कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)
Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola
आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा
चाणक्य-प्रणीत सूत्र ७९७
विवादे धर्ममनुस्मरेत् ॥४८९॥ निशान्ते कार्यं चिन्तयेत् ॥४९०॥ प्रदोषे न संयोगः कर्तव्यः ॥४९१॥ उपस्थितविनाशो दुर्नयं मन्यते ॥४९२॥ क्षीराथिनः किं करिण्या ॥४९३॥ न दानसमं वश्यम् ॥४९४॥ परायत्तेषूत्कण्ठां न कुर्यात् ॥४९५॥ असत्समृद्धिरसद्भिरेव भुज्यते ॥४९६॥ निम्बफलं काकैरेव भुज्यते ॥४९७॥ नाम्भोधिस्तृष्णामपोहति ॥४९८॥
बालुका अपि स्वगुणमाश्रयन्ते ॥४९९॥ सन्तोऽसत्सु न रमन्ते ॥५००॥ हंसः प्रेतवने न रमते ॥५०१॥
अर्थार्थं प्रवर्तते लोकः ॥५०२॥ आशया बध्यते लोकः ॥५०३॥ न चाशापरैः श्रीः सह तिष्ठति ॥५०४॥ आशापरे न धैर्यम् ॥५०५॥
दैन्यान्मरणमुत्तमम् ॥५०६॥ आशा लज्जां व्यपोहति ॥५०७॥
न मात्रा सह वासः कर्तव्यः ॥५०८॥ आत्मा न स्तोतव्यः ॥५०९॥ न दिवा स्वप्नं कुर्यात् ॥५१०॥ न चासन्नमपि पश्यत्यैश्वर्यान्धो न श्रृणोतीष्टं वाक्यम् ॥५११॥
अनार्य व्यक्ति की मित्रता से आर्यव्यक्ति की शत्रुता अच्छी है ॥४८६॥ दुर्वाणि सारे कुल को नष्ट कर देती है ॥४८७॥ पुत्र के आलिंगन से बढ़कर कोई सुख नहीं है ॥४८८॥
विवाद के समय धर्म के अनुसार कार्य करना चाहिए ॥४८९॥ नित्य प्रातः-काल अपने (दिन के) कार्यों पर विचार करना चाहिए ॥४९०॥ संध्याकाल में संभोग वर्जित है ॥४९१॥ जिसका विनाशकाल निकट होता है वह अन्याय पर उतर आता है ॥४९२॥ दूध चाहने वाले को हथिनो की आवश्यकता नहीं होती ॥४९३॥ दान के समान कोई वशीकरण नहीं ॥४९४॥ परायी वस्तु की इच्छा न करनी चाहिए ॥४९५॥ दुर्जनों की समृद्धि को दुर्जन ही भोगते हैं ॥४९६॥ नीम के फल को कौवे ही खाते हैं ॥४९७॥ समुद्र प्यास नहीं बुझाता ॥४९८॥
बालू भी अपने गुण का अनुसरण करती है ॥४९९॥ भले लोग बुरे लोगों से आनन्दित नहीं होते ॥५००॥ हंस श्मशान में रहना पसन्द नहीं करते ॥५०१॥
सारा संसार धन के पीछे दौड़ता है ॥५०२॥ सभी सांसारिक प्राणी आशा के बन्धन से बँधे है ॥५०३॥ आशा में निमग्न पुरुष को लक्ष्मी नहीं मिलती ॥५०४॥ आशावान् मनुष्य धैर्यशाली नहीं होता ॥५०५॥
दरिद्र होकर जीवित रहने की अपेक्षा मर जाना ही अच्छा है ॥५०६॥ आशा, लज्जा को मिटा देती है ॥५०७॥
एकान्त में माता के भी साथ न रहे ॥५०८॥ अपने मुख से अपनी प्रशंसा न करनी चाहिए ॥५०९॥ दिन में सोना न चाहिए ॥५१०॥ ऐश्वर्य में अन्धा मनुष्य न तो अपने समीप की वस्तु को देखता है और न हितकारी बात को सुनता है ॥५११॥
७९८ कौटिल्य का अर्थशास्त्र
स्त्रीणां न भर्तुः परं दैवतम् ॥ ५१२ ॥ तदनुवर्तनमुभयसुखम् ॥५१३॥ अतिथिमभ्यागतं पूजयेद् यथाविधिः ॥ ५१४ ॥ नास्ति हव्यस्य व्याघातः ॥ ५१५ ॥ शत्रुर्भाववत् प्रतिभाति ॥ ५१६ ॥ मृगतृष्णा जलवद् भाति ॥ ५१७ ॥ दुर्मेधसामसच्छास्त्रं मोहयति ॥ ५१८ ॥ सत्संगः स्वर्गवासः ॥ ५१९ ॥ आर्यः स्वमिव परं मन्यते ॥ ५२० ॥ रूपानुवर्ती गुणः ॥५२१॥ यत्र सुखेन वर्तते तदेव स्थानम् ॥ ५२२ ॥ विश्वासघातिनो न निष्कृतिः ॥ ५२३ ॥ दैवयत्तं न शोचेत् ॥ ५२४ ॥ आश्रितदुःखमात्मन इव मन्यते साधुः ॥ ५२५ ॥ हृद्गतमाच्छाद्यान्यद् वदत्यनार्यः ॥ ५२६ ॥ बुद्धिहीनः पिशाचतुल्यः ॥ ५२७ ॥ असहायः पथि न गच्छेत् ॥ ५२८ ॥ पुत्रो न स्तोतव्यः ॥ ५२९ ॥ स्वामी स्तोतव्योऽनुजीविभिः ॥ ५३० ॥ धर्मकृत्येष्वपि स्वामिन एव घोषयेत् ॥ ५३१ ॥ राजाज्ञां नातिलङ्घयेत् ॥ ५३२ ॥ यथाऽऽज्ञप्तं तथा कुर्यात् ॥ ५३३ ॥ नास्ति बुद्धिमतां शत्रुः ॥ ५३४ ॥ आत्मच्छिद्रं न प्रकाशयेत् ॥५३५॥
स्त्री के लिए पति बढ़कर कोई देवता नहीं है ॥ ५१२ ॥ पति के इच्छानुसार चलने वाली स्त्री को इहलोक और परलोक, दोनों का सुख प्राप्त होता है ॥ ५१३ ॥ अपने यहाँ आये हुए अतिथि का विधिवत् सत्कार करना चाहिए ॥ ५१४ ॥ देवताओं के निमित्त से दिया हुआ द्रव्य कभी भी नष्ट नहीं होता ॥ ५१५ ॥ शत्रु भी कभी मित्र के समान दिखायी देता है ॥ ५१६ ॥ तृष्णा के कारण मृग चमकती हुई बालू को जल समझ बैठता है ॥ ५१७ ॥ दुर्बुद्धि मनुष्य को असत् शास्त्र मोह लेते हैं ॥ ५१८ ॥ सत्संग ही स्वर्गवास है ॥ ५१९ ॥ श्रेष्ठ व्यक्ति सबको अपने ही समान समझता है ॥ ५२० ॥ रूप के अनुसार ही मनुष्य में गुण होता है ॥ ५२१ ॥ जहाँ सुख से रहा जा सके, वही उत्तम स्थान है ॥ ५२२ ॥
विश्वासघाती मनुष्य के उद्धार के लिए कोई प्रायश्चित्त नहीं ॥ ५२३ ॥ जो बात दैव के अधीन है उसके सम्बन्ध में सोच-विचार न करना चाहिए ॥ ५२४ ॥ सज्जन व्यक्ति आश्रितों के दुःख को अपना ही दुःख समझते हैं ॥ ५२५ ॥ हृदय की बात को छिपाकर बनावटी बातें करने वाला अनार्य है ॥ ५२६ ॥ बुद्धिहीन मनुष्य पिशाच के समान है ॥ ५२७ ॥ बिना साथ के यात्रा न करनी चाहिए ॥ ५२८ ॥ अपने पुत्र की प्रशंसा न करनी चाहिए ॥ ५२९ ॥
सेवक लोगों को चाहिए कि वे अपने स्वामी का गुणगान करते रहें ॥ ५३० ॥ अपने धर्मकार्यों में भी वे स्वामी का गुणगान करते रहें ॥५३१॥ राजा की आज्ञा का कभी भी उल्लंघन न करना चाहिए ॥ ५३२ ॥ उसकी जैसी आज्ञा हो तदनुसार करना चाहिए ॥ ५३३ ॥
बुद्धिमान् मनुष्य का कोई शत्रु नहीं है ॥ ५३४ ॥ अपनी गुप्त बात किसी पर
चाणक्य-प्रणीत सूत्र ७९९
क्षमावानेव सर्वं साधयति ॥ ५३६ ॥ आपदर्थं धनं रक्षेत् ॥ ५३७ ॥ साहस- वतां प्रियं कर्तव्यम् ॥ ५३८ ॥ श्वः कार्यमद्य कुर्वीत ॥ ५३९ ॥ आपराह्निकं पूर्वाह्ने एव कर्तव्यम् ॥ ५४० ॥ व्यवहारानुलोमो धर्मः ॥ ५४१ ॥ सर्वज्ञता लोकज्ञता ॥ ५४२ ॥ शास्त्र- ज्ञोऽप्यलोकज्ञो मूर्खतुल्यः ॥ ५४३ ॥ शास्त्रप्रयोजनं तत्त्वदर्शनम् ॥ ५४४ ॥ तत्त्वज्ञानं कार्यमेव प्रकाशयति ॥ ५४५ ॥ व्यवहारे पक्षपातो न कार्यः ॥ ५४६ ॥ धर्मादपि व्यवहारो गरीयान् ॥ ५४७ ॥ आत्मा हि व्यवहारस्य साक्षी ॥ ५४८ ॥ सर्वसाक्षी ह्यात्मा ॥ ५४९ ॥ न स्यात् कूटसाक्षी ॥ ५५० ॥ कूटसाक्षिणो नरके पतन्ति ॥ ५५१ ॥ प्रच्छन्नपापानां साक्षिणो महाभूतानि ॥ ५५२ ॥ आत्मनः पापमात्मैव प्रकाशयति ॥ ५५३ ॥ व्यवहारेऽन्तर्गतमाचारः सूचयति ॥ ५५४ ॥ आकारसंवरणं देवानामशक्यम् ॥ ५५५ ॥ चौरराजपुरुषेभ्यो वित्तं रक्षेत् ॥ ५५६ ॥ दुर्दर्शना हि राजानः प्रजाः नाशयन्ति ॥ ५५७ ॥
प्रकट न करनी चाहिए ॥ ५३५ ॥ क्षमाशील मनुष्य अपना सब कार्य साध लेता है ॥ ५३६ ॥ आपत्काल के लिए धन की रक्षा करनी चाहिए ॥ ५३७ ॥ साहसी पुरुष कर्तव्यप्रिय होता है ॥ ५३८ ॥
जो कार्य कल करना है, उसको आज ही कर लेना चाहिए ॥ ५३९ ॥ जो कार्य दोपहर के बाद करना है उसको दोपहर के पहले ही कर लेना चाहिए ॥ ५४० ॥
व्यवहार के अनुसार ही धर्म होता है ॥ ५४१ ॥ सांसारिक बातों का ज्ञाता ही सर्वज्ञ कहलाता है ॥ ५४२ ॥ शास्त्रज्ञ होता हुआ भी जो लोकज्ञ न हो, वह मूर्ख के समान है ॥ ५४३ ॥ यथार्थ ज्ञान की प्राप्ति ही शास्त्र का प्रयोजन है ॥ ५४४ ॥ कार्य ही यथार्थ ज्ञान के प्रकाशक हैं ॥ ५४५ ॥
व्यवहार ( न्याय ) में पक्षपात न करना चाहिए ॥ ५४६ ॥ व्यवहार धर्म से भी बड़ा होता है ॥ ५४७ ॥ व्यवहार का साक्षी आत्मा है ॥ ५४८ ॥ समस्त प्राणियों में आत्मा साक्षीरूप में विद्यमान रहता है ॥ ५४९ ॥ कपट-साक्षी न होना चाहिए ॥ ५५० ॥ झूठे साक्षी नरक में जाते हैं ॥ ५५१ ॥ छिपकर किये गये पापों के साक्षी पंच महाभूत ( पृथ्वी, जल, तेज, वायु और आकाश ) हैं ॥ ५५२ ॥ अपने पापों को पापी स्वयमेव प्रकट करता है ॥ ५५३ ॥ व्यवहार के समय मन की बात को आकृति ही प्रकट कर देती है ॥ ५५४ ॥
मनोगत भावों की अभिसूचक आकृति को देवता भी नहीं छिपा सकते ॥ ५५५ ॥
चोरों और राजपुरुषों से अपने धन की रक्षा करनी चाहिए ॥ ५५६ ॥ जिन
८०० | कौटिल्य का अर्थशास्त्र
सुदर्शना हि राजानः प्रजा रञ्जयन्ति ॥ ५५८ ॥ न्याययुक्तं राजानं मातरं मन्यन्ते प्रजाः ॥ ५५९ ॥ तादृशः स राजा इह सुखं ततः स्वर्गमाप्नोति ॥ ५६० ॥
अहिंसालक्षणो धर्मः ॥ ५६१ ॥ स्वशरीरमपि परशरीरं मन्यते साधुः ॥ ५६२ ॥ मांसभक्षणमयुक्तं सर्वेषाम् ॥ ५६३ ॥
न संसारभयं ज्ञानवताम् ॥ ५६४ ॥ विज्ञानदीपेन संसारभयं निवर्तते ॥ ५६५ ॥
सर्वमनित्यं भवति ॥ ५६६ ॥ कृमिशकृन्मूत्रभाजनं शरीरं पुण्यपापजन्महेतुः ॥ ५६७ ॥ जन्ममरणादिषु दुःखमेव ॥ ५६८ ॥
तेभ्यस्तर्तुं प्रयतेत ॥ ५६९ ॥ तपसा स्वर्गमाप्नोति ॥ ५७० ॥ क्षमायुक्तस्य तपो विवर्धते ॥ ५७१ ॥ तस्मात् सर्वेषां कार्यसिद्धिर्भवति ॥ ५७२ ॥
इति चाणक्यसूत्राणि — : ० : —
राजाओं के दर्शन, प्रजा को कठिनाई से प्राप्त होते हैं उसकी प्रजा नष्ट हो जाती है ॥ ५५७ ॥
जो राजा बराबर प्रजा के सुख-दुःख को सुनते हैं उनसे प्रजा प्रसन्न रहती है ॥ ५५८ ॥ न्यायपरायण राजा को, प्रजा माता के समान मानती है ॥ ५५९ ॥ इस प्रकार का प्रजाप्रिय राजा ऐहिक सुख और पारलौकिक स्वर्ग को प्राप्त करता है ॥ ५६० ॥
अहिंसा ही धर्म है ॥ ५६१ ॥ सज्जन पुरुष अपने शरीर को भी पराया ही मानते हैं ॥ ५६२ ॥ मांस-भक्षण सबके लिए अनुचित है ॥ ५६३ ॥ ज्ञानी पुरुषों को संसार का भय नहीं होता ॥ ५६४ ॥ विज्ञान ( ब्रह्मज्ञान ) के दीपक से संसार-भय भाग जाता है ॥ ५६५ ॥
यह दिखायी देने वाला सब कुछ अनित्य है ॥ ५६६ ॥ कृमि-कीट तथा मल-मूत्र का घर शरीर पुण्य-पाप का जन्मस्थल है ॥ ५६७ ॥ यह जन्म-मरण आदि दुःख ही दुःख है ॥ ५६८ ॥
इस जन्म-मरणादि से छुटकारा पाने का उपाय करना चाहिए ॥ ५६९ ॥ सब से स्वर्ग की प्राप्ति होती है ॥ ५७० ॥ क्षमाशील पुरुष का तप बढ़ता रहता है ॥ ५७१ ॥ तपश्चर्या से सबके कार्य सिद्ध होते हैं ॥ ५७२ ॥
चाणक्यसूत्र समाप्त
— : ० : —
पारिभाषिक शब्दावली
प्राचीन भारत की राजनीति और शासन के क्षेत्र में आचार्य कौटिल्य का अर्थ-शास्त्र एक विश्वकोश जितना महत्त्व रखता है। उसमें धर्म, कर्म, शिक्षा, नीति, समाज, विज्ञान, कृषि, चिकित्सा और यहाँ तक कि मन्त्र-तन्त्र आदि जितने भी विषय हैं उन सभी का समावेश है। इस सर्वांगीण और सर्वतोमुखी विशिष्टता के कारण अर्थशास्त्र की शब्दावली में अनेकता के दर्शन होते हैं।
अर्थशास्त्र-विषयक पुरातन उद्देश्य को दृष्टि में रख कर यहाँ लगभग पौने आठ सौ शब्दों की एक सूची इस हेतु दी जा रही है कि शासन के विभिन्न क्षेत्रों में अंग्रेजी शब्दों के स्थान पर जो भारतीय भाषाओं और विशेषतया संस्कृत भाषा के शब्दों का नवीनीकरण हुआ है, अर्थशास्त्र के पाठकों को उसकी जानकारी प्राप्त हो सके।
प्राचीन अर्थशास्त्र का महत्त्व वर्त्तमान शासन-संबंधी सभी कार्यक्षेत्रों में व्याप्त है। इस दृष्टि से और आचार्य कौटिल्य की सर्वथा वैयक्तिक विचारधारा को समझने के लिए भी यह पारिभाषिक शब्दावली उपयोगी सिद्ध होगी।
यह शब्दावली सरकार के शिक्षा-विभाग से तैयार की गयी पारिभाषिक शब्द-सूचियों, श्री मोनियर विलियम्स, श्री वामन शिवराम आप्टे, श्री लक्ष्मण शास्त्री, राहुलजी तथा डा० रघुवीर के शब्दकोशों, डा० शामशास्त्री, एवं महामहोपाध्याय गणपति शास्त्री कृत अर्थशास्त्र के अंग्रेजी, संस्कृत अनुवादों और डा० जायसवाल की पुस्तक हिन्दू पॉलिटी पर आधारित है।
अ
| अंकनी—लेखनी—पेंसिल | अंतिमेत्यम्—अंतिम चेतावनी—अल्टिमेटम |
| अंकयमित—मुहर लगा पत्र—स्टांप्ड | अंशधर—हिस्सेदार—शेयर होल्डर |
| अंकेक्षित लेखा—लेखा-परीक्षक द्वारा जाँच किया हुआ हिसाब—ऑडिटेड एकाउंट | अकृतक्षेत्र—कृषि के अयोग्य भूमि |
| अंगरक्षक—शरीररक्षक—बॉडीगार्ड | अकृषित—जो भूमि जोती-बोई न गई हो—अनकल्टिवेटेड |
| अंतग्रस्त—विपत्तिग्रस्त—इंवाल्व्ड | अक्ष—धुरी-एक्सिस |
| अंतपाल राज्य—दो देशों की सीमाओं के बीच स्थित राज्य—बफर स्टेट | अक्षपटल—आय-व्यय के लेखे का प्रधान, विभाग या कर्मचारी ( पटल—अधिदेवन ) |
| अंतरंग सचिव—निजी सचिव—प्राइवेट सेक्रेटरी | अक्षपटलाध्यक्ष—महागणक, महागणनिक—एकाउंटेंट जनरल |
| अंतर्वाणिज्य—आभ्यंतर व्यापार—इंटरनल ट्रेड | अक्षशाला—सुवर्ण आदि का शोधन करने एवं गणना करने वालों का स्थान |
५१ कौ०
| अधिकरण—आधार विषय | अधिशिक्षक—मुख्य अधिष्ठाता—रेक्टर |
८०२ कौटिल्य का अर्थशास्त्र
| अग्निवारक—अग्नि का प्रभाव रोकने वाला—फायरप्रूफ | अधिकारी राज्य—कर्मचारी तन्त्र—ब्यूरोक्रेसी |
| अग्निशामक—अग्नि को शांत करने वाला—फायरब्रिगेड | अधिकोष—रुपया जमा करने और माँगने पर ब्याज सहित लौटा देने वाली संस्था—बैंक |
| अग्रदाय—इम्प्रेस्ड | अधिग्रहण—अधिकार या अभियाचन द्वारा किसी की संपत्ति आदि को ले लेना—ऐक्विजिशन |
| अग्रदाय धन--इम्प्रेस्ड मनी | |
| अग्रसर—आगे बढ़ा हुआ—फारवर्ड | |
| अग्रसारित—आगे बढ़ा दिया गया पत्र आदि—फॉरवर्डेड | अधिदेय—भत्ता—अलाउन्स |
| अधिनायक—तानाशाह—डिक्टेटर | |
| अटवीवल—कोल-भील लोगों की सेना | अधिनियम—पारित विधि—ऐक्ट |
| अणुदर्शी—सूक्ष्मदर्शी—माइक्रोस्कोप | अधिपत्र—लिखित आदेश—वारंट |
| अति उत्पादन—खपत या माँग से अधिक मात्रा में पण्य वस्तुओं का उत्पादन—ओवर प्रॉडक्शन | अधिप्रभार—निर्धारित परिणाम से अधिक शुल्क—ओवरचार्ज |
| अधिभार—अधिक कर—सरचार्ज | |
| अतिचरण—सीमा का उल्लंघन—ट्रांसग्रेसन | अधिमास—मलमास—लीप-ईयर |
| अधियुक्त—नियोजित—एम्प्लॉयड | |
| अत्यय—वैध अर्थदण्ड | अधिराज्य—स्वतंत्र उपनिवेश—डोमीनियन |
| अद्यावधिक—आज तक का—अप-टु-डेट | |
| अधमर्ण—जिसने किसी से ऋण लिया हो, कर्जदार—डेटर | अधिवक्ता—वकील—एडवोकेट |
| अधिवारन—डामिसियल | |
| अधिकर—अतिरिक्त कर—सुपर टैक्स | अधिविन्ना—प्रथम विवाहिता पत्नी |
| अधिकरण—आधार विषय | अधिशिक्षक—मुख्य अधिष्ठाता—रेक्टर |
| अधिकर्ता—निदेशक; संचालक—डायरेक्टर | अधिशेष—बचत—सरप्लस |
| अधिकर्मी—अधिकारी—ओवरसीयर | अधिष्ठाता—नियामक अधिकारी—प्रसाइडिंग आफिसर |
| अधिकार—कार्यभार—सर चार्ज | |
| अधिकारपत्र—शासत द्वारा प्राप्त पत्र—चार्टर | असूधिचना—अधिकृत सूचना—नोटिफिकेशन |
| अधिकारिक सेना—विजित देश पर तब तक अधिकार बनाये रखनेवाली सेना, जब तक कि नियमित शासन व्यवस्था कायम नहीं हो जाती—आर्मी आफ आकुपेशन | अधीक्षक—कार्यालय या विभाग का अधिकारी—सुपरिटेंडेंट |
| अध्यक्ष—प्रमुख—चेयरमैन | |
| अभ्यर्थित—क्लेम्ड | |
| अधिकारी—पदाधिकारी—अफसर | अभ्यर्थी—दावेदार—क्लेमेंट |
पारिभाषिक शब्दावली
८०३
अध्यादेश—विशेष स्थिति में लागू किया गया आदेश—आर्डिनेंस
अध्यारोप—इम्यूटेशन
अनय—दुष्टनीति
अनर्हता—अयोग्यता—डिस्क्वालिफिकेशन
अनारूढ—पैदल—डिस्माउण्टेड
अनावर्त्तक—जो (अनुदान) एक ही बार दिया जाय—नाॅन-रेकरिंग
अनावर्ती—फिर न लौटनेवाला—एपीरिओडिक
अनीकस्थ—निपुण हस्तिशिक्षक
अनीकिनी—सेना का सबसे बड़ा भाग, जिसमें १०-१५ हजार सैनिक हों—डिवीजन
अनुग्रह—राजा के द्वारा प्रजा को प्रदत्त उपकार
अनुग्रह परिहार—आर्थिक रियायतें
अनुग्रहधन—सेवा का उपहार—ग्रेचुइटी
अनुच्छेद—संविदा आदि का वह विशिष्ट अंश, जिसमें एक विषय और उसके प्रतिबंधों आदि का उल्लेख हो—पैराग्राफ
अनुज्ञप्ति—अनुज्ञापत्र—लाइसेंस
अनुज्ञाधारी—लाइसेंसदार
अनुदेश—हिदायत—इंस्ट्रक्शन
अनुपूरक—छूट या कमी को पूरा करने के लिए बाद में बढ़ाया हुआ—सप्लिमेंटरी
अनुबन्ध—बंधन—क्राँन्ट्रक्ट
अनुबन्ध पत्र—करारनामा—इंडेंचर
अनुबल—पृष्ठरक्षक सेना—रेयरगार्ड
अनुभाजन—ऐपोर्शन
अनुरक्षक—एस्कॉर्ट
अनुवेशपत्र—परीक्षित पारपत्र—वीजा
अनुशय—क्रय-विक्रय-संबंधी विवाद
अनूप—जलमय प्रदेश
अनैतिक—इम्मोरल
अनौपचारिक —इनफारमल
अन्तपाल—सीमान्त अधिकारी
अन्तर्वेशिक—अन्तःपुर का प्रमुख अधिकारी
अन्तर्धि—शत्रु तथा विजिगीषु के बीच का राज्य
अपचारक—दूसरे की सीमा में अनधिकार प्रवेश—ट्रेसपासर
अपर न्यायाधीश —अतिरिक्त न्यायाधीश—एडीशनल जज
अपर सचिव—अतिरिक्त सचिव—एडिशनॅल सेक्रेटरी
अपराधी—दोषी—गिल्टी
अपरिदेय—जिसकी अदला-बदली न की जा सके—नाॅन-ट्रांसफरेबल
अपलाभ—अनुचित लाभ—प्रोफिटियरिङ्ग
अपहार—प्राप्त आय को खाते में न चढ़ाना निर्धारित धन का व्यय न करना और बचत धन का अपव्यय करना
अपेक्षाभूमि—परती भूमि—फालोलैंड
अप्रतिभाव्य—वह अपराध, जिसमें किसी के जामिन बनने या जमानत देने को तैयार होने पर भी अपराधी को अस्थायी रूप से रिहा कर देने की गुञ्जायश न हो—नाॅन-बेलेबिल
अप्रत्यक्षकर—जो कर विक्रेय वस्तुओं की बढ़ी हुई कीमत के रूप में उप भोक्ताओं से लिया जाता है—इण्डाइरेक्ट टैक्स
अप्रत्यादेय—जो फिर प्राप्त या वसूल न किया जा सके—इर्रिकव्हरेबिल
४०४ कौटिल्य का अर्थशास्त्र
अप्राप्तव्यवहार—नाबालिग
अभक्ति—अश्रद्धा—डिस्लोयल्टी
अभिकथन—अप्रमाणित आरोप—एलेगेशन
अभिकरण—अभिकर्ता के कार्य करने का स्थान—एजेंसी
अभिकर्ता-—कार्यवाहक, घटक—एजेंट
अभिग्रहण—अपना कहकर स्वीकार करना—एक्वीजीशन
अभिज्ञा—मान्यता—रेकॉगनिशान, आइडेण्टिटी
अभिज्ञात—मान्यता प्राप्त—रेकॉगनाइज्ड
अभिज्ञान—पहिचान—आइडेन्टिफिकेशन
अभिज्ञापक—उद्घोषक—एनाउंसर
अभिज्ञापत्र—पहचान पत्र—आइडेण्टिटी-कार्ड
अभिधान—कथन—एपीलेशन्स
अभिनिर्णय—अन्तिम निर्णय—वर्डिक्ट
अभिन्यास—किसी योजना के अनुसार गृह, उद्यान आदि का निर्माण करना—ले-आउट
अभिभावक—संरक्षक—गार्जियन
अभियन्ता—यन्त्रविद—इंजीनियर
अभियान—आक्रमण करने की क्रिया
अभियोक्ता—वादी—कॉम्पिलनेण्ट
अभियोग—दोषारोपण—ऐक्यूजेशन
अभिवक्ता—वकील—प्लीडर
अभिरक्षक—सुरक्षा की दृष्टि से किसी वस्तु या व्यक्ति को अपने संरक्षण में रखने वाला—कस्टोडियन
अभिरक्षा—हिरासत—कस्टोडी
अभिलेख—रिकार्ड
अभिलेख कार्यालय—रिकार्ड आफिस
अभिलेखपाल—कीपर आफ रिकार्ड्स
अभिषद्—सीनेट की प्रबन्ध समिति—सिण्डिकेट
अभिसूचना—हिदायत—इंस्ट्रक्शन
अभिस्रावणी—भट्टी—डिस्टलरी
अभुक्त—जिसका उपभोग या भुगतान न किया गया हो—अनकैश्ड
अभ्यंश—नियतांश—कोटा
अभ्यस्त अपराधी—आदतन दोषी—हैविचुअल ऑफेण्डर
अभ्युक्ति—टीका—रिमार्क
अभ्युद्देश—रिफ्रेन्स
अम्ल—तेजाब—एसिड
अमित्रसंपत्—शत्रु के प्रमुख दोष
अय—अभीष्ट फल की प्राप्ति
अराजक—बिना शासक वाली आदर्शवादियों की शासन-प्रणाली
अर्थदूषण—आर्थिक क्षति
अर्थशास्त्र—पृथिवी की प्राप्ति और पालन का प्रतिपादन करने वाली विद्या
अर्थापन—व्याख्या—इण्टरप्रेटेशन
अर्हता—योग्यता—क्वालिफिकेशन
अवकाशग्रहण—विश्राम लेना—रिटायरमेंट
अवज्ञा—अवहेलना—डिस्-ओविडिएंस
अवघाता—वह व्यक्ति जो असली मालिक की अविद्यमानता में मकान आदि की निगरानी करे—केयरटेकर
अवधायी सरकार—अवधायक सरकार वह सरकार, जो निर्वाचन होने के बाद नई सरकार के कार्यभार ग्रहण कर लेने तक शासन-व्यवस्था की निगरानी करती है—केयरटेकर गवर्नमेंट
अवधान—देखभाल—केयर
पारिभाषिक शब्दावली
८०५
अवधायक अधिकारी—किसी कार्य या कार्यालय का अधिकारी—आफिस इनचार्ज
अवमान—अवज्ञा—कंटेप्ट
अवमूल्यन—किसी सरकार द्वारा अन्य देशों की मुद्राओं की तुलना में अपने देश की मुद्रा का मूल्य घटा दिया जाना—डीवेलुएशन
अवयस्क—नाबालिग (१८ वर्ष से कम)—माइनर
अवर—जूनियर
अवरागार—लोकसभा—लोअर हाउस
अवरुद्ध—नजरबन्द
अवरोधन भत्ता—रूकौनी भत्ता—डिटेंशन अलाउंस
अवशेष—बचा हुआ—बैलेंस ओपनिंग
अवेक्षण—लुक आउट
अवैतनिक—ऑनररी
अवैध—नियमविरुद्ध—इल्लीगल
अवसर ग्रहण—अवसर प्राप्त-रिटायरमेंट
अवस्थान प्रक्रम—ठहरने का स्थान—स्टेशन
अवहार—छूट ( कर )—रिबेट
अव्ययित शेष—किसी काम के लिए निर्धारित या जमा किये हुए धन का वह अंश, जो व्यय न किये जाने के कारण बच गया हो—अनस्पेंट बैलेंस
अशोधित शेष—किसी ऋण आदि का वह बचा हुआ अंश जिसका भुगतान या अदायगी न हुई हो—अनरिडीम्ड बैलेंस
अष्टकुल—आठ सदस्यों की न्यायकारी काउंसिल
असैनिक—सिविल
असैनिकीकरण—किसी स्थान या क्षेत्र को सैन्यविहीन कर देना—डीमिलिटेरिजेशन
अस्थायी संधि—आर्मिस्टिस
आ
आकाशी—एरियल
आक्रय—फेरीवाला—हॉकर
आख्यापक—अनाउंसर
आख्यापना—अनाउंसमेंट
आज्ञप्ति—दीवानी मुकदमे में न्यायालय द्वारा दिया गया निर्णय—डिक्री
आतिथ्य शुल्क—आयात माल पर कर
आतंक युद्ध—प्रचार आदि के द्वारा ऐसा आतंक उत्पन्न कर देना कि जिससे शत्रु का साहस और युद्ध-क्षमता शीण पड़ जाय—वार ऑफ नर्ज
आदेय—वह धन, जो दूसरों से मिलना हो या जो अपनी संपत्ति बेच कर प्राप्त किया जाय—असेट्स
आधि—धरोहर—पॉन
आधिकारिक—सरकारी—ऑफिसियल
आन्वीक्षकी—आत्मविद्या
आपत्सहायकार्य—दुष्काल या बाढ़, भूकंप आदि के संकट-काल में, आर्त तथा असहाय जनता की सहायता के लिए आरंभ किया गया सार्वजनिक निर्माण कार्य—रिलीफ वर्क
आपात—आकस्मिक संकट—इमरजेंसी
आपृच्छा—रेफरेंडम
आबकारी—एक्साइज
आभारोक्ति—एक्नॉलेजमेंट
आयकर—इनकम टैक्स
८०६ | कौटिल्य का अर्थशास्त्र
आयकर अधिकारी—इनकम टैक्स आफिसर
आयात शुल्क—इम्पोर्ट ड्यूटी
आयात—इम्पोर्ट
आयाम—माप-डाइमेन्शन्स
आयव्ययक—किसी निश्चित अवधि के आय-व्यय का लेखा—बजट
आयुक्त—कमिशनरी का प्रधान अधिकारी—कमिशनर
आयोग—किसी विशेष कार्य को संपन्न करने के लिए नियुक्त व्यक्तियों का मंडल—कमीशन
आयोजना—प्लॉनिंग
आरक्षक—आरक्षी-पुलिस
आरक्षण—रिजर्वेशन
आरक्षित शायिका—रिजवर्ड बर्थ
आलोचना—गुण-दोष विवेचन—कॉमेंट
आवक—इनवार्ड
आवर्त्त—रिवोल्यूशन
आवर्त्तक—आवर्ती, बार-बार दिया जाने वाला (अनुदान)—रेकरिंग
आविस पत्र—मैनिफेस्टो
आशुपत्र—एक्सप्रेस लेटर
आशुलिपिक—स्टेनोग्राफर
आहर्त्ता—ड्रावर
आसेध—कुर्की—अटैचमेंट
आहार्यी—ड्रावी
आह्वान पत्र—समन-समंस
इ
इतिवृत्त पत्रक—हिस्ट्री शीट
इतिशेष—बैलेंस क्लोजिंग
उ
उच्च न्यायालय—हाईकोर्ट
उच्चाधिकारी—हाई कमान
उच्चायुक्त—हाई कमिश्नर
उत्कोच—रिश्वत—ब्राइब
उत्तमर्ण—महाजन—क्रेडिटर
उत्तराधिकारी—हेयर
उत्तोलक—ऊपर उठाकर तौलने वाला यन्त्र—लीवर
उत्थानक—ऊपर-नीचे चढ़ाने-उतारने वाला बिजली का आसन—लिफ्ट
उद्ग्रहण—उगाहना—लेवी
उद्योगशाला—कारखाना—फैक्ट्री
उन्मोचन—बन्धनमुक्त या ऋणमुक्त—डिसचार्ज
उप—डिप्टी
उप उच्चायुक्त—डिप्टी हाई कमिश्नर
उपकर—एक तरह का छोटा कर, जो विविध वस्तुओं पर विभिन्न स्थितियों में लगाया जाता है—सेस
उपकुलपति—कुलपति के मातहत—प्रो-वाइसचांसलर
उपजीव—मानना या धर्म आदि का पालन करना (राज शब्दोपजीवी = राजा की उपाधि धारण करने वाला संघ, शस्त्रोपजीवी = जो संघ अस्त्र-शस्त्रों का व्यवहार करता था अथवा युद्धकला में निपुण होता था)
उपनिदेशक—डिप्टी डायरेक्टर
उपनिवेश—दूसरे देशों में अपनी वस्ती वसाना या नई वस्ती वसाना—कॉलोनिजेशन
उपनौबलाध्यक्ष—वाइस एडमिरल
उपपंजीयक—सब रजिस्ट्रार
उपपत्ति—थ्योरी
पारिभाषिक शब्दावली
८०७
उपप्रस्ताव—मोशन
उपमुख्य—डिप्टी चीफ
उपमुख्य लेखा-अधिकारी—डिप्टी चीफ अकाउण्ट आफिसर
उपबन्ध—शर्तक-कांडिशन
उपयोजक—एडाप्टर
उपशुल्क—उपकर-रेण्ट
उपसञ्चालक—डिप्टी डायरेक्टर
उपसंहरण—घटाना, कम करना-आबेट
उपस्कर—मसाला-इक्युप्मेंट
ऋ
ऋणबन्धनपत्र—रुक्का-प्रो-नोट
औ
औपचारिक—दिखाऊ-फारमल
औरस—विवाहिता पत्नी से उत्पन्न पुत्र
क
कक्ष—सेना के पश्चाद् भाग के दोनों पार्श्व
कण्टकशोधन—समाज-अहितकारी लोगों का दमन
कण्टिका—आलपीन-पिन
कण्टिकाधार—पिनकुशन
कर—चुङ्गी-इम्पोस्ट
करण—न्यायालय में बयान लिखने वाला-क्लर्क
करणिक—क्लर्क
करणिक प्रधान—हेडक्लर्क
करणिक मुख्य—चीफ क्लर्क
करणिक सहायक—असिस्टेण्ट क्लर्क
कर निर्धारक—असेसर
कर्णपाल—क्वाटर मास्टर
कर्मक—पर्सनल ( वर्ग )
कर्मकार—वर्कमैन
कर्मशाला—वर्कशाप
कर्मान्त—कारखाना
कल्पना—दन्तकथा पुराणकथा-मेय
कारागारिक—कारापाल-जेलर
कार्तान्तिक—यमपट दिखाकर जीविकोपार्जन करने वाला ज्योतिषी
कार्मिक—गणना विभाग का कर्मचारी
कार्यकारी अभिकर्ता—ऐक्टिङ्ग एजेण्ट
कार्यनायक—चार्ज डी-एफेयर्स
कार्य-परिषद्—काउन्सिल आफ ऐक्शन
कार्यपुस्तक—काल बुक
कार्यभारी—इञ्चार्ज
कार्यवाहक—ऐक्टिङ्ग
कार्यवाहक प्रभारी—इञ्चार्ज
कुटीर शिल्प—छोटा उद्योग-काटेज इंडस्ट्री
कुलपति—वाइसचांसलर
कुलिक—पौर का न्यायाधीश, गणराज्य में निर्णय करने वाली संस्था
कूटरूप—जाली सिक्का
कूटशासन—कपट लेख या जाली दस्तावेज
कूटसाक्षी—झूठा गवाह
कृतिस्वामित्व—सर्वाधिकार-कॉपीराइट
कृष्य—जो भूमि जोती-बोई जा सके—कल्टिवेटेबिल
केन्द्र निदेशक—स्टेशन डायरेक्टर
कोशसंपत—राजकोश के उत्कृष्ट गुण
कोष्ठागार—सरकारी अन्नसंग्रह का स्थान
क्षति सर्वेक्षण—डेमेज सर्वे
क्षय—अल्प आय और अधिक व्यय
क्षेत्रीय न्यायालय—रीजनल कोर्ट
ख
खण्ड निरीक्षक—ब्लाक इन्सपेक्टर
८०८ कौटिल्य का अर्थशास्त्र
ख्यापना—ऐलान-अनाउंसमेंट
ग
गण—संस्था, सिनेट, कंपनी
गणक, गाणनिक—आय-व्यय लेखक—एकाउण्टेण्ट
गणना—लेखा—अकाउंट
गणनाफलक—खिड़की—काउण्टर
गणिकाध्यक्ष—वेश्याओं पर अनुशासन रखने वाला अधिकारी
गति निदेशक—मूवमेंट डायरेक्टर
गुटिकाधार—बाल बेयरिंग
गुणांकन—स्कोरिंग
गुल्म—रक्षकदल—प्लाटून
गृहपति—छात्राभिरक्षक—वार्डन
गृहरक्षक—होमगार्ड
ग्रन्थागारिक—पुस्तकालय का अध्यक्ष—लाइब्रेरियन
ग्रन्थि—गिल्टी—ग्लैंड
ग्रामकूट—गांव का मुखिया
ग्राम गामणिक—किसी गाँव या नगर का निर्वाचित राजा या सभापति
ग्रामणी—गांव का मुखिया
ग्रामिक—ग्रामपाल
घ
घट्टकर—नावकर—फेरी टॉल
च
चमू—मण्डल-डिवीजन
चारक—हवालात
चालक—ड्राइवर
चिकित्सा अधिकारी—मेडिकल आफिसर
चित्राधार—अलबम
छ
छंद—मत—वोट
छंदक—संमति—रेफरेन्डम (Referedum)
छंदाधिकार—मताधिकार
छद्मनाम—कपटनाम—प्यूडोनिक
छद्मयुद्ध—कपट युद्ध—शैंम फाइट
ज
जनित्र—जेनेरेटर
जनन—उत्पादन—रिप्रोडक्शन
जनसम्पर्काधिकार—जनता से सम्पर्क बनाये रखनेवाला सरकारी अधिकारी—पब्लिक रिलेशन आफिसर
जल परिवहन विधि—एडमिरेलिटी ला
जानपद—देशसंघ
जानपद सैन्य—देशरक्षक सेना—मिलीशिया
जीवनरक्षक पेटी—डूबने से बचने के लिए बांधी जाने वाली ऐसी पेटी जिसमें हवा भरी रहती है या बड़ा सा कार्क लटकता रहता है—लाइफ बेल्ट
ज्ञप्ति, प्रज्ञप्ति—सूचना
ज्ञात कुल—डिस्क्रिप्ट
ज्वलनांक—फायर पोइंट
ज्वालक—बर्नर
ट
टंकशाला—टकसाल—मिंट
ड
डमर—विप्लव
डिम्ब—प्रजा-विप्लव
त
तर्जनी—देशिनी प्रदेशिनी—इण्डैक्स फिंगर
तीर्थ—विभागीय अध्यक्ष
तुन्नवाय—दर्जी
तुलनपत्र—बैलेंस शीट
पारिभाषिक शब्दावली
८०९
द
दण्डपाल—सेनाध्यक्ष
दण्डाधीश—दण्डाधिकारी—मजिस्ट्रेट
दशकुली—दस परिवारों का संघ
दशग्रामी—दस गाँवों का समुदाय
दाति—वितरण—डेलीवरी
दाय—रिक्थ—इन्हेरिटेंस
दायाद—पिता की संपत्ति का उत्तराधिकारी
दिक्सूचक—कुतुबनुमा—कम्पास
दिविर—मुंशी—रजिस्ट्रार-एक्चुअरी
दुरभियोजन—किसी को हानि पहुँचाने के लिये की जाने वाली गुप्त कार्यवाही—प्लाट
दुर्ग रक्षक सेना—दुर्गनिवेश—गारिजन
दूरमुद्रक—टेलिप्रिंटर
दूष्य—राजद्रोही
द्रावक—फ्लस्क
द्विनेत्री—दूरबीन—बाइनोकुलर
द्वैराज्य—दो शासकों वाला राज
ध
धनादेश—चेक
धरण—सहारा—गर्डर
धर्मस्थ—दीवानी कचहरी का न्यायाधीश
धर्मस्व—प्राभृत—इन्डोमेंट
धारक—कीपर
धारणिक—कर्जदार
धारा—दफा-सेक्शन
धारिता—मता—कैपेसिटी
धारुक—बियरिंग
धात्री—दायी—मिडवाइफ
ध्वजदंड—फ्लेग स्टाफ
ध्वजपति—फ्लेग अफसर
ध्वजपोत—फ्लेगशिप
न
नगरपाल—सिटी फादर
नगररक्षक—सिविल गार्ड
नामन्—आख्य—नॉमिनेशन
नामपत्र—लेबल
नामिका—पेनल
नायक—दलनेता—कैप्टिन
नाविक—पोतारोही—डेक हैड
निकाय—वर्ग—बॉडी
निगम—पौर संघ—कॉर्पोरेशन
निचयकर्ता—समासक, संक्षेपकर्ता—अब्रेविएटर
निजी सचिव—निजी कामों की देखभाल करने वाला सचिव—प्राइवेट सेक्रेटरी
निदेश—हिदायत—डाइरेक्शन
निदेशक—डाइरेक्टर ( प्रशासन )
निबंधक—पंजीयक—रजिस्ट्रार
निबंधन—पंजीयन—रजिस्ट्रेशन
नियंत्रक—कंट्रोलिंग—आफिसर
नियामक—अवरोधक—रेगुलेटर
नियोक्ता—नियोजिता—एम्प्लायर
निरंकुश राजतंत्र—अवसोल्यूट-मोनार्की
निरसन—किसी विधि आदि को अधिकारपूर्वक या वैधरीति से रद्द कर देना—रिपील्ड
निरीक्षक—इंसपेक्टर
निर्देशक—डाइरेक्टर ( प्रोग्राम )
निर्माता—प्रॉजेक्टर
निर्वांत—वेक्यूम
निलंबित—मुअत्तिल—सस्पेंडिड
निबन्धक—मुनीम
निशान्त—राजभवन
निष्कासिका—आउटलेट
८१० कौटिल्य का अर्थशास्त्र
निष्क्रांत—इवेक्यूई
निष्क्रिय लेखा—डेड अकाउंट
निष्पादक—एक्जिक्यूटिव
निसृष्टि—राज्य का प्रमाण पत्र
निस्तारण—काम पूरा करने की क्रिया—डिसपोजल
निस्यंदक—फिल्टर
निःस्वामिक भूमि—वह परती भूमि जो किसी के अधिकार में न हो—नो मेंस लैंड
नीवी—आय-व्यय के बाद का बचा हुआ धन
नैगम—नगर-व्यापारियों की सभा
नैमित्तिक—असाधारण—काजल
नौतरण—वहन जलयात्रा—नैविगेशन
नौबलाध्यक्ष—नौसेना का प्रधान सेनापति—एडमिरल
नौभार—कारगो
न्यायसभ्य—जूरी
न्यायिक—जुडिसियल
न्यास—निगम—ट्रस्ट
न्यासधन—ट्रस्टमनी
प
पंजी—रजिस्टर
पंजीयन—दर्ज करना—रजिस्ट्रेशन
पक्ष—सेना के अग्रभाग के दोनों पार्श्व
पञ्चगामी—पाँच गाँवों का कर-संग्रह करने वाला अधिकारी
पण—शर्त, राज्याभिषेक के समय राजा से इस बात की शपथ करायी जाती थी कि वह धर्म या कानून के अनुसार शासन करेगा
पण्य—व्यवहार योग्य—कॉमोडिटी
पण्यक्षेत्र—पण्यभूमि, बाजार—मारकेट
पण्यगृह—गोदामघर
पण्यशाला—भंडार—इम्पोरियम
पत्तनपति—हार्बर मास्टर
पत्ती—पार्टी
पत्रवाहक पंजी—पियन बुक
पथकर—मार्गकर—टॉल
पदक्रम—ग्रेड
पदक्षेप—मार्क टाइम
पदाति—पैदल सेना—इन्फैन्ट्री
परजीवी—पैरासाइटिक
परराष्ट्र मंत्री—फारेन मिनिस्टर
परिचर—सेवक—अटेंडेंट
परिचायक—डिटेक्टर
परिचालक—आपरेटर
परिदर्शन—इन्सपेक्शन (चिकित्सा)
परिधि—सरकल
परिपथ—सरक्यूट
परिपृच्छा—पूछ-ताछ—इनक्वाइरी
परिभाव्य धन—काउशन मनी
परिरक्षक—परजरवेटिव (चिकित्सा)
परिवर्त्तक—कॉन्वर्टर
परिवहन—ट्रांसपोर्ट
परिवाद—शिकायत—कॉम्प्लैण्ट
परिवीक्षा—परख—प्रोवेशन
परिव्यय—लागत—कॉस्ट
परिषद्—काउन्सिल
परिष्ठा—हैसियत—स्टेट्स
परिसंपत्ति—असेसमेण्ट
परीक्षक—टेस्टर
परीक्षण—टेस्ट
परीहार—करमुक्ति से सम्बद्ध राजाज्ञा-पत्र
पर्णिका—कूपन
पारिभाषिक शब्दावली
८११
पर्यवेक्षक—सुपरवाइजर
पलायी—फरार—एब्स्कोण्डर
पशु-चिकित्सा-निरीक्षक—वेटेरनरी-इंस्पेक्टर
पारणक—अनुमतिपत्र—पास
पारपत्र—अनुज्ञापत्र—पासपोर्ट
पारित—स्वीकृत—पासड
पारिषद्—काउन्सलेर
पार्श्व—बैक ग्राउण्ड
पार्श्वरक्षक सेना—फ्लैंकगार्ड
पावती पत्र—रसीद—एकनॉलेजमेण्ट
पीठस्थविर—कुलसचिव-रजिस्ट्रार
पुनर्वास—फिर से बसाना—रिहैबिलिटेशन
पुस्त—बहीखाता
पूग—श्रमिक संघ
पूगगामणिक—शिल्प-सम्बन्धी किसी गण या संघ के सभापति
पूर्त्यधिकारी—वितरण का व्यवस्थापक सप्लाई आफिसर
पूर्वेक्षण—पर्व्यू
पौर—नगर-निवासियों की सभा या संस्था; राजधानी के निवासियों की सभा या संस्था—म्युनिसिपल-व्यवस्था
पौर मुख्य—नगर मजिस्ट्रेट
प्रकाश स्तम्भ—रात में विमानों का पथ-प्रदर्शन करने के लिए हवाई अड्डे पर दायें-बायें घूमने वाला प्रकाश-लाइट हाउस या सर्चलाइट
प्रकोष्ठ—सभाकक्ष—लाॅबी
प्रणिधि—गुप्तचर—सीक्रेट एजेण्ट
प्रतिकर—मुआवजा—कम्पेनसेशन
प्रतिजीवाणुक—ऐण्टीसेप्टिक
प्रतिज्ञा—राज्याभिषेक के समय की शपथ
प्रतिनिधि—डेलिगेट
प्रतिपत्रक—रसीद
प्रतिभाव्य—जमानत—बेलेबिल
प्रतिभू—जामिन
प्रतिभू—जमानत देने वाला—श्यूस्टी
प्रतिभूति—गारण्टी
प्रतिरक्षा—इमुनिटी
प्रतिलोम—कन्वर्स
प्रतिवर्णक—नमूना
प्रतिवर्त्त—रिफलैक्स
प्रतिवेदन—आख्या—रिपोर्ट
प्रति श्रवण—प्लेबैक
प्रतिष्ठाता—प्रवर्तक संस्थापक—फाउण्डर
प्रतीक्षालय—वेटिंग रूम
प्रत्यक्ष प्रभार—डाइरेक्ट चार्ज
प्रत्यय—साख-क्रेडिट
प्रत्ययपत्र—क्रिडेंशियल्स
प्रत्याय—प्रतिफल—रिटर्न
प्रत्यायित—संवाददाता—एक्रि्रेडिटेड
प्रत्यावर्तक—अल्टरनेटर
प्रत्यावर्ती—लूप (आकाशी)
प्रदर्शक—एक्जिबिटर
प्रदर्शिका—गाइडबुक
प्रदेष्टा—फौजदारी कचहरी का न्यायाधीश
प्रधान—मुख्य-चीफ
प्रधान निदेशक—डाइरेक्टर जनरल
प्रधान नियामक—हेड रेगुलेटर
प्रधान मन्त्री—प्राइम मिनिस्टर
प्रधान संकेतक—हेड सिग्नलर
प्रधान सचिव—महासचिव-सेक्रेटरी जनरल
प्रधान सैनिक केन्द्र—जनरल हेडक्वार्टर्स
प्रपत्र—फार्म
८१२ | कौटिल्य का अर्थशास्त्र
प्रबंधक—मैनेजर
प्रभार—चार्ज (कार्यभार)-चार्ज (भाड़ा)
प्रभारी—उत्तरदायी-इञ्चार्ज
प्रभुसत्ता—पूर्णसत्ता-साव्हरेनटी
प्रमण्डल—संघ-कंपनी
प्रयोजना—प्रोजक्ट
प्रयोज्य—लागू ऐप्लिकेबुल
प्रलेख—डाकूमैंट
प्रवक्ता—अधिकार प्राप्त बोलने वाला प्रतिनिधि-स्पोक्समैन
प्रवर—उच्च-सीनियर
प्रवर समिति—सेलेक्ट कमेटी
प्रवर्तक—ओरिजिनेटर
प्रवर्धक—एम्प्लिफायर
प्रवाहिका—डिसैंटरी
प्रविधि—विशेष ढंग-टेकनीक
प्रशास्ता—कारागार अधिकारी
प्रशीतन—रेफ्रिजीरेशन
प्रशीतित्र—रेफ्रिजरेटर
प्रशुल्क—आयात-निर्यात की वस्तुओं पर लगने वाला कर-टैरिफ
प्रसंवादी—हारमोनिक
प्रस्तुति—प्रजेंटेशन
प्रवृत्त—लागू-इनफोर्स
प्रशासक—शासन या भू-संपत्ति का प्रबंध करने वाला अधिकारी-ऐडमिनिस्ट्रेटर
प्रशासन—ऐडमिनिस्ट्रेशन
प्रहरक—वाचमैन
प्रांतपति—राज्यपाल-गवर्नर
प्राक्कलन—संभावित व्यय का अनुमान—एस्टिमेट
प्रातराश—नाश्ता-ब्रेकफास्ट
प्राधिकार—प्रिभिलेज
प्राधिकारी—अथॉरिटी
प्राप्तव्यवहार—वयस्क
प्राप्ताधिकार—विशेषाधिकार-प्रिभिलेज
प्रज्ञानुज्ञ—आज्ञापत्र-लाइसेंस
प्राप्ति और दाति—रिसीप्ट एंड डिलीवरी
प्राभिकर्ता—अटॉर्नी
प्राभियोग—महाभियोग-इम्पीचमेंट
प्रारक्षण—रिजर्व
प्रारूप—मसोदा-ड्राफ्ट
प्राविधिक—किसी कला, शिल्प आदि की विशेष कार्यविधि-टेक्निकल
पृतना—ब्रिगेड
पृतनापति—ब्रिगेडियर
प्रेक्षण—ऑबजर्व
प्रेषी—पानेवाला-ऐड्रेसी
ब
वाहिनी—बटालियन
भ
भंडार नियंत्रक—कंट्रोल आफ स्टोर्स
मयद—खतरा-डेंजरस
मलक—भत्ता-अलाउंस
भांडागार—गोदाम-गुडोन
भांडारिक—स्कांधिक बिक्री के लिए बहुत सी चीजें अपनी दूकान या गोदाम में रखने वाला-स्टाकिस्ट
भाग्यदा—लाटरी
भारतीय दण्ड संहिता—इण्डियन पेनल कोड
भारिक—पोर्टर
भूयोजन—अर्थ
भृति—मजदूरी-वेज
भृति भोगी—रुपये के लालच से किसी की सेवा करने वाला-मर्सीनरी
पारिभाषिक शब्दावली
८१३
म
मण्डल—डिवीजन
मण्डल अधीक्षक—डिवीजनल-सुप्रिटेंडेंट
मण्डल मुख्यालय—डिविजन हेड क्वार्टर्स
मन्त्रणा—कौंसिल
मन्त्रणाकार—सलाहकार-ऐडवाइजर
मन्त्रालय—मिनिस्ट्री
मन्त्रिपरिषद्—मंत्रियों की गोपनीय सभा
मन्त्रि-परिषद्—राष्ट्र के कार्यों का विवेचन करनेवाली परिषद्
मन्त्री—अमात्य ( एक साथ रहनेवाला )
मत्स्यन्याय—आततायियों का उपद्रव
महागणनाध्यक्ष—महालेखपाल—अकाउण्टेण्ट जनरल
महाधिवक्ता—एडवोकेट जनरल
महानिरीक्षक—इन्सपेक्टर जनरल
महान्यायवादी, महाप्राभिकर्ता—ऐटर्नी जनरल
महापत्रपाल—पोस्ट मास्टर जनरल
महापरिषद्—जनरल कौंसिल
महाबलाधिकृत—फील्ड मार्शल
महामहिम—हिज एक्सेलेंसी
महामात्य—प्रधानमन्त्री
महामान्य—हिज मैजिस्टी
महालेखापरीक्षक—आडिटर जनरल
मानक—स्टैंडर्ड
माननीय—ऑनरेबुल
मार्गपथ—रोड-वे
मार्गाधिकार—राइट-आफ-वे
मित्र शक्ति—मित्रराष्ट्र एलाइड पावर
मुख्यकरणिक—हेड क्लर्क
मुख्य न्यायाधिपति—चीफ जस्टिस
मुख्य न्यायाधीश—चीफ जज
य
यंत्र—मशीन
यंत्रजात—मशीनरी
यंत्रशाला—मशीनघर
यांत्रिक—मिस्त्री—मिकेनिक
यान पथ—कैरेज-वे
युक्त—आयकारी या अफसर
युक्त कर्म चायुक्तस्य—जो व्यक्ति अफसर या अधिकारी नहीं है, उसका किया हुआ ऐसा कार्य जो किसी अधिकारी या अफसर को करना चाहिए ।
युक्ताहार—बैलेंस्ड डाइट
युग्मन—संयुजन—कॉन्जुगेशन
योजक—आँकड़ा—कपलर
र
रक्षित—वार्ड
रक्षी—करद
राजक—संयुक्त कौंसिल
राजतन्त्र—मोनार्की
राजदया—क्लेमेंसी
राजदूत—अम्बेसेडर
राजनयिक—डिप्लोमेसी
राजनयिक संवाददाता—डिप्लोमेटिक कॉरेस्पोंडेंट
राजपत्र—गजट
राजपथ—राजमार्ग—हाई-वे
राजशब्दिन् संघ—वह प्रजातन्त्र जिसमें राजन् या राजा की उपाधि धारण की जाती है
राजशासन—राजाज्ञा
राष्ट्रमुख्य—जनपद के प्रमुख पुरुष
राजस्व—रेवेन्यू
राजा—शासक, राजा को शासक इसलिए
८१४ कौटिल्य का अर्थशास्त्र
| कहा गया है उसका कर्तव्य अच्छे शासन के द्वारा अपनी प्रजा का रंजन करना अथवा उसे प्रसन्न करना होता है | विज्ञप्ति—कॉम्युनिक |
| वित्त विधेयक—फाइनेन्स बिल | |
| विद्युत आवेश—इलेक्ट्रिक चार्ज | |
| विधिक—कानूनन—लीगल | |
| राज्य परिषद्—कौंसिल ऑफ स्टेट | विधेयक—बिल |
| राष्ट्रपति, अध्यस्ता—प्रजातंत्री राष्ट्र द्वारा चुना हुआ प्रधान शासक—प्रेसिडेण्ट | विपण्य—मार्किटेवल |
| वियोजन—फैलाव—डिस्प्रेशन | |
| राष्ट्रमण्डल—कॉमनवेल्थ | विलम्ब शुल्क—डेमरेज |
| राष्ट्रसंघ—लीग आफ नेशन्स | विलय—मर्ज |
| रिक्ति—वेकेंन्सी | विवरण—कॉमेण्ट्री |
| रिक्थ—सम्पदा—इस्टेट | विशाखन—डिवर्सन |
| रोधक—ब्रेक | विष्कम्भक—इण्टरल्यूड |
| विष्टि—श्रमिक संघ | |
| ### ल | विवीत—गोचर |
| लक्षण—राजकीय चिह्न | वेदक—अभियोक्ता या फरियादी |
| लक्षणाध्यक्ष—सिक्के ढालने वाला प्रधान अधिकारी | वृत्तक—हैंड आउट |
| वृत्त रूपक—न्यूज फीचर | |
| लाभांश—बोनस | वृत्तपत्र—न्यूज लेटर |
| लेखा—हिसाब—अकाउण्ट | वेधक—बोरर |
| लेखा करणिक—एकाउण्ट क्लर्क | वैध—वैलिड |
| लेखा पुस्ती—बहीखाता—एकाउण्ट बुक | वैमानिक—हवाई |
| वैराज्य शासन-प्रणाली—बिना राजा की अथवा राजारहित शासन-प्रणाली | |
| ### व | व्यक्तिगत—पर्सनल |
| वनरक्षक—फारेस्ट रेञ्जर | व्यवहार निरीक्षक—कोर्ट इंस्पेक्टर |
| बन्धपत्र—प्रतिज्ञापत्र—बौण्ड | व्यवहारपटल—कांउटर |
| वर्णन—हुलिया—डिस्क्रिप्शन | व्युत्थान—बगावत—रिवोल्ट |
| वर्त्तिग्रह—बर्नर | |
| वलय मार्ग—रिङ्ग रोड | ### श |
| वहन अभिकर्ता—केरिङ्ग एजेण्ट | शलक—फायर ( आग ) |
| वातानुकूलित—एयरकण्डीशण्ड | शलक नियन्त्रण केन्द्र—फायर कण्ट्रोल |
| वाष्पित्र—बॉयलर | शलककार—गोलाबारी करने वाला फायर |
| वाहक—बेयरर ( चेक ) | शलाका—मतपत्र |
| वाहिनी—सेना—ब्रिगेड | शलाकाग्रहण—एक प्रकार के रंगे हुए टिकटों द्वारा मत (छंद) एकत्र करना |
| वाहिनीपति—सेनापति—ब्रिगेडियर | |
| विगोपन—एक्सपोजर |
पारिभाषिक शब्दावली
८१५
| शायिका — बर्थ | संदेशहर — संदेशवाहक-मेसेंजर |
| शालाकी — सर्जन | संभाग — पोर्टफोलियो |
| शासन — राज-लेख | संयामक — गवर्नर ( आकाशी ) |
| शिल्पज्ञ — टेक्निशियन | संवर्ग — ब्लाक |
| शिल्पविद्या — टेक्नोलॉजी | संवातन — वेंटिलेटर |
| शिल्पसंघ — श्रमिक निकाय-गिल्ड | संवाती — वेंटिलेटर |
| शिष्टमण्डल — डेलिगेशन | संवादनियंत्रक — सेंसर |
| शूक — पिन | संविद् — करार करके बनाये हुए नियम |
| शूकधानी — पिनकुशा | संविदा — समझौता-कंट्रैक्ट |
| शून्यपाल — प्रांतीय शासक | संविधान — कांस्टिट्यूशन |
| शैल्पिक प्रशिक्षण केन्द्र — टेक्निकल ट्रेनिंग सेंटर | संविधान सभा — कांस्टिट्यूएण्ट ऐसेम्बली |
| श्रमसंघ — श्रमिकों का संघ-लेबर यूनियन | संविधि — विधान सभा द्वारा स्वीकृत वह लिखित विधान जो स्थायी कानून के रूप में हो-स्टैटचूट |
| श्रेष्ठिन् — प्रधान-मेयर | संवेष्टिका — पैकेट |
| श्रेणी — शिल्पियों और व्यावसायियों का संघ | संसर्गज — सांसर्गिक-कॉन्टेगियस |
| श्रोणि — हिप | संहिता — कोड |
| स | सदाशय — वोनाफाइड |
| संकलन अधिकारी — कॉम्पिलेशन अधिकारी | सन्न — सहायक कृषि-अधिकारी |
| संकलनकर्त्ता — कॉम्पिलर | सन्निधाता — राजकोष का संग्राहक एवं संरक्षक |
| संकेतक — सिगनल | सन्निधातृ — संग्रहित, राजकोष का अध्यक्ष |
| संक्रमण — इन्फेक्शन | समक्ष नियोक्ता — एम्लायमेंट आफिसर |
| संगणित — कल्क्युलेटेड | समय — सामूहिक संस्थाएँ ( अर्थात् ऐसे नियम या निश्चय जो सब लोगों के समूह में स्वीकृत हुआ करते थे ) |
| संग्लक — इलेक्ट्रिक फ्यूज | समय सारिणी — टाइम टेबल |
| संग्राहक — रिसीप्टर | समरणनिधि — सुविधायक कोष-प्रॉविडेंट फंड |
| संग्राही — रिसीवर ( आकाशी ) | समवरोधक — नाकाबंदी-ब्लोकेड |
| संघ — बहुत से लोगों की मिलकर बनाई समिति, सभा या संस्था-फेडरेशन | समवाय — कंपनी |
| संघ-वैश्यों तथा क्षत्रियों का विशेष समुदाय | समादेश — कमांड |
| संघनक — संधारित्र संघनित्र-कॉन्डेन्सर | समालाप — इन्टरव्यू |
| संचालक — ऑपरेटर, कंडक्टर, डाइरेक्टर | |
| संज्ञापन — सलाह-ऐड्वाइज |
८१६ कौटिल्य का अर्थशास्त्र
समाहर्ता—दुर्ग-राष्ट्र की राजकीय आय को एकत्र करने वाला मुख्य अधिकारी
समाहर्ता, समाहर्तृ—भागदुह, राजकर का संग्रह करने वाला—कलेक्टर
समुदाय—मेस
समूह—संघटित सभा या संस्था
सर्वेक्षण—सर्वे
सर्वोच्च न्यायालय—सुप्रीम कोर्ट
सहायक उच्चायुक्त—असिस्टेंट हाई-कमिशनर
सहायक निदेशक—असिस्टेंट डायरेक्टर
सहायक लेखा परीक्षक—असिस्टेंट ऑडीटर
सहायक सचिव—असिस्टेंट सेक्रेटरी
सहायक सूचना अधिकारी—असिस्टेंट इन्फारमेशन आफिसर
संघातिक—फेटल
साधारणीकरण—जेनरेलिसेशन
सार्थ—व्यापारियों का संघ
सार्थ—सेना-कॉन्वाय
सीमांत—फ्रांटियर
सीमागुल्म—सीमा पर स्थित चौकी—बरियर
सीमा शुल्क—कस्टमडच्यूटी
सुश्रावक—माइक्रोफोन
सूचक—अलार्म
सूचना सहायक—इन्फारमेशन असिस्टेंट
सूत्र—फारमूला
सेनानायक—कॉमांडेंट कॉमांडर
सेनामुख—सेक्शन
सैनिक न्यायालय—कोर्ट मार्शल
सैन्यदल—रेजिमेंट
सैन्यनायक—जनरल
स्कंध—गोदाम, दाल का भंडार-स्टाक
स्कंधावार—शिविर-कैंप
स्कंधिक—स्टाकिस्ट
स्तंभ—राज्यधन का गबन
स्तंभ—कॉलम
स्थानिक—समाहर्ता का अधीनस्थ अधिकारी एवं जनपद तथा नगर के चतुर्थांश का शासक
स्त्रीधन—ज्वाइंचर
स्थायिवत्—क्वासी परमानेंट
स्थायिवित्ता—क्वासी परमानेंसी
स्फटिक—क्रेस्टल
स्फुरण—फ्लटर
स्वचल—आटोमेटिक
स्वयंतथ्य—एक्सियन
स्वामिभू—जागीर-मैनर
स्वायत्तशासन—ऑटोनोमी
ह
हस्तक—हैंडिल
हीनमुद्रा—खोटा सिक्का—कोइन वेस