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महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished3,237 पृष्ठ

।। स्त्रीपर्व सम्पूर्णम् ।।

अतो मनसि यद् गुह्यं स्त्रीणां तन्न भविष्यति ॥ २९ ॥ तदनन्तर वे बोले—'मुझ पापीने इस रहस्यको न जाननेके कारण अपने बड़े भाईको मरवा दिया; अतः आजसे स्त्रियोंके मनमें कोई गुप्त रहस्य नहीं छिपा रह सकेगा' ॥ २९ ॥

इत्युक्त्वा स तु गङ्गाया उत्ताराकुलेन्द्रियः । भ्रातृभिः सहितः सर्वैर्गङ्गातीरमुपेयिवान् ॥ ३० ॥ ऐसा कहकर व्याकुल इन्द्रियोंवाले राजा युधिष्ठिर गंगाजीके जलसे निकले और समस्त भाइयोंके साथ तटपर आये ॥ ३० ॥

इति श्रीमहाभारते स्त्रीपर्वणि श्राद्धपर्वणि कर्णगूढजत्वकथने सप्तविंशोऽध्यायः ॥ २७ ॥ इस प्रकार श्रीमहाभारत स्त्रीपर्वके अन्तर्गत श्राद्धपर्वमें कर्णके जन्मके गूढ़ रहस्यका कथनविषयक सत्ताईसवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥ २७ ॥


।। स्त्रीपर्व सम्पूर्णम् ।।


अनुष्टुप्,बड़े श्लोकबड़े श्लोकोंको अनुष्टुप् माननेपरकुल
उत्तर भारतीय पाठसे लिये गये८२२(५)६ ।। । =८२८ ।। । =
दक्षिण भारतीय पाठसे लिये गये..........
स्त्रीपर्वकी कुल श्लोकसंख्या८२९ ।। । =

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