ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)
Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary
आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा
( १८६ ) इष्टज्या संगुणिता^१ पंचकयमलेक शून्यचन्द्रमसा^२ । इष्टज्यापादयुतव्यासार्द्धविभाजिताल्लब्धम्^३ ॥ २४^४ ॥ नवतिकृतेः प्रोह्यपदं नवतेः संशोध्य शेषकला^१ । एवं धनुरिष्टाया^२ भवति ज्यया^३ विना ज्याभिः^४ ॥ २५^५ ॥ इष्टोदैयिक^१भुजांतर^४मित व^२ स्फुट मध्यमांतरकलाभिः । वाश्विन्यौदयिकेषु^३ स्वचरप्राणैः^५ स्वफलमेवम्^७ ॥ २६^६ ॥ २४. (घ) (वि० इसकी क्रमसंख्या २५ दी गई है ।) १. संगुणिताः (ग) (च) (ङ) for (संगुणिता) २. चन्द्रमसः (ग) शून्यचन्द्रसमः for (चन्द्रमसा) (च) २. चन्द्रमसः for (चन्द्रमसा) ३. इष्टद्या for (इष्टज्या) ४. (वि० क्रमसंख्या २५ अंकित है ।) (ङ) (वि० इस श्लोक की क्रमसंख्या २५ है ) २. चन्द्रमसः for (चन्द्रमसा) २५. (घ) १. कलाः for (कला) (ग) शेषभागकलाः or (शेषकला) २. धनुरिष्टयो for (धनुरिष्टाया) ३. ज्याया (ग) (च) (ङ) for (ज्यया) (वि०--इसकी संख्या २६ अंकित है) (ग) ४. विज्याभिः for (विनाज्याभिः) (च) १. शेषभागकलाः for (शेषकला) २. रिष्टया for (रिष्टाया) ५. (वि० क्रमसंख्या २६ अंकित है) (ङ) १. शेषभागकलाः for (शेषकला) ४. विनाज्याभि for (विनाज्याभिः) (वि० इसकी क्रमसंख्या २६ है) २६. (घ) १. इष्टोदयिक (ङ) for (इष्टोदयिक) २. मिनवत (ग) मिनवत् for (मितव) ३. नाश्विन्यौदयिकेषु (ग) नाश्विन्योदधिकेषु for (वाश्विन्यौदयिकेषु) (ग) ४. भुजातर for (भुजांतर) ५. स्वरप्राणैः for (स्वचरप्राणैः) (च) ६. (वि० यहां क्रमसंख्या २७ अंकित है) (ङ) (ङ) २. वि० मिनवत् for (मितव) ७. भिनवन् for (मेवम्) ३. नाश्विन्यौदयिकेषु for (वाश्विन्यौदयिकेषु)
श्चादंतोर्क for (पश्चादेतोर्क) ७. मानार्धात् for (मानाद्धात्)" Wait, look at line 20: "(ङ) २. पश्चादंतोर्क for (पश्चादेतोर्क) ७. मानार्धात् for (मानाद्धात्)" Yes!
Line 21: "२९. (च) १. पुण्यकालो (ग) (च) for (पुण्यकालो)" Wait, what is in the text line 6? "संक्रांति पुण्यकालो यल्लब्धं" -> wait, does text say "पुष्यकालो"? LOOK AT LINE 6: "संक्रांति पुष्यकालो यल्लब्धं"! It has ष/ष्य, NOT ण्य! "पुष्यकालो"! And line 7: "धर्मो विशिष्टफल" And footnote 21: "२९. (च) १. पुण्यकालो (ग) (च) for (पुष्यकालो)"! YES! "पुष्यकालो" in text, "पुण्यकालो" in variants! That is brilliant! That confirms: Line 6 text: "संक्रांति पुष्यकालो यल्लब्धं नाडिकादि तद्द्विगुणम् ।" Line 21: "२९. (च) १. पुण्यकालो (ग) (च) for (पुष्यकालो)"!
Line
..."
Wait, above "नक्षत्रांतात्", is there a number?
Look at line 2: above "नक्षत्रांतात्", there is a dot or number?
Wait, look at line 2: above "नक्षत्रांतात्", there is a dot/mark.
Wait, is it 1 or 7?
Wait, look at the word: "नक्षत्त्रान्तात्" vs "नक्षत्रात्तात्":
"न-क्ष-त्रा-न्तात्" or "नक्षत्त्रान्तात्"?
Look at: न, क्ष, त्र with double ta: "त्त्रा"? Or "त्रा"? It looks like "नक्षत्रान्तात्" or "नक्षत्त्रान्तात्".
And after "for": (नक्षत्राान्ता) or (नक्षत्रांता)?
Wait, in line 2 it is: "नक्षत्रांतात्".
In parenthesis: (नक्षत्रांता) or (नक्षत्राान्ता)?
Wait, look at the second word: ३. करणाान्ता for (करणाान्तो) or करणात्ता for (करणान्तो)?
Look at करणाान्ता: क, र, ण, ा, ान्ता -> wait, is it double ā-kāra? No, it's 'ण्णा' or 'न्ता'?
Wait, let's zoom in a lot on Line 13:
`(ङ) ७. नक्षत्र
( १६२ ) चक्रैवैधृतमेकायतस्थयोः क्रांतिजीवयोः साम्ये । धनरविगणियोगादग्नि वदूनाधिक कलभ्यः ॥ ३३ ॥ भुक्तैक्यलब्धदिवसैः रवींदुपातायुतोनकाः स्वफलैः । अर्कक्रांतिज्याधनुरिदो विक्षेपयुक्तोनम् ॥ ३४ ॥ त्रिनवग्रहेंदु क्रान्तिर्मेव तुलादौ दिवाकरक्रांतः । उनायावदभावस्तावद्भावो न्यथार्केन्द्वोः ॥ ३५ ॥
३३. (घ) १. मेकायस्थयोः (ग) मेकायनस्थयोः for (मेकायतस्थयोः)
२. इंधन (ङ) (ग) (च) for (धन)
३. मरिण (ग) (च) (ङ) for (गणि)
४. कलाभ्यः (ग) (च) (ङ) for (कलम्यः)
(वि० इसकी क्रमसंख्या ३४ अंकित है) (ङ)
(ग) ५. जीवायाः for (जीवयोः) (प्रथम पंक्ति समाप्त)
६. दूसरी पंक्ति का अंतिम पद ।
७. वरुनाधिक for (वदूनाधिक)
(च) ८. क्रमसंख्या ३४ अंकित है (ङ) ।
(ङ) १. मेकायनस्थयोः for (मेकायतस्थयोः)
३४. (घ) १. भुतद्यैक्य (ग) (च) (ङ) for (भुक्तैक्य)
२. विक्षेप (ग) (च) (ङ) for (विक्षेप्)
(वि०-इसकी क्रम संख्या ३५ अंकित है)
(च) ३. अर्क for (अर्क)
४. (वि०—यहां क्रमसंख्या ३५ अंकित है) (ङ)
(ङ) ५. दिवसै for (दिवसैः)
३५. (घ) १. त्रिनवगृहेंदु (ग) (च) (ङ) for (त्रिनवग्रहेंदु)
२. मेष (ग) (च) (ङ) for (मेंव)
४. ऊना (ग) (च) (ङ) for (उना) ५. ऽन्यथा (ङ) for (न्यथा)
(वि०—इसकी क्रमसंख्या ३६ अंकित है।)
(च) ६. केंद्धोः for (केंन्दोः)
७. (वि०—यहां क्रमसंख्या ३६ अंकित है) (ङ)
(ङ) ३. दिवाकरक्रान्तेः for (दिवाकरक्रान्तः)
( १६३ ) व्यतिपातोपक्रमयोर्दिवसाम्ये² वैधृतं⁵ दिगन्यत्वे । अधिको⁴ द्यूनः कल्पो दिग्भेदेपक्रमः³ शशिनः ॥ ३६⁶ ॥ मेषतुलादाविन्दोरपक्रमेऽल्पक्रमोदुने¹ । एष्यत्यधिके⁴ तीतो² विपरीतं कर्क³मकरादौ ॥ ३७⁵ ॥ क्रान्त्योर्युतिरन्यदिशोरेकदिशोरन्तरं व्यतिपाते² । एका¹दशो युतिरन्तरमन्यदिशो वैधृते⁴ प्रथमः ॥ ३८³ ॥
३६. (घ) (वि०—इसकी क्रमसंख्या ३७ अंकित है)
१. व्यतिपातोपक्रमयो (ग) व्यतीपातोपक्रमयो for (व्यतिपातोपक्रमयो)
२. दिक्साम्ये (ग) दिक्साम्ये (च) for (दिवसाम्ये)
३. दिग्भेदे (ग) (च) for (दिग्मेदे)
(ग) ४. अधिकाप्यूनः for (अधिकोद्यूनः)
(च) १. व्यतिपातोपक्रमयो for (व्यतिपातोपक्रमयो)
५. वैदृतं for (वैधृतं) ६. (क्रमसंख्या ३७ अंकित है) (ङ)
(ङ) १. व्यतिपातोऽपक्रमयो for (व्यतिपातयोपक्रमयो)
२. दिक्साम्ये for (दिवसाम्ये) ५. वैधृतो for (वैधृतं)
४. न्यूनः for (द्यूनः) ७. कल्प्यो for (कल्पो)
३. ऽपक्रमः for (पक्रमः)
३७. (घ) (वि०—इसकी क्रमसंख्या ३८ है)
१. दूने (ग) छूने for (दुने) २. ऽतीतो for (तीतो)
३. कर्क्वि (ग) कर्कि for (कर्क)
४. मेतुला for (मेषतुला)
(च) १. दूने for (दुने) ३. कर्किम करादौ for (कर्कमकरादौ)
५. (वि०—यहां क्रमसंख्या ३८ अंकित है) (ङ)
(ङ) १. दूने for (दुने) २. त्यधिकोऽतीतों for (त्यधिकेतीतो)
३. कर्क for (कर्कि)
३८. (घ) (वि०—इसकी क्रमसंख्या ३६ अंकित है)
१. एकदिशो (ग) एदिशोर्युति for (एकादशोयुति)
(ग) २. व्यतीपाते (ङ) for (व्यतिपाते)
(घ) १. एकदिशोर्युति (ङ) for (एकादशोयुति)
३. (वि०—यहां क्रमसंख्या ३६ अंकित है) (ङ)
(ङ) ४. वैधुते for (वैधृते)
( १६४ ) एवं द्वितीयराशियुतिहीने^४ रिष्टनाडिका^२स्वफलैः । एष्यदतीतं वा यदिराशिद्वयमपि तदंतरकम् ॥ ३६ ॥^३ छेदोऽन्यथा तदैक्यं घात^२स्येष्टघटिका प्रथमराश्योः । फलघटिकाभिर्मध्यं द्वयोरपि^३ प्रथमराशिवशात् ॥ ४० ॥^४ तात्कालिकैर्गैर^३सकृदिष्टघटिकाफलोनयुक्तै^१स्तैः । प्राग्वत्प्रथमे^२ छेदः प्रमाणयोगादर्द्धलिप्तानाम् ॥ ४१ ॥^४ इष्टघटिकागुणाना^५मसकृत^१ फलनाडिकाभिराद्यंतैः^२ । व्यतिपाप^३वैधृतानयनमन्यतंत्रेषु न ब्राह्मा^४यात् ॥ ४२ ॥^१
३६. (घ) (वि०—इसकी क्रमसंख्या ४० अंकित है)
१. एष्यदतीनं for (एष्यदतीतं)
(च) २. नाडिकाः for (नाडिका) १. ऐष्यदतीतं for (एष्यदतीतं)
३. (वि०—यहां क्रमसंख्या ४० अंकित है) (ङ)
(ङ) ४. युतहीने for (युतिहीने)
४०. (घ) (वि०—इसका संख्याक्रम ४१ है )
१. प्रमराशिवशात् for (प्रथमराशिवशात्)
(ग) २. घतस्येष्ठ for (घातस्येष्ट) ३. द्वरपि for (द्वयोरपि)
(च) ४. (वि०—यहां क्रमसंख्या ४१ अंकित है) (ङ)
४१. (घ) (वि०—इसकी क्रमसंख्या ४२ है)
१. फलोनक्तैस्तैः for (फलोनयुक्तैस्तैः)
२. प्रथमच्छेदः (ग) प्रमछेदः for (प्रथमेच्छेदः)
(च) ३. रसक्रदिष्ट for (रसकृदिष्ट) ४. (वि०—यहां क्रमसंख्या ४२ अंकित है) (ङ)
(ङ) २. प्रथमश्छेदः for (प्रथमेच्छेदः)
४२. (घ) (वि०—इसकी क्रमसंख्या ४३ है)
१. असकृतफल (ग) for (असकृतफल) २. राद्यंतो (ग) for (राद्यंतैः)
३. व्यतिपात (ग) व्यतीपात (ग) व्यतीपात for (व्यतिपाप)
४. ग्राह्यात् (ग) ब्रह्यात् for (ब्राह्मा_यात्)
(ग) ५. गुणनाम् for (गुणानाम्)
(च) १. मसकृतफल for (मसकृतफल) ४. ब्राह्मात् for (ब्राह्मा_यात्)
६. (वि०—क्रमसंख्या ४३ अंकित है) । (ङ)
(ङ) १. असकृत् for (असकृत) २. राद्यन्तौ for (राद्यंतैः)
३. व्यतिपात for (व्यतिपाप) ४. ब्राह्मात् for (ब्राह्मा_यात्)
( १६५ ) रविबिम्बमेक¹मार्गच्छशिबि³म्बापक्रमे भवति यावत् । तावत्फ⁴लं तदुक्तं त²द्भावो तत्फला⁵भावः ॥ ४३ ॥ ६ ग्रहकक्ष्या³यनतुल्याः कक्षास्तन्मंद⁷शीघ्रपातानाम् । यस्मात्तस्मान्न⁴ पृथक्कक्षाः¹ कल्प्या²श्चलोच्चाद्याः⁸ ॥ ४४ ॥ पौलिश²रोमकवाशिष्ट⁵ सौर³पैतामहेषु यत्प्रोक्तम् । तन्नक्षा¹नयनं नार्यभटोक्तं तदुक्तिरतः⁴ ॥ ४५ ॥ 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 ४३. (घ) (वि० — इसकी क्रमसंख्या ४४ है) १. मार्गा (ग) मार्गात शशी for (मार्गाच्छिशि) २. तदभावे (ग) तद्भावे for (तद्भावो) (ग) ३. बिम्बापक्रमो for (बिम्बापक्रमे) ४ तावत्पलं for (तावत्फलं) ५. तत्फलोभावः for (तत्फलाभावः) (च) २. तदभावे for (तद्भावो) ६. (वि० — क्रमसंख्या ४४ अंकित है) (ङ) (ङ) १. मार्गाच्छिशि for (मार्गाच्छिशि) २. तदभावे for (तद्भावो) ४४. (घ) (वि० — इसकी क्रमसंख्या ४५ है) १. पृथक्कक्षाः (ग) पृथक् कक्ष्या for (पृथक्कक्षाः) २. कल्प्याश्चलोच्चाद्याः (ग) कल्पाचलोच्चाद्यात् for (कल्प्याश्चलोच्चाद्याः) (ग) ३. ग्रहकक्षायन तुल्या for (ग्रहकक्ष्यायनतुल्याः) ४. तस्मात्तते for (तस्मान्न) (च) १. पृथक्कक्षाः for (पृथक्कक्षाः) ५. (वि० क्रमसंख्या ४५ अंकित है) (ङ) (ङ) ३. कक्षयैव for (कक्षायन) १. पृथक् कक्षा for (पृथक्कक्षाः) ७. तुल्या कक्षा for (तुल्याःकक्षा) २. कल्प्या for (कल्प्याश्) ७. स्तनमंद शीघ्र for (तन्मन्द) ८. चलोचाद्या for (चलोच्चाद्याः) ४५. (घ) (वि० — इसकी क्रमसंख्या ४६ है) १. तन्नक्षत्रानयनम् (ग) for (तन्नक्षानयनं) (ग) २. पौलश for (पौलिश) ३. सौर्य for (सौर) (च) १. तन्नक्षत्रानयनं for (तन्नक्षानयनं) ४. (यहां क्रमसंख्या '४६' अंकित है ।) (ङ) ५. वासिष्ठ for (वाशिष्ट)
? No, wait! There is a ५aboveऋक्षाणि? No! Look at line 2 above ऋक्षाणि: wait, is that a ५? Wait, between line 1 and line 2: Above ऋक्षाणि: there is a ५! Wait, why is there ५aboveऋक्षाणि? Wait, above ऋक्षाणिis५? No, below अध्यर्द्धार्द्ध? Look at the position: Under अध्यर्द्धार्द्ध, above ऋक्षाणि: there is a ५! But wait, does footnote 5 say ऋक्षाणि? Footnote 5 in 47? No, footnote 5 in 48: ५. ऋक्ष (ङ) for (रक्ष) In verse 48 line 1:पंचदशात्रानुक्ता न्येको भिजदुत्तरक्ष५भोगोन्यः Look atक्षinभिजदुत्तरक्षभोगोन्यः: there is a ५above it! And aऋabove it! Wait, what about verse 46? Verse 46 has: १aboveअध्यर्द्धार्द्ध २aboveक्षेत्राण्यूडूनि ३aboveषट्`
( १६७ ) अध्यर्द्धा² समक्षेत्राणां मध्यगते³ लिप्तिकाः शशिनः । अध्यर्द्धाद्वैकगुणा⁴ भोगलिप्तास्तदैक्योना¹ ॥ ४६ ॥⁵ मंडललिप्ताः शेषो भोगोभिजित्¹ शशांक² भगणा वा³ । त्रिघनगुणाः संशोद्ध्याः कल्पदिनेभ्यो यदवशेषम् ॥ ५० ॥⁴ तद्गुणैर्द्दिनभोगो¹ ऽभिजितो भोगलिप्तोनाः³ । भानि ग्रहभुक्त⁴कला गतगम्या गतिहृता² दिवसाः⁵ ॥ ५१ ॥⁶ भफलं प्रोक्तमभिजितो मंगलपात्रासु³ संहिताकारैः । यैस्तद्भोगोनोक्तास्ते¹ गणकाः संहिताबाह्याः² ॥ ५२ ॥⁴
४६. (घ) (वि०—इसकी श्लोक संख्या ५० अंकित है )
१. तदैक्योनाः (च) (ङ) for (तदैक्योना)
(ग) २. अध्यद्धार्द्ध for (अध्यर्द्धा) ३. मध्यगति (ङ)
का) Wait, why isपञ्चाशच्चतुर्भिरधिकाforपञ्चांशच्चतुर्भिरधिका? Let's look at the main text line 3: आर्याणां पञ्चाशच्चतुर्भिरधिका चतुर्दशोऽध्यायः । Wait, in line 3, is there an anusvara onचा? Look closely at पञ्चाशच्चतुर्भिरधिका: Wait, above श? No, between चाandश, there is NO anusvara in line 3. Wait, then why does footnote 15 say: १. पञ्चाशच्चतुर्भिरधिका for (पञ्चांशच्चतुर्भिरधिका)? Wait, let me look at line 15 very closely: १. पञ्चाशच्चतुर्भिरधिका for ( Wait! What is the word in parentheses? (पञ्चांशच्चतुर्भिरधिका)- wait, look at the anusvara: is it overचा? Yes, there is a dot above चा: चां! Wait, or is the first word पञ्चाशच्चतुर्भिरधिकाand the secondपञ्चांशच्चतुर्भिरधिका? Wait, usually the format is: [variant reading] for ([base text reading])`.
Wait! If base text has
( १६६ ) अथ त्रिप्रश्नोत्तराध्यायः पञ्चदशः स्फुटगत्युत्तरमन्या दिशानयाऽप्यूहयेत्प्रश्नम्। योऽह्नपूर्वापरयोस्तुल्यच्छायांगुलाग्रयो बिन्दुं। वीक्ष्याक्रांत्याक्षांशै विना दिशो वेत्ति गणकः सः ॥ १ ॥ त्रिच्छायाग्रज्ञो यः क्रांत्यक्षार्क विना दिशो भ्रमणम्। छायाग्रस्य दिनार्द्धं छायां वा वेत्ति गणकः सः ॥ २ ॥ यः छायाग्रं दृष्ट्वा क्रांत्यक्षज्ञो दिशो विजानाति। शंकुच्छायाभ्रमणे दिक्ज्ञो वा वेत्ति गणकः सः ॥ ३ ॥
१. (घ) १. प्रश्नात् (च) for (प्रश्नम्) २. (वि०—यहाँ पर समाप्तिसूचक चिह्न है)
३. योऽह्न (ग) येह्नः for (योह्न) ४. बिंदू (ग) बिंदुः for (बिंदु)
५. वीक्ष्य (ग) for (वीक्ष्य) ६. विना (ग) for (विना)
(ग) ७. स्फुटगतिरुत्तर for (स्फुटगत्युत्तर)
८. व्यूयत्प्रस्नात् ॥ ५४ ॥ for (प्यूहयेत् प्रश्नम्)
(च) ३. योऽह्न for (योह्न) ५. विक्षय for (वीक्ष्या)
४. बिंदू for (बिंदु) ६. विना for (विना)
(ङ) ३. योऽह्न for (योह्न) ४. विन्दु for (बिंदु)
५. बीक्ष्य for (वीक्ष्या) ७. क्रान्त्यक्षांशै for (क्रान्त्यक्षांशै)
६. विना for (विना)
२. (घ) १. ऋछाया for (त्रिछाया) २. दि श्रद्धे छायां (ग) दिनार्द्धं for (दिनार्द्ध)
(ग) ३. क्रांति क्षार्के विना for (क्रान्त्यक्षार्कं विना)
(च) ३. क्रान्त्यक्षाक्कें for (क्रान्त्यक्षार्कें)
(ङ) १. त्रिच्छाया for (त्रिछाया) ३. क्रान्त्यक्षार्के विना for (क्रान्त्यक्षार्कें विना)
२. दिनार्धच्छायां for (दिनार्द्धं छायां)
३. (ग) १. दिज्ञो for (दिशो) २. “सः” यहाँ यह पद लुप्त है
३. यश्छायाग्रं for (यः छायाग्रं)
(वि० इसकी श्लोक संख्या ४ है। तीन की संख्या का श्लोक लुप्त है ।)
(च) ४. कृत्यक्षज्ञो for (क्रांत्यक्षज्ञो)
(ङ) ३. यश्छायाग्रं for (यः छायाग्रं) १. दिग्ज्ञो for (दिक्ज्ञो)
५. शंकुच्छाया for (शङ्कच्छाया)
बहुधार्कक्रान्त्यश्नान) ३: श्छायातो for (छायातो) ४: छायाः for (छायां) / दलच्छायाम् for (दलछायां)
Wait, this makes everything 100% clear! Now, how should we handle the line-by-line transcription with [L#]? Should we include the small number lines or use inline superscripts, or both? Wait, let's look at the small numbers lines in the image: Line 1: ( २०० ) Line 2: ४ १ Line 3: दृष्ट्वा विषुवच्छायां लम्बश्नेज्ये करोति यो बहुधा । Line 4: ३ २ Line 5: मध्यच्छायार्कज्ञो श्रांशान्यो वेत्ति गणकः सः ॥ ४ ॥ Line 6: ५ Line 7: यश्चरखंडकलंकोदयाद्विजानाति लग्नमुदयैः स्वैः । Line 8: २ ३ ४ Line 9: लग्ना घटिका छायांगत शेषनतांच्च गणकः सः ॥ ५ ॥ Line 10: ३ १ ४ Line 11: गतशेषनता घटिका छायातो भिष्टदिनदलछायां । Line 12: बहुधार्कक्रान्त्यश्नानं दृष्ट्वा यो वेत्ति गणकः सः ॥ ६ ॥
Wait! If we transcribe line by
( २०१ ) ^१क्रांतिज्ञः सममंडल शंकु^२कराँ^३ वयोश्नलंबज्ञः^४ । ^५जानाति कोणशंकु^६च्छाया घटिकाः स तंत्रज्ञः ॥ ७ ॥ शंकुतलप्राच्यपरांतरद्वयं विक्षयो^१ विजानाति । विषुवच्छायामेकं दृष्ट्वाऽऽदित्यं^२ च^३ गणकः सः ॥ ८ ॥ पातलशंकुमुदये^१न्दुस्ते वा दृग्ज्यां खे^३ विजानाति । ^२दृक् पाताल दृक्शंकोः पृथक् तले वा स तंत्रज्ञः^४ ॥ ६ ॥
७. (घ) १. कांतिज्ञः for (क्रांतिज्ञः) २. शंकुं (च) (ङ) for (शंकु)
३. करां: (च) for (कराँ)
४. वयोक्षलंबज्ञः (ग) च योक्षलंबज्ञः for (वयोश्नलंबज्ञः)
५. जानाति जानाति for (जानाति) ६. शंकुं for (शंकु)
(ग)(वि०— इसकी श्लोक संख्या ८ है)
(च) ४ वयोक्षलंबज्ञः for (वयोश्नलंबज्ञः)
(ङ) ३. कराँ च for (कराँ व) ४. योश्नलंबज्ञः for (योश्नलम्बज्ञः)
६. शंकुच्छाया for (शंकुच्छाया)
८. (घ) वीक्ष (ग) वीक्ष्य for (विक्षयो)
२. दृष्ट्वादित्यं (ग) (च) for (दृष्ट्वाऽऽदित्यं)
(ग) (वि०—इसकी श्लोकसंख्या ६ है)
(च) १. वीक्ष for (विक्ष) ३. व for (च)
(ङ) १. वीक्ष्य for (विक्ष) ४. विषुवच्छाया for (विषुवच्छाया)
२. दृष्ट्वाऽऽदित्यं for (दृष्ट्वादित्यं)
६. (घ) १. मुदयेऽस्ते (ग) मुदयेस्ते for (मुदयेँदुस्ते)
२. हग्पावालगशंक्वोः (ग) हग्पातालमशंकुकोः for (दृक्पाताल दृक्शंकोः)
(ग) ३. विजानाति for (विजानाति)
४. तन्त्रज्ञः for (तंत्रज्ञः) ५. पाताल for (पातल)
(वि०— इसकी भी श्लोकसंख्या ६ है)
(च) ५. पाताल for (पातल) २. हग्पाताल for (दृक्पाताल)
६. दृग्शंकोः for (दृक्शंकोः)
(ङ) ५. पाताल for (पातल) २. हक्पाताल for (दृक्पाताल)
१. मुदयेऽस्तो for (मुदयेन्दुस्ते) ३. खेर्विजानाति for (खे विजानाति)
६. गशङ्कोः for (दृक्शंकोः)
( २०२ ) दिनगत²शेषप्राणैरिष्टार्को¹ दिनदलान्नतै⁴स्तथवा । भवति सममंडले⁵ यैर्यस्तान् कथयति स तंत्रज्ञः⁶ ॥ १० ॥ सममंडलंगः³ प्राग्दिनगत शेषे नते¹ दिनार्द्धाद्वा² । यै⁴ र्भवति ज्ञात्वा तान्योऽर्कं⁵ कथयति स तंत्रज्ञः ॥ ११ ॥ यः सममंडल⁵शंकुकरां¹ व वीक्ष³ सूर्यमानयति² । रविसममंडलशंकुज्ञो⁶ क्षं⁴ कथयति स तंत्रज्ञः ॥ १२ ॥ रविलग्नांतर घटिका¹ विनोदयैर्लग्न²मिष्टघटिकाभिः । वेत्ति चरार्द्धादिकं योर्कज्ञो³ वा स तंत्रज्ञः ॥ १३ ॥ अक्षचरार्द्धाज्ज्ञाकं³ छायातो यच्चरार्द्धमिष्टायाः¹ । इष्टचरार्द्धाद्वथवा⁴ छायां कथयति² स तंत्रज्ञः ॥ १४ ॥
१०. (घ) १. रिष्टाऽर्को (ग) रिष्टाऽर्को for (रिष्टार्को)
(ग) २. दिनगते for (दिनगत) ४. दिनदलान्नतेरथवा for (दिनदलान्नतैस्तथवा)
५. समंडले for (सममंडले) ६. तत्रज्ञः for (तंत्रज्ञः)
(च) १. ऽर्को for (र्को)
११. (घ) १. नंते (ग) (च) (ङ) for (नतै) २. दिनाद्धाद्द्वा (च) for (दिनार्द्धाद्वा)
(ग) ३. सममंडलंगं for (सममंडलंगः) ४. यैर्भवति (च) for (यैर्भवति)
५. न्योऽर्कं for (न्योऽर्कं)
(च) ५. तान्योऽक्कं for (तान्योऽर्कं)
(ङ) १. दिनाधर्द्धा for (दिनार्द्धाद्वा) ६. योऽर्कं for (योऽर्कं)
१२. (घ) १. शंकु (ग) (ङ) for (शंकु) २. वा (च) (ङ) for (व)
३. वीक्ष्य (च) (ङ) for (वीक्ष) ४. कथति (च) for कथयति)
(ग) ५. समंडल for (सममंडल)
(ङ) ६. ऽक्षं for (क्षं)
१३. (ग) १. घटिको for (घटिका) २. लग्न for (र्लग्न)
(च) ३. योऽर्कज्ञो for (योर्कज्ञो)
(ङ) ३. योऽर्कज्ञो for (योर्कज्ञो)
१४. (घ) १. यस्यरार्द्धं (ग) यच्चरार्ध for (यच्चरार्द्धं)
२. कथति for (कथयति)
(ग) ३. चरार्द्धंज्ञो for (चरार्द्धाज्ज्ञाकं) ४. चरार्द्धदथवा for (चरार्द्धाद्वथवा)
(च) ३. ज्ञाक्कं for (ज्ञाकं)
(ङ) ३. चरार्धंज्ञोऽर्कं for (चरार्द्धाज्ज्ञाकं) ४. चरार्धादथवा for (चरार्द्धाद्वथवा)
( २०३ ) मध्यच्छायातो^५ ऽक्षविदानयति^१ रविवाक्^६ रज्ञोश्नं^२ । योग्रार्कज्ञो^३ लंबाक्षज्ये^४ कथयति स तंत्रज्ञः ॥ १५ ॥ उदयेस्तमये^६ चाग्रां^१ वेत्ति दिनार्द्धे^२ नतोन्नतज्ययः । ताभिर्विषुवच्छाया^४ इनज्यालंबान्^३ ^५ स तंत्रज्ञः ॥ १६ ॥ दिनरात्र्यर्धे^४ यश्चरदलाद्^५ विना स्वैकरोति^६ वाताभ्यां । अक्षावलंबकौ वा नस्तमयार्कात्तिस^१ ^३ तंत्रज्ञः ॥ १७ ॥ १५. (घ) १. छायातोक्षविदानयति (ग) तोऽक्षविदानब्दि for (च्छायातोक्षविदानयति) २. रविवाकरज्ञोक्षम् (ग) रविदिवाकरज्ञोक्षम् for (रविदिवाकरज्ञोऽक्षम्) ३. लोबाक्षज्ये for (लम्बाक्षज्ये) (च) २. रविवाक्र्ज्ञोक्षं for (रविवाक्र्जोशनं) ३. योग्रार्क्कज्ञो for (योग्रार्कज्ञो) ४. लंबाक्ष्यज्ये for (लंबाक्षज्ये) (ङ) ५. मध्यच्छायातो for (मध्यछायातो) १. ऽक्ष for (क्ष) ३ योडग्रार्कज्ञो for (योग्रार्कज्ञो) ६. रवि for (रवि) २. दिवाकरज्ञोऽक्षम् for (वाक्र्जोश्नं) ४. लम्बाक्षांशान् for (लम्बाक्षज्ये) १६. (घ) १. वाग्रां (ग) (ङ) for (चाग्रां) २. ज्ये (ग) ज्येयः for (ज्ययः) ३. क्षज्या (ग) क्षप्या for (श्रज्या) (ग) ४. विषुवा for (विषुवच्छाया) ५. लंबात् for (लंबान्) (च) ३. क्षज्या for (इनज्या) (ङ) ६. उदयेऽस्तमये for (उदयेस्तमये) २. ज्ये यः for (ज्ययः) ४. विषुवच्छाया for (विषुवच्छाया) ३. क्षज्या for (श्रज्या) १७. (ग) १. नस्तमयार्के for (नस्तमयार्कात्) २. नस्तमयार्को for (नस्तमयार्कात्) ३. न स for (त्स) (च) ४. दिनरात्र्यार्धे for (दिनरात्र्यर्धे) १. नस्तमयाक्कर्त्तिस for (नस्तमयार्कात्तिस) (ङ) ४. 'लुप्त' for (दिनरात्र्यर्धे) ५. दलविना for (दलाद्विना) ६. +दिनरात्र्यर्धे+ १. ऽस्तमयार्कान् for (नस्तमयार्कात्)
( २०४ ) श्राय¹निवक्त्योनां प्रश्ना³नामुत्तरं चतुःषष्टि⁵ । आया²स्त्रिप्रश्नो⁴क्ताशेषप्रश्नोत्तरोक्तिरतः ॥ १८ ॥ विषुवच्छाया⁵ गुणितां¹ स्वाहोरात्रार्द्धाद्² भाजिता त्रिज्या⁴ । क्रान्तिद्वादशगुणिता फलचापकला श्रु³भिः सहितैः ॥ १६ ॥ स्वचरप्राणैर्दिन³गतशेषैः सममंडले रविर्भवति । फल चापाशून्य¹भिस्तिथि घटिकाभि नता²भिर्वा ॥ २० ॥ उदयसममंडलान्तरं⁵ घटिकाज्यो¹र्लंबकाहतं² गुणयेत् । अक्षज्यया³ हृतां तत⁴ त्क्रांत्या व्यासार्द्धसंगुणया ॥ २१ ॥
१८. (घ) १. आर्यनिवक्तोक्तानां (ग) (ङ) for (आयनिवक्त्योनां)
२. आर्यास्त्रि (ग) (च) for (आयास्त्रि)
(ग) ३. प्रस्नाना for (प्रश्नाना) ४. प्रस्नोक्ताः for (प्रश्नोक्ता)
(च) १. आर्यनिवक्थानां for (आयनिवक्त्योनां)
(ङ) ५. षष्टघा for (षष्टिः) २. आर्याणां for (आयास्त्रि)
४. प्रश्नोक्त्या for (प्रश्नोक्ता)
१६. (घ) १. गुणित (ग) गुणित (ङ) for (गुणिता)
२. रात्रार्ध (ग) (ङ) for (रात्रार्द्ध)
(ग) ४. त्रिज्या: for (त्रिज्या)
(च) १. गुणित for (गुणिता) २. रात्रार्द्ध for (रात्रार्द्ध)
३. कलासुभिः for (कलाश्रुभिः)
(ङ) ५. विषुवच्छाया for (विषुवच्छाया)
२०. (घ) १. चापाशुनाभि (ग) चापास्तनुभि for (चापाशून्यभि)
२. नंतानिबीं: (ग) नंताभिर्वा for (नतामि)
(च) ३. दिन for (दिन) १. शून्याभि for (शून्यभिः)
२. न्नताभिर्वाः for (नताभिर्वा)
(ङ) १. चापच्यूनाभि for (चापाशून्यभि) २. नंताभि for (नताभि)
२१. (घ) १. ज्यां (ङ) for (ज्या) २. लंबकाहता (ङ) (ग) लंबकाह्ला for (लंबकाहतं)
३. अज्यया (ग) अक्षया for (अक्षज्यया)
४. हृयांतक्रान्त्या (ग) हृतांत्यक्रान्त्या for (हृतां ततक्रान्त्या)
(ग) ५. मडलांतरघटिकार्ज्या for (मंडलान्तरं घटिकाज्या)
(च) २. हतां for (हतं) ४. हृत्यांतक्रांत्या for (हृतांततक्रांत्या)
(ङ) ४. हृताज्यक्रान्त्या for (हृतां ततक्रान्त्या)
( २०५ ) लब्धधनु रविरजाक्षं कर्कटकादौ विशोद्ध्ये चक्रार्द्धात् । तज्या तदुदय सममंडलांतरा क्षुज्ययाभक्ता ॥ २२ ॥ प्रह्न सममंडला सुक्रमज्यया संगुणा सकृत्सूर्यः । प्रह्न घटिकाभिरेवं गतघटिकाभिर्भवत्यहः ॥ २३ ॥ त्रिज्यादिनाङ्कसममंडलांतरा सुज्यायाः कृतिविशेषः । स्वविषयविषुवच्छाया वर्गेण गुणो द्विधा प्रथमाः ॥ २४ ॥ व्यासार्द्धवर्गभक्तौ लब्धं द्वादशकवर्ग संयुक्तम् । छेदो द्वितीयराशे लब्धं पदं क्रान्तिरर्कतः ॥ २५ ॥ २२. (घ) १. रजादौ (ग) (च) for (रजाक्षं) २. विशोध्य (ग) (च) for (विशोद्ध) (च) ३. कर्केट for (कर्कट) ४. सुज्यया for (क्षुज्यया) (ड) ५. रिनो for (रवि) १. ऽजादौ for (रजाक्षं)
? No, ल व द्र वि. Wait! Look at the first word, third to last akshara: लthenव? No, is that च? Wait! In the verse: लंकोदयचरदलवद्रविलग्नाभ्यांWait, look at the verse:लं को द य च र द ल व द्र वि ल ग्ना भ्यांIs thatवद्रविorवद्विorवद्रवि? Wait, look at footnote: (च) २. मृगकर्क्यादिषु for (मृगकर्क्यादिषु)-- wait! Look at the next line:(च) २. मृगकर्क्यादिषु for (मृगकर्क्यादिषु)Wait, look at line :(च) २. मृगकर्क्यादिषु for (मृगकर्क्यादिषु)Wait! What is the difference there? Let's look atमृगकर्क्यादिषु: In the first one: मृ ग क र्क् या दि षुvsमृ ग क र्क्या दि षु? Wait! Look at the consonant cluster: First one: मृ ग क र्क्कां दि षु? No, it has कwith a curl under it?मृगकक्ष्यादिषु`?
YES! Look at the letter:
( २०७ ) मेषादिषु कर्क्यादिषु¹ विशोध्य⁶ भार्द्धा² तुलादिषु⁶ सभार्द्धा³ । मकरादिषु संशोध्यश्चक्ररवि⁴ भुक्ता⁵ लिप्ता वा ॥ ३० ॥ लग्नकालाद्यद्यू¹ना² सचक्रालिप्ता³ विना स्वराश्यूदयैः⁴ । एवं स्फुटाभवंत्यर्क⁶ लग्नयोरंतरप्राणाः ॥ ३१ ॥ अष्टयमाश्रु¹त्य² गुणा दिगिषु कालोना³ रदाः सतित्थिलिप्ताः । स्वचरादर्द्धांशैरूना विपरीता⁶ संयुता व्यस्तै⁵ ॥ ३२ ॥
३०. (घ) १. कक्यादिषु (ग) कक्क्यादिषु (ङ) for (कर्क्यादिषु)
२. भार्द्धात् (ग) for (भार्द्धा) ३. सभार्द्धाः (ग) for (सभार्द्धा)
४. चक्राद्रवि (ग) (च) (ङ) for (चक्ररवि)
५. भुक्तलिप्तोनाः (ङ) (ग) भुक्तलिप्तोना for (भुक्तलिप्तावा)
(च) १. कक्वर्चादिषु for (कर्क्यादिषु) ६. तुलादीषु for (तुलादिषु)
३. “सभार्द्धां” लुप्त ५. भुक्तलिप्तोनाः for (भुक्तलिप्तावा)
(ङ) ६. शोध्या for (विशोध्य)
३१. (घ) १. लग्नकला (ग) (च) (ङ) for (लग्नकाला)
२. यद्यूनाः (ग) (च) (ङ) for (यद्यूना)
३. सचक्रलिप्ता (ग) (ङ) for (सचक्रालिप्ता)
४. राश्युदयैः (ग) रास्युदयैः for (स्वराश्यूदयैः)
(ग) ५. दिना for (विना)
(च) ३. सचक्रलिप्ताः for (सचक्रालिप्ता) ४. स्वराश्युदयैः for (स्वराश्यूदयैः)
६. भवंत्यर्कं for (भवंत्यर्क)
(ङ) ४. स्वराश्युदयैः for (त्वराश्यूदयैः) ७. रंतते for (रंतर)
३२. (घ) १. यमाः (ग) (च) (ङ) for (यमा)
२. शून्य (ग) (च) (ङ) for (श्रुत्यगुणा)
३. कलोना (ग) (च) (ङ) for (कालीना) ४. रूनाः (च) for (रूना)
५. व्यस्तैः (ग) (च) (ङ) for (व्यस्तै)
(ग) ६. विपरीताः (ङ) for (विपरीता)
(च) ६. विपरिताः for (विपरीता)
( २०८ ) व्यस्ता॑ चा जादीनां कलांश॑लग्नमिष्टघटिकांशैः । लग्ना घ॑टिकाः कालांशे वि॑नैवं स्वरा॑श्यूदयैः ॥ ३३ ॥ इष्टा॑र्कं चरा॑र्द्धं ज्या क्ष॑यवृद्धिज्याद्युरात्रिदल॑गुणिता । व्यासाद्धे॑न विभक्ता क्षितिजा द्वादशगुणा भक्ता ॥ ३४ ॥ क्रांत्याविषुवच्छाया क्षितिजेष्ट क्रान्तिवर्गा॑योगं पदम् । अग्रे॑ क्षितिजापक्रमजी॑वे त्रिज्या गुणो॑भक्ता ॥ ३५ ॥ अ॑र्काग्रयाक्षकल॑बंकजीवे दिनकृतच॑रासुविज्ञाने । अ॑र्कज्ञाने ज्ञा॑ने विषुवच्छाया चराभू॑नाम् ॥ ३६ ॥
३३. (घ) १. व्यस्तश्चाजादीनां (ग) (च) (ङ) for (व्यस्ताचाजादीनां)
२. कालांशा (ग) कालांशो for (कलांश)
३. लग्नाद्वटिकाः (ग) (च) (ङ) for (लग्नाघटिकाः)
४. कालांशकै (ग) (च) (ङ) for (कालांशै)
५. विनैवं (ग) (च) (ङ) for (विनैवं)
६. स्वराश्युदयैः (ग) (च) (ङ) for (स्वराश्यूदयैः)
(च) २. कालांश for (कलांश) (ङ) २. काजांशैर्लग्न for (कलांशलग्न)
३४. (घ) १. क्षयं for (क्षय)
(ग) २. चरार्द्धज्या (ङ) for चरार्द्धज्या) ३. गुणिताः for (गुणिता)
(च) ४. इष्टाक्कं for (इष्टार्कं) २. द्याक्षय for (ज्याक्षय)
(ङ) ५. द्युरात्रदल for (द्युरात्रिदल)
३५. (घ) १. वर्गयोगपदम् (ग) (च) for (वर्गायोगंपदम्)
२. अग्रा (ग) अप्रा for (अग्रे) ३. जीव (ग) जीवा for (जीवे)
४. गुणेभक्तो (ग) (च) (ङ) for (गुणोभक्ता)
(च) २. अग्रक्षिति for (अग्रेक्षिति) ३. जीवत्रीज्या for (जीवेत्रिज्या)
(ङ) १. वर्गयोगपदम् for (वर्गायोगंपदम्) २. अग्रा for (अग्रे)
३६. (घ) १. कृच्चरा for (कृतचरा) (ग) दिनक्रच्चरासुविज्ञाते for (दिनकृतचरासुविज्ञाते)
२. अर्का (ग) for (अर्क) ३. चरासूनाम् (ग) (ङ) for (चराभूनाम्)
४. 'क' यहां 'क' लुप्त है (च) (ङ) ५. ज्ञाते ज्ञाते for (ज्ञाने ज्ञाने)
(च) ६. अक्र्काग्रि for (अर्काग्रि) ४. लंबक for (कलंबक)
१. दीनकृच्चरा for (दिनकृतचरा) २. अक्कज्ञाने for (अर्कज्ञाने)
३. चरासूनां for (चराभूनाम्)
(ङ) ६. अर्काग्रियाऽक्ष for (अर्काग्रियाक्ष) १. कृन्चरासु for (कृतचरासु)
२. अर्कज्ञाने for (अर्कज्ञाने) ७. विषुवच्छाया for (विषुवच्छाया)