि ९९३ सीसे का स्वरूप ९८० | मारित-मूर्च्छित पारे के गुण ९९३ सीसा के शोधन की विधि ९८० | हिङ्गुल की शोधन विधि ९९४ सीसा के मारने की विधि ९८१ | शुद्ध हिङ्गुल के गुण ९९४ मारे हुए सीसा के गुण ९८१ | सिंगरफ से पारा निकालने की विधि ९९४ अशुद्ध लोहा के दोष ९८१ | अशुद्ध गन्धक के दोष ९९५ लोहा के दोष की शान्ति के लिये शोधनविधि ९८१ | गन्धक शोधने की विधि ९९५ लोहा के मारणविधि ९८१ | शुद्ध गन्धक के गुण ९९५ मारे हुए लोह के गुण ९८२ | अशुद्ध अभ्रक के दोष ९९५ लौहभस्म खाने की मात्रा ९८३ | अभ्रक शोधन-मारण विधि ९९५ लौहभस्म खाने के समय त्याज्य द्रव्य ९८३ | धान्याभ्रक बनाने की विधि ९९६ धातुओं के मारने की साधारण विधि ९८३ | मारे हुये अभ्रक के गुण ९९६ अशुद्ध स्वर्णमाक्षिक के दोष ९८३ | अशुद्ध हरताल के दोष ९९६ सोनामाखी शोधने की विधि ९८३ | हरताल शोधने की विधि ९९६ सोनामाखी मारने की विधि ९८३ | हरताल मारने की विधि ९९७ रूपामाखी शोधने की विधि ९८४ | शुद्धाशुद्ध हरताल के गुण ९९७ रूपामाखी मारने की विधि ९८४ | अशुद्ध मैनसिल का स्वरूप ९९७ सोनामाखी तथा रूपामाखी के विशेष गुण ९८४ | मैनसिल शोधने की विधि ९९८ अशुद्ध तूतिया के शोधन की विधि . ९८४ | शुद्ध की हुई मैनसिल के गुण ९९८ शुद्ध तूतिया के गुण ९८४ | खपरिया के शोधन की विधि ९९८ कांसा तथा पीतल के शोधन की विधि ९८५ | शुद्ध खपरिया के गुण ९९८ कांसा तथा पीतल के मारने की विधि ९८५ | उपरसों के शोधन की साधारण विधि ९९८ मारे हुए कांसा तथा पीतल के गुण ९८५ | अशुद्ध हीरे के दोष ९९९ सिन्दूर के शोधने की विधि ९८५ | हीरा शोधने की विधि ९९९ सिन्दूर के गुण ९८५ | हीरा मारने की विधि ९९९ शिलाजीत के लक्षण ९८६ | मारे हुए हीरे के गुण ९९९ शिलाजीत के शोधन की विधि ९८६ | शेष रत्नों की शोधन-मारण विधि १०००

द्वितीयो भागः विषय-सूची ४३ वत्सनाभ विष के लक्षण १००० । ऋतुभेद से विरेचन द्रव्यों में भेद १०१३ विष शोधने की विधि १००० । अभयादिमोदक १०१४ विष के गुण १००० । विरेचन लेने के बाद कर्तव्य १०१४ उपविषों का निरूपण १००१ । न्यूनाधिक विरेचन का लक्षण और औषध १०१५ द्रव्यों के पूर्ण गुणयुक्त रहने की अवधि १००१ । अनुवासन तथा निरूह के भेद १०१६ घी तथा तैल के विषय में विशेषता १००१ । स्नेहबस्ति की विधि १०१६ स्नेहपानविधिप्रकरणम् । सभी प्रकार के विकारों को दूर करने वाली स्नेह के भेद तथा विशेष नाम १००२ । अनुवासन बस्ति १०२१ घी तथा तेल पिलाने योग्य व्यक्ति १००४ । निरूहबस्ति की विधि १०२२ मज्जा तथा घी पिलाने योग्य व्यक्ति १००४ । उत्क्लेशन बस्ति १०२४ शीतादि समयों तथा वातादि दोषों के भेद १००५ । दोषहर बस्ति १०२४ नस्य आदि लेने में तेल तथा घृत का प्रयोग १००५ । शमन बस्ति १०२४ घी आदि के पीने में अनुपान १००५ । लेखन बस्ति १०२४ स्नेह से द्वेष रखने वालों के लिये स्नेह-पान-विधि १००५ । बृंहणबस्ति १०२५ स्नेहन करने वाले अन्य भी पदार्थ १००५ । पिच्छिलबस्ति १०२५ स्नेह के न पचने पर कर्तव्य १००५ । निरूह बस्ति की मात्रा १०२५ स्नेह न पचने की आशङ्का में कर्तव्य १००६ । मधुतैलकबस्ति १०२५ स्नेह पीने से उत्पन्न प्यास की शान्ति १००६ । यापनबस्ति १०२६ स्नेह पीने के अयोग्य लोग १००६ । युक्तरथबस्ति १०२६ स्नेहपान के योग्य लोग १००६ । उत्तरबस्ति १०२७ स्नेहपान द्वारा भली भाँति स्निग्ध हुए लोगों । फलवर्ति की विधि १०२७ के लक्षण १००६ । नस्यग्रहण की विधि १०२८ अधिक मात्रा में स्निग्ध हुए लोंगों के लक्षण १००७ । रेचन नस्य की मात्रा १०२८ रूक्ष तथा अत्यन्त स्निग्ध हुए लोगों के । रेचन नस्य की विधि १०२९ लिये कर्तव्य १००७ । नस्य औषध का प्रमाण १०२९ स्नेह सेवन करने के गुण १००७ । रेचन नस्य के भेद १०२९ स्नेह सेवन करने के समय त्याज्य कर्म १००७ । रेचन नस्य के भेदों के लक्षण १०२९ पञ्चकर्मविधिप्रकरणम् । रेचन तथा स्नेहन नस्य के उपयोग १०२९ । रेचन औषधियों के गुण १०३० पञ्चकर्म के नाम १००७ । प्रधमन नस्य की औषधियाँ १०३० वमन कर्म में प्रथम वमन के योग्य समय और । स्नेहननस्य की कल्पना १०३० रोगियों का निर्देश १००८ । बृंहण नस्य की विधि १०३१ वमन कराने के अयोग्य लोगों का निर्देश १००८ । प्रतिमर्श की मात्रा १०३२ वमन कराने की विधि १००९ । प्रतिमर्श का समय १०३२ विरेचन के योग्य समय तथा व्यक्ति का निर्देश १०११ । प्रतिमर्श के विषय तथा गुण १०३२ मृदु, मध्यम तथा क्रूर कोष्ठ वाले मनुष्यों तथा । प्रतिमर्श के विषय तथा गुण १०३२ उनके योग्य मात्रा एवं द्रव्यों का वर्णन १०१२ । नस्य की सामान्य विधि १०३३ CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammu. Digitized by S3 Foundation USA

४४ भावप्रकाशस्य पूर्वखण्डे नस्य देने के पश्चात् निषिद्ध कर्म १०३३ | उत्तम रीति से रक्तस्राव के लक्षण १०५१ नस्य के हीनयोग तथा अतियोग की चिकित्सा १०३४ | रक्तस्राव कराने के बाद त्याज्य १०५१ षष्ठंधूमपानादिविधिप्रकरणम् | नेत्र को स्वच्छ करने की विधि १०५१ धूमपान की विधि १०३४ | नेत्र को सेक करने की विधि १०५२ धूमपान में ओषधि का कल्क १०३७ | नेत्र के आश्च्योतन विधि १०५२ गृह में देने योग्य धूम १०३७ | पिण्डी की विधि १०५३ धूमपान में त्याग करने योग्य कार्य १०३७ | विडालक विधि १०५३ गण्डूष की विधि १०३७ | तर्पण विधि १०५३ गण्डूष के भेद १०३८ | तर्पण के योग्य नेत्रों के लक्षण १०५३ गण्डूष तथा कवल की औषधियों का मान १०३८ | रोगभेद से तर्पण धारण करने के काल का भेद १०५४ गण्डूष तथा कवल धारण करने में अवस्था | यथार्थ तर्पण के चिह्न १०५४ की मर्यादा १०३८ | अतितर्पित नेत्र के लक्षण १०५४ गण्डूष धारण के गुण १०३८ | पुटपाक की विधि और भेद १०५५ कवलधारण की विधि १०३८ | पुटपाकों के धारण काल की अवधि १०५५ प्रतिसारण की विधि १०३९ | तिक्तक द्रव्य १०५६ स्वेद की विधि १०३९ | तर्पण तथा पुटपाक धारण किये हुये लोगों के स्वेद के अयोग्य व्यक्ति १०४० | लिये त्याज्य कर्म १०५६ तापस्वेद की विधि १०४१ | अञ्जन की विधि और भेद १०५६ ऊष्मस्वेद की विधि १०४१ | लेखनकारिणी वर्ति १०५८ उपनाहस्वेद की विधि १०४२ | रोपणकारिणी वर्ति १०५८ द्रवस्वेद की विधि १०४३ | स्नेहनकारिणी वर्ति १०५८ सिर में तेल डालने की विधि १०४४ | लेखनकारिणी रसक्रिया १०५८ कान में तेल डालने की विधि १०४५ | रोपणकारिणी रसक्रिया १०५८ लेप की विधि १०४५ | स्नेहनकारिणी रसक्रिया १०५८ दोषघ्न लेप १०४६ | लेखन चूर्ण १०५९ विषहा लेप १०४६ | रोपण चूर्ण १०५९ मुखकान्तिदायक लेपं १०४६ | स्नेहन चूर्ण १०५९ लेप के दो भेद १०४७ | प्रत्यञ्जन सेवन विधि १०५९ शोणितस्राव की विधि १०४८ | नयनामृत चूर्ण १०६० वातादि से दूषित रक्तों के लक्षण १०४८ | दृष्टि को स्वच्छ करने वाली शलाका १०६० शुद्ध रक्त के लक्षण १०४८ | औषध खाने के पांच समय १०६० रक्तस्राव के विषय १०४९ | निरन्न कोष्ठ में ओषधि सेवन के गुण १०६१ रक्तस्राव के साधन १०४९ | अन्न के साथ ओषधि सेवन के गुण १०६२ सिरामोक्षण के अयोग्य जन १०४९ | ओषधि के पाकापाक का लक्षण १०६२ अधिक रक्त निकलने के दोष १०५० | रोगिपरीक्षाप्रकरणम् रक्त के अधिक निकल जाने पर वायु के | वाग्भटोक्त रोगी की परीक्षा १०६३ कुपित होने की चिकित्सा १०५१ | नेत्र की परीक्षा १०६३ CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA

द्वितीयो भागः विषय-सूची ४५ जिह्वा की परीक्षा १०६४ | अत्यन्त बढ़े हुए दोषादि के कारण तथा लक्षण १०७६ मूत्र की परीक्षा १०६४ | मेदोवृद्धि के लक्षण १०७७ स्पर्शद्वारा नाडी की परीक्षा १०६४ | दोष, धातु तथा मलों के कम होने के कारण १०७८ रोग जानने के कारण १०६५ | क्षीण हुए दोषादि के लक्षण १०७८ हेतु का लक्षण १०६५ | ओज के क्षय होने का कारण १०७९ सम्प्राप्ति के लक्षण तथा भेद १०६६ | ओज के क्षय होने के लक्षण १०७९ विकल्पसम्प्राप्ति १०६७ | मल के क्षय होने के लक्षण १०७९ प्राधान्यसम्प्राप्ति १०६७ | मूत्रादि के क्षय होने के लक्षण १०७९ बलसम्प्राप्ति का व्याख्यान १०६७ | क्षीण हुये दोष, धातु तथा मलों को बढ़ाने कालसम्प्राप्ति का व्याख्यान १०६७ | की विधि १०८० वातादि दोषों में कौन दोष किस ऋतु में | वात से क्षीण हुआ मनुष्य १०८० प्रकुपित होता है १०६८ | मांस से क्षीण हुआ मनुष्य १०८० पूर्वरूप के लक्षण १०६८ | भेद से क्षीण हुआ मनुष्य १०८१ लक्षण के लक्षण १०६९ | बल का क्षय होने में कारण १०८१ उपशय के लक्षण १०६९ | बलक्षय के लक्षण १०८२ वायु के उपशय १०७० | बलवृद्धि के कारण १०८२ पित्त के उपशय १०७० | बलवान् तथा निर्बल के प्रधान लक्षण १०८२ कफ के उपशय १०७० | परिशिष्ट- १ रोगों के निदान का विवेचन १०७० | अस्थियों के विषय में-संक्षिप्त विवरण १०८३ वायु के प्रकुपित होने के कारण १०७१ | मांस धातु १०८६ पित्त के प्रकुपित होने के कारण १०७२ | नारी-जननेन्द्रियों का संक्षिप्त विवरण १०८९ विदाही के लक्षण १०७२ | पुरुष-जननेन्द्रियों का संक्षिप्त विवरण १०९२ कफ के प्रकुपित होने के कारण १०७३ | आर्त्तव-गर्भाधान तथा बन्ध्यत्व का संक्षिप्त रोग के कारण स्वरूप रोग की विचित्रता १०७४ | विवरण १०९४ बढ़े तथा क्षीण हुए दोष, धातु तथा मल की | परिशिष्ट- २ सुश्रुतोक्त चिकित्सा १०७४ | अकारादि-क्रमानुसार निघण्टुभाग-स्थित द्रव्यों के स्वस्थ मनुष्य के लक्षण १०७५ | व्यवहारोपयोगी अङ्ग तथा उनकी मात्राएँ ११०१

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