ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)
Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary
आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा
Here is the line-by-line transcription of the page into pure Unicode Devanagari:
( २६ ) ३ रदरसयमला गुणवेदवसुयमाः षट्क विषयशून्यगुणाः । १ ४ २ खमुनिरसां व्यासाद्धं नवरदचन्द्रा जिनांशज्याः ॥ ६ ॥ २४।१३२६ | २१४ | १ १८८७ | २६३३ | ७ | ५५१ | १८२४ | | ४२७ | १९६१ | ३०२१ | २८ | ६७६ | २०१६ | | ६३८ | २१५६ | ३०६६ | ६३ | ८११ | २२१६ | | ८४६ | २३१२ | ३१५६ | १११ | ६५८ | २४२४ | | १०५१ | २४५६ | ३२०७ | १७४ | १११४ | २६७२ ३ | | १२५१ | २५६४ | ३२४२ | २४६ | १२७६ | २८४३ | | १४४६ | २ २७१४ | ३२६३ | ३३७ | १४५३ |
( २७ ) लिप्तास्तत्त्वयम॑हता २२५ लब्धं द्योष्राष्टुचांतरादृता छेषात् । तिथिकृति २२५ हृत्फल्युता लब्धषष्ट्या द्वा ग्रहणमेवम् ॥ १० ॥ ज्यां प्रोह्य शेषगुणितास्तत्त्वयमा ज्यांतरा धृतालब्धम् । क्षेप्यं विशुद्धजीवासंख्यातिथि कृतिवधे चापम् ॥ ११ ॥
१०. (घ) १. ज्याष्टचांतरा (ग) ज्याज्यांतरा (क) ज्याज्यांतरा (च) for (द्याष्टचांतरा)
२. हृतात् (क) for (हृत्)
३. ष्ट्या (ग) ज्या (क) (ख) षष्ट for (षष्ट्या)
४. ज्या (ग) ज्या (क) (ख) ज्या for (द्वा)
(ग) ५. मलहता (ख) यमाहृता for (यमहृता)
६. २२५ हृतातफल for (हृत्फल)
७. लब्धं for (लब्ध)
(क) २. हृतातफलयुतात् for (हृत्फलयुता)
(ख) १. लब्धद्याष्टचां for (लब्धद्याषष्टचां)
८. ग्रहणमेव for (ग्रहणमेवम्)
(च) ६. २., २२५ हृतातफलयुता for (२२५ हृत्फलयुता)
३. ष्ट्या for (षष्ट्या)
४. द्वा for (द्वा)
११. (घ) १. ज्यांतरो (क) ज्यांतरोद्धृता (च) ज्यांतरोधृता for (ज्यांतराधृता)
२. संख्या for (संख्या)
(ग) ३. गुणितातत्त्वयमा २२५ for (गुणितास्तत्त्वयमा)
४. ++न++
५. ++२२५++
(क) ६. सेष (ख) सेष for (शेष)
(ख) ७. प्रयोज्यय for (प्रोह्य)
८. क्षेपं for (क्षेप्यं)
(च) ७. प्रोज्य for (प्रोह्य) ८. क्षेप्यं for (क्षेप्यं)
( २८ मध्याद्विशोध्य मंदं शीघ्रात्संशोध्य मध्यमं केन्द्रम् । अयुतिगता^१ यया यो^३ युति पदेऽन्यथा^४ बाहुकोटिज्ये^२ ॥ १२ ॥ त्रिज्याहता^४ भुजज्या २२७०^५ युगयुक्परिधि द्वयांतर^१ गुणाप्त्या^२ । युग्मांत^३ परिधिरधिको हीनोऽधिकः^६ हीनोधिकः^८ स्पष्टः ॥ १३ ॥ तद्गुणितेज्ये भांशैः ३६२ हृते^२ फले कोटिफलयुता त्रिज्या ३२७० । आद्यन्तयोर्निहीनो^१ पदयोर्द्वितृतीययोः^३ कोटिः ॥ १४ ॥
१२. (घ) १. व्युयुगतयेयोर्युजि (ग) अयुजिगतयेयोर्युजि for (अयुतिगताययायो युति)
(क) १. अयुजिगतैयोंज्ययोर्युजि for (अयुतिगताययायोयुति)
(च) १. अयुतिगतं for (अयुतिगता) २ या for (यो) ३ युंक्ति for (युति)
४. अवग्रहचिह्नलुप्त
१३. (घ) १. द्वयांतर (ग) द्वयांत (क) द्वयांतर (ख) द्वध्वयांतर for (द्वयांतर)
२. गुणात्प्या (ग) गुणाप्त्या for (गुणाप्त्या)
३. परिधिको हीनो हीनाधिकः for (परिधिरधिको हीनोऽधिकः हीनोऽधिकः)
(ग) ४. ३२७० हृता (क) त्रिज्याहृता (च) for (त्रिज्याहता)
५. यह संख्या अंकित नहीं।
६. 'ऽधिकः' शब्द अंकित नहीं (क)
(क) ७. 'युग्मांतर for (युग्मांत)
(ख) ६. 'हीनोऽधिकः' पद लुप्त हैं
८. हीनाधिकः for (हीनोऽधिकः)
(च) ५. २७७० for (२२७०) २+८+
३. परिधिकोहीनो for (परिधिरधिको हीनोऽधिकः)
१४. (घ) १. विहीना (ग) विहीना (क) विंहीना for (निहीनो)
(ग) २. हृंते (क) for (हृते)
३. द्वित्रितीययोः for (द्वितृतीययोः)
(ख) १. विहीनो for (निहीनो)
(च) १. विहीना for (निहीनो)
( २६ ) तद्भूुजफल कृतियोगान्मूलं कर्णः<sup>१</sup> पदेष्वयुग्युक्षु<sup>५</sup> । स्वपरिधिगुणा<sup>२</sup> क्रमोत्क्रमजीवा भांशै<sup>३</sup> ३६० हृ<sup>४</sup>तान्मन्दे ॥ १५ ॥ क्षयधनधनक्षयास्तत्फलानि शीघ्रेऽन्यथा धनं धनयोः । ऋणमृणयोर्योगा<sup>२</sup>न्तरमृणधनयोस्तुल्ययोः<sup>३</sup> शन्यं ॥ १६ ॥ तच्चापं मन्दफलं फलयोगान्तरवशाद्धनमृणं<sup>३</sup> वा । शीघ्रफलं तद्गुणिताद्व्या<sup>२</sup>सार्द्धात् कर्णालब्धधनुः ॥ १७ ॥ ३२७० देशान्तरे खमध्ये<sup>१</sup> भुजफलचापे भुजांतरे च कृते । उन्मण्डलेऽर्क<sup>२</sup> चन्द्रौ स्पष्टौ रविचरदले क्षितिजे ॥ १८ ॥ अर्कोदया<sup>१</sup>स्तमययोर्विना चरार्द्धेन रात्रिदिनदलयोः । न स्फुटमार्यभटोक्तं स्पष्टीकरणं स्फुटोक्तिरतः ॥ १६ ॥
१५. (घ) १. कर्णं पटेष्वग्युक्षुः for (कर्णः पदेष्वयुग्युक्षु)
२. गुणाः (च) for (गुणा)
३. म्यांशे for (भांशै ३६०) (ग) हृताफलं मंदे for (हृतान्मन्दे)
४. मांदेः (क) हृतामांदो (ख) हृतामन्दे for (हृतान्मन्दे)
(क) ५. पदेष्वयुक् युक् स्यात् for (पदेष्वयुग्युक्षु)
(ख) ६. क्रमोक्रमजीवा for (क्रमोत्क्रमजीवा)
(च) १. कर्णंपदेष्वयुक्षः for (कर्णः पदेष्वयुग्युक्षु)
३. ज्यां (भां) शै for (भांशै) ४ हृतामंदं for (हृतान्मन्दे)
१६. (घ) १. धनयोः for (धनयोस्)
(ग) २. योगोत्तर for (योगान्तर)
३. तुल्ययो for (तुल्ययोः)
१७. (घ) १. गुणुता for (गुणिताद्)
(ग) २. व्यासाद्धैत् (क) व्यासोर्द्धात् for (व्यासार्द्धात्)
(क) ३. मृणांवति for (मृणांवा)
(च) १. तद्गुणिताद् for (तद्गुणिताद्)
१८. (घ) १. स्वमध्यो (ग) स्वमध्ये (क) स्वमध्यौ (ख) स्वमध्यो for (खमध्ये)
(च) १. स्वमध्यो for (खमध्ये)
२. र्का for (ऽर्क)
१६. (ख) १. अर्कोदयास्तममयोर्विना for (अर्कोदयास्तमययोर्विना)
२. राभि for (रात्रि)
(च) १. अर्ककोदयास्तमययोर्विना for (अर्कोदयास्तमययोर्विना)
( ३० ) १ सूर्यस्य मनुद्वितयं त्रिंशोनं⁴ दिनदलेन तस्य प्राक् ।₅ १/४ ३/३० तिथि²घटिकाभिस्त्र्यं³शाधिकोनमूनाधिकं पश्चात् । ६ २ं०¹ ।। २० ।। द्युदले जिनलिप्तोनं दशनद्वितयं (३/३ ६)⁵ द्विशर¹ ५२ कलोनु प्राक्² । पश्चाद्युतोर्नमिदोः³ सूर्यवहण धन परिध्यंशाः⁴ ।। २१ ।।
२०. (घ) १. १/४ ३/३० | १/४ ३/३ (ग) for (१/४ ३/३०)
२. तिथि + १५ + (ग) for (तिथि)
३. त्र्यंशा (ग) स्त्रियंशाधिकोन १४।०।। १३।२०।। for (स्त्र्यंशाधिकोन)
(ग) ४. त्र्यंशोनं (क) for (त्रिंशोनं)
५. पश्चात् व for (पश्चात्)
(च) २. + १५ + १ संख्या लुप्त
३. त्र्यं ३/४ ३/३ | ३/४ ३/३ शाधिको for (त्र्यंशाधिको)
२१. (घ) १. कलोनं (ग) (क) (ख) कालोनं for (कलोनु)
२. यहां ‘५२’ संख्या जो ‘द्विशर’ के बाद अंकित है, लिखी है ।
३. मंदोः for (मिदोः)
(ग) ५. संख्या अंकित नहीं है ।
६. संख्यां अंकित नहीं है ।
(क) ७. सूर्याहरण for (सूर्यवहण)
(ख) ८. द्युदलेतिन for (द्युदलेजिन)
(च) ६. संख्यालुप्त १ कलोनं for (कलोनु)
२. + ५२ + ७ सूर्यवहण for (सूर्यवहण)
( ३१ ) तद्द्यु दलपरिध्यन्तरं गुणांकृता^१ त्रिज्यया^२ स्वनतजीवा । ऊने धनमृणमधिके^४ दिनार्द्ध^६ परिधौ स्फुटः^५ परिधिः ॥ २२ ॥ भुजफलचापं केन्द्रे षड्राश्यूने^१ खावृणं मध्ये । स्वभुजबल^२चापमिन्दौ षड्राश्यधिके^३ धनं भवति ॥ २३ ॥ देशान्तराद्यमेवं स्पष्टीकरणं दिनार्द्धपरिधिभ्याम् । कृत्वा तत्तिथ्यन्तं^१ स्फुटपरिधिभ्यां स्फुटावसकृत् ॥ २४ ॥ २२. (घ) १. हृता (ग) (क) (च) for (कृता) २. तृज्यया for (त्रिज्यया) (क) त्रिज्ययाश्च नतजीवा for (त्रिज्यया स्वनत- जीवा) (ग) यहां निम्नांकित संख्या अधिक है—
| ३१ | ३१ | ५२ | ३० | ३२ | ३० |
|---|---|---|---|---|---|
| ३६ | ३६ | ४४ | २८ | ४४ | |
| ८ | |||||
| (क) ३. तत् | |||||
| ४. मधिका for (मधिके) | |||||
| (ख) ३. तद्युदलं for (तद्द्युदल) | |||||
| (च) ६. परिवो for (परिधौ) | |||||
| २३. (घ) १. षड्राशून्ये (च) for (षड्राश्यूने) | |||||
| २. फल (च) for (बल) | |||||
| (ग) ३. षड्राशधिके (क) षड्रास्यधिके (ख) षड्राश्याधिके for (षड्राश्यधिके) | |||||
| २४. (क) १. तत्तिथ्यन्तः (ख) तत्तिथ्यन्तं for (तत्तिथ्यन्त) |
( ३२ ) प्राक् पश्चाद्वा याभिर्घटिकाभिर्दिनदलान्नतः^४ सूर्यः^३ । तिथ्यंते तद्रहिते^१ त्रिंशत्^२ घटिकावशेषाभिः^५ ॥ २५ ॥ विपरीतमर्धरात्राच्चन्द्रग्रहणे^२ शशी रविग्रहणे । सूर्योतस्ततस्ताभिरेव^१^३ घटिकाभिरिन्दुरपि ॥ २६ ॥ दिनदल^१ परिधि स्फुट तिथिनतकेन्द्रज्यावधो^२ गुणोर्केन्दोः^३ । इंदू^४ धृति धृतिभि १६१ नवनववेदै^८ ४६६ व्यासार्द्धकृतिर्भक्तः^५ ॥ २७ ॥ १०६६२६००^६ २५. (घ) १. तद्रहिव for (ग) (तद्रहिते) (ग) तद्रहितस्त्रिंशद् for (तद्रहिते त्रिंशत्)(क) तद्रहितं for (तद्रहिते) २. त्र्यंशद् (क) त्रिदशत for (त्रिंशत्) (ग) ३. नतसूर्यः for (नतः सूर्यः) (ख) ४. घटिकामि for (घटिकाभि) ५. त्रिंशदधिकावशेषाभिः for (त्रिंशत्घटिकावशेषाभिः) (च) ३. दिनदलान्नत् सूर्यः for (दिनदलान्ततः सूर्यः) २. त्रिशद् for (त्रिंशत्) २६. (घ) १. यतस्वषः for (यतस्ततस्) २. चन्द्रग्रहणे (क) चन्द्रग्रहादिनिग्रहाणः for (चन्द्रग्रहणे) ३. रेवमथ for (रेव) (च) २. चन्द्रग्रहणो for (चन्द्रग्रहणे) २७. (घ) १. दज for (दल) २. व्या for (ज्या) (क) ज्यावाधो for (ज्यावधो) ३. केंन्दोः (ग) (ख) केंन्द्रो for (केंन्दोः) ४. इंद्धृतिधृतिभि (ग) (क) इंदुविधृतिभि for (इंदूधृतिधृतिभि) ५. भक्तः for (र्भक्तः) (ग) (ख) कृतिर्भक्ति for (कृतिर्भक्तः) ६. १०६६ ।। २६०० for (१०६६२६००) (ग) ७. व्यासाद्धंकृति (क) व्यासाद्धंकृते for (व्यासार्द्धकृति) वि० रेखाङ्कित दोनों संख्याएं "वेद" के पश्चात् एक स्थान पर हैं । (१६१, ४६६) (क) ३. गुणोर्केस्तः for (गुणोर्केन्दोः) ८. नंवनववेदै (च) for (नवनववेदै) वि० संख्याएं मूल में लुप्त हैं । (च) ३. केंद्रोः for (केंन्दोः) ५. भक्तः for (र्भक्तः)
? Let's check the meter: Line 2-3: फलविकला वा सूर्ये प्रागृणमसकृन्नते धनं पश्चात् । (Arya: 12 + 18) फ ल वि क ला (5) वा (2) सूर् ये (3) प्रा गृ ण म स कृ न्न ते (9) = 19? Wait: फलविकला वा सूर्ये (12 morae: फ(1) ल(1) वि(1) क(1) ला(2) वा(2) सूर्(2) ये(2) = 12) प्रागृणमसकृन्नते धनं पश्चात् (18 morae: प्रा(2) गृ(1) ण(1) म(1) स(1) कृन्(2) न(1) ते(2) ध(1) नं(2) पश्(2) चात्(2) = 18). Line 3: केन्द्रफलमृणं चन्द्रेऽन्यथा धनं चेदृणं स्पष्टौ ॥ २८ ॥ (12 + 15) केन्(2) द्र(1) फ(1) ल(1) मृ(1) णं(2) चन्(2) द्रेऽ(2) = 12. न्य(1) था(2) ध(1) नं(2) चे(2) दृ(1) णं(2) स्पष्(2) टौ
( ३४ ) स्वदिनार्द्ध परिधिभुजफलचापं मध्योर्क²चन्द्रयोः कृत्वा । पूर्ववदन्यत्स्पष्टं¹ संव्यवहारार्थमेवं वा ॥ ३२ ॥ आर्यभटस्याज्ञानान्मध्यममन्दोच्चशीघ्रपरिधिना¹ । न² स्पष्टा भौमाद्याः³ स्पष्टा⁴ ब्रह्मोक्तमध्याद्यैः ॥ ३३ ॥⁵ मंदोच्चनीचवृत्तस्य परिधिभागाः सितस्य विषमांते । नव ६ युग्मांते रुद्राः⁴ ११ शीघ्रौ³ जान्तेऽ⁵ग्निरसयमलाः¹ ॥ २६३² ॥३४॥ युग्मांतेष्ट⁴शरयमाः⁵ २५८ मंदफलात्¹मध्यमः² स्फुटो मध्यः । शीघ्रफलात्स्पष्टो सकृदेवं स्वफलैर्ज्ञगुरुसौराः³ ॥ ३५ ॥
३२. (घ) १. स्पष्टो (ग) स्पष्टौ (क) स्पष्टौ for (स्पष्टं)
(च) २. मध्यार्कं for (मध्यार्क)
३३. (घ) १. परिधीनाम् (ग) (क) (च) for (परिधिना)
२. त for (न)
३. भौमाद्या for (भौमाद्याः)
(क) ४. स्पष्ट for (स्पष्टा)
(च) २. ते for (न) ३ भौमाद्या for (भौमाद्याः)
५. क्रमसंख्या लुप्त
३४. (घ) १. यमलाः (च) for (यमलाः)
२. ३४।२६३ for (२६३।३४) (क) संख्या लुप्त है ।
(क) ३. शीघ्रो (च) for (शीघ्रौ)
(ख) यह श्लोक यहां ३० वें श्लोक के पश्चात् है । यद्यपि इस प्रति में श्लोक
संख्या नहीं दी गई है ।
(च) ४. विसर्गलुप्त ५. अवग्रहचिह्न लुप्त
३५. (घ) १. फलान् (ग) (क) (ख) मंदफला for (मंदफलात्)
(ग) २. मध्यम for (मध्यमः)
(क) ३. सौरः for (सौराः)
(ख) ४. युग्मांतिष्ठ for (युग्मांतेष्ट)
५. शरयमा for (शरयमाः)
(च) १. फलान् for (फलात्)
( ३५ ) ^१बुधमंदपरिधि^७भागांवसु^६रामाः ३८ सुरगुरो^८र्खयँस्त्रिशत्^२ । रविजस्य^१०शून्यारामा ३० ^३सशीघ्रपरिधि^४द्विगुण^९श्चन्द्राः ॥ ३६ ॥^५ देवगुरोरष्ट^१रसा ६८ भास्कर पुत्रस्य शरगुणाः ३५ ^२स्पष्टाः । कुजशीघ्रकेन्द्रपदगत ये ^३अल्पज्या^४भिभागो^५नैः ॥ ३७ ॥
३६. (घ) १. बुधमंदपरिधि for (बुधमंदपरिधि)
२. + ३३ + (ग) (च)
३. ज्ञ (ग) (क) (ख) (च) for (स)
४. द्विगुण (ग) for (द्विगुण)
५. + १३२ + (ग) (च)
(ग) ६. रामा for (रामाः)
(क) वि० मूल में अंकित संख्याएं यहां लुप्त हैं ।
(ख) ७. रंशा for (भागा)
८. त्रयंस्त्रिशत् for (त्रयंस्त्रिशत्)
९. चन्द्रा for (चन्द्राः)
(च) १०. रामाः for (रामा)
३७. (घ) १. रस्य (क) रस for (रसा)
२. शरगुणा स्पष्टाः । ३५ for (शरगुणाः ३५ स्पष्टाः)
३. याल्पज्या (ग) (क) for (अल्पज्या)
४. त्रि (ग) (क) (च) for (त्रि)
५. नौः for (नैः)
(च) २. झरगुणास्पष्टाः ३५ for (शरगुणाः ३५ स्पष्टाः)
३. याल्पद्या for (अल्पज्या)
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[L...] ३८. (घ) १. गुणिताः (च) for (गुणिता) [L...] २. २३।१२ (ग) (च) for (२३।१) [L...] ३. नः (ग) (क) (च) for (न) [L...] ४. स्फुटो (ग) (क) (ख) (च) for (स्फुटौ) [L...] ५. भवति (ग) (क) भवंति (ख) भवति (च) for (भवतीति) [L...] (ग) ६. यहाँ यह संख्या नहीं है (च) '४०' संख्या लुप्त [L...] (क) ७. दिवाद्धं for (दिवर्द्धं) [L...] वि० मूल में दी गई संख्याएं लुप्त हैं । [L...] (ख) ८. हताप्ताशः for (हृताप्तांशं) [L...] ६. शृगकवचादौ for (मृगकर्कदौ) [L...] (च) ६. मृगकक्कादौ for (मृगकर्कदौ)
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( ३७ ) मन्दफलं मध्येऽङ्कौ तच्छीघ्रफलं च मध्यमे सकले । मध्ये सकृत् क्षितिसुतः स्पष्टो भुक्ति स्फुटाग्रहवत् ॥ ४० ॥ ग्रहकेन्द्रभुक्तिज्याकरगुणिताद्यजीवया भक्ता २१४। लब्धं स्फुट परिधिगुणं भगणांशहृतं कलाभिस्तु ॥ ४१ ॥
४०. (घ) १. फलं (ग) (क) (ख) फलस्य for (फल)
२. सकलो (ख) (च) for (सकले)
३. मध्येऽसकृत् (क) मध्यशकृत for (मध्येसकृत्)
४. भुक्तिः (ग) (च) for (भुक्ति)
६. क्षितिसुते (ख) for (क्षितिसुतः)
७ स्फुटौ for (स्फुटा)
(ख) ८. र्द्धा (च) र्द्ध for (ऽङ्कौ)
(च) ६. तत्शीघ्र for (तच्छीघ्र)
४१. (घ) १. ग्रहमंदकेन्द्र (ग) (क) ग्रहमंद्रकेंद्रा (ख) ग्रहमंदकेन्द्र for (ग्रहकेन्द्र)
२. ज्यतिर (ग) ज्यांतर (क) ज्यतिर (ख) ज्याँतर for (ज्याकर)
३. फलकबाभिः । (ग) (क) फलकलाभिः for (कलाभिस्तु)
(ग) ४. द्युजीवया (क) (ख) गुणिताद्या for (द्यजीवया)
(ख) ५. भक्ताः for (भक्ता )
६. स्फुटि for (स्फुट)
३. फलकलाभि for (कलाभिस्तु)
(च) १. ग्रहमंदकेंद्र for (ग्रहकेन्द्र )
२. ज्याँतर for (ज्याकर)
३. फलकबभिः for (कलाभिस्तु)
( ३८ ) मृगकर्काद्यादूनाधिका स्वमध्यमगतिः स्फुटाकेंदोः । शीघ्रगतिमंदफलस्फुटभुक्तच्यूनां कुजादिना ॥ ४२ ॥ शीघ्रफलं भोग्यजीवागुणिता माघजीवया विभजेत् । फलगुणितं व्यासाद्धं विभाजयेत् शीघ्रकरणेन ॥ ४३ ॥ ४२. (घ) १. मृगक्कर्धादावूना (ग) (क) मृगकर्काद्यवूनाधिका for (मृगकर्काद्यादूनाधिका) २. स्फुटाकेंदो: (ग) (क) स्फुटाकेंदो: for (स्फुटाकेंदोः) ३. शीघ्रगति (क) शीघ्रगतिः for (शीघ्रगति) ४. भक्तूनां (ग) भुक्तच्यूनां (क) भुत्तचूनां (ख) for (भुक्तच्यूनां) ५. कुजादीनाम् । (ग) (क) (ख) कुजादीनाम् for (कुजादिना) (ग) ६. स्वमध्या for (स्वमध्यम) ७. मंदफल (ख) म
( ३६ ) लब्धोनाशीघ्रगतिस्फुटभुक्तिर्लब्धमधिकं चेत् । शीघ्रगतेः शीघ्रगतिः लब्धा संशोध्य वक्रगतिः ॥ ४४ ॥ देयमसुताय नेदं शपथैरपि दत्तसुकृतनाशायैः । यात्राविवाहजातक फलस्फुटत्वं यतः स्पष्टैः ॥ ४५ ॥ मेषादितः प्रवृत्तानार्यभटस्य स्फुटाः युगस्थादौ । श्रीषेणस्य कुजाद्याः सूर्याद्यविष्णुचन्द्रस्य ॥ ४६ ॥ दूरभ्रष्टाः स्पष्टा श्रीषेणार्यभटविष्णुचन्द्रेषु । यस्मात् कुजादयस्तेषु न विदुषामादरस्तस्मात् ॥ ४७ ॥
४४. (घ) १. शीघ्रगतिः (ग) (क) गतिं (ख) शीघ्रगतिः (च) for (शीघ्रगति)
२. र्भवति लब्ध (ग) र्भवति लब्ध (ख) भवति लब्ध for (र्लब्ध)
३. शीघ्रगंति (ग) (क) (ख) शीघ्रगतं for (शीघ्रगतिः)
(क) ४. लब्वात् for (लब्धा)
(ख) ५. संसोध्य for (संशोध्य)
६. वक्तगतिः for (वक्रगतिः)
(च) २. +भवति+
३. शीघ्रगंति for (शीघ्रगतिः)
४५. (घ) १. जातकं (ख) जातव for (जातक)
२. स्पष्टै for (स्पष्टैः)
(क) ३. नाशोचैः (ख) नशायैः for (नाशायैः)
४. यत्र for (यात्रा)
(च) ५. नेदशपंयै for (नेदं शपथै)
४६. (घ) १. स्फुटा (ग) (क) (ख) स्फुटा (च) for (स्फुटाः)
२. ज्या (ग) द्या (ख) द्याः for (द्य)
(ख) ३. विष्नचंद्रस्य for (विष्णुचन्द्रस्य)
(च) २. सूर्याद्या for (सूर्याद्य)
४७. (घ) १. (चंट) for (भट)
(ग) २. स्पष्टाः (ख) for (स्पष्टा)
(ख) ३. दूरम्यष्टः for (दूरभ्रष्टाः)
४. ‘आर्य’ लुप्त है
५. चन्देषु for (चन्द्रेषु)
( ४० ) १अग्न्यष्टिभिरि२षुमनुभिः शरसूर्यैरिषु रसेंदु४भिस्त्रिभवैः । शीघ्रान्त्यकेन्द्रभागैर्भौमादीनां भवति ५वक्रम् ॥ ४८ ॥ १वक्रांशकैस्तदूनैः ३६० २रनुवक्रं तदधिकोन भागकलाः । मंदफलस्फुट ३भुत्तचून शीघ्रवृत्तचाहता दिवसाः ।। ४६ ।। ३शीघ्र१स्फुटा४ग्रहोना ५च्छेषे मध्यस्फुटांतराद्धं६ वा । अधिकेधन२मृणमूने स्फुटग्रहा मध्यमे कृत्वा ।। ८५० ।।
४८. (ग) १. अग्निष्टिभि (क) अग्न्यष्टिभि (च) for (अग्न्यष्टिभि)
२. रिषुमुनिभिः for (रिषुमनुभिः)
३. +भौ० व० कें० ।। ५ । १३ । ० ।। बु० व० कें० ।। ४ । २५ । ० । ० ।।
बृ० व० कें० ।। ४ । ५ । ० । ० ।। शु० व० कें० ।। ५ । १५ । ० । ० ।।
श० व० कें० ।। ३ । २३ । ० । ० ।।+
(ख) १. अग्न्याष्टिभि for (अग्न्यष्टभि)
४. रसेदुभि for (रसेंदुभि)
५. कर्म for (वक्रम्)
(च) २. रिषमनुभि for (रिषुमनुभिः)
४६. (क) १. चक्रांशकै for (वक्रांशकै)
(ख) २. वक्तं for (वक्रम्)
३. भुक्त्यान for (भुत्तचून)
५०. (घ) १. स्फुट (ग) (क) for (स्फुटा)
२. ग्रहान् (ग) (क) ग्रहान् for (ग्रहा)
(क) ३. शीघ्रात् (ख) for (शीघ्र)
४. ग्रहोनात् for (ग्रहोना)
(ख) ५. च्छेपे for (च्छेषे)
६. स्फुटार्धं वा for (स्फुटांतराद्धं वा)
७. नष्टणामूने for (नमृणामूने)
(च) २. स्फुटग्रहान् for (स्फुटग्रहा)
८. यहां क्रम संख्या भूल से “१५०” अंकित है ।
वि० यहां पर जो सारणी दी गई है। वह मूल पाठ में ५२ वें श्लोक में दी
गई है ।
( ४१ ) राशिषु चतुर्षु वक्रं¹ षट्स्वति⁶ वक्रमनु⁷वक्रमष्टासु । ४ । ५ । ८² अप्राप्ता³ प्रतीतकाला भुक्त्या सैवोद्धृता⁵ दिवसाः ॥ ५१ ॥ अष्टममैः⁴ कृतचन्द्रैर्मु⁶नीन्दुभि¹⁰र्भौमजीव⁵ रविजानाम्⁸ । उदयप्रागस्तमयस्तदून¹¹वक्रांशक पंचात्¹ ² ॥ ५२ ॥ | ५ | ४ | ४ | ४ | ३ |³ | १३ | २५ | ५ | १५ | २३ | | ० | ० | ० | ० | ० | | ० | ० | ० | ० | ० |
५१. (घ) १. वंकं for (वक्रं)
२. ४ । ६ । ८ (ग) (च) for ( ४ । ५ । ८ )
३. अप्राप्तातीतकला (ग) अप्राप्तातातकला (ख) अप्राप्तातीतकाला for (अप्रा-
प्ताप्रतीतकाला)
४. सैवौदधृता (ग) (क) (ख) for (सैवोद्धृना)
(ग) ५. दिवसा (ख) (च) for (दिवसाः)
(क) ३. अप्राप्ताप्रतीतकला for (अप्राप्ताप्रतीतकाला)
(ख) ६. षटत्वति for (षट्स्वति)
७. 'नु' पद लुप्त है ।
८. भत्त्या for (भुक्त्या)
(च) ६. 'षट्स्व' लुप्त ० अप्राप्तातीतकला for (अप्राप्ताप्रतीतकाला)
५२. (घ) १. वक्रांशकैः (ग) (क) चक्रांशकैः (ख) वक्तांशकैः for (वक्रांशकै)
२. पश्चात् (ग) (क) (ख) पश्चात् for (पंचात्)
३. यहां यह तालिका ५०वें श्लोक के साथ है (ख) लुप्त है
(ग) ४. अष्टमैः (ख) अष्टयमै for (अष्टममैः)
५. भौमजा (क) भौम for (भौम)
६. + २८ । १४ । १७ +
७. उदयः (ख) for (उदय)
३. यहां यह तालिका नहीं दी हुई है (क)
(क) ८. रविजानाम् for (रविजानाम्)
(ख) ६. कृतचन्द्रैः for (कृतचन्द्रै)
१०. मुनिदुभौम for (मुनीन्दुभिर्भौम)
११. तादून for (तदून)
(च) १. वक्रांशकैः for (वक्रांशकै) २ पश्चात् for (पंचात्)
तिथि = 155! Exactly 155!
इषु (5) + तिथि (15) = 155!
And मुनि (7) + गो (9) or मुनि (7) + अद्रि?
Wait, मुनि (7), अद्रि (7), रूप (1), रूप (1)? Wait, in the text:
"मुनिगोनै-" - wait, is that 'गोनै'?
Let's check the digits: 1177.
7 = मुनि
7 = अद्रि? Or मुनि (7), मुनि (7)?
Wait, look at the text:
"रिषुतिथिभिर्मुनिगोनै-"
Wait, look at the letters:
म ु न ि = मुनि
ग ो = गो? Or ग ै? Or न ौ?
Wait, let's look at footnote:
Is there a footnote for मुनिगोनै?
No, the footnote is: १ १५५।११७७ (ग) १५५ । १७७ for (१५५, ११७७)
So the main text is exactly as printed: रिषुतिथिभिर्मुनिगोनै-
And line 3: द्युभिः पश्चात् । १५५, ११७७
Wait, look at वि० संख्याएँ मूल में नहीं दी गई हैं ।
वि० संख्याएँ = विशेष संख्याएँ or विवरण संख्याएँ?
In the text, the numerals
( ४३ ) <sup>६</sup>जिनभागज्या <sup>१</sup>गुणिता <sup>७</sup>सूर्याद्या व्यासदलहृता<sup>२</sup><sub>६</sub>लब्धम् । <sup>३</sup>३२७० <sup>४</sup>इष्टापक्रमजीवा <sup>५</sup>विषुवदुग् दक्षिणा <sup>६</sup>सवितुः ॥ ५५ ॥ <sup>६</sup>इष्टापक्रमवर्ग<sup>१</sup>मिज्यावर्गाद्<sup>२</sup>विशोध्य <sup>५</sup>१०६६१६०० शेषपदम् । विषुवदुदग् <sup>३</sup>दक्षिणतः <sup>४</sup>स्वाहोरात्र्यार्द्ध <sup>८</sup>विष्कंभः ॥ ५६ ॥
५५. (घ) १. +१३२६+(च)
२. +३२७०+(ग) (च)
३. यह संख्या यहाँ पर 'हृता' के पश्चात् है ।
४. दृष्टा for (इष्टा)
५. विषुवदुदिग्दक्षिणा (ग) विष्वदुदिग्दक्षिणे for (विषुवदुग्दक्षिणा)
६. सदितु (ख) सदितु (च) for (सवितुः)
(ग) ७. +१३२६+सूर्याज्ज्या (क) सूर्याज्ज्या (ख) सूर्यज्य for (सूर्याद्या)
(क) ८. दक्षिणो (ख) दक्षिण for (दक्षिणा)
(ख) ६. जिनभागाज्या for (जिनभागज्या)
(च) ५. विष्वदुदग्दक्षिणा for (विषुवदुग्दक्षिणा)
५६. (घ) १. वर्ग त्रिज्या (ग) (क) (ख) वर्ग त्रिज्या for (वर्गमिज्या)
२. वर्गाद्विशोध्य (ख) वर्गाद्विशेषपदम् for (वर्गाद्विशोध्य)
३. दक्षणात: (च) for (दक्षिणतः)
४. स्वाहोराद्धं (ग) स्वाहोरात्रार्द्धं (क) स्वाहोरात्रार्द्ध for (स्वाहोरात्र्यार्द्ध)
(ग) ५. +१०६६२६००+
(ख) ६. इष्टमपक्रम for (इष्टापक्रम)
७. ‘ग्’ लुप्त
४. स्वांहोरात्रार्ध for (स्वाहोरात्र्यार्द्ध)
८. विष्कभ्रः for (विष्कंभः)
(च) १. वर्गं त्रिज्या for (वर्गमिज्या)
४. स्वाहोराद्धं for (स्वाहोरात्र्यार्ध)
( ४४ ) क्रान्तिज्या विषुवच्छाया गुणा द्वादशो धृता क्षितिजा । स्वाहोरात्रेऽनष्टा व्यासार्धेनाहता भक्ता ॥ ५७ ॥ स्वाहोरात्रार्द्धेन क्षयवृद्धिर्ज्याधनुश्चरप्राणाः । षट्कोधृता विनाड्यो विनाडिका नाडिका षष्ट्या ॥ ५८ ॥ चरदलघटिका गुणिता भुक्तिः षष्ट्याहता कलाद्याप्तम् । ऋणमुदयेऽस्तमये धनमुत्तरगोलेऽन्यथा याम्ये ॥ ५९ ॥
५७. (घ) १. त्सायाया (ग) छायया (ख) विषुच्छाया for (विषुवच्छाया)
२. धृता (ग) (ख) हृता for (धृता)
३. स्वाहोरात्रे नष्टा (ख) (क) स्वाहारात्रे नष्टा for (स्वाहोरात्रेऽनष्टा)
४. भक्ताः (ग) for (भक्ता)
(ग) ५. व्यार्द्धेनाहता (ख) सार्धेन हता for (व्यासार्धेनाहता)
(ख) ६. गुण for (गुणा)
(च) २. दृता for (धृता) ३. स्वाहोरात्र for (स्वाहोरात्रे)
५. व्यासार्द्धे for (व्यासार्धे) ४. भक्ताः for (भक्ता)
५८. (घ) १. धृता (ग) (क) (ख) (च) for (धृता)
२. षष्ट्याः (ख) षष्टा for (षष्ट्या)
(ग) ३. विड्यो for (विनाड्यो)
(ख) ४. शर for (चर)
५. +भवंति नाड्यो+
६. ‘डका’ लुप्त है
(च) २. षष्ट्याः for (षष्ट्या)
५९. (घ) १. घाप्तम् (ग) घातम् (ख) द्यप्तम् for (द्याप्तम्)
२. गोलेन्यथा (ग) (च) for (गोलेऽन्यथा)
(ग) ३. पल for (दल)
४. रूप for (ऋण)
५. ऽस्तसमये for (ऽस्तमये)
(क) ६. भुक्ति for (भुक्तिः)
७. हृता (च) for (हृता)
८. मुत्तरं for (मुत्तर) (ख) धनूत्तरगोलेन्यथा for (धनमुत्तरगोलेऽन्यथा)
(च) ५. अवग्रहचिह्न लुप्त
( ४५ ) दिनरात्रिमानघटिकाश्चरार्द्धनाडीभिरुत्तरगोले । पंचदश १५$^{२}$ युक्तहीना$^{४}$ याम्ये$^{५}$ हीनाधिका$^{६}$ द्विगुणाः$^{१}$ $^{२}$ $^{३}$॥ ६० ॥ भान्यश्विन्यादीनि ग्रहलिप्ता खखवसु ८०० द्वृताल्लब्धम् । भुक्तिहृते$^{५}$ $^{३}$ गतगम्ये दिवसाः दिवसा षष्ट्याहते घटिका ॥ ६१ ॥ अर्कोन$^{८}$ चन्द्र लिप्ताः खयम$^{६}$ स्वर$^{७}$ ७२०$^{४}$ भाजिता फलं तिथयः$^{५}$ । गतगम्ये षष्टिगुणे भुक्तन्तर भाजिते घटिका$^{१}$ $^{६}$ ॥ ६२ ॥
६०. (ग) १. रुत्तरे (क) (ख) कत्तरे for (रुत्तर)
२. यह संख्या लुप्त है
३. यहां (:) लुप्त हैं (क)
(क) ४. युक्ति for (युक्त)
५. ६ 'याम्ये हीना' पद लुप्त हैं । (ख)
(च) १. रुत्तरे for (रुत्तर)
६१. (घ) १. खखवसूद्धृता (क) (ख) खखावस्तूह्रता for (खखवसु ८०० द्वृता)
२. यह '८००' संख्या यहां न होकर 'लब्धम्' के पश्चात् है (ग)
३. 'दिवसा' इस प्रति में विद्यमान नहीं (क) (ख) विवसाः for (दिवसा)
(ग) ४. यह पद यहां लुप्त है (ख)
(क) ५. भान्यस्विन्वादीनि (ख) भन्याश्विन्यादीनि for (भान्यश्विन्यादीनि)
६. लिप्ताः for (लिप्ता)
(ख) ७. भुक्तिहृते for (भुक्तिहृते)
८. गुणे च्च घटिका for (षष्ट्याहते घटिका)
(च) १. वसूद्धृता for (वसुद्धृता)
६२. (घ) १. लिप्ता (क) for (लिप्ताः)
२. गुण (ग) for (गुणे)
३. घटिकाः (च) for (घटिका)
(ग) ४. यह संख्या 'भाजिता' और 'फलं' के बीच में है
५. तिथियः (ख) तिथ्ययः for (तिथयः)
(क) ६. खयमा for (खयम)
(ख) ७. खर for (स्वर)
(च) ८. अर्को for (अर्कोन) ४. संख्या लुप्त